.
Skip to content

एक शेर

Surendra Shrivastava

Surendra Shrivastava

शेर

July 7, 2016

ज़माने भर की मुश्किल हैं मगर कब दिल समझता है
ये खुद को प्यार के अब भी बहुत काबिल समझता है

सुरेन्द्र श्रीवास्तव

Author
Recommended Posts
समझता हूँ
तेरे लव से निकलती हर जुबां को में समझता हूँ तेरे खामोस होने की वजह भी में समझता हूँ क्यों यारा तुम नहीं समझी मेरे... Read more
मुहब्बत मेँ मजे कम
कोई मजबूर कहता है कोई जाहिल समझता है मगर वो अपने भाई को सदा लक्ष्मण समझता है मुहब्बत मेँ मजे कम और खतरे ढेर सारे... Read more
उम्र का तगाजा है,
उम्र का तगाजा है, साँसों की फितरत है, दोनों ही निकल जाती है, मरहूम करके यंहा, कोई शान समझता है, कोई ईमान समझता है, खोखले... Read more
शेर
kamni Gupta शेर Jul 27, 2016
टूटने लगी हैं सभी जंजीरे अब यूं भी, परिंदों के पर काट कर भी क्या पाओगे।।। सितारों को नहीं शौक है खुद पे इतराने का,... Read more