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Category: तेवरी

देश प्रेम
करने दो हुंकार अब,बस मातृभूमि का सत्कार अब बजने दो मृदंग,कर दो संखनाद अब, भरो कुछ ऐसा ही दम्भ,कण कण में दिखे देश प्रेम का... Read more
“तभी बिखेरे बाती नूर”  {लम्बी तेवरी-तेवर पच्चीसी }  +रमेशराज
छुपे नहीं तेरी पहचान, इतना मान चाहे रूप बदल प्यारे । 1 तुझमें बढ़ा घृणा का भाव, भारी ताव अंगारों में जल प्यारे । 2... Read more
और भरो हुंकार [ लम्बी तेवरी-तेवर चालीसा ] +रमेशराज
जनता लायी है अंगार आज यही चर्चा है प्यारे अधराधर। 1 मिलकर मेटें भ्रष्टाचार नयी क्रान्ति के जागेंगे अब फिर से स्वर। 2 भीषण करके... Read more
रावणों के राज में  [ वर्णिक छंद में लम्बी तेवरी/तेवर चालीसा ] +रमेशराज
पागलों के साथ है मानो आज राजनीति दानवों के साथ है। 1 आज मत पूछिए भीम जैसा दल-बल कौरवों के साथ है। 2 तम-भरी रात... Read more
मन ईलू-ईलू बोले  [  लम्बी तेवरी-तेवर चालीसा  ] +रमेशराज
घोटाले मंत्री को प्यारे, लिपट पेड़ से बेल निहाल छिनरे सुन्दर नारि ताकते खडे़ हुए हैं बम भोले। 1 अज्ञानी को मद भाता है, भला... Read more
कायर मरते पीठ दिखाकर [ लम्बी तेवरी-तेवर चालीसा ] -रमेशराज
‘मीरा’ जैसा धर्म निभाकर तीखे विष का प्याला पाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 1 बन प्रहलाद देख ले प्यारे अग्नि-कुण्ड के बीच नहाकर, मरा... Read more
‘ रावण-कुल के लोग ‘  (लम्बी तेवरी-तेवर-शतक)  +रमेशराज
बिना पूँछ बिन सींग के पशु का अब सम्मान मंच-मंच पर ब्रह्मराक्षस चहुँदिश छायें भइया रे! 1 तुलसिदास ऐसे प्रभुहिं कहा भजें भ्रम त्याग अनाचार... Read more
‘ मेरा हाल सोडियम-सा ’ [ लम्बी तेवरी, तेवर-शतक ] +रमेशराज
......................................................... इस निजाम ने जन कूटा हर मन दुःख से भरा लेखनी । 1 गर्दन भले रखा आरा सच बोलूंगा सदा लेखनी । मैंने हँस-हँस... Read more
“जै कन्हैयालाल की! [ लम्बी तेवरी तेवर-शतक ]  +रमेशराज
कृष्ण-रूप में कंस जैसे हर शासक के प्रति- “जै कन्हैयालाल की! [ लम्बी तेवरी तेवर-शतक ] +रमेशराज ..................................................... जन को न रोटी-दाल, जै कन्हैयालाल की!... Read more
' ककड़ी के चोरों को फाँसी ' [ प्रचलित लोककथनों पर आधारित-लम्बी तेवरी-तेवर-शतक ]  +रमेशराज
हर तेवर ‘लोकोक्ति’ सुहाये, शब्दों के भीतर तूफान अपने घर को फूंक तमाशा हुए देखने हम तैयार, क्या समझे! दही जमेगा, घी निकलेगा, जब ले... Read more
‘धन  का मद गदगद करे’ [लम्बी तेवरी -तेवर-शतक]  +रमेशराज
कितने विश्वामित्र, माया के आगे टिकें इत्र सरीखा दे महक धन -वैभव हर बार । 1 अब मंत्री-पद पाय, मुनिवर नारद खुश बहुत धन का... Read more
अन्तर आह अनंत अति [ लम्बी तेवरी – तेवर शतक ]  +रमेशराज
बोलें-‘वंदे मातरम्’ तस्कर, चोर, डकैत छद्मवेश को धारे प्यारे खल-गद्दार बहुत से हैं। 1 तुझे पढ़ाने के लिए नारी-तन-भूगोल मस्तराम के उपन्यास, चैनल-अखबार बहुत से... Read more
'दे लंका में आग' [ लम्बी तेवरी--तेवर-शतक ]   +रमेशराज
सिस्टम आदमखोर, जि़न्दगी दूभर है, कविता को हथियार बना तू लाँगुरिया, गाल छर असुरों के। असुरों के आगे विनती में हर स्वर है, क्रान्ति-भरे फिर... Read more
लोक-शैली  ‘रसिया’ पर आधारित रमेशराज की तेवरी
लोक-शैली ‘रसिया’ पर आधारित रमेशराज की तेवरी …………………………………………………………………. मीठे सोच हमारे, स्वारथवश कड़वाहट धारे भइया का दुश्मन अब भइया घर के भीतर है। इक कमरे... Read more
नेता जी
भोली भाली जनता को ना मूर्ख बनाओ नेता जी ! जीत गए अब पाँच साल तुम मौज मनाओ नेता जी !! हम गरीब का दाल,... Read more