मुक्तक

मुक्तक

शोसल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी जा रही शोक मनाया जा रहा है.. बस दो दिन का और दिखावा फिर से किया जा रहा है ......... ... Read more

तन्हां नहीं हूँ मैं ...!!

दर्द.. चुभन.. तड़प.. घाव.. मुझे आबाद रखने में इन सबका हाथ है, हाँ ... तन्हां नहीं हूँ मैं , तनहाई साथ है ...!! Read more

मुक्तक

चंचल हुआ नवल भू यौवन प्रिय । पा स्नेहिल स्पर्श आलिंगन प्रिय। रूप रस गंध की सरिता मचली - करने वसंत का अभिवादन प्रिय। -लक्ष्मी... Read more

वैलेंटाइन-डे

वैलेंटाइन-डे *** देशी चमड़ी को विदेशी पहरन से सजाते है, प्रेम नाम पर पार्को होटलो में रंग जमाते है, सरेआम अश्लील फूहड़ता का नंगा न... Read more

बसंत पर मुक्तक

💮💮💮 पात पुराने बिछुड़े डाली- डाली नव पल्लवों ने बिखेरी हरियाली हुई पद आहट ऋतुराज वसंत की कुहू कुहू बोले कोयलिया काली । 💮💮💮 छ... Read more

ईश्वर है

कभी-कभी लगता है वो कुछ करता नही, पर ऐसा नही वो सबकुछ करता है ; कभी ऐसी घटना घटती है कि,... Read more

मुक्तक

बाहर चंदन सा महक रहा, लेकिन अंदर से खारा है। आने जाने की चक्की में, पिसता मानव बेचारा है। बस लगा रहा अपनी धुन में, ... Read more

मुक्तक

"उठाया जब कलम हमने दबे जज़्बात लिख डाले, गुज़रते बेबसी मे जो वही हालात लिख डाले, बहुत हैं दूर खुशियों के ठिकानों मुफलिसी मे अब, त... Read more

मुक्तक

केशरिया वस्त्र पहन, मानो कोई संत आ गया। सकुचाई शकुन्तला, उपवन में दुष्यंत आ गया। मनहारी सकल सृष्टि, मादक सुगंध चहुँ दिश बिखरे - ... Read more

मुक्तक

हे सौम्य रूपा, रूचिर वीणा वादिनी जयति जय माँ। माँ शारदा वागीश्वरी वरदायिनी जयति जय माँ। हे विद्या, कला, बुद्धि प्रदा, तमस हारिनी... Read more

"चाँद"

आजकल चाँद गुनगुनाता नहीं, मखमली सेज बिछाता नहीं, शोर का ज़ोर है वादियों में, रूठी चाँदनी को मनाता नहीं। @निधि... Read more

मुक्तक

सूरज से माँग बैठी उजाले उधार के, अरमान नीचे दब गए कर्तव्य भार के, मुश्क़िल वहीं था मोड़ जहाँ मुड़ न पाए तुम पलटी थी कितनी बार मैं... Read more

कानून

देश का कानून अंधा और बहरा हो गया नेवले और सर्प का संबंध गहरा हो गया कैद हैं खुशियां सभी दौलत की तिजोरी में बेईमानों का वहां पर घो... Read more

मुक्तक

[2/7, 12:14] rajniagrawal60: हवा ने जिस्म की खुशबू भरा संदेश पहुँचाया। अधर पर इश्क का चुंबन लिए पैगाम जब आया। शबनमी प्रीत की सौगात... Read more

मुक्तक

जो फूल ही फूल है बाहर से। वो जख्म ही जख्म है अंदर से। सहमा- सहमा बेगुनाह चिराग - कुछ सितमगर हवाओं के डर से। -लक्ष्मी सिंह Read more

बेटी

बेटी भगवान का वरदान है , बेटी बिन ये जगत वीरान है , जहाँ बेटी का सम्मान ना हो , वो समाज तो बना शमशान है। -वेधा सिंह Read more

मुक्तक

काश मेरा एक भाई होता , दिल में उसके सच्चाई होता , मेरे दिल के हर इक जख्मों का, उसका हर बोल दवाई होता। -वेधा सिंह Read more

मुक्तक

नन्हा मुन्ना मेरा भाई , सबसे प्यारा मेरा भाई, वो करे शरारत प्यारी सी , सबसे भोला मेरा भाई। रक्षा बंधन आएगा , रिश्तों का दिन ... Read more

गुलाब हो तुम

मेरे इन ख्वाबों की गुलाब हो तुम|| मैं खाली बोतल तो शराब हो तुम|| कैसे लिखता मैं शेर इस कलम से| मैं काली श्याही तो किताब हो... Read more

मुक्तक

"याद मेरी , गुलशनों की , दास्ताँ बन जाएगी, कोई इक डाली ही, मेरा आशियाँ बन जाएगी, फ़ूल भी, सपने भी इसमें, आस भी, अहसास भी, मेरी खु... Read more

मुक्तक

हैं दास्ताँ निराळी, दुनिया की दास्ताँ में, यदि शँख में है जादू, तो रंग हैं अजाँ में नादान हैं वो यारों जो जानते नहीं हैं, अपने ... Read more

मुक्तक

यूं मुस्करा हम मिले इतने दिनों के बाद, आएं हैं दिन बहार के इतने दिनों के बाद , ... Read more

मुक्तक

"जब से ज़िंदगी ये ज़िंदगी होने लगी, दिये में इक नई सी रौशनी होने लगी, नई कुछ हसरतें दिल में बसेरा कर रही हैं, बहुत आबाद अब दिल की... Read more

मुक्तक

यूँ सड़क तक छोड़ने भी आपको आते हैं लोग, आपकी निंदा ही करते लौट कर जाते हैं लोग, हर मसीहा को यहाँ सूली पे लटका दिए, और फिर अपने कि... Read more

मुक्तक

नमन मंच विधा - मुक्तक **************************** मात्रा भार - २१ अब हकीकत छुपाने से क्या फायदा। गम को हृदय लगाने से क्या फाय... Read more

मुक्तक

"औरों को अपने शब्द से पहचान बेहतर चाहिए, कविताओं में उन्हें क़ब्रिस्तान बेहतर चाहिए, मेरी रचना है नही मोहताज़ वाह वाही कि, मुझको त... Read more

मुक्तक

जुबाँ से कह न पाऊँगी,समझ लो आँखो की बोली। जरा तुम ध्यान से देखो बनी है तेरी रंगोली। समर्पण है समर्थन है मैं बनूँ हर ... Read more

मुक्तक

जागते आँखों में कोई ख्वाब आया था। आसमाँ से जमीं पर आफताब आया था। महक उठा है मेरे मन का हर इक कोना - लगता है मुझ से मिलने गुलाब... Read more

मुक्तक

तीर खंजर की न अब तलवार की बातें रहें, जिन्दगी में आइये बस प्यार की बातें रहें, तितलियों की बात हो या फिर गुलों की बात हो क्या जरू... Read more

मुक्तक

दर्द दिल में मगर लब पे मुस्कान है हौसलों की हमारे ये पहचान है लाख कोशिश करो आके जाती नहीं याद इक बिन बुलाई सी मेहमान है Read more

मुक्तक

तुझे दिल याद करता है तो नग्‍़मे गुनगुनाती हूँ, जुदाई के पलों की मुश्किलों को यूं ही घटाती हूँ घटायें, धूप, बारिश, फूल, तितली, चां... Read more

मुक्तक

"भूला कर ग़म सभी आओ जरा - सा गुनगुनाते हैं, ख़ुशी में दूसरों की झूम कर हम गीत गाते हैं, कवायद मत करो यारों किसी को भी बदलने की सु... Read more

मुक्तक

" अपनी लगाई आग के शोलों में जल जाते हैं लोग, अब तो अँधेरे में यूं हीं बस रोशनी पाते हैं लोग, काश इक पल अपनी मर्ज़ी से भी ज... Read more

मुक्तक

"इस समय मैं ज्योति को विस्तार देने में लगी हूँ, भावों को मैं गीत का आकार देने में लगी हूँ, यह समय अंधियार के अवसान का है, यह समझकर... Read more

मुक्तक

मुक्तक बुढ़ापे का सहारा जो रहीं ये लाठियाँ देखो दुकानों पर सजी हैं किस तरह ये लाठियाँ देखो बगावत आज तक इनको कभी करते नहीं देखा ... Read more

मुक्तक

खुदाया तूने उसको क्यों बड़ा संगदिल बनाया है। चक्षु को नीला और उसका बदन शीशा बनाया है। मुहबत में ये हसरत थी कि उसको आँखों से छ... Read more

मुक्तक

विधाता ने ये जीवन का बनाया खेल प्यारा है । कोई जीता मुहबत का तो कोई खेल हारा है। ना हो गमगीन ओ बन्देे,खुदा पे अब यकीं रख तू ... Read more

मुक्तक

ये दुनिया की रवायत है काग को बाज़ बतलाना । दान जर्रे सा करना और खुद को कर्ण बतलाना । मेरी सबसे गुज़ारिश है स्वार्थ के मोह से निक... Read more

मुक्तक

मैं जिनके इश्क़ में जिंदा हूँ उनको छोड़ आया हूँ। मैं अपने देश की रक्षा में रिश्ते तोड़ आया हूँ । गला ना पायेगी मुझको धवल ये बर्फ ... Read more

मुक्तक

सदायें सुन तो ले मेरी, मैं तुझको याद करता हूँ। मैं दश्तो-सहरा में गम की, दिन को रात करता हूँ। जमाना कह ले जो कहना, मुझे उसकी न... Read more

मुक्तक

प्रेम की सारी संज्ञाएँ तुम्हारे नाम कर दूँगा । मैं अपने इश्क़ में तुझको छलकता जाम कर दूंगा । खुमारी इश्क़ की मेरे तिरे सर चढ़ क... Read more

मुक्तक

अंधेरा हो भले कितना , न हिम्मत हार जाना तुम । उदासी हो भले कितनी , न हँसना भूल जाना तुम । सफर में जीत के अक्सर, बिछे काँटो क... Read more

मुक्तक

"तेरे होंठों पर रही जो, वो हँसी अच्छी लगी तुझसे जब नज़रें मिलीं थीं वो घड़ी अच्छी लगी तुमने जब हँसते हुए मुझसे कहा` तुम हो मेरे ` ... Read more

मुक्तक

हमेशा पास रहते हैं मगर पल-भर नहीं मिलते, बहुत चाहो जिन्हें दिल से वही अक्सर नही मिलते, हकीकत में उन्हें पहचान अवसर की नहीं होती ... Read more

मुक्तक !

"तीर तलवार कि जरूरत नहीं मुझे, तुम्हें हो तो सँभाल लो, मुल्क़ मुहाने पे है धर्मयुद्ध के, हम कलम से काम चलालेंगे !" *** 07-02-20... Read more

मुक्तक

"जो रहे सबके लबों पर वो हँसी अब चाहिए, बँट सके सबके घरों में वो खुश़ी अब चाहिए, देखिए तो आज सारा देश ही बीमार है हो सके उपचार जिस... Read more

मुक्तक

"सच को समझाना है तो कहना पडता है, दुनिया की बातों को भी सहना पड़ता है, जब सारे के सारे ही बेपर्दा हों जाएं ऐसे में तो खु़द ही पर्... Read more

मुक्तक

" सफ़र में मुश्किलें आएं तो जुर्रत और बढ़ती है, रास्ता कोई जब रोके तो हिम्मत और बढ़ती है, अगर बिकने पे आ जाओ तो लग जाती भले कीमत ... Read more

मुक्तक

"शब्द मेरे बोलते हैं बादलों की बात , घुंगूरुओं कि ना कोई पायलों की बात, तमाम खेत बन रहे निवाले शहरों के, किसान क्या कहे अब हलों क... Read more

मुक्तक

"ज़ात,मज़हब,रंग के भेद अब सारे हुए, आदमी था एक जिसके लाख बँटवारे हुए, लफ़्ज़, जिनका था हमारी ज़िंदगी से वास्ता आपके होंठों पर आकर... Read more
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