तेवरी

हिंदी दिवस पर एक तेवरी

*आज हिंदी दिवस पर खास पेशकश* ---------------------------------------------- आज गुरुजी हिंदी दिवस है ,मुझे कुछ बोलना है क्या लिखू... Read more

विधा-मुक्त छंद

जय, जय माँ भारती। सिंह-सुता दहाड़ती।। आगे कभी, पीछे कभी नीचे कभी, ऊपर कभी घूम-घूम अग्नि बाण मारती जय, जय माँ भारती । ... Read more

शर्म

शर्म ***** आज तो कमाल हो गया जी, तुझे देख कर चांद शर्म से लाल हो गया जी। सजती हो सवरती हो निखरती हो जी, मुझे देखने को मजबुर करत... Read more

उठ जाग बेटी

उठ जाग बेटी अब हो प्रबल। चुप्पी तोड़ तलवार ले। शमशीर सम हथियार ले।। करले स... Read more

भारत को

जाओ वोट नहीं देंगे हम तुमको जिन पर भरोसा नहीं है हमको तुम क्या-क्या करके दिखाओगे हम जानते हैं हम तुम्हारी नियत पहचानते... Read more

शहीदों की शहादत और शहीदी का मर्म

शहादत देते वीर अपने, शहादत से कब घबराये हैं, पर अफशोस रहता इस. बात का है, दुश्मन धोखे से आए हैं, आकर सामने से वह वार करते, तब ह... Read more

सुधरोगे नहीं तुम

सुधरोगे नहीं तुम । कितनी बार काटी है हमने तेरी दुम हिम्मत था गर तुझमें पुलवामा में दो हाथ कर लेते पता चल जाता तुझको कितना ... Read more

सिर्फ कैंडल मार्च नहीं

सिर्फ कैंडल मार्च नहीं। हुँकार करो... सिर्फ विचार नहीं । प्रहार करो। सिर्फ कैंडल मार्च नहीं । गरलयुक्त अजगर बन फुँफकार करो... Read more

रक्षक या भक्षक

जनता की रक्षा करने को, इन सबने कसमे खाई हैं कैसे की जाती है रक्षा, इसकी छवि दिखाई है ले - देकर सब समझौता करते, ऐसी नीति अपनाई है... Read more

युवा दिवस के अवसर पर

उठो जागो हे मेरे प्यारे युवाओं । भारतवंश के तूफ़ानी जलधाराओं ।। राह कठिन हो या सरल हो। पीने को यदि भी गरल हो।। साम... Read more

सिधू ने जो इस तरह के वक्तव्य बोले है उनसे सभी हिन्दुस्तानियो का दिल इस पर आक्रोशित है और में चार पंक्तियों के माध्यम से कहना चाहता हूँ----

यहाँ राजनीति के गुंडे कुछ बढ़चढ़कर बोलते है देश का मान गिरे ऐसे कुछ संदेशो को बोलते है हमारी नही तो देश की आत्मीयता की तो लाज रखी हो... Read more

आज सिंहनाद करना होगा:-वीर रस का प्रयास

आज सिंहनाद करना होगा। माँ भारती की अस्मिता खतरे में है... गिद्धधों से लड़ना होगा।। आज विजयघोष करना होगा। असंख्य असुरो... Read more

है अर्जुन उठा लो गाण्डीव आज

ये रणभूमि है। रणचण्डी का द्वार।। हे अर्जुन उठा लो गाण्डीव आज। है नहीं वो हस्तिनापुर न है कोई एक दुशासन आज।। हे अर्ज... Read more

कुछ दिन

कुछ दिन गरीब और रह जा ऐ जिन्दगी । राह में तेरे बेशक असंख्य सैलाब आए। फर्क क्या पड़ता है तुझे उनसे बह जा या ठहर ले जब तक न... Read more

नशा

उसके अंदाज़े इश्क़ का, नशा था कुछ अजीब सा। लोग होंठो से पिलाते है, वो आंखों से पिलाती थी। ©® पांडेय चिदानंद “चिद्रूप” (सर्वाधिक... Read more

बहाना

हम तो बरसो से ही कई गम छुपाये बैठे है। वो तो एक बहाना है की - पीने के बाद हमे कुछ याद नही रहता।। ©® पांडेय चिदानंद “चिद्रूप... Read more

ज़िद

अभी तो इन्तेजा ही की थी, और अभी ज़िद आप कर बैठे। इतनी जल्दी हक़ जताने का, क्या खूब अंदाज़ पाया है ।। ©® पांडेय चिदानंद “चिद्रूप” ... Read more

वक़्त की नज़ाकत क्या कहिएगा!

ज़माने की फ़ितरत ! क्या कहिएगा साहब भरे बाज़ार में मैं निकला भरपूर जोश के साथ बड़े ही होश के साथ अपने तमाम सच लेकर बेचने को इक़ हु... Read more

मज़हबी ढ़िढोरा

कौन है काफ़िर,कौन है आख़िर, ख़ुदा का बन्दा ये मज़हबी ढ़िढोरा पीटने से कहाँ पता चलता है __अजय "अग्यार Read more

तलब संग भीगने की

इक़ मर्तबा फ़िर बीत गया सावन बिन भिगोए तलब तेरे संग भीगने की अब तलक तलब रही... __अजय "अग्यार Read more

पाकीज़ा बातें

तुममें औऱ मुझमें बड़ा फ़र्क है ,ऐ दोस्त °°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°°° तुम नसाफ़ बातें याद रखतें हो, पाकीज़ा भूल जाते हो मैं पा... Read more

मुहब्बत गुनाह नहीं

ऐ मज़हब के ठेकेदारों क्या तुमने सुना नहीं मुहब्बत ख़ुशबू है अविनाशी कोई गुनाह नहीं... __अजय "अग्यार Read more

थोड़ा औऱ सही

तूफ़ानों में घिरे हैं हम मिलता नहीं हमें छोर कहीं लम्बा है ये सफ़र ,बिन हमसफ़र,थोड़ा औऱ सही... __अजय "अग्यार Read more

दौर आएगा

मेरी ज़िन्दगी में दुज़ा कोई दौर आएगा तुम ना सके तो क्या कोई और आएगा.... __अजय "अग्यार Read more

आईना

ज़रा ज़रा सी बात पर कीचड़ उछालने वालों चाँद में दाग ढूढ़ने वालों, आईना देखों आईना.... __अजय "अग्यार Read more

मुसाफ़िर सब ,मन्ज़िल एक

आख़िर किस बात का ग़ुरूर है तुम्हें ऐ मुसाफ़िर कभी ज़मीं देखों आसमां देखों देखों हाथ ख़ाली... __अजय "अग्यार Read more

मैं भारती हूँ मैं इंसान हूँ

मैं हिन्दू हूँ, मैं मुसलमान हूँ, मैं राजपूत मैं पठान हूँ कोई तो कहदे ख़ुदा का बन्दा,मैं भारती हूँ इंसान हूँ... __अजय "अग्यार Read more

गुल-ए-गुलनार ज़मीं हिन्द की..

गुल-ए-गुलनार ज़मीं हिन्द की, ये तानाशाही तस्वीर नहीं सभी क़ौमों ने लहू से सींचा है इसे,ये किसी की जागीर नहीं.... --अजय "अग्यार Read more

"बुरे को बुरा ही बोल देता हूँ तो बुरा हूँ मैं"

बुरे को बुरा ही बोल देता हूं ,इसीलिए बुरा हूं मैं गाता हूं सच्चाई के नग़मे ,इसीलिए बेसुरा हूं मैं मुझपे किसी का ज़ोर नहीं बेढंगी म... Read more

मैं थका हुआ हूँ

कोई काम नहीं है,पर मैं थका हुआ हूँ भारी, मन है बोझिल बना हुआ,और तन में है थकान भारी, शायद इसलिए कि बच्चों को पढा लिखा कर निभाई है ... Read more

यह दोष किसका है‼यहाँ दोषी कौन नहीं❗

देश कि राजधानी,दिल्ली में, तीन बच्चे भुख से मर गये, तो खबर बन गयी। दूर किसी गांव में अक्सर मर जाते हैं किसी न किसी अभाव के चलते,... Read more

मोदी जी के ४ साल : हास्य व्यंग

मोदी जी के चार साल के वादे, अगर अच्छा लगे तो शेयर करना : निकला था घर से, तुम्हारे पास में आने को, स्मार्ट सिटी से बुलेट ट्रेन मे... Read more

कह मुकरी

रहूँ अकेले सदा सताए। ऐसी हरकत मुझे न भाए। करता रहता मुझे ये तंग क्या सखि साजन? नहिं सखि "पलंग"। ०१।। Read more

होली पर्व

आपस में मिल बैठिये,मन मुटाव हो दूर, तो होली सार्थक रहे, मद हो चकनाचूर. रंग, बिरंगी हो रही,... Read more

जीतने वाले की हार

*केवल अहंकार* *ही ऐसी दौड़ है* *जहाँ जीतने वाला* *हार जाता है।* Read more

जिंदगी का फलसफा

*जिंदगी सिर्फ एक बार मिलती है,* *ये एक झूठ है।* *जिंदगी तो हमे रोजाना मिलती है,* *मौत ही सिर्फ एक बार मिलती है!!* *इन्सान क... Read more

शब्दों का प्रयोग

शब्दो का प्रयोग सावधानी से करिये, ये परवरिश का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करते हैं।। Read more

मैं तो इंसानियत निभा रहा था

मैं झुक गया तो वो सज़दा समझ बैठे, मैं तो इन्सानियत निभा रहा था, वो खुद को ख़ुदा समझ बैठे।। Read more

जिंदगी की पाठशाला

रिश्तों में ना रखा करो, हिसाब नफ़े और नुकसान का.. ज़िन्दगी की पाठशाला में, गणित का कमज़ोर होना अच्छा है। Read more

गाली

.......... प्रजातंत्र के देश में भैया प्रजा है पर तंत्र नहीं है देवों के इस देवभूमि में अंग्रेजीयत है मंत्र नही है। देखो कै... Read more

दहेज़ (तेवरी)

--------------------- चलो हटो नामुरादों कुछ हमें भी दहेज के नाम कह लेने दो, एक बाप को बेटी पैदा करने का कुछ तो अपमान सह लेने दो... Read more

व्यंग्य

दाएँ को बायाँ ही बताया करते हैं। दर्पण भी सच कहाँ दिखाया करते हैं।। -विपिन शर्मा Read more

अपना तो यही मिज़ाज है___

ग़लत बात बर्दाश्त नहीं है, ग़लत नहीं सुनकर दूँगा। जिस भाषा में बोलोगे, उस भाषा में उत्तर दूँगा।। -विपिन शर्मा Read more

धर्म.....

धर्म (तेवरी)....... ........ ......... ......... जिन्हें देखना था वो दर्शक कहाँ गये? धर्म के वो रक्षक कहाँ गये? कौन परोस रहा आ... Read more

उल्लाला छंद

उल्लाला छंद मृगनयनी है राधिका,मोहन चंचल मन अधीर। लाज हया सब भूलकर,मिलते हैं यमुना तीर। जाने जो बात हिय की, सुमीत उसे कहते हैं... Read more

|नये शिल्प में रमेशराज की तेवरी

हम चोर लुटेरों ने घेरे हर सू है चीख-पुकार | इस बार || हम घने अंधेरों ने घेरे दिखती न रौशनी यार | इस बार || हम सेठ-कुबेरों ... Read more

नये शिल्प में रमेशराज की तेवरी

कोई तो किस्सा पावन हो, वृन्दावन हो अब चैन मिले मन को कुछ तो | तहखानों बीच न जीवन हो, घर-आँगन हो सुख के पायें साधन कुछ तो | ... Read more

रमेशराज की एक तेवरी

दारू से कुल्ला बम भोले अब खुल्लमखुल्ला बम भोले | ईमान बेचकर इस युग में खुश पण्डित-मुल्ला बम भोले | हर रोज सियासत मार रही ... Read more

तीन मुक्तकों से संरचित रमेशराज की एक तेवरी

जनता पर वार उसी के हैं चैनल-अख़बार उसी के हैं | इसलिए उधर ही रंगत है सारे त्योहार उसी के हैं | सब अत्याचार उसी के हैं अब था... Read more

मुक्तक-विन्यास में रमेशराज की तेवरी

पीयें ठर्रा-रम बम भोले हम सबसे उत्तम बम भोले | जनता से नाता तोड़ लिखें सत्ता के कॉलम बम भोले | + हम पै कट्टे-बम बम भोले हम यम... Read more