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Category: लघु कथा

धार्मिक कौन
धार्मिक कौन (लघु कथा) नवरात्रों की शुरुआत हो चुकी थी। घर घर में व्रत उपवास भजन कीर्तन पूजा पाठ आदि से मोहल्ले का लगभग हरेक... Read more
जीवन दान
रोज की तरह मैं आज भी अपने क्लीनिक में समय पर पहुँच गयी थी | क्लीनिक के बाहर सुबह मेरे पहुँचने से पहले ही रोज... Read more
खतरा
खतरा (लघुकथा) उफ्फ आज तो मैं बाल -बाल बचा हूँ। यदि मैं प्लेटफार्म पर न गिरकर सीधा.. पटरियों पर गिर जाता तोआज मेरा पता भी... Read more
रेलर्व लाईन
पार्क में सुबह - सुबह घुम रहाँ हूँ। तभी आगं बुझाने वाली गाड़ी की आवाज सुनाई देती है। मैनें सड़क की ओर देखा - मैं... Read more
कुनबा
देव दानव यक्ष नर नारी सब ने उसकी ओर देखकर मुंह फेर लिया । कचरे के ढ़ेर पर बिलखता शिशु अपने चीत्कार से तीनों लोक... Read more
रस्म अदायगी
पति के मृत्यु की सुचना आई थी। साथ ही सन्देश भी,"पत्नी तो तुम ही हो, चिता को अग्नि बड़ा बेटा ही तो देता हैं।" परिवार... Read more
हम (लघुकथा)
हम (लघुकथा) पता नही कब से यें गलतफहमी तुम्हारे दिल में अपना अपना घर बना बैठी । चूंकि इस दिल पर तो केवल मैने अपना... Read more
शरारती बंकू
किसी शहर के समीप एक जंगल था, जिसका नाम सुंदरवन था। उस वन में सारे जानवर ख़ुशी ख़ुशी अपना जीवन व्यतीत कर रहे थे, उस... Read more
शादीं बिना तलाकं
लघुकथा शादीं बिना तलाकं - बीजेन्द्र जैमिनी कोर्ट में महिला ने शिकायत दी है कि विवाह के समय किये वायदें पूरे नहीं किये गये हैंः-... Read more
माँ - बाप
लघुकथा माँ - बाप - बीजेन्द्र जैमिनी शिव मन्दिर माँ प्रतिदिन जाती है। भगवान से हमेशा एक ही दुआँ मांगती है- हे भगवान ! मेरे... Read more
नारी शोंषण
लघुकथा नारी शोंषण - बीजेन्द्र जैमिनी नारी शोंषण के खिलाफ समाज सेवा करने वाली सरोंज जोंर जोंर एक समारोह में भाषण दे रही है -... Read more
मुहिम
मुहिम कैसे हो पारसजी ?कहते हूँए विमलजी बंगलो की सोसायटी में बने गार्डन की बेंच पर बैठकर बातें करने लगे। "आज जल्दी ऑफिस से ...... Read more
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----------"भानू"-------(लघुकथा) भानू ........... भानु.......... शायद आप भानु सूरज को समझ रहे होंगे लेकिन ऐसा नहीं हाँ इसे कभी उगता सूरज मान सकते थे? ये भानू... Read more
दहेंज के झूठे केस
लघुकथा दहेंज के झूठे केस - बीजेन्द्र जैमिनी जेल में हत्या के मामलें में उम्रकैद काट रहे कैदी से साक्षात्कार लेने पत्रकार पहुँच जाता है... Read more
क्यों ऐसा?
क्यों ऐसा ? विश्वा जल्दी से अपनी कंपनी की बस से उतरती हुई घर के कम्पाउंड में दाखिल हुई ।बाहर ही उसकी सर्वेंट मिली ,... Read more
लघुकथा- माँ हूँ
लघुकथा- माँ हूँ ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश” उर्मि ने डॉक्टर से सुना और परेशान हो गई. फिर उसी तरह समुद्र के किनारे बैठ गई जैसे हमेशा... Read more