मुक्तक

मुक्तक

#विधा - ताटंक छंद आधारित (मुक्तक) ********* ************ ********** ********** व्यथित हृदय की पीर अभी हम, बोलो भला दिखाये क्यों। ... Read more

मुक्तक

वक्त के दरिया मे बहते जा रहें हैं हम जाने क्या क्या साथ लेते जा रहें हैं हम आसमाँ पर हैं सितारे उस कदर हैं ख़्वाहिशें हर कदम पर... Read more

मुक्तक

औरों को ख़ुश देख के जलते नहीं हैं हम, कीमत लगाते लोग पर बिकते नहीं हैं हम, मुझ से हैं कई लोग इसी बात से ख़फा, जीते हैं सर उठा के ... Read more

एक दुआ मौला से

दिनांक 28/3/19 दुआ फैला के हाथ फकीर ने माँगी यूँ दुआ मौला से भर दे हर इन्सान की झोली जो चलें नेकी ओ ईमान की रा... Read more

मुक्तक

तीरगी अब तो हमें रोशनी सी लगती है ज़िन्दगी आज हमें ज़िन्दगी सी लगती है कैसे कह दूँ कि फरिश्ता है वो देखो उसको उसकी फितरत तो हमें ... Read more

जीवन ये व्यापार हो गया -मुक्तक

दाना –दाना तरसे भाई , कातर नयना ताके ताई , कृषक मौन , घर द्वार बह गया । जीवन ये व्यापार हो गया । सुविधायें सब नौ दो ग्यारह ... Read more

दो मुक्तक

“ वृद्ध, चने बेचने वाला “ रोज ही रोग से मर रहे काँपते , बोझ पर बोझ ले दौड़ते हाँफते , सांस भी थी उखड़ते –उखड़ते बची , बेच कर... Read more

मुक्तक

इस राज़ को क्या जानें साहिल के तमाशाई हम डूब के समझे हैं दरिया तेरी गहराई ये जुल्म भी देखा है इतिहास की नज़रों ने लम्हों ने ख़ता ... Read more

ग़म के हजार घूँट.........तीन मुक्तक

ग़म के हजार घूँट.........तीन मुक्तक ●●●●●●●●●●●●● कितना बे'दर्द हो गया' संसार देखिये कोई नहीं है' पूछता' अखबार देखिये घायल तड़प रह... Read more

मुक्तक

ख़ुद पुकारेगी जो मंज़िल तो ठहर जाऊँगी वरना ख़ुद्दार मुसाफ़िर हूँ गुज़र जाऊँगी, आँधियों का मुझे क्या ख़ौफ़ मैं पत्थर हूँ रेत का ढ... Read more

मुक्तक

रख दीजिए समय की धारा को मोड़कर, है संग आज हम सब निज स्वार्थ छोड़कर, ऐसा हो अब विकास कि फिर कभी किसान, देखे न आसमान को खेतों को गो... Read more

मुक्तक

मुहब्बत में मुहब्बत के सिवा सब मिल गया मुझको नही मिलना था उसको पर मेरा रब मिल गया मुझको किसी तपती दुपहरी में दिया जब आब प्यासे को ... Read more

मुक्तक

कल तलक थे जो लुटेरे अब विधायक हो गए हैं, ये जेब में कानून को रखने के लायक हो गए हैं, डाल रक्खी हैं नकेलें ज़िन्दगी की नाक में, चन... Read more

मुक्तक

वो चोर चौकीदार पे ताने खडा कमान है जिसे जानती है जनता वो स्वयं बेइमान है, सत्य और असत्य मे जंग फिर से है छिडी सत्य के ही साथ में... Read more

मुक्तक

देखिए जरा गौर से तमाम बोलने लगे, वन्दे मातरम नमक हराम बोलने लगे, राम का कभी जो अस्तित्व भी न मानते थे आते चुनाव वो जय श्री राम ब... Read more

मुक्तक

अब तक का इतिहास यही है, उगते हैं कट जाते हैं हम जितना होते हैं अक्सर, उससे भी घट जाते हैं लोगों की पहचान तो आख़िर, लोगों से ही होत... Read more

मुक्तक

" कब-कब इन आँखों से बरसी आँसू की बरसात न पूछो जीती बाज़ी किस मौके़ पर हुई किस तरह मात न पूछो बलिदानों की बुनियादों पर आज़ादी का भव... Read more

रंग बिरंगी रँगोली

दिनांक 22/3/19 पिरामिड 1 है घर सुन्दर बने जब रंग बिरंगी द्वारे में रँगोली लाऐ सुख समृद्धि 2 है गृह लक्ष्मी चह... Read more

मुक्तक

आज़ादी मिल गई, ग़रीबी किन्तु नहीं मिट पाई, जन जीवन को निगल रही है मौत बनी महंगाई। ‘रामराज’ का नहीं आज तो ‘काम-राज’ का युग है पद-ल... Read more

मुक्तक

संघर्ष भरा ही यह जीवन है यह जीवन अनमोल रतन है मंज़िल उसको ही मिलती है जिसमें धीरज और लगन है Read more

मुक्तक

" कल तक थे पास अपने, अब दूर हो गए हैं, रिश्तों में प्यार के गुल बेनूर हो गए हैं, मुंह पर है बात मीठी, छुप-छुप के घात करते, अपनो क... Read more

मुक्तक

अँधेरे रास क्या आते उदासी सह नहीं पाया। तुम्हारे बिन गुज़ारीं रात तन्हा रहह नहीं पाया। मिला धोखा मुहब्बत में नहीं उम्मीद थी जिसकी-... Read more

रंगोत्सव

माथे पर है पीला चंदन , गालों की शोभा लाल चंदन, पीतांबर की छटा मनभावन, होठों पर मुरली सम्मोहन , सिर पर मोरपंख दु:खभंजन , प्रभु क... Read more

मुक्तक

" निर्भय हो बढ़ चले सभी जूझ पड़े तूफ़ान से, रहे तिरंगा उड़ता नभ में यूं हीं ऊँची शान से, यही कामना है मेरी माँ भारती पूरी कर देन... Read more

मुक्तक

" सफ़र में मुश्किलें आएँ तो जुर्रत और बढ़ती है, रास्ता कोई जब रोके तो हिम्मत और बढ़ती है, अगर बिकने पे आ जाओ तो लग जाती भले कीमत ... Read more

मुक्तक

" तेरे होंठों पर रही जो, वो हँसी अच्छी लगी, तुझसे जब नज़रें मिलीं तो वो घड़ी अच्छी लगी, तुमने जब हँसते हुए मुझसे कहा` तुम हो मेरे ... Read more

मुक्तक

" अपनी लगाई आग के शोलों में जल जाते हैं लोग, अब तो अँधेरे में यूं हीं बस रोशनी पाते हैं लोग, काश इक पल अपनी मर्ज़ी से भी ज... Read more

मुक्तक

"इस समय मैं ज्योति को विस्तार देने में लगी हूँ, भावों को मैं गीत का आकार देने में लगी हूँ, यह समय अंधियार के अवसान का है, यह समझकर... Read more

मुक्तक

"कभी है प्यार पल भर में कभी है वार पल भर में, बदल जाती है बैलेट से यहाँ सरकार पल भर में, यहाँ पर ईद हो दीपावली हो या कि हो क्रिस्म... Read more

मुक्तक

"याद मेरी , गुलशनों की , दास्ताँ बन जाएगी, कोई इक डाली ही, मेरा आशियाँ बन जाएगी, फ़ूल भी, सपने भी इसमें, आस भी, अहसास भी, मेरी खु... Read more

मुक्तक

" जलाये दिल में तेरी याद का, लोबान रखते हैं दर्द में भी अधरों पर मधुर मुस्कान रखते हैं उसी की बात होती है, उसी को पूजती दुनिया जो... Read more

मुक्तक

"काम से अपने सभी को प्यार होना चाहिये चाहतों का भी कभी इज़हार होना चाहिये यूँ बढा कर हाथ कोई फूल को तोड़े नहीं जो सुरक्षा कर सक... Read more

मुक्तक

"मौन थी मेरी कलम उसको रवानी दे गये, जाते-जाते मुस्करा कर इक निशानी दे गये, जिनके आने से बढ़ी थीं रौनकें चारों तरफ, देश के खातिर व... Read more

मुक्तक

" भारत को आहत करके आग लगा कर चले गये, मेरे घर में घुसकर वो दहशत फैला कर चले गये, हम उलझे रह गये अपनी ही आँगन की दीवारों में, वो ब... Read more

मुक्तक

"अब निकल पड़े मैदाने जंग में हर कोई अभिमानी, हम गद्दारों को दिखाला देंगे ताकत हिंदुस्तानी, दहल उठे दुश्मन का सीना,ऐसा सबक सीखा दें... Read more

मुक्तक

“औरों को अपने शब्द से पहचान बेहतर चाहिए, कविताओं में उन्हें क़ब्रिस्तान बेहतर चाहिए, मेरी रचना है नही मोहताज़ वाह वाही कि, मुझको त... Read more

मुक्तक

हैं दास्ताँ निराळी, दुनिया की दास्ताँ में, यदि शँख में है जादू, तो रंग हैं अजाँ में नादान हैं वो यारों जो जानते नहीं हैं, मेरे वत... Read more

मुक्तक

" आशियाँ तुम भी बुनो बिजली के तेवर के लिए, जिस तरह हमने चुना, अपना कफ़न सर के लिए, आईना बनकर खड़े हो जाएंगे हम सामने, वो फिर नहीं... Read more

मुक्तक

"माँ भारती के लाल का कमाल देखिए, आसमां से फेंका दुश्मनों पे जाल देखिए, बैठे हैं पड़ोसी अब तो तिलमिलाए से, अब मुल्क में मचा है क्या... Read more

मुक्तक

वो संघर्ष की भट्टी में सौ -सौ बार दहता है तब कहीं जाकर के वो इन्साँ शेर बनता है, तू है गीदड़ बात पर तेरी करे विश्वास क्या ? तू कभ... Read more

मुक्तक

"खेलता है खेल बेहतर यार वो जज़बात का, काफिला है साथ उसके झूठ की बारात का, बात ये मालूम उसको कौन जीता कौन हारा, फैसला करता जुबानी ... Read more

मुक्तक

" गद्दारों की हर बात वही है उनकी तो औकात वही है मज़हब कितने ही बदलें पर बेइमानों की जात वही है " Read more

मुक्तक

"नहीं घर की हिफाजत में कोई सियार रखेंगे, नही बुजदिल कोई, हम शेर चौकीदार रखेंगे, यूहीं देश में बेईमान को तुम सर पटकने दो, करे भा... Read more

मुक्तक

रो-रो पाक अब हिंदुस्तां को याद करता है, गंध-ऐ-बारूद अब तक वहाँ के हर घास में है, वो भी मुर्दों में है शामिल सुना आज ये हमने शहंश... Read more

मुक्तक

पहले शख्श कोई और था, यह शख्श दूसरा है, तभी खाक में गिरके मिला तू टूटकर बिखरा है, नक़ाब तेरा हट गया , कोई क्यूँ भरोसा अब करे पतवा... Read more

मुक्तक

" रौशन जुगनूओं से मेरी तो हर रात होती है, तन्हा आस्मां की धरती से कुछ बात होती है, कभी भी मेघ रुकते है नहीं बंजर जमीन पर दोस्त स... Read more

मुक्तक

" रिश्ते जुड़ा है मेरा अपनी ज़मीन से, हम जो कहेंगे बात कहेंगे यक़ीन से, रक्खा था मैनें जिसको कभी घर में पालकर, निकला है साँप बन के... Read more

मुक्तक

कमजोर यूँ ही उम्र भर टेकता रह जाएगा, व्यूह अभिमन्यु अकेला भेदता रह जाएगा, क्या लुटती रहेगी बेटियों की असमतें यूं ही सदा कब तलक इक... Read more

मुक्तक

बैठे -बैठे सबूत मांगना आसान है, कभी कुछ करके देखो गद्दारों.... " नश्तर हैं ये सिर्फ ज़ुबाँ के वार नही तलवारों के, हाल कहां मालूम... Read more

मुक्तक

अब नहीं तुलसी कबीरा ना यहाँ रसखान है, भेड़िये की खाल को ओढ़े हुए इंसान हैं, शूल बिकते हैं यहाँ अब फूल की दूकान पर, धूल की परतों म... Read more
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