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Category: मुक्तक

माँ भारती
माँ भारती की शान में, ग़ुस्ताख़ियाँ होने न दें। ग़ुस्ताख़ की ग़ुस्ताख़ियों, की माफ़ियाँ होने न दें।। हिंदुस्ताँ को तोड़ने की, भी साजिशें हो रहीं,... Read more
हर नगर फहराये तिरंगा, अखण्ड भारत की शान रहे
तीन रंगों से सजा हमेशा अपना हिंदुस्तान रहे जोश केसरिया अंग अंग में, भरे खेत खलिहान रहे भेदभाव को भूल शांति सन्देश चलो अब फैलाएं... Read more
हरा केसरिया फिर मिलकर, तिरंगा संग लहरायें
गिरा दीवार नफरत की, चलो फिर एक हो जायें हरा केसरिया फिर मिलकर, तिरंगा संग लहरायें दिखा दे देश दुनिया को वतन की शान की... Read more
वंदे मातरम ....
हो हरियाली,शान्ति,खुशहाली का संगम हर ओर… हर मन नाचे, झूमें, गाये हो भाव विभोर.. जन,गन,मन की लय पे बच्चा,बूढा और किशोर.. वंदे मातरम से ध्वनित... Read more
मुक्तक
जिन्दगी में सबको प्यार मिलता नहीं है! महफिलों में सबको यार मिलता नहीं है! हुस्न की अदा के तलबगार हैं लेकिन, गम में सबको मददगार... Read more
मुक्तक
हौसला मैं चाहत का बुलन्द रखता हूँ! दर्द को पलकों में नजरबंद रखता हूँ! कहीं ख्वाब खो न जाऐं हसीन लम्हों के, हर याद को... Read more
भोर की किरण......
बीत गया जो उसे बीत जाने दे.... दिल दुखाये जो बात उसे भूल जाने दे.... नफरत हटा प्यार को बिखरने दे ज़रा... फिर दिल से... Read more
मुक्तक
रात जाती है फिर से क्यों रात आ जाती है? धीरे---धीरे दर्द की बारात आ जाती है! भूला हुआ सा रहता हूँ चाहतों को लेकिन,... Read more
कल्पना
----------------------------- कल्पना से बनी एक चिड़िया रानी है। लिखी किताबों मे सुन्दर सी कहानी है। पढ़ लिये कुछ पन्ने और थोड़े हैं बाकी खत्म न... Read more
मुक्तक
देखकर जिसको हमें करार मिलता है! ऐसा नसीब से हमें प्यार मिलता है! याद करता हो हमें हर घड़ी दिल़ से, ऐसा कभी कभी हमें... Read more
आजाद हिंद फौज बनाकर , दुश्मन को ललकारा था
नेताजी जी सुभाष चंद्र बोस जयंती की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। **************************** आजाद हिंद फौज बनाकर , दुश्मन को ललकारा था खून मुझे दो... Read more
रक्तदान
क्यों न करें खुद पर अभिमान यारो करते हैं जब इंसानो वाला काम यारो कसम से छाती तनकर अकड़ जायेगी करके देखो एक बार रक्तदान... Read more
मुक्तक
तेरी आरजू ने यही काम किया है! मेरी जिन्द़गी को बदनाम किया है! कैसे मैं छुपाऊँ अंजाम को सबसे? दर्द ने नुमाइश तेरे नाम किया... Read more
बेटियां
(१) खिलतीं धूप हैं बेटियां, हों सबकी दरकार. बिन बेटी सब सून है, सजा धजा घरबार. सजा धजा घरबार, सदा बेटी से मिलती. महके घर... Read more
मुक्तक
इसतरह से जागी है तेरी कामना! जाँम को लबों से हो जैसे थामना! बर्फ सी पिघल रही हैं हसरतें मेरी, आग से ख्वाबों का हो... Read more
मुक्तक
दिल के गम जब आसुओं में निकलते हैं ये अश्क़ भी तब मोतियों में बदलते हैं इन आसुओं को कभी जाया न कीजिए ये हमारे... Read more
मुक्तक
बुढ़ापे में जो नज़र कमज़ोर हो गई अफ़सोष सब की नीगह पलट गई हर चीज़ पुछता हूं,उलझी सी नज़र उजली सहर जैसे अंधेरी रात हो... Read more
मुक्तक
जबसे जिन्दगी में आप मिल गये हैं! रास्ते मंजिल के फिर से खिल गये हैं! जागे हुए हैं पल ख्वाबों के इसतरह, जख्म भी जिगर... Read more
मुक्तक
बहुत उदास हूं थोड़ा मन बहला दो ना बहुत ज़्यादा नहीं थोड़ा समझा दो ना थक कर सो जाऊं सपने में यों ही कहीं वह... Read more
मुक्तक
दुनिया में मेरा ना तुझसा कोई मीत है। मेरी तो लागी तुझ संग ही प्रीत है। तुमसा सर्वशक्तिमान नही कोई मेरे प्रभु! मेरी कलम भी... Read more
मुक्तक
तुमको मैं जबसे खुदा मान बैठा हूँ! जिन्द़गी को गुमशुदा मान बैठा हूँ! खोजती हैं महफिलें जमाने की मगर, खुद को मैं सबसे जुदा मान... Read more