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Category: तेवरी

उल्लाला छंद
उल्लाला छंद मृगनयनी है राधिका,मोहन चंचल मन अधीर। लाज हया सब भूलकर,मिलते हैं यमुना तीर। जाने जो बात हिय की, सुमीत उसे कहते हैं। छू... Read more
तेवरी
हिंसा से भरा हुआ नारा अब बोले धर्म बचाना है हर ओर धधकता अंगारा अब बोले धर्म बचाना है | जो कभी सहारा नहीं बना... Read more
तेवरी
जिनको देना जल कहाँ गये सत्ता के बादल कहाँ गये ? कड़वापन कौन परोस गया मीठे-मीठे फल कहाँ गये ? जनता थामे प्रश्नावलियां सब सरकारी... Read more
तेवरी
गुलशन पै बहस नहीं करता मधुवन पै बहस नहीं करता जो भी मरुथल में अब बदला सावन पै बहस नहीं करता | कहते हैं इसे... Read more
तेवरी
खुशियों के मंजर छीनेगा रोजी-रोटी-घर छीनेगा | है लालच का ये दौर नया पंछी तक के पर छीनेगा | हम जीयें सिर्फ सवालों में इस... Read more
तेवरी
मैं भी अगर भाट बन जाता गुण्डों को सेवक बतलाता | कोयल के बदले कौवों को सच्चा स्वर-सम्राट सुझाता | सारे के सारे खलनायक मेरे... Read more
वर्णिक छंद में तेवरी
गण- [राजभा राजभा राजभा राजभा ] छंद से मिलती जुलती बहर –फ़ायलुन फ़ायलुन फ़ायलुन फ़ायलुन ......................................................................... आपने नूर की क्या नदी लूट ली गीत के... Read more
तेवरी
मौजूदा दशा आज का राजनेता 12 अमीरों को ही सदा देता 16 गरीबों से ही छीन लेता, परंपरा इस देश की .16,13 =29 जो आदर्शवादी... Read more
जनक छंद में तेवरी
तेवरी काव्य जनक छंद में तेवरी –एक कोशिश ००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००००० छंद विधान: मापनी: हर प्रथम पंक्ति में मात्राएँ 22 22 २12 =13 हर दुसरी पंक्ति में... Read more
संघर्ष एक इतिहास
जुल्म_ए_खाकी या जुल्म_ए_खादी अधिकार के संघर्ष का तो इतिहास रहा है, किसी ने समर्पण किया है,तो कोई भक्त रहा है मुझे याद है पुरुषर्थ पोरस... Read more
‘ सर्पकुण्डली राज छंद ‘ में 14 तेवरियाँ  +रमेशराज
‘ सर्पकुण्डली राज छंद ‘ में तेवरी....1. ------------------------------------------ हर पल असुर करेंगे बस वन्दना खलों की बस वन्दना खलों की , नित अर्चना खलों की... Read more
देश प्रेम
करने दो हुंकार अब,बस मातृभूमि का सत्कार अब बजने दो मृदंग,कर दो संखनाद अब, भरो कुछ ऐसा ही दम्भ,कण कण में दिखे देश प्रेम का... Read more
“तभी बिखेरे बाती नूर”  {लम्बी तेवरी-तेवर पच्चीसी }  +रमेशराज
छुपे नहीं तेरी पहचान, इतना मान चाहे रूप बदल प्यारे । 1 तुझमें बढ़ा घृणा का भाव, भारी ताव अंगारों में जल प्यारे । 2... Read more
और भरो हुंकार [ लम्बी तेवरी-तेवर चालीसा ] +रमेशराज
जनता लायी है अंगार आज यही चर्चा है प्यारे अधराधर। 1 मिलकर मेटें भ्रष्टाचार नयी क्रान्ति के जागेंगे अब फिर से स्वर। 2 भीषण करके... Read more
रावणों के राज में  [ वर्णिक छंद में लम्बी तेवरी/तेवर चालीसा ] +रमेशराज
पागलों के साथ है मानो आज राजनीति दानवों के साथ है। 1 आज मत पूछिए भीम जैसा दल-बल कौरवों के साथ है। 2 तम-भरी रात... Read more
मन ईलू-ईलू बोले  [  लम्बी तेवरी-तेवर चालीसा  ] +रमेशराज
घोटाले मंत्री को प्यारे, लिपट पेड़ से बेल निहाल छिनरे सुन्दर नारि ताकते खडे़ हुए हैं बम भोले। 1 अज्ञानी को मद भाता है, भला... Read more
कायर मरते पीठ दिखाकर [ लम्बी तेवरी-तेवर चालीसा ] -रमेशराज
‘मीरा’ जैसा धर्म निभाकर तीखे विष का प्याला पाकर, मरा न कोई, अमर हुआ। 1 बन प्रहलाद देख ले प्यारे अग्नि-कुण्ड के बीच नहाकर, मरा... Read more
‘ रावण-कुल के लोग ‘  (लम्बी तेवरी-तेवर-शतक)  +रमेशराज
बिना पूँछ बिन सींग के पशु का अब सम्मान मंच-मंच पर ब्रह्मराक्षस चहुँदिश छायें भइया रे! 1 तुलसिदास ऐसे प्रभुहिं कहा भजें भ्रम त्याग अनाचार... Read more
‘ मेरा हाल सोडियम-सा ’ [ लम्बी तेवरी, तेवर-शतक ] +रमेशराज
......................................................... इस निजाम ने जन कूटा हर मन दुःख से भरा लेखनी । 1 गर्दन भले रखा आरा सच बोलूंगा सदा लेखनी । मैंने हँस-हँस... Read more
“जै कन्हैयालाल की! [ लम्बी तेवरी तेवर-शतक ]  +रमेशराज
कृष्ण-रूप में कंस जैसे हर शासक के प्रति- “जै कन्हैयालाल की! [ लम्बी तेवरी तेवर-शतक ] +रमेशराज ..................................................... जन को न रोटी-दाल, जै कन्हैयालाल की!... Read more
' ककड़ी के चोरों को फाँसी ' [ प्रचलित लोककथनों पर आधारित-लम्बी तेवरी-तेवर-शतक ]  +रमेशराज
हर तेवर ‘लोकोक्ति’ सुहाये, शब्दों के भीतर तूफान अपने घर को फूंक तमाशा हुए देखने हम तैयार, क्या समझे! दही जमेगा, घी निकलेगा, जब ले... Read more
‘धन  का मद गदगद करे’ [लम्बी तेवरी -तेवर-शतक]  +रमेशराज
कितने विश्वामित्र, माया के आगे टिकें इत्र सरीखा दे महक धन -वैभव हर बार । 1 अब मंत्री-पद पाय, मुनिवर नारद खुश बहुत धन का... Read more
अन्तर आह अनंत अति [ लम्बी तेवरी – तेवर शतक ]  +रमेशराज
बोलें-‘वंदे मातरम्’ तस्कर, चोर, डकैत छद्मवेश को धारे प्यारे खल-गद्दार बहुत से हैं। 1 तुझे पढ़ाने के लिए नारी-तन-भूगोल मस्तराम के उपन्यास, चैनल-अखबार बहुत से... Read more
'दे लंका में आग' [ लम्बी तेवरी--तेवर-शतक ]   +रमेशराज
सिस्टम आदमखोर, जि़न्दगी दूभर है, कविता को हथियार बना तू लाँगुरिया, गाल छर असुरों के। असुरों के आगे विनती में हर स्वर है, क्रान्ति-भरे फिर... Read more