Skip to content

II दिमागों में गुरूर देखा है….. II

संजय सिंह

संजय सिंह "सलिल"

गज़ल/गीतिका

February 21, 2017

दिमागों में गुरूर देखा है l
सलीके में शुरूर देखा है ll

भरी दौलत से जेबे हैं जिनकी l
उधारी में हुजूर देखा है ll

देखी कारों में भी बुझी शक्ले l
फकीरों में भी नूर देखा है ll

मिले हर दम बनावटी चीजें l
बाजारू ये फितूर देखा है ll

न रखना हसरते ‘सलिल’ उनसे l
तेरा सारा कुसूर देखा है ll

संजय सिंह ‘सलिल’
प्रतापगढ़ ,उत्तर प्रदेश l

Share this:
Author
संजय सिंह
मैं ,स्थान प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश मे, सिविल इंजीनियर हूं, लिखना मेरा शौक है l गजल,दोहा,सोरठा, कुंडलिया, कविता, मुक्तक इत्यादि विधा मे रचनाएं लिख रहा हूं l सितंबर 2016 से सोशल मीडिया पर हूं I मंच पर काव्य पाठ तथा मंच... Read more

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

आज ही अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साथ ही आपकी पुस्तक ई-बुक फॉर्मेट में Amazon Kindle एवं Google Play Store पर भी उपलब्ध होगी

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

सीमित समय के लिए ब्रोंज एवं सिल्वर पब्लिशिंग प्लान्स पर 20% डिस्काउंट (यह ऑफर सिर्फ 31 जनवरी, 2018 तक)

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you