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Category: मुक्तक

कर्मक्षेत्र
विचार मेरा कर्म क्षेत्र है शिक्षा है आधार लेखन मेरी शक्ति और अभिव्यक्ति मेरा व्यवहार रचना करना बात की शैली साहित्य मेरा आचार कर्मकरे निज... Read more
मुक्तक
होते ही शाम तेरी प्यास चली आती है! मेरे ख्यालों में बदहवास चली आती है! उस वक्त टकराता हूँ गम की दीवारों से, जब भी... Read more
पत्थर
दे..लालच... देश में दंगा कराया है ।। यहाँ.भाई से...भाई को...लड़ाया है ।। फसाते चंद सिक्को का देकर लालच ।। उन्ही..के हाथ में..पत्थर थमाया है ।।... Read more
कवि धर्म
गांधी विश्वामित्र बन, माँग लिया मोती से लाल, सुख धन,वैभव छोड़ राष्ट्रहित आय जवाहर लाल l सत्य अहिंसा का आश्रय ले, पंचशील के अनुयायी, भारत... Read more
मुक्तक
जब से लबों पे आया है तेरा नाम फिर से! जैसे लबों पे आया है कोई जाम फिर से! तेरी याद बंध गयी है साँसों... Read more
कुहासा
भानु तेरी रश्मि के सँग आँख मिचौली करे कुहासा नभ जल थल सब राहों में विलंब सदा करे कुहासा शीत काल में डेरा डाले है... Read more
प्यास  ....
प्यास .... होता नहीं है मन .अपना जब ये अपने पास । छलक उठती है नैनों से पिया मिलन की आस। संभव नहीं मधुपलों को... Read more
मुक्तक
तेरे सिवा दिल में कोई आता नहीं कभी! तेरे सिवा दिल को कोई भाता नहीं कभी! मुझे मंजिल मिल न पायी तकदीर से लेकिन, सिलसिला... Read more
मुक्तक
मेरी नजर से दूर तुम जाया न करो! मेरी चाहत को तुम तड़पाया न करो! तेरे लिए बेचैन हैं मेरी ख्वाहिशें, मेरे प्यार पर गमों... Read more
इमारत....
इमारत.... शानों पे लिख गया कोई इबारत वो रात की। ...महकती रही हिज़ाब में शरारत वो रात की। ....करते रहे वो जिस्म ..से गुस्ताखियाँ रात... Read more
मुक्तक
मुझसा कोई तेरा दीवाना नहीं होगा! मुझसा कोई तेरा परवाना नहीं होगा! हार चुका हूँ मंजिल को तकदीर से लेकिन, मुझसा कभी मशहूर अफसाना नहीं... Read more
मुक्तक
बात गुजर गई,मेरा अब उससे कोई सवाल नही, मेरी उदासीनता का जब उसे कोई मलाल नही, रूह से मोहब्बत का तलबगार था मैं उसकी ,... Read more
मुक्तक
मंजिल की तलाश में तूफान मिल जाते हैं! रास्तों में ख्वाबों के शमशान मिल जाते हैं! उस वक्त भीग जाती हैं आँखें अश्कों से, जब... Read more
मुक्तक
मैं कबतक राह देखूँगा तेरे आने की? तुमको राहे-जिन्दगी में फिर से पाने की! धीरे धीरे चुभ रही है तन्हाई दिल में, जाग उठी है... Read more
मुक्तक
क्यों तुम शमा-ए-चाहत को बुझाकर चले गये? क्यों तुम मेरी जिन्दगी में आकर चले गये? हर गम को जब तेरे लिए सहता रहा हूँ मैं,... Read more
मित्र
★★★मित्र★★★ .............. .............. मित्र तो बस मित्र है वह आम है ना खास है। मित्र से ही जीवन में खुशीयाँ तेरे पास है।। मित्र है... Read more