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Category: लघु कथा

रस्म अदायगी
पति के मृत्यु की सुचना आई थी। साथ ही सन्देश भी,"पत्नी तो तुम ही हो, चिता को अग्नि बड़ा बेटा ही तो देता हैं।" परिवार... Read more
हम (लघुकथा)
हम (लघुकथा) पता नही कब से यें गलतफहमी तुम्हारे दिल में अपना अपना घर बना बैठी । चूंकि इस दिल पर तो केवल मैने अपना... Read more
शरारती बंकू
किसी शहर के समीप एक जंगल था, जिसका नाम सुंदरवन था। उस वन में सारे जानवर ख़ुशी ख़ुशी अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे, उस... Read more
शादीं बिना तलाकं
लघुकथा शादीं बिना तलाकं - बीजेन्द्र जैमिनी कोर्ट में महिला ने शिकायत दी है कि विवाह के समय किये वायदें पूरे नहीं किये गये हैंः-... Read more
माँ - बाप
लघुकथा माँ - बाप - बीजेन्द्र जैमिनी शिव मन्दिर माँ प्रतिदिन जाती है। भगवान से हमेशा एक ही दुआँ मांगती है- हे भगवान ! मेरे... Read more
नारी शोंषण
लघुकथा नारी शोंषण - बीजेन्द्र जैमिनी नारी शोंषण के खिलाफ समाज सेवा करने वाली सरोंज जोंर जोंर एक समारोह में भाषण दे रही है -... Read more
मुहिम
मुहिम कैसे हो पारसजी ?कहते हूँए विमलजी बंगलो की सोसायटी में बने गार्डन की बेंच पर बैठकर बातें करने लगे। "आज जल्दी ऑफिस से ...... Read more
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----------"भानू"-------(लघुकथा) भानू ........... भानु.......... शायद आप भानु सूरज को समझ रहे होंगे लेकिन ऐसा नहीं हाँ इसे कभी उगता सूरज मान सकते थे? ये भानू... Read more
दहेंज के झूठे केस
लघुकथा दहेंज के झूठे केस - बीजेन्द्र जैमिनी जेल में हत्या के मामलें में उम्रकैद काट रहे कैदी से साक्षात्कार लेने पत्रकार पहुँच जाता है... Read more
क्यों ऐसा?
क्यों ऐसा ? विश्वा जल्दी से अपनी कंपनी की बस से उतरती हुई घर के कम्पाउंड में दाखिल हुई ।बाहर ही उसकी सर्वेंट मिली ,... Read more
लघुकथा- माँ हूँ
लघुकथा- माँ हूँ ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश” उर्मि ने डॉक्टर से सुना और परेशान हो गई. फिर उसी तरह समुद्र के किनारे बैठ गई जैसे हमेशा... Read more
मतलबी दुनिया
लघुकथा ------------------ मतलबी दुनिया -------------------- क्या जरूरत थी तुझे इस बाग़ीचे में आने की ?अम्बियों का बहुत शौक है ना तुझे पर तझे ये नही... Read more
दुःख और मजबुरी
लघुकथा दुःख और मजबुरी - बीजेन्द्र जैमिनी फटेहाल युवती को भीख माँगते देखकर दो मनचले लड़के उसके पास आये और बीस रूपय का नोट दिखा... Read more
सुमिरन
सुमिरन ------------- सागर किनारे खड़ा मैं इससे पहले की कुछ संभल पाता.. अचानक से लगभग बीस ....पच्चीस फुट ऊंची एक लहर ने मुझे अपने आगोश... Read more
ईद चली गई
“ईद चली गई अब तो एक साल तक मजे कर यार।” (चितले ने धोलू के अपने सींग अड़ाते हुए और उसे हल्का सा ठेलते हुए... Read more
बुढापा एक अभिशाप
लघुकथा बुढापा एक अभिशाप - बीजेन्द्र जैमिनी मुझे अपने गाँव की याद आई थी । मैनें जल्दी-जल्दी कार्यालय का काम समाप्त कर के मोटर साईकिल... Read more
अपराध
लघुकथा अपराध - बीजेन्द्र जैमिनी वह तेजी से मोटर साईकिल पर जा रहा था । नौजवान लड़की ने आवाज दी - क्या ! आप पुलिया... Read more
पति महोदय
लघुकथा पति महोदय - बीजेन्द्र जैमिनी रोजाना की तरह डाकं खोल खोल कर पढ़ रहा हूँ। एक डाकं खोली तो देखा, अपने ही शहर में... Read more