मुक्तक

मधुशाला

हमारी जिन्दगी तो है यहाँ पर ऐसी मधुशाला जरूरी है जहाँ पीनी सभी को मौत की हाला दिखाती खेल साकी बन हमेशा ही हमें किस्मत पिलाये... Read more

कविता

खाली मन को भरने आती, रोज रोज दिल को बहलाती । सुख दुःख की मेरी संगिनी, इस जग को जग से मिलवाती। जीवन पथ पर साथ निभाती, हर पल वो... Read more

मतदान अवश्य करें

जाकर अपने बूथ जरा सा कष्ट उठाना है कर अपना मतदान सभी को फ़र्ज़ निभाना है सोच समझ कर खूब परख कर अपना मत देना चुननी है सरकार उसी ... Read more

मुक्तक

जीवन की इस कर्मभूमि में ठीक नहीं है बैठे रहना, बहुत ज़रूरी है जीवन में सबकी सुनना, अपनी कहना, सुख जो पाए हम मुस्काएं, दर्द सभी हंस... Read more

मुक्तक

धर्म नहीं इंसान को इंसान से है बाँटता । धर्म नहीं जुनून में कभी सिर किसी का काटता || जग में दु:ख का या दर्द का नाम कुछ होता नहीं ... Read more

जय महावीर (महावीर जयन्ती पर)

दिनांक 17/4/19 पिरामिड विधा 1 है देव पूज्नीय जो जगाए धर्म सत्य की अलख जग में नमन महावीर 2 है आज मानव परेश... Read more

मुक्तक

शब्दों में कैसे उनके अब अंगार आ गए, अपने रहे ना अपने क्यों दरार आ गए मोल मिट्टी के बिके रिश्ते तब बाज़ार में, जब दोस्तों के वेश ... Read more

हृदय नादान

दिनांक 15/4/19 पिरामिड 1 है सच हृदय अनजान छल फरेब प्यार सच्चाई दोनों के जीवन में 2 ऐ दोस्त भटके ये हृदय टूट... Read more

अंदाज़

मुस्कुराने की भी एक बजा चाहिए । नज़्र-ओ-निग़ाह की अदा चाहिए । कैसे रहे कायम बात पर अपनी , हर अंदाज़ की एक फ़िज़ा चाहिए । .... विवेक द... Read more

"जरूरत सोंच बदलने की"

देखा मैंने एक दिन, समाज को करीब से, देखी लोगों की भावनाएं, और जिम्मेदारियाँ | हर कोई लगा है कम करने में, अपनी जिम्मेदारी , जी चुर... Read more

मुक्तक

जारी है मेरा सफर धीरे-धीरे, खोलूँगी ख़्वाबों के पर धीरे-धीरे, जहाँ पहुँचे हैं सब छ्लांगे लगाकर, पहुँचुंगी मै भी मगर धीरे-धीरे Read more

झूठ का बोलबाला... (तीन मुक्तक)

झूठ का बोलबाला... (तीन मुक्तक) ■■■■■■■■■■■■■ नौकरी है नहीं क्या करे आदमी रोटियों के लिये भी मरे आदमी झूठ का ही पुलिंदा लिये देश ... Read more

मौत एक रहस्य

दिनांक 11/4/19 पिरामिड 1 है सच ये मौत जिन्दगी है कभी करीब मौत के तो कभी जिन्दगी है मजाक 2 ऐ मौत न बन खौफ मेर... Read more

मुक्तक

कुदरत की बेहतर रचना से इन्कार नही करते, सत्य अगर कोई कहता है हम तकरार नही करते, प्रतिभा को सहयोग मिले ख्वाहिश है मेरी लेकिन कोई ... Read more

मुक्तक

रौशनी को दीप हम मिलकर जलाएँगे, तीरगी के पाँव फिर खुद लड़खड़ाएँगे, हैं फ़क़त काँटें ही काँटे जिंदगी की डाल पर हाँ मगर हम फूल बनकर... Read more

गज़ल

यहाँ मुस्कुराना जरूरी बहुत है हक़ीक़त छुपाना जरूरी बहुत है, अगर ख़्वाब संजीदा होने लगें तो उन्हें गुदगुदाना जरूरी बहुत है, ज... Read more

मुक्तक

सियासी मोहरे में उलझी हर चाल को समझो, जरूरी है सियासत की बिछाई जाल को समझो, सभी ने रंगों पर भी धर्म का एक रंग चढाया है, रंगों के ... Read more

मुक्तक

उन्हें लगता है उनको इश्क़ के क़ाबिल समझते हैं, हम उनको राह जीवन की उन्हें मंजिल समझते हैं, हमे साहिल से जो मँझदार मे लेकर के आए है... Read more

मुक्तक

कोशिश की जरा हँसने की तो तुमने रुला डाला, ग़मों की आग मे फिर से मुझे तुमने जला डाला, सजाए मौत तुमने इस तरह से दे दिया हमको रही स... Read more

मुक्तक

मज़हब की चिंगारी से अंगार बनाने आए हैं, जाति, धर्मों का फिर से व्यापार बनाने आए हैं सत्ता की कश्ती इनकी मझदार में आकर उलझी गई तो... Read more

मुक्तक

गौर से सुन लो जुम्मे को इतवार बनाने आए हैं, जीवन के पतझड़ को ये गुलजार बनाने आए हैं, भूख गरीबी लाचारी खत्म करेंगे इन वादों से फिर... Read more

मुक्तक

कोशिश है उनसे मुलाकात की बौछारें है दिल में सवालात की, दर्द जनता के अब वो समझने चले , कद्र जिनको नहीं थी जज्बात की Read more

मुक्तक

जब इस बार हारेंगे तो जाने फिर कहाँ होंगे, ज़मीं की गोद में होंगे या फिर आसमाँ होंगे, छुपाओ लाख सच्चाई मगर अब छिप नही सकती, उठेंगी... Read more

एक दुआ सब के लिए

(पिरामिड) 1 मैं एक फकीर माँगू दुआ सलामती की चैन भाईचारा हो दुनियाँ भर में 2 मैं भक्त माता का करूँ स्वयं ईश वन्... Read more

नववर्ष मंगल कामनाएँँ ।

चैत्र शुक्ल पक्ष प्रतिपदा विक्रम संवत 2076* (6 अप्रैल 2019) के शुभ आगमन पर सभी *स्वजनों को परिवार सहित* *हार्दि... Read more

मुक्तक

बदला बदला मौसम है शातिर बहुत हवायें हैं, अफ़वाहों की चादर में लिपटी सभी दिशाएँ हैं, बदल रही है पल पल अब तो दुनिया की पहचानें, सर्व... Read more

मुक्तक

भाषण में नेता तो अपना बहुत सगा सा लगता है, सत्ता में आते ही धोखा और दगा सा लगता है, रंग बदलता रूप बदलता आए दिन वह रोल बदलता इनकी ... Read more

मुक्तक

कोशिश सब बेकार दिख रही पप्पु की नादानी में, मान लो मेरा कहना फिर से भैंस गई अब पानी में, बातें तो ईमान धरम की करते हैं सब मंचों से... Read more

परिचय.....

मन की मन मे रह जाए कौन समझ पाए दिजो परिचय अपना तो चरित्र समझ आए !! परिचय दिजो ऐसा उत्तम छवि बनाए तनिक विवरण मे ही... Read more

जीवन हो सुगम

दिनांक 4/4/19 विधा पिरामिड 1 है राम जीवन मरण का सुखी आधार अच्छे कर्म धर्म करें तो नैया पार 2 है शक्ति चलाए जग... Read more

जीवन-संगिनी

दिनांक 4/4/19 विधा पिरामिड है मेरा जीवन साथ साथ निभाने हेतु है आभार उस ईश्वरीय शक्ति को 2 है साथी तू मेरे जीवन ... Read more

जीवन-संगिनी

दिनांक 4/4/19 विधा पिरामिड है मेरा जीवन साथ साथ निभाने हेतु है आभार उस ईश्वरीय शक्ति को 2 है साथी तू मेरे जीवन ... Read more

चलती रहे घडी

दिनांक 3/4/19 विधा - पिरामिड 1 है घड़ी जीवन जन्म मृत्यु एक आधार है राह कठिन परिश्रम से जीत 2 ये घड़ी चलती आजीव... Read more

तुम

ये तो तय है कि मोहब्बत नही थी तुमसे कभी, मगर हाँ, ख्वाहिशों में तुम भी शामिल थी कभी। #सरितासृजना Read more

ख्याल

कुछ इस कदर था खुद का ख्याल, तेरा खुबसूरत ख्याल नजर नही आया, शम्मां को फुर्सत कहाँ थी परवाने, तेरा जल जाना नजर नही आया। #... Read more

ख्वाब

जी लेने दो मुझको भी ख्वाबों में, हकीकत में तो हर कोई जीता है, उधड़ी हुई पुरानी यादों के लिबास को, मन तनहाईयों में अक्सर, अके... Read more

मुक्तक

कुछ कर गुज़रने के लिए मौसम नहीं मन चाहिए, हर प्यास को जो दे बुझा वह एक सावन चाहिए, है सही, क्या है गलत जो भेद बतला दे हमें सत्य... Read more

मुक्तक

सवाल गूँज के चुप हैं जवाब आए नहीं जो आने वाले थे वो इंक़लाब आए नहीं, वो एक नींद की जो शर्त थी अधूरी रही हमारी जागती आँखों में ख... Read more

मुक्तक

तुमको क्या बताएँ हम कैसे गम छुपाते हैं, ज़माने को दिखाने को हँसी ओठों पे लाते हैं, बडी खुदगर्ज़ है दुनिया यह तो जानते है हम गमो ... Read more

मुक्तक

इक जहान के अंदर कई जहान लिए, ये जारी है सफर मेरा नई उडान लिए, मैं चल पड़ी हूँ सितारों की रौशनी लेकर ज़मीन पाँव तले सर पे आसमान लिए Read more

जीतो मन को आज तुम....

जीतो मन को आज तुम,लोगे कल जग जीत। पहले खिलता फूल है,ख़ुशबू के फिर गीत।। गिरते उठते राह में,चलते रहना झूम। मंज़िल पाकर एक दिन,मच ज... Read more

मुक्तक

(1) जिसका बहुमत उसी की *सत्ता दिखलाए वह अपनी प्रभुत्ता उससे पंगा लिया तो जैसे आ पड़ा मधुमक्खी का छत्ता। (2) अतुल *सुंदरी... Read more

मुक्तक

मुक्तक जिसका बहुमत उसी की *सत्ता दिखलाए वह अपनी प्रभुत्ता उससे पंगा लिया तो जैसे आ पड़ा मधुमक्खी का छत्ता। (2) अतुल... Read more

मुक्तक : कुंडली छंद : 22 मात्राऐं, यति 12,10 यति से पूर्व या तुरंत बाद में 21, 12 मात्राऐं, अंत 2 गुरु

ध्रुवतारा पिता उत्तानपाद का, पुत्र था ध्रुवतारा गोद चढ़ने पिता की, हठी था बेचारा माता सुरुचि ने उसे, खींच कर उतारा ... Read more

मुक्तक

#विधा - ताटंक छंद आधारित (मुक्तक) ********* ************ ********** ********** व्यथित हृदय की पीर अभी हम, बोलो भला दिखाये क्यों। ... Read more

मुक्तक

वक्त के दरिया मे बहते जा रहें हैं हम जाने क्या क्या साथ लेते जा रहें हैं हम आसमाँ पर हैं सितारे उस कदर हैं ख़्वाहिशें हर कदम पर... Read more

मुक्तक

औरों को ख़ुश देख के जलते नहीं हैं हम, कीमत लगाते लोग पर बिकते नहीं हैं हम, मुझ से हैं कई लोग इसी बात से ख़फा, जीते हैं सर उठा के ... Read more

एक दुआ मौला से

दिनांक 28/3/19 दुआ फैला के हाथ फकीर ने माँगी यूँ दुआ मौला से भर दे हर इन्सान की झोली जो चलें नेकी ओ ईमान की रा... Read more

मुक्तक

तीरगी अब तो हमें रोशनी सी लगती है ज़िन्दगी आज हमें ज़िन्दगी सी लगती है कैसे कह दूँ कि फरिश्ता है वो देखो उसको उसकी फितरत तो हमें ... Read more

जीवन ये व्यापार हो गया -मुक्तक

दाना –दाना तरसे भाई , कातर नयना ताके ताई , कृषक मौन , घर द्वार बह गया । जीवन ये व्यापार हो गया । सुविधायें सब नौ दो ग्यारह ... Read more
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