लघु कथा

मैं अपनी राय से परेशान था

हर एक की किसी वस्तु, व्यक्ति,परिस्थिति, घटना के बारे मे एक खास राय होती है। कभी कभी हम उसे जाहिर नही करना चाहते । और कभी कभी ह... Read more

मेरा पहली बार कविता लिखने का अनुभव

बात उस जमाने की है जब मैं आठवीं कक्षा का छात्र था। एक दिन क्लास टीचर ने आकर बताया कि स्कूल की मैगज़ीन छपेगी। छात्रों को अपनी स्वरचित ... Read more

उपहास

एक शादी समारोह में खाने की प्लेट हाथ मे ली ही थी कि पीछे से एक परिचित सज्जन ने आवाज़ दी। कैसे हो? मैंने अभिवादन किया । उनकी नज़र ... Read more

" रिश्ता प्यार का "

प्रतिमा : जब समझती है तो बहस क्यों कर रही है चुप रह... सुधा : बसह कहाँ कर रही हूँ मैं तो रिक्वैस्ट कर रही हूँ प्लीज़ भाभी मेरी बात क... Read more

वादा

बहुत हिल हुज्जत के बाद पिता ( रंजना यानी मै ) मेरे अंतरजातीय विवाह के लिए राज़ी हुये थे परंतु एक बात उन्होंने ख़ास करके कही कि " तुम स... Read more

" एहसान मंद "

खाना बनाते हुये मीरा को बगल की खिड़की से हु हु की आवाज़ सुनाई दी पलट कर देखा तो एक बंदरिया अपने नन्हे से बच्चे को छाती से चिपकाये हुये... Read more

अविस्मरणीय स्वाद

सन् 1976 -77 की बात थी इलाहाबाद के पास एक जगह है घूरपूर वहाँ ग्लास फैक्ट्री में पिता कार्यरत थे...उस दिन सभी बड़े उत्साहित थे पाँच फै... Read more

कोरोना-प्रकृति से छेड़छाड़

काश हमने प्रकृति से छेड़छाड़ न की होती तो यह कोरोना वायरस जैसी महामारी का सामना न करना पड़ता।ईश्वर की बनाई रचना को ही हम चुनौती देने लग... Read more

" खादी वस्त्र नही विचार है "

बचपन में जब भी खादी आश्रम जाती वहाँ लिखा पढ़ती " खादी वस्त्र नही विचार है " ये बात उस उम्र में सर के उपर से निकल जाती ! खादी जीवन में... Read more

अरेऊआ - परेऊआ

लघु लोककथा एक राजा था अपनी रानी और प्रजा के साथ खुशहाल जीवन जी रहा था राज्य में एक नदी थी सदियों से नदी के उस पार जाने की इजाज़त न... Read more

नारी पर के बाबू जी

संस्मरण जब भी छुट्टियों में गाँव जाते बड़की अम्माँ और चाची लोगोंके बीच नारी पर के बाबू जी सर पर साड़ी के पल्ले की तरह गमछा लपेटे ... Read more

" माँ की सीख "

सन् 1970 में हमें कलकत्ता छोड़ बनारस आना पड़ा...कलकत्ता निवास के दौरान ही पिता जी ने बनारस में ज़मीन खरीद ली थी | पिता जी कलकत्ते ही रू... Read more

मेरे ठाकुर जी

सरला आंटी माँ से मिलने आईं थी दोनों एक दूसरे का सुख - दुख कह - सुन रहीं थीं मैं नाश्ता टेबल पर रख उन दोनों लोगों को बुलाने गई... " आ... Read more

पांडे जी की चाहत

पहले सब्जी लाने के लिए नाक भौ सिकोड़ने वाले पांडे जी आज कल बिन कहे ही सब्जी मार्केट जाने को उतावले रहने लगे। जानबूझ ... Read more

किताबी दोस्ती

मैं अक्सर बेहतर तलाश कर ही लेती हूँ, इन किताबों की भीड़ में! एक बेहतर किताब को अपना दोस्त बना ही लेती हूँ । हाँ... मेरा कोई दोस्त न... Read more

बेफिक्र सफर

मेरा सफर कभी रुका ही कहां , वो मुझे रोकना चाहता है , और में ज़िन्दगी की रफ्तार के साथ बस दौड़ना , रुक कर वो ठहरे रहना चाहता है , और ... Read more

एक बात

कहानियां कविताएं लिखना उसे भी पसंद था, और मुझे भी l सांझ का घूमना उसे भी पसंद था, मुझे भी l हर सांझ हम तालाब किनारे पगडंडी वाले कच्च... Read more

एक शाम

मुद्दतों बाद दिखी वो एक शाम, इस अजनबी शहर के बाजार में । अजनबी, मेरे लिए तो अजनबी शहर ही है । अभी आए 1 महीना भी कहा हुआ था । बिल्... Read more

मुझे याद है

मुझे याद है...... जब तुम मेरा हाथ मांगने आये थे I थोडा घबराये और कितना शरमाये थे I बाते करने में भी तुम कितना हिचकाये थेl जब में... Read more

ये अनोखे रिश्ते

ये हिचकियाँ भी ना जाने किसकी यादो की दस्तक आज सुबह सुबह ही दे रही है. माँ कब से कह रही है कि, पानी पिले ।।मगर मैं हु कि कब से चाय का... Read more

उसके साथ क्या हुआ था !

मुझे प्रेम लिखना पसंद था और उसे प्रेम की कहानियों से नफ़रत l कहती थी ये कहानियां महज, सिर्फ एक ख्याल है जिसे तुम शब्दों से बुनते ह... Read more

अकेले पन की दास्तां

अक्सर हम जब अकेले होते है , कुछ ज्यादा ही सोचते है। और सोच का ये दायरा रात में कुछ ज्यादा ही बढ़ जाता है । फिर कुछ ज्यादा ही खयाल ... Read more

मजबूरी

बुढ़ी दादी ( हम सब उसको इसी नाम से बुलाते थे ) छाड़ू - पोछा - बर्तन करती थी उस दिन भी रोज की तरह अपना काम कर रही थी पेपरवाले का पैसा द... Read more

दुकान का चैक

शादी हुये एक महीना ही हुआ था सयुंक्त परिवार लेकिन कमान एक के हाथ में वो थीं दादी सास...सही - गलत कुछ भी उनकी निगाहों से बच नही सकता ... Read more

लाक डाउन

अलका बहुत परेशान थी।कुछ समझ नहीं पा रही थी की क्या करें क्या न करें पति की नौकरी भी छुट गई थी पति एक फैक्ट्री में सुपर वाइजर थे मगर ... Read more

मिशाल

इलेक्शन का समय था दोनों पार्टियों का प्रचार पुरे जोर शोर से चल रहा था पुरे मुहल्ले की दीवारों पर पोस्टरों की भरमार थी हर पार्टी को ल... Read more

" अंधविश्वास नौ दो ग्यारह "

स्मृति के पिता का चार भाईयों का परिवार था सबसे छोटे चाचा थोड़ा बिगड़ गये थे कई - कई दिन घर - गाँव से गायब रहते...इस बार होली मनाने स्म... Read more

भविष्य की कहानी

रमेश के गांव में एक दिन राशि देखने वाले बाबा आये हुए थे (जो वर्ष में एक या दो बार माताजी के नाम से गांव से आटा या गेंहू एकत्र करते ह... Read more

हाथी के दाँत

सब अपने अपने हिसाब से कोरोना पर अपने विचार व सुझाव प्रकट कर रहे थे फ़लाना...ढिमाका...कोई video पोस्ट कर रहा है कोई voice mail भेज रह... Read more

तकिये के निचे की पूड़ी

बूढ़ी दादी बिमारी से जर्जर हो चली थीं बार - बार बच्चों की तरह थोड़ी - थोड़ी भूख लगती वो और सारी इक्षाओं पर तो काबू कर लेतीं पर ये मुयी ... Read more

बड़ा हुआ तो क्या हुआ

व्यक्ति पद-प्रतिष्ठा,धन-शिक्षा,उम्र व अनुभव में बड़ा होता है। बड़े व्यक्ति को लगता है कि उससे छोटे व्यक्ति को ही उसकी जरूरत पड़ेगी प... Read more

नया पकवान

एक महान राजा के राज्य में एक भिखारीनुमा आदमी सड़क पर मरा पाया गया। बात राजा तक पहुंची तो उसने इस घटना को बहुत गम्भीर मानते हुए पूरी ज... Read more

कमाऊ बेटा

#कमाऊ बेटा#( पितृ दिवस पर विशेष) हैलो,कौन ? कैसे हो बिभोर बेटा? अरे पापा! आप,मैं बिल्कुल ठीक हूँ । आप सब कैसे हैं ? हम सब भी ठ... Read more

ईनाम

#ईनाम # फोन की घंटी बजने पर जब सविता ने फोन रिसीव किया तो उधर से आवाज़ आई- "हैलो सविता, मैं नेहा बोल रही हूँ।" "अरे ! मेम साहब ,आप... Read more

पहली तनख्वाह

आज रमा बहुत खुश थी सुबह जल्दी नींद खुल गई । रात भी ठीक से हो नहीं पाई कल के इंतजार में नींद ही कहां आई थी , जल्दी से तैयार हुई और घ... Read more

लगता है मम्मी सुधर गई

***********{ लगता है मम्मी सुधर गई}************ ******************************************** शर्मा जी का फार्म हाउस काफी ब... Read more

लघु कथा।

हमें गर्व है ! एक तरफ करोना अपनी चरम सीमा पर था, वहीं चीन का दगा ! भारत देश को दुश्मनों के साथ -साथ कुछ देश के अंदर के दुश्मनों स... Read more

लघुकथा संतान

लघुकथा संतान इस बार गर्मी आयी थी अपनी माँ से मिलने..... ‘‘क्या हुआ माँ तुम तो लोहे की तरह तप रही हो तुम्हारा ताप तो दिन पर दिन... Read more

"साथियों संग नवजीवन की शुरुआत"

आज भी रेवा ने दौड़ते-भागते मिनी बस पकड़ी और वह खड़े-खड़े थक गई थी। इतने में अगले स्‍टॉप माता मंदिर पर दो सीट खाली हुई, उसे बैठने को ... Read more

प्रकोप

सबेरे से मौसम ठीक ही ठाक था। ये दुपहरी को सूरज देवता को क्या ग्रहण लगा कि अंधियारा - सा हो उठा। झोंपडी से बाहर झांका तो भैरू काका ... Read more

अ-शादी

एक-दूसरे से वे दोनों कई वर्षों से प्रेम करते थे । दोनों के बालिग हुए भी कई बरस हो गए थे। इसबार की होली में दोनों खूब होली खेले थे, प... Read more

मानव बम

दूसरे देश के लिए अपने देश के लोगों ने इतिहास का सबसे क्रूरतम हत्या कर डाली ! 'मानव बम' ने इतना लील लिया राजीव को..... चेन्नई से सुदू... Read more

नून के साथ अमफक्के

कोरोना का कहर या लॉकडाउन का असर कहिये जनाब कि इसबार 'आम' आमलोगों के लिए नहीं रहा ! आम के बच्चे यानी टिकोले वहीं बगीचे में कैद है ! ट... Read more

पाशविक भाई

बहन ने धर्मभाई के कलाई पर राखी बाँधी, चन्दन की टीका लगाई, आरती उतारी और महिमा-मंडित, प्रेम-पुष्पित 'कर' से मिठाई खिलाई । न परिचय, न... Read more

दिलदार स्पीकर

एक प्रतियोगी छात्र और उनकी माँ जो तलाकशुदा महिला थी, एक मोटिवेशनल स्पीच देनेवाले शख़्सियत के पास आये और उन दोनों के लिए 'फ्रस्ट्रेशन'... Read more

भीड़ में हत्या

सम्पूर्ण देश में दो अक्टूबर से पूर्णरूपेण खुले में शौचमुक्त होने की सरकारी घोषणा हुई, उसी दिन बिहार में बाढ़ के कारण खुले में शौच कर ... Read more

सूरज पर अँधेरा हावी

चमगादड़ों की सभा देर रात में हुई और सर्वसम्मति से उल्लू को सभाध्यक्ष बनाया गया तथा उन्होंने सर्वमंत्रणा कर यह प्रस्ताव पारित किया कि ... Read more

एग्जाम कैंसिल

बाबूजी ने विजय की वकालत करने की बात मान ली थी । एलएलबी के अंतिम साल की परीक्षा भी महीने भर बाद होती, लेकिन जब किस्मत में करिया कुत्त... Read more

नियम से बंधे दशानन

दशानन आज परेशान है और बाइक पर बदहवास भागे जा रहा है, इस कारण से नहीं कि उनकी आज हत्या होगी, क्योंकि उसे मालूम है कि प्रत्येक साल 'दश... Read more

अर्थशास्त्र जी !

जब से सोशल मीडिया का चस्का लगा है, कई विचारों से अवगत हो रहा हूँ. कहीं से प्रेम मिल रहा है, तो कहीं से दुत्कार ! सभी फ़ेसबुकियों का ट... Read more