मुक्तक

कसक

महक मीठी सुनहरी रेत की मैं छोड़ आया हूँ कसक काचर ओ मीठे बेर की मै छोड़ आया हूँ जहाँ गूंजे कभी मरवण ओ मूमल के मधुर किस्से धर... Read more

एकता कायम रहे...पाँच मुक्तक

एकता कायम रहे...पाँच मुक्तक (मापनी- 221 2121 1221 212) ●●●●●●●●●●●●●●● 1- अपनों से जो लड़ोगे बिखर जाओगे सुनो जलने लगेंगे गाँव कि... Read more

मुक्तक

१. जब हम न हों तो हमें ख़ुशी में नही बेचैनियों में ढूंढा जाए मेरे लफ़्ज़ों को सलीके से निचोड़ा जाए उसी में मिलूंगी कहीं और न मुझक... Read more

चांद

चांदनी रात है चांद ऊपर नहीं ।। ढूंढो ढूंढो सखी होगा भीतर कहीं ।। छुपके आया मगर है ये सबको खबर हो परदेशी भला उसका पीहर यहीं ।। Read more

दो मुक्तक

जाग जाओ अब जाग भी जाओ, दूर करो सब अंधयारी l भारतमाता बिलख रही अब, बन जाओ तुम चिंगारी ll पुरखो की तुम न कटबाओ मत लजबाओ महतार... Read more

हार न मानो,

सदा सफलता चरण चूमती, हार न मानो, सम्बन्धों को जीवन में व्योपार न मानो. चरैवेति ही जीवन का सिध्दान्त सदा से, कठिन परिश्रम को जीवन ... Read more

मुक्तक

१. बस चाहतें ज़िंदा रहे जिंदगी की सूर्यास्त होने तक दिल का क्या है वो तो आज धड़का कल भूल गया। ...सिद्धार्थ २. किसी को परवाह नह... Read more

मुक्तक

है बहुत घना अंधेरा, शब भी निशब्द है मगर जिद पे जुगनू आजाये तो अंधेरा कहां टिक पायेगा। रात की औकात क्या अंधेरे में भी वो बात कहां... Read more

प्यारे दद्दा जी

आज के दद्दा सुन भैया, देखो का का है कर रये l मूंछो पे जे ताब है दे रये, संगफंटीआ नई धर रये ll व्याह बराते जा रये तो , खुल ... Read more

चाँद मेरी चाँदनी को निहारता रहा --एक मुक्तक --आर के रस्तोगी

चाँद मेरी चाँदनी को निहारता रहा | मै भी खड़ा खड़ा उसे निहारता रहा || मेरी चाँदनी को कोई नजर न लग जाये | उसको नजर का टीका लगाता रहा ... Read more

सत्य क्या है,

सत्य क्या है, झूठ का पृष्ठावरण, कर्म है जब स्वार्थ का ही आचरण. लोभ ने अपना बढाया कद यहाँ, क्रोध का क्या कर सकेंगे संवरण. ... Read more

मुक्तक

१. मैं कुछ रोज उस से जाके उलझ जाती हूँ सुलझाने की ज़िद में और उलझ जाती हूँ। ...सिद्धार्थ २. बहस में जाओगे तो हार ही जाओगे इश्... Read more

मुक्तक

१. कुछ और नही बस इतनी खराबी है खुद को मिटा कर भी हसीन दुनियां बनानी है तुम्हे गर प्यार से हो प्यार तो तुम्हें भी साथ लाने की मे... Read more

मुक्तक

१. हम भारत के नीच लोग नीचे गिरते ही जाएंगे किसान न रहे तो क्या हम एक दूजे को ही खाएंगे ??? ... सिद्धार्थ २. चल सखी हम घास काट... Read more

मुक्तक

१. आईने ने हंस कर कहा उम्र ने तो बस अपना काम किया देह के कोरे किताब पर कुछ लकीरों को तेरे नाम किया ! ...सिद्धार्थ २. मेरा चाक-ए... Read more

माई

जिंदगी की सिलेट पर कुछ सफ़हे मिटने को है कहां जाके रोऊँ मेरा पहला प्यार बिछड़ने को है। सबसे हसीन सबसे जहीन है वो, नौ महीने बड़ा ह... Read more

परिचय कलम का

कविता नही लिखता मे हँसने हँसाने की, न दुश्मन की न दुश्मन को उकसाने की l कविता लिखता हूँ मे सब को राह दिखाने की, क्योकि जरूर है... Read more

गुनहगार कौन?

सबूती आधार पर बेशक संज्ञान ले। हर चीज़ का सबूत होता है जान ले। बेगुनाही का सबूत नही पर पास में। तो क्या किसी को गुनहगार मान ले। ... Read more

मुक्तक

तेरी आरजू मरने नहीं देती मेरा गम जीने नहीं देता Read more

मुक्तक

हम तो वनडे खेलते हैं जिंदगी एवरी डे खेल रही है Read more

मुक्तक

१. कुछ भूख से रोते बच्चे देखे, देखे चाँद गगन में सादा सा था पूनम का चाँद मगर वो दिखे मुझे बस आधा सा । ...सिद्धार्थ २. गुरुर ... Read more

एक विडम्बना

शरद पूर्णिमा के चाँद ने इठला कर कहा : " बन रही हर घर खीर " मैंने कहा : " उस झोपड़ी में भी देख चाँद , सौ रहे ... Read more

एक विचार

यातायात नियमों का पालन करते हुए सड़क पर चलें सुरक्षित रहें, दूसरों की जिंदगी भी सुरक्षित करें *विश्व ट्रामा (चोट) दिवस* Read more

शेर

मुझे देख कर मुस्करा रही है ए जिंदगी बता सब ठीक तो है ना Read more

मेरी आँखो

मेरी आँखो से सनम, तेरी आँख गर मिले l दो जिस्म दो दिलो के, मन मे चमन खिले Read more

याद

दिखा नाम कोई अचानक नज़र को पुराने दिनों की झलक दे गया याद आया वो चेहरा थे भूले जिसे सोए अरमान कोई जगाता गया। Read more

शेर

बड़ी सीधी सी वज़ह है, मेरे काफिर होने की मस्जिद से पहले तेरा घर पड़ता था Read more

तुझ मे डूब जाऊँ ऐसा ठान न ले

ऐ दिल की रानी मेरी जान न ले। जल मे उतरने मुझे तान न ले।। तैरना तो जल में मैं जानता हूँ; तुझ पे डूब जाऊं ऐसा ठान न ले।। Read more

आँखों में खुमार

आँखों में खुमार या प्यार है दिल में जज्बात यार प्यार है कहो है कौन-सी सरहद यार दिलआईना दिलपार यार है।। ... Read more

इंकलाब

बंट रहे थे पर्चे सब उसकी मर्ज़ी है बस रब को ऐसे ही माना जाये। हम गिर पड़े हैं चलते-चलते चोट खाकर क्या इसको भी उसकी रज़ा ही जाना... Read more

मुक्तक

बंट रहे थे पर्चे जो होता है सब उसकी मर्ज़ी है बिना फेर बदल ,इसे ऐसे ही बस माना जाये हम गिर पड़े हैं चलते-चलते चोट खाकर क्या इस... Read more

मुक्तक

जो कभी झुके नही हैं, वो झुकना सीखा रहे हैं, मंजिलों से पहले बचपन को रुकना सीख रहे हैं। वो दिन ए इलाही का लेते हैं जोर से नाम ... Read more

परोपकार

परोपकार हो बस जीवन में, समझूंगा मैं महा दान है, धन दौलत तो नहीं रही है,सबका रक्खा सदा मान है, कवि तो फटे हाल रहता है, केवल भाव व... Read more

मुक्तक

१. ज़िस्म की गली में जिंदगी का सूरज ढल भी जाय शब्दों के आंगन से बिछोड़ा किस तरह हो पाय । मिट जाते हैं बारहा हर नक़्श कदम के शब... Read more

घी मे ऊँगली मुँह मे दांत

चका चक्क है उनके हाथ, घी ऊँगली मुंह मे दाँत l तभी दिखते है औकात बिन पैसा न करते बात, होनी अनहोनी करदे, अनहोनी होनी करदे औ... Read more

मुक्तक

जाति-पाति के भेद की ऐसी है दीवार, इसे तोड़ने में स्वयं प्रेम गया है हार । किन्तु मानूंगा नहीं मेरा ये है विचार , इसे हराने के लिए... Read more

वो परिंदे थे

ये दौर भी मुसलसल जाना ही था । तहरीर नसीबो का निभाना ही था ।। हम दरख़्त से थे इंतजार में फ़क़त । वो परिंदे थे उन्हें जाना ह... Read more

गहरा और नीला समंदर

इस धरती से मिलता वो अम्बर देख। ये गहरा और नीला समंदर देख।। अब भी कुछ समझना बाकी रहा अगर। खुद से मिल आईने के अंदर ... Read more

मुक्तक

होश उड़ जाएंगे मेरे दिल का मंजर देख के, हैरान होंगे आप आँखों में समंदर देख के, हर हाल में जलने की जिद्द ठान ली ज्योति ने तो आ... Read more

मुक्त

१. अब कोई मेरी सारी सुबहों में सूर्य ग्रहण लगा दो मगर सारी बेटियों के मन आंगन में धूप खिलने दो ! ...सिद्धार्थ २. तू नीम नींद ... Read more

मुक्त

१. बिका हुआ कलम क्रांति गीत नही गाता थूक से कभी भी इतिहास नही रचा जाता । ...सिद्धार्थ 2 ख़ता गर कर ही लिया तो सज़ा से क्या डरे... Read more

मानसिक स्वास्थ्य

अच्छा सोचें अच्छा खायें खुश रखें खुश रहें *विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस की शुभकामनाएं * Read more

ज्ञानी मत बन

बहूत सारे कष्ट पायेगा ज्ञानी मत बन। नजारे नही देख पायेगा ध्यानी मत बन। सही मायने में भौंट बनकर जी ले एक दिन सारे सुख ... Read more

मुक्तक

जुस्तुजू उसकी करके भी ख़ाके मुहब्बत ही उड़ाया मैंने दीद की बस आरज़ू ही रही, चैन भी तो गवाया मैंने ! बस एक तेरी दीद की रही आरजू दि... Read more

मुक्तक

१. कुछ गम कुछ खुशियां तेरे दामन में वो टांक गया उम्र था कि एक और साल चुपके से फलाँग गया ! ...सिद्धार्थ २. हम दोनों एक ही माँ... Read more

एक मतला एक शेर

हम तो उड़ते नही उनके पर से। जाने जाते है अपने हुनर से। आजकल जो ये बदला ज़माना। हम निकलते नही है जी घर से। Read more

मुक्तक

हमारी किस्मतों के फ़ैसले वो क्यों करें ? हमारे प्यार जताने के तरीक़े वो तय क्यों करें ? हमारी माँ अभी जिन्दा है, हम गाय को माँ क्... Read more

गुमनाम जिन्दगी

गुमनाम जिन्दगी जीने का भी मजा अलग ही है न दुआ न सलाम अपने में मस्त बंद दरवाजा न साकल न कुंडी Read more

सेवा भाव,बनो कर्मठ

सेवा भाव समर्पण ही बस, मानव की पहिचान है, जिसको है सन्तोष हृदय में, सच में वह धनवान है l यों तो मरते,... Read more

इस बार का दशहरा

देश पर कभी हो नहीं बुराई का पहरा नौनिहाल सीखें राष्ट्रभक्ति का ककहरा किसी के भी हृदय में रहे न रावण ज़िंदा कुछ इस तर... Read more