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Category: मुक्तक

गणेश वंदना.
हे गजबदन गणेश गजानन गणनायक गुरु स्वामी हो. प्रथम पूज्यवर पार्वती-सुत गणपति अन्तर्यामी हो. विकट विनायक विघ्नेश्वर शुचि विद्यावारिधि सिद्धिप्रियः, कपिल कवीष कृषापिंगाक्षा सत्पथ के... Read more
मुझे सारा संसार हिन्‍दुस्‍तान लगता है
1 कुछ यूँ चले अम्‍नोवफ़ा की ताज़ा हवा शामोसहर। फ़स्‍ले बहाराँँ चारसू, जश्‍ने चराग़ााँँ शामोसहर। तालीमगाह-इल्‍मरसाँँ है तेरा शहर-मेरा शहर, तारीख़ बयाँँ करे सुखनवर, तुम... Read more
समय
समय बदलते देर न लगती, क्यों खोवे है आस ? नव प्रभात फिर से आवेगा, रख रे ऐसी आस । जब झेलेगा सिर पर अपने,... Read more
ग़मो ख़ुशी
रहती नहीं मिठास,ज़ुबाँ पर देर तक, रहती मुई खटास,ज़ुबाँ पर देर तक, ग़मोख़ुशी का मेल,जो काश हो जाता, रहती ग़मोख़ुशियाँ,ज़ुबाँ पर देर तक ।
कृष्ण की मुरली
मधुबन बजत मुरलि मधुर, सुनि सुनि सुधि बिसारी है। बजाय पुनि पुनि मधुर धुन, स्व वश करत मुरारी है। गृह तजि तजि धाय मोहन, मुरलिधर... Read more
मुक्तक
प्रदत शीर्षक- अलंकार, आभूषण, भूषण, विभूषण, गहना, जेवर सादर प्रस्तुत एक दोहा मुक्तक............. “मुक्तक” गहना भूषण विभूषण, रस रूप अलंकार बोली भाषा हो मृदुल, गहना... Read more
मासूम क़ातिल
क़ातिल कभी मासूम नहीं होता है, मासूम कभी क़ातिल नहीं होता है, मासूम कहीं हो जाए बिसमिल अगर, बिसमिल ख़ूनी,क़ातिल नहीं होता है।
रब की रहमत
रंग औ नूर जो,बरसा है रब के दर से, रंग औ नूर वो,न मिला दुनिया के घर से, बराबर बराबर ,बाँट सब में वही रेखा... Read more
देश  की आवाज़
भारत देश महान हुआ और शक्तिवान ! अंतरिक्ष मे हुआ बड़ा नाम है वैज्ञानिकों पर हमे अभिमान !! @ विजय मिश्र *अभंग* ???????????????????? मेरे देश... Read more
ज़िन्दगी
ज़िन्दगी बेवजह हो तो इल्जाम होती है, ज़िन्दगी बावजह हो तो इनाम होती है, जो बना रहे हैं ज़िन्दगी दोजख अवधूत, वो ज़िन्दगी बिलावजह बदनाम... Read more
मुक्तक
शर्म आती नहीं उन्हें अब तो ! चाहे कपडे सभी ले जाये जो !! नग्न उनको सभी ने अब देखा ! वोट ले देश को... Read more
जिंदगी का सफर
हँसते रहे मुस्कुराते रहे दिल को दिलों से मिलाते रहे ना रहे यहाँ जगह बैर भाव की ज़िन्दगी सितारों से झिलमिलाते रहे ! @ विजय... Read more
लौटा लायेंगी तुम्हे
समझा देंगे यादों को न रुलायेंगी तुम्हे करना न गिला फिर न बुलायेंगी तुम्हे **************************** मेरा तुम्हारा अब ख़ुदा निगेहबाँ हमदम देखना इक रोज यही... Read more
जीत
इक लंबा अरसा बीत गया, यादों का बादल रीत गया, बाजी थी उनको पाने की, रेखा रक़ीब ही जीत गया।
मुक्तक :-- ज्यामिति विद इंसानियत
मुक्तक :-- ज्यामिति विथ इंसानियत अधिककोण जैसे अकड़ोगे तो उल्टा गिर जाओगे ! न्यूनकोण से झुकने में आखिर कब तक शर्मओगे ! उल्टा-सीधा होने पर समकोण... Read more