मुक्तक

विडम्बना

सावन के संगीत गये खो, कहाँ दिखे अब सावन। सावन की वह बात पुरातन, जो दिखता मनभावन। कॉल विडीयों युग मे गर जो , हुये पिया पर... Read more

मुक्तक

१. इश्क में तो हम खुद ही गिरते संभलते दरिया पार कर लेंगे तुम कहो साथी, क्या इंकलाब में मेरा तुम सब साथ दोगे ? जो साथ हो तुम तो ... Read more

मुक्तक

१. जीत हार की सीमा से परे, दोस्ती अपनी निराली है मैं थोड़ी अख्खड सी हूँ पुर्दिल, तू तो थोड़ा बबाली है ! ...सिद्धार्थ २. सुनो न... Read more

मुक्तक

मुस्कुराना और चहकते रहना दिल की गुबार को न आँखों से बहने देना इश्क का ये भी मुख़्तसर सा अन्दाज है न लब पे आहें ठहरे,न उतरे आँखो... Read more

मुक्तक

१. कहा था आओगे तुम मुलाकात के लिए मैंने दाँतों में दबा रखा था रात बस उसी एक छोटी सी बात के लिए ! ...सिद्धार्थ २. शिकायत क... Read more

मुक्तक

डोर उम्मीदों की छूटी हर मेहनत बेकार हुई, मेरे जीवन की पीड़ा अब दोधारी तलवार हुई, मुद्दत से ख़ामोश थे लब सन्नाटा था ज़हन में पर ... Read more

मुक्तक

मुख़्तसर सी बस एक बात है, दिल के जबां पे जो तेरा प्यार है। मरने नही देता, जीने नही देता जुदाई में भी तन्हा होने नही देता... Read more

मुक्तक

कभी कभी लगता है कह दूँ पुर्दिल, समय लगेगा जाने में कुछ सांसे अब भी अटकी हुई है, जीवन के खाली खाने में। कभी-कभी दिल कहता है कि,... Read more

मुक्तक

मुख़्तसर सी एक बस बात है, दिल में लिए हैं प्यार हम ख़्वाहिस है तू मेरी, दिल से किया यार तेरा इंतख़ाब हम। अब ख्वाब में भी करते हैं... Read more

मुक्तक

मुख़्तसर सा एक ख़ाब है हांथो में तेरे मेरा हाँथ है दिल धड़कता है मेरा और ख्वाहिशें भी बेशुमार है। सुकून मिल जायेगा दिल-ए-बेकरार क... Read more

मुक्तक

१. जब तक चमन में तुम रहोगे प्यार खिला रहेगा दिल के बाग़-बग़ीचे में मेरी भी कुछ सांसे लेकर जीना प्यार ज़िंदा रहे सब के दिल के दर... Read more

मुक्तक

हमने कब कहा...? फासला पे रहो...? फैसला भी तुम्हारा फासला भी तुम्हारा हमने तो बस इतना चाहा... जहां भी रहो हौसलों से रहो... .... Read more

मुक्तक

१. वो डूब रहा था जाने कितनी हसरतें लेकर हम तैरना उसको सीखा भी न पाए, कोई नही... कल फिर कोशिस करेंगे अपनी अना देकर ! ...सिद्ध... Read more

मुक्तक

तुम कभी तो आओगे सबको छोड़कर। रस्मों की जंज़ीर से ख़ुद को तोड़कर। हमको मिल जाएँगीं कभी तो मंज़िलें- दर्द की राहों से रुख़ अपना मोड... Read more

मुक्तक

तुम कभी तो आओगे सबको छोड़कर। रस्मों की जंज़ीर से ख़ुद को तोड़कर। हमको मिल जाएँगीं कभी तो मंज़िलें- दर्द की राहों से रुख़ अपना मोड... Read more

बात

दिल जो बोलता है, वही बात लिखते हैं । चल रहा है जो आजकल वही हालात लिखते हैं । कवि लेखक वक्ता प्रवक्ता क्यों कहते हो मुझे । मन मे... Read more

मुक्तक

तुम साथ न चल पाए दूर तक, कोई नही हम अकेले भी तो न हुए... मुझमे रहोगे तुम पुर्दिल जिंदगी भर के लिए ! ...सिद्धार्थ २. और क्या थ... Read more

मुक्तक

मुहब्बत रेजगारी है क्या, जो खर्च हो जाय मुहब्बत तो रुह में बसी खुशी है जो जितनी खर्च हो सूद उतना ही बढ़ता जाय ! ...पुर्दिल २. ... Read more

मुक्तक

मैं उसे खुद में मरने नही दूंगी वो मुझे खुद में जीने नही देगा ! ...सिद्धार्थ 2. कुछ जबाब आये तो हैं जानिब से उनके पर जबाब भी स... Read more

मुक्तक

१. तुम अब दीवार पे ही टांग दो, तसवीर नही तकदीर मेरी तुम्हारी चालाकियों ने नंगा किया है बदन की तहरीर मेरी ! ...सिद्धार्थ २. न ... Read more

मुक्तक

१. बेहिसों की महफ़िल में लाश मेरी पड़ी रही कागा वो तंगदिल न था सड़न से बचाने को ! ...सिद्धार्थ कई जमाने हुए तू बन याद, दिल के दया... Read more

मुक्तक

1. तू और तेरी ये मुस्कान, समंदर सी लगती है हमें नदी होकर तुझ में हर बार ही समा जाती हूँ मैं बेटियां कहीं भी चहके बस अपनी सी लगत... Read more

मुक्तक

१. मैंने, ख़्याबों को कभी अलबिदा कहा ही नही क्यूँ कहूँ आँखे हैं, हक है उसका / ये अलग बात... कुछ पुरे हुए कुछ टूट कर ब... Read more

मुक्तक

१. दिल मेरा दिल से बफादार था थोड़ा दूसरों के दुखों से बेज़ार था कश्मकश में जो कट रही थी जिंदगी बस इस लिए ख़ुद से ख़ुद का गद्दार ... Read more

मुक्तक

वो इश्क को भी बीमार कर देगा जो हसरतों के नक़्शे खींचा करता है तुम ख़्वाबों से भरा दिल लेकर दूर रहो दिल फ़रियादी होकर लाचार करता... Read more

मुक्तक

न देना दोस्ती में दाँव, रिश्ता टूट जाता है, यही देखा गया, अच्छे से अच्छा छूट जाता है, किसी का दिल हुआ या आइना रखना हिफाज़त से, कह... Read more

अरे आईने हमसे नफ़रत कर

अरे आईने हमसे नफ़रत कर मगर दिल से कर अपना तो रोज देखते है चेहरा अब अपना दिखा चल ।। मधुप बैरागी इतनी ख़ामोशी औ... Read more

मुक्तक

१. हमने लिबास समझ कर तुम्हें पहना ही नही था कफ़न थे हमारे रूह का, वो भी तुम तो नोच चले ! ...पुर्दिल *** मेरी चाहत की स... Read more

मुक्तक

१. तूने पलट कर एक नजर देखा ही नही, बैठी थी मैं किस आस में तू गुजर गया हवा बन कर, अब दिल मेरा खौफ़ के आगोश में है ! ...पुर्दिल ... Read more

मुक्तक

१. तुम तड़पो हमें हरगिज नही मंजूर मगर तुम्हें तड़प का पता कैसे चले ! ...पुर्दिल २. तुम्हारी यादों ने बेचैनियों के सिवा मु... Read more

मुक्तक

जब भी वो सफ़हा कोई नया सा पलटता होगा मेरे जानिब से यादों के साये में घिर जाता होगा। तमाम मसरूफ़ियतों को खुद से करके दरकिनार ... Read more

हम रोक न सके

लव हिलते रहे बात हो न सकी अश्क गिरते रहे वो समेट न सके बस यहीं होती है खत्म कहानी जिन्दगी की , वो जाते रहे हम रोक न सक... Read more

स्वतंत्रता दिवस की बधाई

💝💝💝💝💝💝💝💝💝💝💝💝💝💝 सजा हुआ दुल्हन के जैसा, प्यारा हिंदुस्तान हमारा गूँज रहा है जल थल नभ में, भारत माँ की जय का नारा आज़ादी पाई थी हम... Read more

भारत मेरा प्यारा है।

भारत मेरा प्यारा है सब देशो से न्यारा है। हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई सब में भाईचारा है। यहाँ पर बहती गंगा यमुना की निर्मल धारा है। ... Read more

मुक्तक

तुम पास नहीं हो लेक़िन तन्हा रात वही है। चाहत है वही यादों की बरसात वही है। हर ख़ुशी भी दूर है मेरे आशियाने से- ख़ामोशी के पल में... Read more

मुक्तक

साहेब की मन की बात ; हम जान क्या लेंगे किसी का, अपना हाँथ गंदा क्यूँ कर करना है पूज देते हैं हथियारों को नौजवानों को अभी देश भक्त... Read more

मुक्तक

१. भेजा था एक पैगाम हवा के पर पे तुम्हे मिली थी क्या ...? पूछना था... खुश रहते हो क्या...? मेरे शब्दों से रिश्ता बनाकर... ...स... Read more

मुक्तक

रंगती रही वो गैरों की दीवारों को निस दिन औलाद के आँसू कर के नजरअंदाज पलछिन बेरंग ही रही वो देहारी न मिली जिस दिन ! ...सिद्धार्थ Read more

मित्रता दिवस

चहुं ओर प्रेषित मित्र-दिवस की शुभकामनाएं। किंतु क्या सच्चा मित्र कौन यह पहचान पाए। मित्र कौन सच्चा आज यह जानिए। सच्चे मित्र की पह... Read more

ईद मुबारक...

तुमको सखे अब मैं क्या ही बोलूं , शीशा भी अब सच कहने से डरता है। तुम जब से दूर गए हो चाँद गगन में थकता है तुम जिस दर्पण क... Read more

मुक्तक

तुम्हे पता है क्या,...? क्या ढूंढती हूँ मै,...? बस एक अदना सा वकील जो दिल के दरबार में सुनवाई करवा दे यार से इश्क की गवाही दिल... Read more

मुक्तक

वो शब्द कहाँ से लाऊँ, तेरी प्रतिछाया जिसे बनाऊँ एक माँ की जाई हम, आ तेरी परछाईं मैं बन जाऊँ। तू उर में ही मेरे रहती है, कहां कह... Read more

मुक्तक

1. हम ने कई बार पलट कर देखा था उसे दिल ने यूँ ही सूरज कह दिया था जिसे ! / तेरी तलाश में मैं कहीं भी नहीं हूँ सखे मैं हर जगह ह... Read more

मुक्तक

ख़्वाहिशों के धार पे मचलती रही जिंदगी... / सुबह से शाम ... साम से फिर सुबह में ... बदलती रही जिन्दी... *** Read more

मुक्तक

सारे दिन की थकन मैं तुझ पे ही उतार आती हूँ, तेरे खत में पलते शब्द को जब जरा सा निहार आती हूँ जब भी तेरी याद, याद बन सताती मुझ... Read more

मुक्तक

१. कुछ कहना था तुम से, कहो कह दूँ क्या ? तुम यूँ जो रूठे हो, गुदगुदी कर दूँ क्या ? ...सिद्धार्थ २. जरा सा मुस्कुराने के ... Read more

मुक्तक

बेवज़ह ही मन में कुछ सपनें करबट बदल रहें हैं हँसुआ और हथौड़े उठाने को हांथ मचल रहे हैं ! ... सिद्धार्थ *** ये जो इंक़लाबी रफ़्तार... Read more

मुक्तक

१. मैं अजीब कुछ अलग ही किस्सा हूँ तू मुझ में है और मैं तेरा हिस्सा हूँ ! ...सिद्धार्थ २. तमाम रात कुछ ख़्वाब चुनते रहे सुबह ... Read more

मुक्तक

एक चुटकी नमक रखो दिल के ज़ुबान पे ख़ुशियाँ साथ चलेंगी जिंदगी की ढलान पे ! *** कभी अखबारों में सच की सियाही से शब्द फूटते थे आज प... Read more

मुक्तक

किसी के हिस्से महल आया किसी के हिस्से आई झोपड़ी मुझे फुटपाथ मिला जागीर समझ मार दी हमने चौकड़ी । ...सिद्धार्थ २. गिद्धों ने पर फै... Read more