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Category: Sahitya

ईश छंद
जब चाँद से ठनी है छिटकी न चाँदनी है गमगीन हैं सितारे मिलती न रौशनी है बरसे न नैन देखो मिलता न चैन देखो सपने... Read more
' ककड़ी के चोरों को फाँसी ' [ प्रचलित लोककथनों पर आधारित-लम्बी तेवरी-तेवर-शतक ]  +रमेशराज
हर तेवर ‘लोकोक्ति’ सुहाये, शब्दों के भीतर तूफान अपने घर को फूंक तमाशा हुए देखने हम तैयार, क्या समझे! दही जमेगा, घी निकलेगा, जब ले... Read more
हमारी हिंदी
नानक कबीर सूर तुलसी बिहारी मीरा जायसी रहीम रसखान की ये भाषा है राजकाज सकल समाज की ये वाणी और भारत के ज्ञान-विज्ञान की ये... Read more
दरमियाँ अपने ये पर्देदारियाँ
जल रहीं जो याँ दिलों की बस्तियाँ कब गिरीं इक साथ इतनी बिजलियाँ बातियों में अब नहीं लज़्ज़त रही अब बिगाड़ेंगी भला क्या आँधियाँ अंजुमन... Read more
घाव
उघङ जाते हैं कुछ घाव मरहम लगाने के फेर में धीरे से किसी कोने से रिस जाया करते हैं छोड़ जाते हैं फीकी सी हँसी... Read more
सपने
.सपने कुछ सपने नहीं होते कभी पूरे और रहते हैं सदा जवां नहीं होते कभी बूढ़े बस रख जाते हैं गिरवी समय के हाथों पर... Read more
दीवानी
जुदाई तेरी, मुझे जीने नहीं देती, यादें तेरी, मुझे मरने नहीं देती, ऐ कम्भख्त, तूने किस मोड़ पर ला छोड़ा, मेरी मुस्कराहट, मुझे रोने नहीं... Read more
जो कोरे कागज सी खुशबू लिये सुबह सुबह बस्तों का बोझ लिये नये रंग , नये ढंग ,नये तेवर लिये चलते हैं ज़िंदगी को मनाने... Read more
वाह रे अपनत्व
प्रस्तुत है एक कथ्य...... "वाह रे अपनत्व" झिनकू भैया दौड़-दौड़ के किसी को पानी पिला रहे हैं तो किसी को चाय और नमकीन का प्लेट... Read more
कुछ पुष्प होते हैं ऐसे , निशा काल में हैं खिलते | एकाकी तो होते हैं लेकिन , सुरभि बयारों में फैलाते | भीनी -भीनी... Read more
सरस्‍वती वंदना
1 वीणापाणि नमन करूँ, धरूँ ध्‍यान निस्‍स्‍वार्थ। यथाशक्ति सेवा करूँ, करूँ खूब परमार्थ। करूँ खूब परमार्थ, बनें जड़बुद्धि सचेतन। चले कलम अनवरत, न कोई हो... Read more
मुक्तक - 2
चुल्हों में सभी के नहीं रोटियाँ बदन पे सभी के नहीं धोतियाँ। हजारों बिना रोटियों के मरे करों में सभी के नहीं बोटियाँ।। भाऊराव महंत... Read more
मुक्तक
माँ को मेरे ऐसा अक्सर लगता है। मेरा बेटा अब तो अफ़सर लगता है सूटबूट से जब भी निकलूँ मैं घर से कहती पूरब का... Read more
दूसरा पहलू
देखा पलट के पीछे की ओर था नज़ारा वहाँ कुछ और होठों पे थी मुस्कान जैसे ओढ़ी हुई उस के पीछे छुपा दर्द भी देखा... Read more
गजल
#गजल# *** नहीं चाहता जो कराती, बता दे, अलग राह तू क्यूँ चलाती बता दे?1 बहुत दूर पीछे रखा था नशा को, मगर बास घर... Read more
मनहर घनाक्षरी छंद
हिंदी दिवस की हार्दिक बधाई आप सभी को एक कवित्त के साथ....... "मनहर घनाक्षरी" भावना श्रृंगार लिए, रस छंद भाव पिए, हिंदी छेड़े मीठी तान,... Read more
किताबों सी नहीं होती जिंदगी , असल का अलग ही अंदाज़
कल्पना में जीकर क्या करेंगे सपनों का टूटना है दुखों की किताब किताबों सी नही होती जिंदगी असल का अलग ही अंदाज़ अच्छे होते है... Read more
एकादश  दोहे:
सिर्फ मलाई मारकर, जन्नत की हो सैर. दूध सभी को चाहिये, गायों से है बैर.. गायें भूखी घूमतीं, संकट में है जान. चारा भूसा गाय... Read more
जूझ रहे है नित्य...
असली गोरक्षक यहाँ, जूझ रहे है नित्य. बदनामी नकली करें, शर्मनाक हैं कृत्य. शर्मनाक हैं कृत्य, पत्र-परिचय पहचानें. पासवर्ड लें जाँच, गलत यदि फर्जी मानें.... Read more
महाकवि तुलसी-महिमा
दन्त पंक्ति पट खोल, मुख तेहिं बोला राम जब| सुत उपजा अनमोल, हुलसी हुलसी, जग चकित|| (सोरठा) राजापुर शुभ रत्न समाना| उपजा जहँ तुलसी विद्वाना||... Read more
गणेश वंदना.
हे गजबदन गणेश गजानन गणनायक गुरु स्वामी हो. प्रथम पूज्यवर पार्वती-सुत गणपति अन्तर्यामी हो. विकट विनायक विघ्नेश्वर शुचि विद्यावारिधि सिद्धिप्रियः, कपिल कवीष कृषापिंगाक्षा सत्पथ के... Read more
कृष्ण-जन्म
अँधियारे का पक्ष, भाद्रपदी शुभ अष्टमी, बंदीगृह का कक्ष, जगमग आलोकित हुआ.. धरि शिशुरूप सहज हो नाता. सम्मुख विष्णु उपस्थित माता.. नतमस्तक वसुदेव देवकी. स्वीकारें... Read more
जगह दिल में  बनाना जानते है
जगह दिल में बनाना जानते है याराना भी निभाना जानते हैं।1। पूछो कुछ; बताते कुछ हैं यारों फ़कत बातें बनाना जानते हैं।2। कोई महफ़िल नहीं... Read more