लेख

बस मुहब्बत कीजिये

बस मुहब्बत कीजिये #पंडित पी के तिवारी (लेखक एवं पत्रकार) इ श्क की ही तरह मुहब्बत शब्द भी प्रेम के अर्थ में खूब इस्तेमाल होता ... Read more

सफलता और रहस्य

जो लोग असफल यानि फेल्योर होते हैं वे होते ही हैं इसीलिए होते हैं 👇 ( कारण कोई खास या विशेष / गुप्त या रहस्य नहीं. बातें पुरातन... Read more

साकी तेरा काम है कैसा

कैसा जीवन यापन करता वो सबके पात्रों को भरता समाज और परिवार के साथ समय बिताने को वो मरता . दिनचर्या को अपनी भूलकर आधुनिक जीवन ... Read more

भाषा अपनी गरिमा खोती जा रही है

बुजुर्गों के लिए अपशब्द का इस्तेमाल करना हमारी संस्कृति का हिस्सा ही नही था कभी। लेकिन इस की शुरुआत हुई हमारे देश में . थोड़ी देर के ... Read more

जय हो

मुझे पता नही ये मैंने क्या लिखा है, पर कुछ तो है... अपने आप को बचाईये, अपने होने को जाया मत जाने दीजिए ; युद्ध जब धर्म के नाम हो ज... Read more

भगवान की परिकल्पना

कमजोर असहाय मंदबुद्धि कर्महीन आलसी लोगों का मार्ग है तथाकथित धर्म. कुछ चालाक लोग के लिए. बचने का मार्ग ..भी, कूडेदान की तरह ... Read more

कहीं व्यर्थ की तो नहीं है यह कड़वी दवा?

(यह लेख मैंने नोटबंदी की घोषणा के तीसरे दिन 10/11/2016 को ही लिखा था, जब सारे लोग, तमाम अखबारों के विद्वान स्तंभकार और संपादकीय लेखक... Read more

माँ की उपेक्षा क्यों करें

Md Jamil लेख Oct 9, 2019
माँ एक ऐसी है जो पूरी संसार में न तो खरीदा जा सकता और न ही कहीं मिल सकती है। माँ एक अनमोल चीज़ है। और हर बच्चों की खुशियाँ के लिए मा... Read more

रावण से राम तक

आइए आज दशहरे पर दो बातों पर ध्यान देते हैं: पहली, दशमलव प्रणाली में मूलभूत संख्याएँ दस ही हैं - शून्य से लेकर नौ तक। इतने ही महाप... Read more

राष्ट्रवाद और विवेक

एक आदमी धर्म अधर्म के मार्ग पर जब तक नहीं चल सकता जब तलक उसके पास अपना ज्ञान/विवेक बोध नहीं होता . तब तक वह किसी #विचारधारा का #सं... Read more

दशहरा मेरी नज़र में

दशहरा निकल गया।रावण जल गया।पर मेरे मन में प्रश्न अनेक सिर उठा रहे हैं।आखिर यह नवराते वर्ष में 2 बार क्यों आते है।रावण क्यों जलाया जा... Read more

सत्य का साथ

अपने काम मे मगन रहने पर भी, कभी - कभी मेरा मन मेरा साथ छोड़कर कहीं दूर चला जाता हैं । आज भी बैठे - बैठे त्रेता युग और द्वापर युग में ... Read more

यही है विकास का गुजरात मॉडल!!!

आपको कभी इन बातों पर आश्चर्य नहीं होता कि किसी वक्त हमारे देशवासियों को ‘काला कुली’ कहकर बुलाने वालों को विगत कुछ दशकों से हमारे देश... Read more

ज्ञान युग में भी ज्ञानियों की ओछी सोच

हमारी कथित ‘महान’ भारतीय संस्कृति में लड़कियों की ऑनर किलिंग कोई नई बात नहीं है. ऑनर किलिंग का मतलब होता है-सम्मान के लिए हत्या. हर ... Read more

गांधी- विचार के आदर्श जीवन को फिर राजनीतिक रूप से सक्रिय होने की आवश्यकता हैं..

महात्मा गांधी समय की कसौटी पर जितना खरा उतरते जा रहें हैं, वैसी मिसाल मिलना मुश्किल है । उनकी 150 वीं जयंती पर उनका स्मरण करते हुए य... Read more

स्वच्छता मेरे जीवन का अभियान

आज फिर आप सभी के समक्ष उपस्थित हूँ।सबसे पहले आप सभी को स्वच्छता दिवस की स्वच्छ मन से हार्दिक शुभकामनाएं सादर अर्पित हैं साथ ही साथ ग... Read more

मोदी और संत कबीर!!

संतो देखत जग बौराना। सांच कहीं तो मारन धावै, झूठे जग पतियाना।। नेमी देखा धरमी देखा, प्रात करै असनाना। आतम मारि पखानहि पूजै, उनमें... Read more

प्लास्टिक बन्द का नाटक

आज बहुत धूम धड़ाका ,देखने को मिला ,प्लास्टिक की विदाई जैसे तय कर दी गई हो। परन्तु एक बात समझ नही आती क्या प्लास्टिक विदाई के प्रति सर... Read more

डिजिटल इंडिया और पाँच सौ का नोट

#Digital_India पर व्यंग्य 👇 छोटे दुकानदार के पास अगर ग्राहक #पाँच_सौ या #दो_हजाररुपये का नोट. लेकर पहुंचता है तो ये मत समझना #ग... Read more

साहित्य दर्पण नही

साहित्य किसे कहते है ? जैसे प्रश्न बेमानी है। ठीक उसी तरह से जैसे समन्दर किसे कहते है आदि आदि। साहित्य क्या है ? क्यो है ? जैसे प... Read more

अंधभक्ति और सुकून

जी हाँ आज फिर वो पश्चाताप के नो मुकर्रर दिन आ पहुंचे है. जिसमें सब पश्चाताप करेंगे 😢 संकल्प तो बिलकुल नहीं होंगे. हमने जो अतित ... Read more

आभासी दुनिया और युवा पीढ़ी

आभासी दुनिया और युवा पीढ़ी _______________________ ... Read more

दोस्ती का असर

आज भी जब कभी फूर्सत में अपनी जिंदगी के बीते पलो को ताजा करता हुँ तो, मेरे हदय की जमीं पर मेरी वह दोस्त अपना हस्ताक्षर जरुर करती है, ... Read more

दोषी स्वर्ण या दलित

आजकल छुआछूत, जात - पात, अगला - पिछड़ा के नाम पर समाज को तोड़ने की भरपूर कोशिश की जा रही है और अनेक तरह की सोशल मीडिया पर वीडियो वायर... Read more

पानी की दुकान

जिस देश में दूध की नदियां बहती थी, वही पानी के लिए दर-दर भटक रहा है। उसकी हालत बिन पानी के मछली तड़पती है जैसी हो गई है। पानी के लिए... Read more

पानी की दुकान

जिस देश में दूध की नदियां बहती थी, वही पानी के लिए दर-दर भटक रहा है। उसकी हालत बिन पानी के मछली तड़पती है जैसी हो गई है। पानी के लिए... Read more

पितर पक्ष- महत्व लघुलेख

जो बच्चे माता पिता के जीते जी भोजन वस्त्र और शरीर से सेवा करते हैं और स्वर्गवास के बाद भी नियमित भोग अर्पण करते है और पितर प... Read more

केकई एक चरित्र

विडम्बना है कि केकई का चरित्र राम को वनवास जाने का पर्याय माना जा रहा है लेकिन इस मर्म के पीछे मंथरा के चरित्र को अनदेखा किया जाता ह... Read more

दिव्यांग या विकलांग

"दिव्यांग या विकलांग" इस शब्द का उच्चारण मैं आज इसलिए कर रहा हूं की पहले के सरकारी दस्तावेजों में विकलांग शब्द का उच्चारण किया जाता ... Read more

***"कर्म बंधन से मुक्तिबोध"**

***" कर्म बंधन से मुक्तिबोध "*** भागवत गीता अनंत ज्ञान का वृहद भंडार है इसे समझना बहुत ही कठिन है लेकिन भागवत गीता में कृष्ण अर्जुन... Read more

फिल्म ‘काला’ की समीक्षा

यूं तो उस दिन फिल्म देखने का मूड बिल्कुल भी नहीं था. वैसे भी बचपन से मन:पटल में ही अंकित कर दी दी गई फिल्मों के प्रति नकारात्मकता के... Read more

‘मेरी आत्मकथा-किशोर साहू’ हिंदी सिनेमा के शुरुआती दौर की झांकी

पहली बार इस फिल्मी सितारे के नाम से मेरा परिचय 2011 में लोकमत समाचार, नागपुर के कार्यालय में संपादन कार्य के दौरान हुआ. सहकर्मियों क... Read more

आरक्षण : सच जानना जरूरी

हमारे देश में दलित, आदिवासियों एवं अन्य पिछड़े वर्ग के लोगों को नौकरी व स्थानीय स्वराज संस्थाओं में उन्हें समुचित प्रतिनिधित्व देने क... Read more

आलसी नही कर्मठ बने

आजकल सब जगह गरीबों को मुफ्त खाना रहना बिजली पानी की विडंबनापूर्ण पेशकश की जाती है और की जा रही है जो उचित परिवेश नही है । इससे एक ... Read more

वाह रे हिन्दी दिवस तू धन्य है।

मैं भारत का लाल और आप हरे, पीले, नीले, गुलाबी, नारंगी।सबसे पहले आप सभी भारत के माननीय, आदरणीय, सम्माननीय, सभ्य, शिष्ट, विशिष्ट, श्रे... Read more

हिंदी के मन की बात

✍️ हिंदी दिवस पर___ मैं #हिंदी, आज नगर भ्रमण पर निकली हूं। मीडिया की वजह से मुझे भी पता चला कि आज मेरा दिन है। अच्छा लगा, मेरे लिए ... Read more

***पितृ पक्ष श्राद्ध कर्म***

पितृ पक्ष श्राद्ध 2019के बारे में आवश्यक जानकारी:- """"""""""”"""""""""""""""""""""""""""""""""" हिन्दू धर्म में मृत्यु के बाद श्र... Read more

***पितृ पक्ष व तर्पण**

पितृ पक्ष व् तर्पण। ग्रन्थो में लिखा गया है कि घर में अमावस्या पितृ पक्ष विशेष तिथि तथा श्राद के दिन तिल से तर्पण करें परन्तु अन्य ... Read more

अप्रैल फूल

अपने बचपन से रू-ब-रू कराने के पहले मैं यहां सबसे पहले मध्य प्रदेश के बैतूल जिले की युवा कवयित्री रेखा कापसे की पंक्तियां उद्धृत करना... Read more

धार्मिक आयोजन या नासूर?

आजकल हमारे देश में लोग कुछ ज्यादा ही धार्मिक होते जा रहे हैं। हर मजहब के लोग बढ़-चढ़कर धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करते नजर आते हैं... Read more

***हिंदी भाषा **

विषय - केवल लेखन से ही होगी हिन्दी लोकप्रिय हिंदी भाषा अधिकतर राज्यों में लिखी जाने वाली भाषा में से एक है हम जिस परिवेश में जन्म ... Read more

तेवरी में गीतात्मकता

योगेन्द्र शर्मा ग़ज़ल के जन्म के समय, लगभग सभी प्रचलित विधाएं, कथ्य पर ही आधारित थीं। ग़ज़ल का कथ्य था, हिरन जैसे नेत्रों वाल... Read more

तेवरी को विवादास्पद बनाने की मुहिम +रमेशराज

ग़ज़ल-फोबिया के शिकार कुछ अतिज्ञानी हिन्दी के ग़ज़लकार तेवरी को लम्बे समय से ग़ज़ल की नकल सिद्ध करने में जी-जान से जुटे हैं। तेवरी ग़ज़ल... Read more

‘घड़ा पाप का भर रहा’ एक विलक्षण तेवर-शतक

कविता में ‘तेवरी प्रयोग’ साहित्य के लिए एक सुखद अनुभव *विश्वप्रताप भारती ---------------------------------------------------------... Read more

तेवरी के तेवर को दर्शाती पत्रिका ‘तेवरीपक्ष’

[ ग़ज़ल और तेवरी का विवाद बेकार की कवायद ] -भगवानदास जोपट हिन्दी कविता के क्षेत्र में कविता की अनेक विधाओं के मध्य तेवरी विधा का... Read more

तेवरीकार रमेशराज, राजर्षि जनक की भूमिका में *योगेन्द्र शर्मा

कविवर निराला का कथन है-“कविता बहुजीवन की छवि है।“ तेवरी भी माँ सीता की तरह, भूमि से ही जन्मी है, और रमेशराज, राजर्षि जनक की भूमिका म... Read more

ग़ज़ल एक प्रणय गीत +रमेशराज

ग़ज़ल का अतीत एक प्रणय-गीत, महबूबा से प्रेमपूर्ण बातचीत’ के रूप में अपनी उपस्थित दर्ज कराते हुए साहित्य-संसार में सबके सम्मुख आया। ज... Read more

*"गणेश जी का आत्मिक दर्शन "*

***"ॐ गणपतये नमः"*** *"गणेश जी का आत्मिक दर्शन"* मांगलिक कार्यों को आरंभ करने से पहले श्री गणेश जी की आराधना महत्वपूर्ण व अनिवार्य... Read more

एक विचार यह भी "लघु लेख"

भगवान् नहीं कहते मुझे दूध मिठाई पैसे सोना चाँदी चढाओ यह हमारी श्रद्धा भावनाएं हैं भोले नाथ को दूध से अभिषेक मत करो दूध बरवाद ह... Read more

सुपर-30 : शिक्षा का क्रांतिघोष

बेशक मैं कहूंगा मुझे क्या, हम सभी भाइयों को घर से पर्याप्त समय, संसाधन और संरक्षण मिला. पिताजी जिन्हें मैं पापाजी कहता हूं, शिक्षक थ... Read more