लेख

जनसंख्या नियंत्रण के सख्त कानुन की लगातार बढ़ रही है मांग |

यू तो जनसंख्या नियंत्रण कानुन की मांग बहुत पुरानी है मगर 2019 में मोदी सरकार के फिर से केन्द्र में आने के बाद से यह मांग और बलवती हो... Read more

लत

कल रात टीवी पर एक ज्ञानवर्धक डाॅक्यूमैंटरी देखी पहले तो विश्वास ही नहीं हुआ पर थोड़े अंतराल पर यथार्थ देखकर आंखे फटी रह गयी।आज हर जग... Read more

माता पिता के दायित्व

माता पिता के दायित्व --------------------------- आज के इस व्यस्त वातावरण और तकनीकी युग में माता पिता के लिए भी अपने दायित्वों का न... Read more

व्यंग बाण भोपाली लहजे में

अस्सलाम वालेकुम बन्ने मियां वालेकुम अस्सलाम आशिक मियां, क्या हाल है मियां, दिखी नई रिये हो आजकल, मियां वही हड्डी वही खाल है, तुम तो ... Read more

मेरी P R O

डॉक्टर साहब मैं आपका बहुत एडवरटाइज करती हूं , जिस दिन आपको दिखाने आना होता है मैं सुबह से उठ कर पूरे मुहल्ले में ज़ोर ज़ोर से आप का... Read more

Me!

शीशे में स्वयं के अक्ष को देखते हुए मैंने बालों के गुच्छें सफेद बालों की एक छिपी क्यारी को पाया।मैं स्वयं को शीशे के करीब ले जाता गय... Read more

वृक्ष

वृक्ष का धर्म क्या है जहां कहीं खड़ा हो वहीं से शीतलता व उन्नत पुष्प तथा फल प्रदान करे वो कभी दूसरे की निंदा नहीं करते और ना ही ईष्य... Read more

संबंध

संबंध और संबंधों का निर्वाह महज इतना कि संबंध दिखाई दे शायद इससे अधिक कुछ नहीं।किसी को याद तब ही किया जाता है जब ज़रूरत है एक अंतराल... Read more

कोविड में भीख

रोटी खाओगे?वाक्य सुनते ही जैसे वो निढ़ाल हो गया।आंखे खिल गयी होठ फैलने लगे।आज तो पेट भर गया पर कल?ये सोचकर उसने अपना सिर पकड़ लिया।अ... Read more

दोस्ती

कभी-कभी ख़्याल आता है कि ज़िन्दगी इतनी छोटी कैसे हो सकती है ये इल्म कुछ वर्ष पहले ही हुआ जब किताबों से मित्रता हुई।हर तरफ बस किताबों... Read more

बचे रहेंगे किसान, तभी तो होगा नफा-नुकसान..

सामयिक लेख: कृषि विधेयक सुशील कुमार 'नवीन' पिछले एक पखवाड़े से देशभर में किसान और सरकार आमने-सामने हैं। मामला नये कृषि विधेयकों क... Read more

कोरोना और उसका दुष्प्रभाव

लेख कोरोना और उसका दुष्प्रभाव --------------------------------- जब से कोरोना आया है ,उसने हमारे जीवन के हल पहलू को किसी न कि... Read more

बारिश

एल ई डी लाइट्स की सफेद रोशनी बारिश की बूंदों को और दुधिया कर देती है जैसे अंधकार में टिमटिमाते छोटे जुगनु अपने अल्प समाज को चमकीला क... Read more

शाम

ज़िन्दगी जैसे थम गयी है घर के एक कोने में वहीं सुबह जगती है शाम तक आंखे जैसे दीवारें ताकती है।अजीब-सी व्यस्तता जो निरंतर कहीं मुझमें... Read more

कोरोना!एक वैश्विक आपदा

कोविड-19 एक वैश्विक आपदा है जिसने संपूर्ण विश्व के लोगों को घरों में बंद कर दिया है।सारा मीडिया जगत ही नहीं बल्कि हर ज़ुबां पर एक ही... Read more

मौसम

मौसम की भांति जीवन विविधताओं से परिपूर्ण है घर की डयोढ़ी रोज़ भीग जाती है सुबह की मंद मंद बूदों से पर कुछ देर में स्वच्छ दिखने लगती ... Read more

मर्यादा

मर्यादा ******* हमारे जीवन में मर्यादा का अपना महत्व है।बिना मर्यादा के जीवन में तमाम तरह की परेशानियों से आये दिन दो चार होन... Read more

मूल्यांकन

पसंद चयन और वरीयता तीन ऐसे शब्द है जो एक दूसरे से संबद्ध है प्राय हमें जो पसंद होता है उसे चयन करना अपना ध्येय मानते हैं पर जीवन में... Read more

शब्द

कितने ही निरर्थक शब्द जीवन शैली में अभिन्न रूप से जुड़ने लगते हैं कुछ और कब पता ही नहीं चलता।ऐसे बेअदबी शब्द जिनके कोई मायने नहीं हो... Read more

स्टेटस

तुम मुझे उतना ही जानते है जितना मैं तुम्हें शायद उसी तरह जैसे तुम मेरे रोज़ के स्टेट्स को पढ़ लेते हो और चूंकि मेरा परिचय अब आपके मो... Read more

मोहन राकेश की डायरी से

हवा में वासंती स्पर्श है-समय अच्छा-अच्छा लगता है।ऐसे में अनायास मन होता है कि हल्के-हल्के स्वर में किसी से बात करें।अपने चारों ओर घर... Read more

उर्दू की मिठास

कितने मुख्तलिफ़ चेहरों से ग़ुफ़्तगू होती है कुछ दिले ख़ास होते हैं तो कुछ निहायत बद दिमाग।उर्दू ज़ुबान में 'बा'और 'बे' का यकीनन् बेह... Read more

सबेरे सबेरे

डेढ़ महीने से कमरों में था घर के अहाते या ड्योढ़ी तक चलना निकलना बस इतना ही या एक आध बार अत्यधिक ज़रूरी काज से घर के आसपास तक ही आना... Read more

कोरोना एक वैश्विक आपदा!

कोविड-19 एक वैश्विक आपदा है जिसने संपूर्ण विश्व के लोगों को घरों में बंद कर दिया है।सारा मीडिया जगत ही नहीं बल्कि हर ज़ुबां पर एक ही... Read more

मेरी किताब

खिड़की के शीशों पर गर्द जम चुकी है ओस की बूंदों से वो और भी घनी हो गई है बाहर झांकने के लिए खिड़की की तरफ देखा पर वहां अब अपना ही प... Read more

सिगरेट

जी चाहता है तुम्हें अपने होठों से छूं लूं तुम मेरा पहला प्रेम हो।जानती हो तुम्हे मैं उन दिनों से चाहता हूं जब मैं स्कूल जाया करता था... Read more

मोहन राकेश

वो आने वाला है एक बार फिर बस दो रोज़ में उसकी गहरी आंखों पर मोटा काला चश्मा है सिर पर उलझे बालों का पफ उसके गोल चेहरे की परीधि से ज़... Read more

""मेरा परिचय - आपके साथ""

""संक्षिप्त परिचय"" हिंदी साहित्य पीडिया से जुड़े समस्त लेखन व पठन करने वाले सुधिलेखकों कवियों को मेरा प्रणाम । 19 अगस्त 2020 को म... Read more

बैंग्लौर दंगे को ऐसे समझिए |

क्या आपको याद है कि पिछले महिने में बैग्लौंर में दंगा फसाद हुआ था ? यदि यह याद है तो आपको ये भी याद होगा कि यह दंगा क्यों हुआ था ? य... Read more

हाफ टिकट

स्कूल से घंटा गोल करके फ़िल्म देखने का मज़ा कुछ अलग ही है । जिन्होंने इसका मज़ा कभी नहीं लूटा उनसे इसका पूर्ण आनंद लेने के लिए मेरा ... Read more

जब नाचा बैंक अधिकारी (हास्य व्यंग्य लेख)

एक हास्य प्रहसन में बैक कर्मचारियो को बैंक प्रवन्ध द्वारा दिये गये बैकिंग कार्यों के टारगेट को पूरा करते समय अपने आत्म सम्मान को त... Read more

किंकर्तव्य

उन दिनों मेडिकल कालेज के पाठ्यक्रम में योजना के अनुसार चिकित्सा विद्यार्थियों को गांव - गांव में जाकर वहां की परिस्थितियों , खान -... Read more

" हिंदी को रूचिकर कैसे बनायें "

हिंदी हम सबके लिए नया विषय नही है हम सबने बचपन से घुट्टी के साथ हिंदी को भी पीया है लेकिन घुट्टी को तो स्वीकार लिया परंतु अपनी मातृभ... Read more

️तेरी चाहत कभी ना लौटेगी ️

सालो बाद ऐसा मौका पाया है, बीती मोहब्बत फिर लौट आयी है, उसकी आँखों मे फिर वही नशा है और कहती है कि… सारे रंजो ग़म भुला के आयी है ... Read more

विश्वकर्मा पूजा

विश्वकर्मा पूजा ◆◆◆◆◆◆◆ स्कंद पुराण के अनुसार (1)भाद्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विश्वकर्मा जयंती/विश्वकर्मा पूजन का प्राव... Read more

भारत-भारती से नवाजे गए युवा साहित्यकार रुपेश

बिहार के सिवान जिले के चैनपुर गाँव के मध्यवर्गीय परिवार में जन्मे व भौतिक विज्ञान के छात्र रूपेश कुमार, पुत्र- श्री भीष्म प्रसाद, को... Read more

कुछ भी

किसी ने मुझसे पूछा जिंदगी में और जन्नत में क्या फर्क है मैंने मुस्कुराकर जवाब दिया,यदि जिंदगी मिल जाए तो जन्नत मिल जाती है और जन्नत ... Read more

एक लघु प्रेम कथा

एक बार मेरे मित्र के कोई परिचित एक सुंदर पर्शियन बिल्ली का बच्चा काफी तारीफ़ों एवम किफ़ायती दामों पर मुझे बेंच गए । हम लोगों ने पालतू... Read more

देश का दुर्भाग्य

इसे हमारे देश का दुर्भाग्य ही कहा जाएगा कि जिसकी राष्ट्रभाषा, मातृभाषा, राजभाषा, गरीबों के कामकाज की भाषा... सब कुछ हिंदी है। फिर भी... Read more

पत्र

पत्र ●●● मेरे जीवन साथी हृदय की गहराईयों में तुम्हारे अहसास की खुशबू समेटे आखिरकार अपनी बात कहने का प्रयास कर रहा हूँ।यह सही है क... Read more

धूम्र रेखा

आकाश में उठता धुआं मेरे लिए हमेशा कौतुहल का विषय रहा , वो चाहे किसी ज्वालामुखी के फटने पर उठता हुआ गहन आकाश में विलीन होता धुंआ और... Read more

" हिंदी को रुचिकर कैसे बनायें "

हम सबके लिए विषय नया नही है हम सबने बचपन से घुट्टी के साथ हिंदी को भी पीया है लेकिन घुट्टी को तो स्वीकार लिया परंतु अपनी मातृभाषा हि... Read more

ख़रगोश

मेरी शैशव काल की शेष स्मृतियों में मेरे पड़ोस में मेरी तरह की एक नन्हीं सी लड़की रहती थी जिसका नाम कुसुम था और हम दोनों की उम्र कम ह... Read more

संस्मरण-माँ की महिमा

माँ की महिमा *********** वर्ष 2014 की बात है।उस समय मैं हरिद्वार में लियान ग्लोबल कंपनी में काम करता है। वैसे तो हर... Read more

सोसिओ इकोनॉमिक के मार्क्स मेरिट वाले हकदार बच्चों को खत्म कर रहे है.

सोसिओ इकोनॉमिक के मार्क्स मेरिट वाले हकदार बच्चों को खत्म कर रहे है. --------------------------------------------------------------... Read more

सकारात्मक सोच

सकारात्मक सोच ---------------------- मानव जीवन मैं सोच कि बहुत महत्वपूर्ण स्थान है।जैसी हमारी सोच होगी वैसा ही हमारी बुद्... Read more

कब्ज़

कभी-कभी मुझे लगता है कि मैं दुनिया की हर बीमारी का कारण और उसका निराकरण जानता हूं , मरीज का ठीक होना ना होना उसके भाग्य और भगवान की... Read more

श्रृद्धा सुमन : महान कवयित्री , गद्य लेखिका डा.महादेवी वर्मा

छायावादी कवयित्री, गद्य लेखिका और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी महादेवी वर्मा की आज यानी 11 सितंबर 2020 को 23वीं पुण्यतिथि है। महादेवी... Read more

कंगना कि ललकार और बॉलीवुड की हिंदू घृणा का कारण और विश्लेषण

कहा जाता है कि भारत में हर साल करीब 1000 फिल्में रिलिज होती हैं जो विभिन्न भाषाओं कि होती हैं पर एक भाषा है जो देश में सर्वाधिक बोली... Read more

ॐ गंगा तरंगे

उस समय सावन मास के कृष्ण पक्ष की रात्रि के तीसरे पहर त्रियामा काल में करीब 2:30 बजे मैं बनारस के हरिश्चन्द्र घाट पर खड़ा था । उन दिन... Read more