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Category: लेख

हैप्पी न्यू ईयर नहीं हिन्दू नव वर्ष
Naveen Jain लेख Dec 24, 2016
हैप्पी न्यू ईयर नहीं हिन्दू नव वर्ष हम भारतीयों को हमारी संस्कृति, सभ्यता विरासत में मिली है । हमारी हिन्दू संस्कृति, सभ्यता सर्वश्रेष्ठ है, विश्व... Read more
स्त्री-शक्ति
स्त्री शक्ती स्त्री और पुरुष इस विश्व की धरोहर मानें जाते हे ।। कही दोनेा में से कोई एक दूसरे से ज्यादा जरूरी या ताकतवर... Read more
हिंदुत्व का राष्ट्रीय एकीकरण एवं सहिष्णुता में योगदान
Prasant Singh लेख Dec 6, 2016
आमतौर पर हिंदुत्व शब्द का अर्थ कई लोग हिंदूवादी वैचारिक प्रचार-प्रसार से लगा बैठते हैं। लेकिन जहाँ तक मैंने अनुशीलन के दौरान पाया कि हमारे... Read more
नोटबंदी का जहाँ कई लोग विरोध करते थकते नहीं हैं।…
नोटबंदी का जहाँ कई लोग विरोध करते थकते नहीं हैं। गरीबों के हित की चिंता कर सरकार की अलोचना करने में लगे रहते हैं। वहीं... Read more
लेख
"शरद के रंग" सागर का जल शान्त गम्भीर सारी वस्तुऐं स्वभाविक रूप से सुन्दर, आकाश भी जल की भाँति निर्मल श्याम मेघो का उमड़ना रूक... Read more
राष्ट्र हित में युवा लक्ष्य निर्धारित करें
Rita Singh लेख Nov 13, 2016
राष्ट्र हित में युवा वर्ग लक्ष्य निर्धारित करे - अनूठी सांस्कृतिक विरासत और गौरवमयी परम्पराओं से सुसज्जित इस देश के नागरिकों में न जाने क्यों... Read more
मोदी जी का ऐलान
Naveen Jain लेख Nov 9, 2016
जितनी भी तारीफ की जाए कम है , क्या योजना है देश समेत सारे विश्व को आश्चर्यचकित कर दिया । मोदी जी के इस ऐलान... Read more
ब्रज के एक सशक्त हस्ताक्षर लोककवि रामचरन गुप्त   +प्रोफेसर अशोक द्विवेदी
हमारे देश में हजारों ऐसे लोककवि हैं, जो सच्चे अर्थों में जनता की भावनाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। वे न केवल स्वयं, बल्कि अपनी रचनाओं... Read more
लोककवि रामचरन गुप्त के लोकगीतों में आनुप्रासिक सौंदर्य   +ज्ञानेन्द्र साज़
‘जर्जरकती’ मासिक के जनवरी-1997 अंक में प्रकाशित लोककवि स्व. रामचरन गुप्त की रचनाएं युगबोध की जीवन्त रचनाएं हैं। हर लोककवि की कविता में आमजन लोकभाषा... Read more
लोककवि रामचरन गुप्त मनस्वी साहित्यकार   +डॉ. अभिनेष शर्मा
स्व. रामचरन गुप्त माटी के कवि थे। अपने आस-पास बिखरे साहित्य को अपने शब्दों का जामा पहनाकर लोकधुन से उसका शृंगार कर जिस तरह से... Read more
मेरे बाबूजी लोककवि रामचरन गुप्त  + डॉ. सुरेश त्रस्त
आठवें दशक के प्रारम्भ के दिनों को मैं कभी नहीं भूल सकता। चिकित्सा क्षेत्रा से जुड़े होने के कारण उन्हीं दिनों मुझे दर्शन लाभ प्राप्त... Read more
संघर्षों की एक कथाः लोककवि रामचरन गुप्त  +इंजीनियर अशोक कुमार गुप्त [ पुत्र ]
लोककवि रामचरन गुप्त 23 दिसम्बर 1994 को हमारे बीच नहीं रहे, लेकिन उनका चेतन रूप उनके सम्पर्क में आये उन सैकड़ों जेहनों को आलोकित किये... Read more
दया के सागरः लोककवि रामचरन गुप्त +रमेशराज
लोककवि रामचरन गुप्त का मन कविता के स्तर पर ही संवेदनशील नहीं रहा, बल्कि जिन स्त्रोतों से वे कविता के लिये संवेदना ग्रहण करते थे,... Read more
लोककवि रामचरन गुप्त का लोक-काव्य  +डॉ. वेदप्रकाश ‘अमिताभ ’
लोककवि रामचरन गुप्त की रचनाओं को पढकर यह तथ्य बार-बार कौंधता है कि जन-जन की चित्त-शक्तियों का जितना स्पष्ट और अनायास प्रतिबिम्बन लोक साहित्य में... Read more
लोककवि रामचरन गुप्त एक देशभक्त कवि   - डॉ. रवीन्द्र भ्रमर
अलीगढ़ के ‘एसी’ गांव में सन् 1924 ई. में जन्मे लोककवि रामचरन गुप्त ने अपनी एक रचना में यह कामना की है कि उन्हें देशभक्त... Read more
‘ विरोधरस ‘ [ शोध-प्रबन्ध ]    विचारप्रधान कविता का रसात्मक समाधान  +लेखक - रमेशराज
‘ विरोधरस ‘---1. ‘ विरोधरस ‘ [ शोध-प्रबन्ध ] विचारप्रधान कविता का रसात्मक समाधान +लेखक - रमेशराज ---------------------------------------------------- ‘ विरोधरस ‘ : रस-परम्परा एक नये... Read more
‘ विरोधरस ‘---2. [ काव्य की नूतन विधा तेवरी में विरोधरस ]  +रमेशराज
काव्य की नूतन विधा ‘तेवरी’ दलित, शोषित, पीडि़त, अपमानित, प्रताडि़त, बलत्कृत, आहत, उत्कोचित, असहाय, निर्बल और निरुपाय मानव की उन सारी मनः स्थितियों की अभिव्यक्ति... Read more
‘ विरोधरस ‘---3. || विरोध-रस के आलंबन विभाव || +रमेशराज
तेवरी में विरोध-रस के आलंबन विभाव के रूप में इसकी पहचान इस प्रकार की जा सकती है- सूदखोर- ---------- लौकिक जगत के सीधे-सच्चे, असहाय और... Read more
‘ विरोधरस ‘---4. ‘विरोध-रस’ के अन्य आलम्बन- +रमेशराज
‘विरोध-रस’ स्थायी भाव ‘आक्रोश’ से उत्पन्न होता है और इसी स्थायी भाव आक्रोश को उद्दीप्त करने वाले कारकों में सूदखोर में, भ्रष्ट नौकरशाह, भ्रष्ट पुलिस,... Read more