मुक्तक

जागो हे इंसान....."

जुबां ही जुबां है सुनता कोई क्यों नहीं। आस्था का अपार भंडार तो है, शांत मनोवृति की भी दरकार है।। Read more

बेरोजगारों का दर्द

न समझे दर्द कोई भी कभी बेरोजगारों का। मिले उनको नहीं यारों, कहीं मौसम बहारों का। व्यथा क्या है सबब क्या है न कोई पूछने आता... Read more

उमर

इतनी भी उमर मत दे मौला जब खुद ही नहीं अपने भी मरने की दुआ करने लगे Read more

मुक्तक

जिन को माना अपना मैने सपना बन कर रह गया कहना पाया में जन्मों तक वो पल भर में कह गया Read more

मुक्तक

रूह कांपे दिल मचलता एक तड़प सीने में है भूखे प्यासे दर भटकना क्या मजा जीने में है आंख से छलके ना आंसू गम है साया घना जब नशा चढ़त... Read more

मुक्तक

तुम निगाहों से अपनी ना कातिल करो रोज_हमको_सताने_से_क्या फायदा पास_आके_सनम_तुम_लगालो_गले रोज_दूरी_बढ़ाने_ से_ क्या_ फायदा Read more

मुक्तक

मेरी जिंदगी में तेरा साथ गर हो मै कांटो पे चलके खुशी ढूंढ लूंगा उदासी के पल में पलके भिगोकर मेरे हर लवो पे हंसी ढूंढ लूंगा Read more

मुक्तक

अभी तो बात ही की थी अभी सब राज बाकी है मुलाकातों के वो प्यारे अभी सब राज बाकी है तू ही है जान _तू जन्नत _तू ही है जिंदगी _मेरी ते... Read more

जिन्दगी

जिन्दगी बड़ी अजीब किताब है, जितना समझो कम है, हर पन्ना अपना लगता है जो न समझ आये वो फालतू हिस्सा लगता है अगर न पढ़ें तो बेगाना ... Read more

डर डर, निडर निडर ।

डर डर, निडर निडर । डगर डगर, डर डर ।। जब डर डर, डगर डगर । चिंताएं, निडर निडर ।। कर कर घर, डर पर डर l डगर डगर, अगर मगर ll ... Read more

शिकवा

दर्दो गम का शिकवा नहीं करते यूँ जिन्दगी को रुसवा नहीं करते चाहे कितने भी दरिया समा जायें समन्दर कभी भी भरा नहीं करते Read more

क्या करे

दिल में दर्दो गम का मेला हो तो क्या करे इस हाल में गर कोई अकेला हो तो क्या करे लोग दिल से खेले तो खामोश ही रहा 'अर्श' जब कोई जज... Read more

हैसियत

किसी की हैसियत को देख गर तुम प्यार करते हो। मुझे लगता कि जैसे अब, ये तुम व्यापार करते हो। बिना मंजिल की राहों में, भटकते हो किधर ब... Read more

दलील

तुम जो उनपे उँगली उठाने पे आ जाओगे तो फिर सियासत के निशाने पे आ जाओगे हमने तो सिर्फ़ सच्चाई की दलील माँगी थी क्या पता था कि तु... Read more

पैंतरे

कहना सही तुम्हारा, बिल्कुल, वही हमारा कहना है। किन्तु दिखावे की दुनियाँ में, अलग थलग भी रहना है। हर्ज ही क्या जो ऐसा बोलो, उल्लू भ... Read more

बेमौसम के मुसाफिर.......!

आज सर्द इतना बेदर्द हो चला गर्मी का वो हमदर्द हो चला।। मुसाफिर थका है यूं कि क्या बोले ना धूप भा रहा ना ही उसे छांव भा रहा।।।।। Read more

इश्क़–दोस्ती (पाँच बन्द)

बन्द एक— चार दिन ही, चाँदनी है, इस जहां में, २ १ २ २, २ १ २ २, २ १ २ २ हर किसी ने, ये कहा है, मानते हैं। २ १ २ २, २ १ २ २, २ ... Read more

छटा भू की निराली है

फुहारे पड़ रहे रिमझिम, घटा ये छायी काली है। लिपटकर जल की बूंदों से,झुकी पेड़ों की डाली है। उमस से है मिली राहत, कृषक भी गा रहे... Read more

नहीं माँगती

सब दुःख दर्द बाँट लेती है माँ-बाप के मगर बेटी कभी जायदाद में हिस्सा नहीं माँगती वक़्त अगर दो तो ग़ैरों से भी हो जाती है मोहब्ब... Read more

हो सके तो।

दिल खोलकर कीजियेगा मेरी आलोचना, बेशक चाहे मुझको कोस लीजियेगा, पर ऐसा भी क्या किया है मैंने, हो सके तो एक बार ये भी सोच लीजियेगा,... Read more

एक दफा उसे भी इश्क होना चाहिए....

एक दफा उसे भी इश्क होना चाहिए, जिसे दिल के बदले सिर्फ खिलौना चाहिए. मुझसे बिछड़कर भी मुस्कुराते है वो, जिन्हे मुझसे लिपटकर रोना च... Read more

मुक्तक

बरसात का मौसम लुभावन है मौसम का राजा तो सावन है यहां बुद्ध, महावीर, कबीर हुए भारत की धरती ही पावन है। नूरफातिमा खातून "नूरी" ... Read more

बेवफ़ाई (छह बन्द)

बन्द एक— न पाट पाई, तेरी उल्फ़त १ २ १ २ २, २ २ २ २ वफ़ा की होती, ये गहरी खाई १ २ २ २ २, १ २ २ २ २ न कर सकेगी, वफ़ा को ज़िन... Read more

" अजनबी लोग "

बड़ी काबलिय तारीफ है उन अजनबी लोगों की , जो अपने नहीं है फिर भी बहुत कुछ दे जाते हैं । सफर में मिलते है और सफर में ही जुदा हो जाते... Read more

" ढोंग "

अपने मतलब के लिए अपना बनने का ढोंग करने वाले ही , दर्द के अंधकार में डूबा देते हैं , वरन गौरों का क्या वो तो, गलती से भी टकरा कर ... Read more

सच कड़वा ही लगेगा

1- झूठ तो हलवा ही लगेगा मगर सच कड़वा ही लगेगा । मेरी बात पे सच्चों को अच्छा मगर झूठों को बुरा ही लगेगा । बात घुमा फिरा के कह... Read more

" ईश्वर "

जो कल की चिंता में ईश्वर से गिले – शिकवे गा कर उसकी मुरत को पत्थर में दर्शा रहें हैं , जिसने सच में है ईश्वर को महसूस किया है वो कर... Read more

समझदारी

1- नफ़रत की तरफ़दारी ठीक नहीं मज़हब की ठेकेदारी ठीक नहीं खुद को सबसे बेहतर समझते हो आपकी यह समझदारी ठीक नहीं। 2- यहाँ कब ... Read more

अशआर

1- कड़ी धूप से पाला पड़ गया रंग चेहरे का काला पड़ गया एक ऐसी बबा फैली अचानक ज़माने भर में ताला पड़ गया। 2- यह गलफ़हमियो... Read more

" तमाशा "

वक्त का कैसा तकाजा है , इश्क बन गया बखेड़ा है । ना समझी की बेला है , जिंदगी बन गई तमाशा है ।। - ज्योति Read more

मुक्तक

रित से प्रित करो कबहो ना, फूल खिलन मुरझाए जाएं, अगर अंधा प्रेम जो करत फूल से, बेचारा गंवा जाएं जिवन से, रित से प्रित करो कबहो... Read more

मुक्तक

दो दिल के दरमियान ये नफरत ही मिलाते, मजहब के नाम पर हमें आपस में लड़ाते। मक्कार बड़े हैं सफेदपोश वतन के, ये जब भी चाहें बस्तियों मे... Read more

खुशी फिर लौट आएगी

सुनहरे ख़्वाब से केवल, नहीं बन बात पाएगी। करो जो मेहनत मन से, तो किस्मत जाग जाएगी। कभी मायूस मत होना, बदलते जिंदगी ... Read more

सुकून अभी कहां.......!

जिस्म का दरिया है, सांसों का है समंदर, जिंदगी कभी आसमान पर है तो कभी है गुफा के अंदर। Read more

मुक्तक

जो होगा अच्छा ही होगा कब से सुना हम सब ने कॉल ने शिकंजा कसा दर्द गहरा हुआ सब पर एक एक कर के रुखसत सा होने लगा इंसान एक कोरोना ... Read more

मुक्तक

मंजिल भी अपनी है मिल ही जायेगी कोशिश करेंगे तो हांसिल हो ही जायेगी रात के बाद सवेरा तो आना लाजमी ही है फिर सोचने के बाद कैसे न... Read more

मुक्तक

आंसुओं की कीमत का अंदाज न होगा जिस के बहे तुम्हे वो एहसास न होगा बेखबर बन गए सब जानकार भी रात भर कितने बहे सोचा भी न होगा ... Read more

मुक्तक

जीवन में कदम भटक से गए कुछ जागते हुए सोते ही रह गए दस्तक तो दी थी समय ने सब को पर सुनकर भी अनजान से रह गए अजीत कुमार तलवा... Read more

मधुमास पतझर हो नहीं सकता

बा'जारें इश्क का वीरान मंजर हो नही सकता मुहब्बत से तराशा बुत ये पत्थर हो नही सकता कभी भी हुश्न धोखा इश्क को देता नही लोगो गुलों क... Read more

सितमगर हो नहीं सकता

यकीं है ये कभी दरिया समंदर हो नही सकता मुहब्बत से भरा जो दिल वो' पत्थर हो नही सकता जमाना कह रहा कातिल मुहब्बत का तुझे सँगदिल मगर ... Read more

दर्द

बना कर अश्क ऑखो से बहाया है सदा हमनें छुपा कर गीत मे किस्सा सुनाया है सदा हमनें न पूँछो दर्द के अहसान कितने है शरद तुझ पर तुम्हार... Read more

किसानों को..

फसल ख्वाबों की आँखों में, कभी बोने नहीं देते। किसी उम्मीद के शिशु को, युवा होने नहीं देते। कभी बारिश, कभी सूखा, कभी आँधी, कभी ओले,... Read more

रिश्ते

गर है दौलत तो चमकते हैं जहां मे रिश्ते दौरे' गुरबत मे बिखरते हैं जहां मे रिश्ते वक्त के साथ ये दुनिया भी बदलती रंगत साल जैसे ही ... Read more

मानवता

किसी मंदिर के बाहर भूख से सिसकी है मानवता मज़ारों पर चढ़ीं चद्दर मगर ठिठुरी है मानवता करोड़ो का दिया चंदा चली जब बात मजहब की गरीबी म... Read more

विश्वास बेच देते हैं

गरीबों के छप्पर की घास बेच देते हैं वो अपनेपन का अहसास बेच देते हैं खनक सिक्कों की ऐसे भा गई यहाँ सबको कि पैसों के खातिर विश्वास ... Read more

मुहब्बत कौन करता है ?

गमे-उल्फत की यूँं हँस कर शिकायत कौन करता है लवों को सी लिया जाता बगावत कौन करता है अजब दस्तूर है उल्फत की राहों का जमाने में लगान... Read more

दिल के अंदर छोड़ जायेंगे

वफा के दौर का गुजरा वो मंजर छोड़ जायेंगे कि आंखो मे ये अश्कों का समंदर छोड़ जायेंगे भुलाने की हमें कोशिश हज़ारों बार कर लेना यकीनन अ... Read more

अश्क से भीगी वो आंखें छोड़ जाऊंगा

इश्क की सारी सलाखें तोड़ जाऊंगा और रुख तेरी गली से मोड़ जाऊंगा था नहीं अहसास मेरे दर्द का जिनको अश्क से भीगी वो आखें छोड़ जाऊंगा ... Read more

" वो दिन "

वो दिन भी क्या दिन थे , आंखों में काजल और होंठों पर लिपस्टिक कम थे , मजाक में भी किसी का दिल दुखाने से डरते हम थे , एक रूपए के चू... Read more

छलने लगें है लोग

मासूमियत का ढोंग कर ठगने लगें हैं लोग अब इश्क तेरे नाम से डरने लगें हैं लोग बाजार मे बिकती हुईं इक चीज अब है प्यार लेकर वफा का ना... Read more