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II ख्वाब कि दौलत II

संजय सिंह

संजय सिंह "सलिल"

शेर

February 13, 2017

अगर साथ होते न,तब रात होती l
अलग से हमारी, यहां बात होती ll

न कोई परखता, कि कितनी कमाई l
वफाओं कि दौलत,अगर साथ होती ll
—————————–
वह सब का मालिक है,सब उस के सहारे हैंl
जज़्बात हैं जो अपने,सब उसने उतारे हैंlI

सब भूल चुका हूं अब,क्या अपना पराया है l
ख्वाब तुम्हारे सब ,अब ख्वाब हमारे हैं lI

संजय सिंह “सलिल”
प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश

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Author
संजय सिंह
मैं ,स्थान प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश मे, सिविल इंजीनियर हूं, लिखना मेरा शौक है l गजल,दोहा,सोरठा, कुंडलिया, कविता, मुक्तक इत्यादि विधा मे रचनाएं लिख रहा हूं l सितंबर 2016 से सोशल मीडिया पर हूं I मंच पर काव्य पाठ तथा मंच... Read more

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