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Category: Sahitya

हकीकत मानने से मै भला इनकार क्योँ करता ?
हकीकत मानने से मै भला इनकार क्योँ करता तुम्हारे प्यार के खातिर किसी से प्यार क्योँ करता निवाला मुँह का देकर जिसने मेरी परवरिश की... Read more
बेटियाँ
Md Danish कविता Jan 14, 2017
बन्द दरवाजों के पल्ले खुलने लगे हैं सूरज की पहली किरण की लाली उन्हें छूने लगी है पथरीली,अनचीन्ही,उदास पगडंडियों पर अपने अरमानों की रंगोली वो... Read more
ज़िन्दगी
ऐ ज़िन्दगी तुझसे शिक़ायत हो गयी है फिर भी तुझे जीने की सी आदत हो गयी है। गिले शिखवे तो बहुत है, ज़िंदगी मे इन्हें... Read more
गीतिका
*गीतिका * देश हित के लिए खेलती बेटियाँ हर कदम पर यहाँ जीतती बेटियाँ देखिये देश में अब पदक ला रहीं बढ़ धरा से गगन... Read more
अखंड  भारत  की  ओर
आघातोँ की राहोँ मेँ सुन्दर मुस्कान बढाता जा, राष्ट्रदूत हे वीर व्रती भारत को भव्य सजाता जा, सुस्थिरता को लाता जा । अगणित कर्तव्योँ के... Read more
शाख़
हक़ हवा को जब तेज़ बहने के हासिल हो जाते हैं ..........!! यादों की तरहा सूखे पत्ते भी एक हवा से झड़ जाते हैं ....!!... Read more
?चले हम ?
आपको आपके परिवार को नये वर्ष की असीम शुभकामनाये।।।। चले हम ? नाराज़ सी ज़िंदगी को मनाने चले हम,, हर गैर को भी अपना बनाने... Read more