मुक्तक

मित्रता दिवस

चहुं ओर प्रेषित मित्र-दिवस की शुभकामनाएं। किंतु क्या सच्चा मित्र कौन यह पहचान पाए। मित्र कौन सच्चा आज यह जानिए। सच्चे मित्र की पह... Read more

ईद मुबारक...

तुमको सखे अब मैं क्या ही बोलूं , शीशा भी अब सच कहने से डरता है। तुम जब से दूर गए हो चाँद गगन में थकता है तुम जिस दर्पण क... Read more

मुक्तक

तुम्हे पता है क्या,...? क्या ढूंढती हूँ मै,...? बस एक अदना सा वकील जो दिल के दरबार में सुनवाई करवा दे यार से इश्क की गवाही दिल... Read more

मुक्तक

वो शब्द कहाँ से लाऊँ, तेरी प्रतिछाया जिसे बनाऊँ एक माँ की जाई हम, आ तेरी परछाईं मैं बन जाऊँ। तू उर में ही मेरे रहती है, कहां कह... Read more

मुक्तक

1. हम ने कई बार पलट कर देखा था उसे दिल ने यूँ ही सूरज कह दिया था जिसे ! / तेरी तलाश में मैं कहीं भी नहीं हूँ सखे मैं हर जगह ह... Read more

मुक्तक

ख़्वाहिशों के धार पे मचलती रही जिंदगी... / सुबह से शाम ... साम से फिर सुबह में ... बदलती रही जिन्दी... *** Read more

मुक्तक

सारे दिन की थकन मैं तुझ पे ही उतार आती हूँ, तेरे खत में पलते शब्द को जब जरा सा निहार आती हूँ जब भी तेरी याद, याद बन सताती मुझ... Read more

मुक्तक

१. कुछ कहना था तुम से, कहो कह दूँ क्या ? तुम यूँ जो रूठे हो, गुदगुदी कर दूँ क्या ? ...सिद्धार्थ २. जरा सा मुस्कुराने के ... Read more

मुक्तक

बेवज़ह ही मन में कुछ सपनें करबट बदल रहें हैं हँसुआ और हथौड़े उठाने को हांथ मचल रहे हैं ! ... सिद्धार्थ *** ये जो इंक़लाबी रफ़्तार... Read more

मुक्तक

१. मैं अजीब कुछ अलग ही किस्सा हूँ तू मुझ में है और मैं तेरा हिस्सा हूँ ! ...सिद्धार्थ २. तमाम रात कुछ ख़्वाब चुनते रहे सुबह ... Read more

मुक्तक

एक चुटकी नमक रखो दिल के ज़ुबान पे ख़ुशियाँ साथ चलेंगी जिंदगी की ढलान पे ! *** कभी अखबारों में सच की सियाही से शब्द फूटते थे आज प... Read more

मुक्तक

किसी के हिस्से महल आया किसी के हिस्से आई झोपड़ी मुझे फुटपाथ मिला जागीर समझ मार दी हमने चौकड़ी । ...सिद्धार्थ २. गिद्धों ने पर फै... Read more

मुक्तक

१. बेताब रुह है न तेरी, चिनार से लिपट जाने को बिजली बन गिरेगी, मक्कारी तेरी जला जाने को ! ...सिद्धार्थ *** २. जब तक बेटियों ... Read more

मुक्तक

मिट्टी होकर एक दिन मिट्टी में ही तो मिल जाना है धन-दौलत का करना क्या यही तो असली खजाना है । छीना-झपटी, कत्ल-खून से किस को क्या... Read more

मुक्तक

हमारा सरपरस्त पस्त हुआ है भूख मिटाने में अख़बार से निकल हमारे हांथ तक आ जा 'भेल-पूरी' चखेंगे हम सब तुझे, बैठ अपने ही गरीब खाने मे... Read more

मुक्त

१. सफ़र बांकी था, बस तुम छूट गए खुशियों से रिश्ता हमारा टूट गए ! ...सिद्धार्थ *** २. सब ने सब्र करना सिखाया उसने बेसब्री से ... Read more

मुक्तक

१. तू मिला ही नहीकभी, तो छूटेगा कैसे ...? मुझ में ही जो बसा हो वो टूटेगा कैसे...? ...सिद्धार्थ २. सभी ख़्वाब पूरा नही होता ..... Read more

मुक्तक

१. दुनियाँ बहुत खुबसूरत है मेरे बच्चे नफ़रत नही प्यार करना किताबों में ही मिलेंगे रास्ते सच्चे ! ...सिद्धार्थ ***२. बदलते सम... Read more

खाली पेट

नंगे - भूखे फिरते मिले इंसान नहीं है रोटी कपड़ा और मकान धरम शूरु होता है रोटी के बाद खाली पेट भजन ना होय भगवान Read more

रोटी

अज़ां, न आरती सुनाई देती है दुनिया दीन की दुहाई देती है खाली पेट ठहरे यह सारे लोग इनको बस रोटी दिखाई देती है Read more

मुक्तक

ये कैसी झाँकी है समाज के। पूत कपूत है कितना आज के। मात-पिता के इज्जत भूले हैं- ये नंगा नाचते बिन लाज के।। -लक्ष्मी सिंह Read more

मुक्तक

मंजिल नहीं मिले जब तक आराम नहीं करना। अपने आप को कभी खुद नाकाम नहीं करना। जो दाग शीश पर है, पसीने से मिटा लेना - अपने हौसलों का न... Read more

मुक्तक

आधे अधुरे मन से कोई काम नहीं करना। यूँ हीं बरबाद अपना सुबह-शाम नहीं करना। ऐसे जियो की आखरी सांस भी मुक्कमल हो- अपने जिन्दगी को य... Read more

मुक्तक

१. झुका कर पैरों में अपने, कैद में जूते के इंसान को रखती है क्या अजब की वो... उसपे ख़ुलूस-ए-फ़िक्र और फिर अम्न की भी बात करती ह... Read more

मुक्तक

तुम्हें मिल जाता होगा चैन कई ठिकाने जो होंगे मेरी तो बेचैनियों की सबब तुम से क्या अब मुझे ये भी, तुमको पुर्दिल बताने होंगे ! ..... Read more

मुक्तक

दिल को जुबां नही होता, आंखे नही होती, बस धडकने- धडकनों को पहचान लेती हैं मुहब्ब्त जिसको कहते हैं, अंधे - गूंगे दिल की धडकनों म... Read more

जबसे हम तुम्हारे दिल के फ्रेम में कैद हुए

जबसे हम तुम्हारे दिल के फ्रेम में कैद हुए हैं ना मालूम दिल - आईने में कितने भेद हुए हैं तड़प-तड़प रह गया हैं दिल आबोहवा वास्ते मिल... Read more

मुक्तक

खिलौनों से खेलने की थी हसरत, भूख ने दिल को बड़ा बेज़ार किया रोटी के खातिर मैंने बच्पन की हसरतों को बाज़ार के नाम कर दिया ! ...सिद्धार्थ Read more

सुन्दरता है सस्ती ,चरित्र है महँगा --आर के रस्तोगी

सुन्दरता है सस्ती,चरित्र है महँगा | घडी है सस्ती,अब समय है महँगा || कर ले बन्दे समय का सदुपयोग | वर्ना जीवन काटना पड़ेगा महँगा || ... Read more

मुक्तक

इंसानियत लंगड़ा हुआ धर्म के बाजार में खून की तलब लगी है मज़हबी तलबार में ! ...सिद्धार्थ *** सदा-ए-इंक़लाब की उठी तो पूजीं टिक न ... Read more

मुक्तक

'प्यार'... तुम से कैसे कह दूँ प्यार नहीं है हमें बस कहने नही आता जिस तरह आता है तुम्हें ! ...सिद्धार्थ *** तुमने पलट कर कुछ तो... Read more

शायरी

हम अपनी आद्तों से न जाने कब तक बाज आएंगे किसी की मर्जी हो के न हो हम आवाज़ उठाते जायेंगे। हम अकेले वो नहीं जो इस दहर में दफ़नाय... Read more

मुक्तक

बड़े सलीके से दबा रखा था, 'इश्क' को दिल कि संदूकची में वो बाज़ीगर निकला, दिल ले गया दर्द का दरिया दे गया ! ...सिद्धार्थ २. ये इश... Read more

मुक्तक

तुम्हारी ख़ामोशी का मलाल नही बस अपनी साफगोई से डरती हूँ कहीं किसी रोज पलट के न कह दूँ जा तुझे अब मैं आजाद करती हूँ ! ...सिद्धार... Read more

मुक्तक

१. तन को जंजीरों से तो बांध भी सकते हैं, मन को किसी बिधि न साधा जायेगा, बाजु कटे तो कट जाये, सर भी डाला जायेगा और नहीं तो र... Read more

मुक्तक

हमने ठोकरों में रखा है एहसास-ए-मसर्रत को तुम्हें गर दरकार हो इसकी तो लेते हुए जाना ! ...सिद्धार्थ २. दिल से याद कर मगर फ़रियाद न... Read more

मुक्तक

१. अपने कई ताज़ा जख़्म खुला छोड़ रखा है मैंने नमक के सौदागर हो तो मल जाओ जख़्मों पे ...सिद्धार्थ ***२. था भरा उपवन सारा रंग बिर... Read more

मुक्तक

पत्थरों की सोहबत ने पत्थर का ही बुत बनाया मुझ को बिछड़ के तुझ से रोया था, क्या पत्थरों ने बताया तुझ को ! ...सिद्धार्थ *** ख्वाबो... Read more

मुक्तक !

चूल्हे में डालो बंदूकों को, प्यार की रोटी सिक जाने दो धर्म की बातें छोड़ गरीबी-भुखमरी की बातें हो जाने दो। मुंसिफ हुई है जो सरकार... Read more

एक लब्ज 'मां'

एक लब्ज 'माँ' जब भी "मां" मुझे बुलाती है, फिजायें दौड़ी चली आती है। नर्म शाखों की शबनमी बूँद छू लूँ, माँ उंगली पकड़ चलना सिखात... Read more

मुक्तक

आप ज़बसे ज़िन्दग़ी में मिल गये हैं। रास्ते मंज़िल के फ़िर से ख़िल गये हैं। ज़ाग़े हुए से ख़्वाब हैं निग़ाहों में- ज़ख़्म भी जिग़र... Read more

मुक्तक

एक किताब से दूसरे तक जाते-जाते नट सी हो जाती हूँ मैं अल्फ़ाजों के भँवर में कभी-कभी उलट पलट हो जाती हूँ मैं ! ...सिद्धार्थ दोस्त... Read more

ॐ नमः शिवाय

ॐ नमः शिवाय ॐ नमः शिवाय। भज ले मन शिव न कोई सहाय। शिव रहस्य को जो जन जाने। शिव भक्त उसको जग माने। शिव परिवार की देख विषमता, जीन... Read more

मुक्तक

अबकी राख से आग होने का सोचा है, ये न कर, मुझ से मेरी औकात न पूछ । माँ बहनों की आन-मान के लिए, ताव देख मेरी, देख न मेरी मूछ!! **... Read more

मुक्तक

१. मैं कभी कसी दोस्त बनने न पाई पुर्दिल कोई सांस-सांस में दोस्त बन पल रहा है ! ...सिद्धार्थ २. समय के नर्म रेत पर एक दिन यूँ ह... Read more

मुक्तक

१. तुम गलतियाँ करते रहो हम सुधार देंगे मुहब्बत है तुम से, कैसे तुम्हें उजाड़ देंगे। २. हमने तो मुहब्बत को अलफाज बना कर जज्बात अ... Read more

मुक्तक

मेरे जिस्म के गली में तुमने जश्न मनाई थी मार कर मुझको, मुझ में मेरी कब्र बनाई थी ! ...सिद्धार्थ *** सांप की बांबियों को तुम दू... Read more

मुक्तक

तुम मुझको ग़म देकर भी ज़ीने नहीं देते। तुम ज़ख़्म-ए-जिग़र को भी सीने नहीं देते। मैं ढूँढ़ता हूँ सब्र को पैमानों में मग़र- तुम ज़... Read more

मुक्तक

हादसे कुछ इस क़दर हो गये हैं। हम ग़में-हालात से रो गये हैं। ज़िन्दग़ी बिख़री है रेत की तरह- हम राहे-बेख़ुदी में खो गये हैं। म... Read more

मुक्तक

हादसे कुछ इस क़दर हो गये हैं। हम ग़में-हालात से रो गये हैं। ज़िन्दग़ी बिख़री है रेत की तरह- हम राहे-बेख़ुदी में खो गये हैं। म... Read more