शेर · Reading time: 1 minute

II…….मेरे अपने हैं II

सब के अपने सपने हैं ,मेरे सपनों में अपने हैं l
अपनों के लिए जीता, नहीं अब सपने अपने हैंll

कैसे भी चलो राही, नजर आती नहीं मंजिल l
सफलता कैसे नापे हम, छोटे सारे नपने हैं ll

कभी ना साथ थी किस्मत, ना आगे ही भरोसे हैं l
दो हाथों का भरोसा है ,यही तो मेरे अपने हैं ll

संजय सिंह “सलिल ”
प्रतापगढ़ ,उत्तर प्रदेश l

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