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II तुम ही सुबह शाम हमारे II

संजय सिंह

संजय सिंह "सलिल"

कविता

February 23, 2017

तुम ही सुबह शाम हमारे,
सूरज चंदा तारे हो l
सारी दुनिया से क्या मतलब,
बस तुम ना मुझको रोकना ll

एक दूजे का साथ है तो,
यह जीवन रण हम जीतेंगे l
ए मेरी कश्ती के साहिल,
मुझे पतवार बना कर देखना Il

मेरे जीवन के अंधेरे,
इतना भी क्या सोचना l
खुद हो दिनकर रोशनी,
पर्दे उठाकर देखना ll

संजय सिंह “सलिल”
प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश

Author
संजय सिंह
मैं ,स्थान प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश मे, सिविल इंजीनियर हूं, लिखना मेरा शौक है l गजल,दोहा,सोरठा, कुंडलिया, कविता, मुक्तक इत्यादि विधा मे रचनाएं लिख रहा हूं l सितंबर 2016 से सोशल मीडिया पर हूं I मंच पर काव्य पाठ तथा मंच... Read more
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