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II डगर आसान हो जाए II

संजय सिंह

संजय सिंह "सलिल"

गज़ल/गीतिका

February 8, 2017

सफर में बच के तू रहना कहीं ना रात हो जाए l
तेरी जो दौलते असबाब ही जंजाल हो जाए ll

ठिकाना ढूंढना अपना समय रहते यहां पर तुम l
कहीं ऐसा ना हो तनहाई कि चर्चा आम हो जाए ll

समय की है कमी सबको कभी होती नहीं पूरी l
जियो कुछ इस तरह से सब इसी में काम हो जाए ll

परिंदों को भि है शिकवा नहीं परवाज़ है पूरी l
रखो जो हौसला ऊंचा गगन भी पार हो जाए ll

समय की है सियासत और पहरा फजाओं का l
बड़ी है बंदिशे फिर भी आजादी आम हो जाए ll

कभी मुड़कर “सलिल” पीछे न देखो हाल तुम अपना l
निगाहें मंजिलों पर हो डगर आसान हो जाए ll

संजय सिंह “सलिल”
प्रतापगढ़ ,उत्तर प्रदेश ll

Author
संजय सिंह
मैं ,स्थान प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश मे, सिविल इंजीनियर हूं, लिखना मेरा शौक है l गजल,दोहा,सोरठा, कुंडलिया, कविता, मुक्तक इत्यादि विधा मे रचनाएं लिख रहा हूं l सितंबर 2016 से सोशल मीडिया पर हूं I मंच पर काव्य पाठ तथा मंच... Read more
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