मुक्तक

मुक्तक

मैं जिनके इश्क़ में जिंदा हूँ उनको छोड़ आया हूँ। मैं अपने देश की रक्षा में रिश्ते तोड़ आया हूँ । गला ना पायेगी मुझको धवल ये बर्फ ... Read more

मुक्तक

सदायें सुन तो ले मेरी, मैं तुझको याद करता हूँ। मैं दश्तो-सहरा में गम की, दिन को रात करता हूँ। जमाना कह ले जो कहना, मुझे उसकी न... Read more

मुक्तक

प्रेम की सारी संज्ञाएँ तुम्हारे नाम कर दूँगा । मैं अपने इश्क़ में तुझको छलकता जाम कर दूंगा । खुमारी इश्क़ की मेरे तिरे सर चढ़ क... Read more

मुक्तक

अंधेरा हो भले कितना , न हिम्मत हार जाना तुम । उदासी हो भले कितनी , न हँसना भूल जाना तुम । सफर में जीत के अक्सर, बिछे काँटो क... Read more

मुक्तक

"तेरे होंठों पर रही जो, वो हँसी अच्छी लगी तुझसे जब नज़रें मिलीं थीं वो घड़ी अच्छी लगी तुमने जब हँसते हुए मुझसे कहा` तुम हो मेरे ` ... Read more

मुक्तक

हमेशा पास रहते हैं मगर पल-भर नहीं मिलते, बहुत चाहो जिन्हें दिल से वही अक्सर नही मिलते, हकीकत में उन्हें पहचान अवसर की नहीं होती ... Read more

मुक्तक !

"तीर तलवार कि जरूरत नहीं मुझे, तुम्हें हो तो सँभाल लो, मुल्क़ मुहाने पे है धर्मयुद्ध के, हम कलम से काम चलालेंगे !" *** 07-02-20... Read more

मुक्तक

"जो रहे सबके लबों पर वो हँसी अब चाहिए, बँट सके सबके घरों में वो खुश़ी अब चाहिए, देखिए तो आज सारा देश ही बीमार है हो सके उपचार जिस... Read more

मुक्तक

"सच को समझाना है तो कहना पडता है, दुनिया की बातों को भी सहना पड़ता है, जब सारे के सारे ही बेपर्दा हों जाएं ऐसे में तो खु़द ही पर्... Read more

मुक्तक

" सफ़र में मुश्किलें आएं तो जुर्रत और बढ़ती है, रास्ता कोई जब रोके तो हिम्मत और बढ़ती है, अगर बिकने पे आ जाओ तो लग जाती भले कीमत ... Read more

मुक्तक

"शब्द मेरे बोलते हैं बादलों की बात , घुंगूरुओं कि ना कोई पायलों की बात, तमाम खेत बन रहे निवाले शहरों के, किसान क्या कहे अब हलों क... Read more

मुक्तक

"ज़ात,मज़हब,रंग के भेद अब सारे हुए, आदमी था एक जिसके लाख बँटवारे हुए, लफ़्ज़, जिनका था हमारी ज़िंदगी से वास्ता आपके होंठों पर आकर... Read more

मुक्तक

जीना है तो जी लें पुष्प बनकर शूल चुभता है जिसको निरंतर, तोड़ती दुनियाँ जिसे फिर भी सदा रहता वो गले का हार बनकर Read more

मुक्तक

"हवा भी क़ैद कर में होती कहीं जाने नहीं देते, किसी के खेत पर बादल भी ये छाने नहीं देते, सूरज चांद पर भी जो हुक़ूमत चल गयी होती, स... Read more

मुक्तक

" सिपाही हूँ कलम की मैं तो मन की बात करती हूँ , नही हिन्दू और मुस्लिम की, वतन की बात करती हूँ, हमें मत वास्ता देना कभी मंदिर औ मस्... Read more

मुक्तक

सम्भल के तुम जरा चलना, कहीं पंगा न हो जाये कहीं रुसवा यहाँ मज़हब और ये गंगा न हो जाये चुनावी रोटियाँ सिकने लगी हैं, फ़िर से सूबे म... Read more

मुक्तक

"हमारे दर्द का दिल से बहुत रिश्ता पुराना है, बहुत ग़म सह लिये हमने, ज़रा अब मुस्कराना है, तुम्हारे और हमारे दरमियाँ इतना सा रिश्त... Read more

मुक्तक

"सभी बस जख्म देते हैं दवाएं कौन करता है, दिल से माँ के अलावा अब दुआयें कौन करता है, यहाँ इंसान की छोड़ो परिन्दे भी समझते हैं, मुह... Read more

एक मुक्तक --आर के रस्तोगी

"बगैर कहे पहले से ही ये नजरे बोल देती है तुम्हारे आने से पहले दिल के द्वार खोल देती हे बस तुम आ जाओ,और न इंतजार कराओ समझ जाओ य... Read more

मुक्तक

"जताने की ज़रूरत क्या,नज़ारे बोल देते हैं, हाले दिल तो आँखों के इशारे बोल देते हैं, इस दहलीज़ पर आने से पहले ही तेरे साजन खुशी से ... Read more

मुक्तक

दिल का चैनों-क़रार खोया है मेरा बरसों का प्यार खोया है ढूँढ़ता हूँ मैं कू-ब-कू उसको कौन दुनिया में यार खोया है प्रीतम रा... Read more

मुक्तक

दिल को लुभा रहा है ये मनुहार आपका किसके नसीब में है लिखा प्यार आपका कहने लगी चमन की कली फूल और सबा दीवाना बन गया है ये संसार आप... Read more

मुक्तक

" हर बातें चुभती हैं अब तो ख़ारों की तरह, अब दूरियां बढ गयी हैं किनारों की तरह, पढ़ चुका चाहे हज़ारों ही किताबें इंसां सुलूक आज भ... Read more

मुक्तक

खैरात नहीं हमें हमारा हक़ का तो दीजिए जो हमारे हक का है बस उतना ही दे दीजिए चंद सिक्के उछाल के मातमपुर्सी कर रहें हैं आप हमार... Read more

मुक्तक

" चमन में ख़ुद को ख़ारों से बचाना है बड़ा मुश्किल, बिना उलझे गुलों की बू को पाना है बड़ा मुश्किल, न छोड़ी चोर ने चोरी, न छोड़ा सां... Read more

मुक्तक

मौन थी मेरी कलम उसको रवानी दे गये, जाते-जाते मुस्करा कर इक निशानी दे गये, जिनके आने से बढ़ी थीं रौनकें चारों तरफ, देश के खातिर वो... Read more

मुक्तक

"आज सपने मेरे अश्क में ढल रहे हैं, ये जिगर के दिए ख़ून से जल रहे हैं, परायों की नज़रों को भाए हैं, लेकिन अब हमारे ही अपने हमें छल... Read more

मुक्तक

" नज़र आ रहा है धुआँ ही धुआँ, लगे दोष तो क्या कहे बेज़ुबाँ वहाँ कैसे महफूज़ कोई रहे दरिंदे खुले आम घूमें जहाँ " Read more

मुक्तक

मेरी आरज़ू मेरा मुकाम तुम हो। मेरी मंज़िल मेरा अंज़ाम तुम हो। तुमसे ही हासिल है मेरी हर ख़ुशी- मेरी हर सुबह मेरी शाम तुम हो। म... Read more

मुक्तक

" कभी दिल से रिश्ते निभाकर तो देखो, नफरत को दिल से मिटाकर तो देखो, उठाना है आसान औरों पे ऊँगली, कभी खुद पे ऊँगली उठाकर तो देखो " Read more

दरिन्दे

वो मासूम थी सामने दरिन्दा था किया उसने कराटे का वार वो हुआ धराशायी चीख कर भागी मासूम सीखे सब बेटियाँ इसी तरह के वार... Read more

मुक्तक

हरदम हमदम बनाना चाहती हूँ। तेरा हर गम चुराना चाहती हूँ। तेरा हमसफर हमराही बनूँ मैं - कदम से कदम मिलाना चाहती हूँ। -लक्ष्मी सिंह Read more

सब कुछ खत्म (क्षणिका)

1 बंद कमरा मारपीट की आवाजे औरत की चीख सब कुछ खत्म 2 मस्ती में युगल तेज रफ्तार एक चीख और सब कुछ खत्म स्वलिखित लेखक... Read more

दुश्वारियां

मासूम चेहरे पर हो जब मुस्कान खिलने गले फूल महके क्यारियाँ मिले जब हक बराबरी का आसमां छूए ये नारियाँ अब गिला शिकवा का... Read more

मुक्तक

जब कभी इस दौर का इतिहास लिखा जायगा बग़लगीर नीरो का ही तुझको समझा जाएगा, जल रहा था देश मेरा धर्म के उन्वान पर, तू बैठ मजे में जु... Read more

"मुक्तक"

बैठ कर नीर की धारा किनारे कुछ विचारूं मैं सुनूं समझूं मगर फिर भी तुम्हे ही क्यों पुकारूं मैं मेरे अस्तित्व के वाहक बने हो तुम प्र... Read more

"खुदा से फरियाद "

हमने खुदा से एक चीज़ माँगी थी I सपनो मॆ नही ,दुआओं मे माँगी थी I ... Read more

कुछ कलयुगी मुक्तक --आर के रस्तोगी

काश ! मैं तुम्हारा मोबाइल होता तुम्हारे कानो से चिपका होता तुम अपने दिल की बात कहती मैं अपने दिल की बात कहता काश ! तुम मेरे... Read more

मुक्तक

गहराई में आकर देखो,एक वेदना जमी मिलेगी, अधरों पर मुस्कान भले हों, पर नयनों में नमी मिलेगी, सागर जल से भरा मिले ज्योंपर लहरें प्यास... Read more

मुक्तक

"प्यार की इस ज़िंदगी को बेच मत, अपने तन की सादग़ी को बेच मत, बस अँधेरा ही अँधेरा पाएगा, इस तरह से रौशनी को बेच मत " Read more

मुक्तक

सुरभित शीत बयार,घन गरजे चपला संग, आने को बरसात, विरहनी भरा मन उमंग। ताड़-तरु खग-विहग संग पूर्वा,लगी गाने, कूके कोयल, मोर, प्रकृति... Read more

अमर्यादा

एक अशांत महिला कर्मी उसके बातों में नही थी नर्मी शायद कामों की अधिकता से थी पेरशान लोगों की बातों पर नही दे रही थी ध्यान इसपर ... Read more

मुक्तक

जब कोई चाहत क़रीब हो जाती है। हाल-ए-ज़िन्दग़ी अज़ीब हो जाती है। कभी मुड़ते नहीं हैं रास्ते ख़्यालों के- रश्म बंदिशों की रकीब हो ... Read more

मुक्तक

होते ही सुबह तेरी तस्वीर से मिलता हूँ। अपनी तमन्नाओं की ज़ागीर से मिलता हूँ। नज़रों को घेर लेता है यादों का समन्दर- चाहत की लिपटी... Read more

बेकरारी

...मुलाहिज़ा फरमाइए.....👇 तोहर जईसन हाल गोरिया हमरो ओईसन हाल बा। तोहरे बिना लईकन सब के जीयल मुहाल बा। चाँद तारा त... Read more

मुक्तक

"आँख तुमसे मिली तो सजल हो गई मैं मिलने को तुमसे विकल हो गई ख्वाब में तुम हमारे करीब आ गये, छू लिया मुझको तो मै कँवल हो गई" Read more

"जिंदगी ने हमें इस कदर लूटा"

जिंदगी से आज हमने पूछ ही लिया। क्यूँ तूने हमें इस कदर लूटा। कि मौत ने भी आज हमें। पहचानने से इंकार कर दिया। सुचिता बोहत ग्र... Read more

मुक्तक

तू मुझे मिल जाए ख़ुदा से रोज़ कहती हूँ मैं, तू वजह जिसके लिए ख़ामोश सी रहती हूँ मैं, कुछ नहीं मिलना मुझे मालूम है अच्छी तरह फिर भ... Read more

मुक्तक

"पतझर को कैसे हम भला बहार लिख दे, उड़ती धूल को सावन की फुहार लिख दे, यह वो क़लम है जिसमें सच की स्याही छलक रही एक लुटेरे को कैसे ... Read more

मुक्तक

"चाह यही है मेरी लेखनी,सरस मधुर रसधार बने, वक़्त पड़े तो शब्द गरजते वीरों की हुंकार बने, भारत माँ के अर्चन से अधरों का श्रृंगार कर... Read more
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