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Category: मुक्तक

मुक्तक
आप जबसे जिन्दगी में मिल गये हैं! रास्ते मंजिल के फिर से खिल गये हैं! जागे हैं ख्वाबों के पल निगाहों में, जख्म भी जिगर... Read more
मुक्तक
क्यों तुम भटक गये हो वस्ल की राहों में? क्यों तुम बिखर गये हो दर्द की आहों में? ढूँढती हैं मंजिलें रफ्तार हिम्मत की, क्यों... Read more
मुक्तक
जबसे तेरे दर्द का पैगाम आ गया है! तबसे मेरी जिन्दगी में जाम आ गया है! मैं क्या करूँ नुमाइश अपनी तमन्नाओं की? जब तेरा... Read more
गुनगुनी सी धूप — डी के निवातिया
गुनगुनी सी धूप शरद ऋतू में पीली सुनहरी गुनगुनी सी धूप कुहासे की श्वेत चादर में लिपटे रवि का रूप फुर्रफुराती कलँगी में डाल-डाल फुदकते... Read more
मुक्तक
तुम मेरी जिन्दगी में खास बन गये हो! तुम मेरी मंजिलों की प्यास बन गये हो! हर वक्त तड़पाते हो आकर यादों में, तुम मेरे... Read more
मुक्तक
छा गई पनघट उदासी गीत बिन सूना जहाँ। घाट आतप से तपे हैं प्रीत बिन सूना जहाँ। कृषक अंबर को तके खलिहान सूखे रो रहे-... Read more
मुक्तक
तेरी याद में तबियत मचल जाती है! शामे-अलम की सूरत बदल जाती है! जब तीर ख्यालों का चुभता है जिगर में, मेरे सब्र की नीयत... Read more
मुक्तक
तेरा ख्याल मुझको तड़पाकर चला गया! अश्कों को निगाहों में लाकर चला गया! नींद भी आती नहीं है तेरी याद में, करवटों में दर्द को... Read more
मुक्तक
दर्द तन्हा रातों की कहानी होते हैं! तड़पाते हालात की रवानी होते हैं! कभी होते नहीं जुदा यादों के सिलसिले, दौरे-आजमाइश की निशानी होते हैं!... Read more
कर्म प्रधान मानते जग में, वे रहते सानन्द l
कर्म प्रधान मानते जग में, वे रहते सानन्द सिद्धि साधना में रत जो हैं, पाते परमानन्द l जागो,उठो,बढो तुम आगे, तुम्हें लक्ष्य तक जाना, सत्य... Read more
मुक्तक
तेरी याद कभी-कभी मुस्कान देती है! तेरी याद कभी-कभी तूफान देती है! टूटी हुई चाहत भी जुड़ जाती है कभी, कभी-कभी हर आलम सूनसान देती... Read more
मुक्तक
तेरी आज भी मुलाकात का असर है! तेरे ख्यालों की हर बात का असर है! नींद उड़ जाती है यादों की चोट से, तड़पाते लम्हों... Read more
🌺🌺अनन्त श्री युक्त पूज्य गुरुदेव के नाम की व्याख्या🌺🌺
पूज्य गुरुदेव के नाम की विशद व्याख्या का प्रयास मेरे द्वारा किया गया है। जिस पर मैं पहले कुछ पंक्तियाँ अपनी क्षमा प्रार्थना के लिए... Read more
मरघट
🌹🌹🌹🌹🌹 क्रन्दन करूण स्वर वेद ध्वनि अखण्ड है मरघट । ना मोह - माया, ममता ना उदण्ड है मरघट । अंतिम ठहराव चिर शान्तिमय एक... Read more
मुक्तक
मैं क्या भरोसा कर लूँ इस ज़हाँन पर? डोलता यकीन है टूटते इंसान पर! हर किसी को डर है तूफाने-सितम का, आदमी जिन्दा है वक्त... Read more
मुक्तक
एक मुद्दत से अपना मुकाम ढूँढता हूँ! मैं तेरी गुफ्तगूं सुबह-शाम ढूँढता हूँ! जब भी नजर को घेरती हैं तन्हाइयाँ, मैं अपनी ख्वाहिशों में जाम... Read more
माँ
ना जन्नत की ख्बाईस है, तमन्ना ना खजानें की! मुझे कोई सीखलादे , अदा माँ को मनानें की !! जो माँ रूठे तो रब रूठे,... Read more
मुक्‍तक
दिल में हो अगर आग लगी तो जाहिर ना करना बाहर दिख जाय तो गैरों को आता है हाथ सेखना लक्ष्‍मण सिंह जयपुर
मुक्तक
हरबार तुम एक ही नादानी करते हो! हर किसी से जिक्र तुम कहानी करते हो! हँसते हुए सहते हो अपनों के सितम को, हरबार तुम... Read more
बेटी
देवी का समझ रूप, पूजते बेटी अगर, कोख में कोई भी बेटी, मरनी न चाहिए बेटी को देना है मान, और रखना है ध्यान,पढ़ने से... Read more