लघु कथा

लल्ली शीरू

तुम तो कहते थे! मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूं फिर इतनी छोटी सी ख्वाइश पूरी नहीं कर सकते?विड़ियो काॅलिंग पर बात करते हुए दोनो... Read more

टूटे तारे

टूटे तारे -ख़ान इशरत परवेज़ "क्या लाऊँ, साहब?" बड़ी ही नम्रता से उसने पूछा. मैने सुबह के अखबार पर... Read more

कानून का फैसला

लघुकथा कानून का फैसला ************** रामधनी बहुत गरीब था।किसी तरह मेहनत मजदूरी कर अपना और अपनी पत्नी का जीवन यापन करता था... Read more

पड़ोसियत

आज सुबह उठतेही, मैं मेरा रोज का काम करने मतलब पानी भरने घर के बाहर निकली| अपने दो गुंडी उठाके बड़ी माँ के घर के नल के पास पोहच गई| नल... Read more

मुझे कुछ कहना है

मुझे कुछ कहना है -----/-----/-----/----- बहुत दिनों से सोच रहा हूँ कि आप से कुछ बात करूँ।पर डरता था कि कहीं आप मेरी किसी भूल का गु... Read more

भीख

भीख ★★★★ कहते हैं लाचारी इंसान को कितना बेबस बना देती है।कुछ ऐसा ही मि.शर्मा को अब महसूस हो रहा है। कहने को तो चार ब... Read more

चुनौती

चुनौती --------- राम की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी,फिर भी वो अपनी बेटी की अच्छी शिक्षा के लिए हर संभव प्रयास करता रहता रहता। बेट... Read more

छाँव

अनुराधा का आज सम्मान समारोह था | पूरे गांव में ख़ुशी का वातावरण था | मुख्यमंत्री और और कई मंत्री आये | पर्यावरण के लिए म... Read more

बब्बर शेर

मैं बड़े मनोयोग से अपनी नई ग़ज़ल का शेर लिखने लगी हुई थी। पूरा ध्यान उसी पर केंद्रित था। एक दमदार शेर दहाड़ने ही वाला था कि कानों में ब... Read more

वीभत्स दृश्य

वीभत्स दृश्य ********** रात गहरी होती जा रही थी।रेलगाड़ी अपने पूरे वेग से दौड़ रही थी।दिसम्बर की उस भीषण ठंड में यात्री अपनी अप... Read more

ये कैसा श्रद्धाभाव

ये कैसा श्रद्धाभाव? ************ इस समय पितृ पक्ष चल रहा है।हर ओर तर्पण श्राद्ध की गूँज है।अचानक मेरे मन में एक सत्य घटना घूम गई। ... Read more

" डर "

सांय - सांय सर्द हवा के साथ बारिश भी झमाझम हो रही थी महक को महसूस हुआ की मोहन ( सहायक ) की गलती से कहीं की खिड़की खुली रह गई है । मोह... Read more

** वो साइकिल **

वो साइकिल //दिनेश एल० "जैहिंद" चावल से सफेद कंकड़ बीनते हुए रामदीन की पत्नी ने कहा- "बीस रूपये दे जाते तो थोड़ी दाल व कुछ आलू मँ... Read more

खेल

लघुकथा शीर्षक - खेल =================== "अरी मुनिया जल्दी चल खेलने, रमिया, छुटकी, सोहना, राजू सभी आ गये हैं चौंतरे पे l किल्ली ... Read more

माँ का श्राद्ध

लघुकथा शीर्षक - माँ का श्राद्ध ============== " सुनिए जी, आज अपने घर में क्या हो रहा है? बहू बेटा बड़े खुश दिख रहे l कुछ ब्राह्म... Read more

सूखी रोटियाँ

लघुकथा शीर्षक - सूखी रोटियाँ ================== "ओये सुनील क्या लाया टिफिन में" "कुछ नहीं अनुज, वहीं माँ की बनाई रोटी की रोल" ... Read more

बाबूजी

बाबू जी ---------- आज साक्षरता वाले बाबूजी(लोग उन्हें इसी नाम से जानते थे)के निधन से पूरा का पूरा क्षेत्र शोक के सागर डूबा... Read more

भ्रम

भ्रम --------- शुभम बारहवीं का छात्र था।देर रात तक पढ़ता रहता था।क्योंकि परीक्षा अब सिर पर थी।कमरे में वो अकेले पढ़ता सोता था,जिससे... Read more

मारवाड़ी हास्यरस

दृश्य १ परसा, किसी के बेटे के तिलकोत्सव से नंगे पांव भुनभुनाते हुए तेजी से घर की ओर लौट रहा था। रास्ते में एक घर के बरामदे मे... Read more

फुलपैंट

रवि कांत चौबे जी १९६६ में जब कोलकाता राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई के लिए आये, तो कुछ दिन अपने रिश्तेदार के पास बैरकपुर मे... Read more

तीर्थयात्रा

संस्मरण ----------- तीर्थ यात्रा ------------ बात 2010 की है।मैं अपने ही शहर में एक कारपोरेट कं.में फील्ड वर्कर की हैस... Read more

" ब्याज का बोझ "

देखो निशाना चूकना नही चाहिए प्रमोद गीता से बोल रहा था...( गीता प्रमोद के बड़े पिता जी की बेटी जो कलकत्ते से गाँव आई थी ) , और निशाना ... Read more

सुधार

"सुधार"........ --- --"मम्मी ! पता है आज क्या हुआ ?" खुशी घर में घुसते ही चहकते हुए बोली । --"हाँ! बताओ बेटा । क्या हुआ ?" --"आज... Read more

वो भी क्या दिन थे

वो भी क्या दिन थे -----------^^--------- बात उन दिनों की है जब मैं घर से पाँच किमी.दूर 6 से 10 तक की पढ़ाई करने इंटल कालेज में जाते... Read more

खून का रिश्ता

सड़क के किनारे खून से लथपथ पड़े हैप्पी सिंह पर जब शिशिर की अकस्मात नज़र पड़ी तो वह उन्हें अस्पताल लेकर पहुँचा और उन्हें भर्ती कराया... Read more

खून का रिश्ता

सड़क के किनारे खून से लथपथ पड़े हैप्पी सिंह पर जब शिशिर की अकस्मात नज़र पड़ी तो वह उन्हें अस्पताल लेकर पहुँचा और उन्हें भर्ती कराया... Read more

वृक्षारोपण

संस्मरण ''''''''''''''''''''' वृक्षारोपण ---//---/--- बात शायद 1977-78 की है।उस समय मैं तीसरी या चौथी कक्षा में था।उस समय मेरा प... Read more

" अपनी ही गरिमा खोती स्त्री "

आज दोपहर के खाने पर रीदिमा की चाची सास अपने बेटी दमाद के साथ उसके घर आ रहे थे , आ तो वो मुंबई से दो दिन पहले ही गये थे लेकिन सबसे मि... Read more

प्रथम पुरस्कार

संस्मरण ----------- प्रथम पुरस्कार -----/-----/----- बात 2016 की है।जब मेरी बड़ी बेटी संस्कृति जी.वी.एम.कान्वेंट स्कूल, ब... Read more

एक लघु कथा: शीर्षक"ओह"

देखें एक लघु कथा 🙏🙏🙏🙏🙏 शीर्षक:-"ओह" नितिन और नीरज दो जुड़वां भाई थे।नीरज बहुत ही कुशाग्र बुद्धि का था जबकि नितिन पढ़ने में उस... Read more

फैसला

फैसला ~~~~ गांव में आज खूब उत्साह था।आज ताजिया चौक पर रखी जाने वाली थी। गांव में केवल छ: घर हिंदुओं के थे।मुसलमानों के लग... Read more

भाषा का बोझ

गांव की राजस्थान क्लब के सदस्यों द्वारा कुछ दिनों बाद एक नाटक का मंचन होना था। ये क्लब हिंदी भाषियों की सांस्कृतिक गोष्ठी की जगह... Read more

" एहसास "

राजीव को किसी काम से एक महीने के लिए दिल्ली जाना पड़ा , पहली बार एक साथ इतने लंबे समय के लिये घर से बाहर जा रहा था...दिल्ली में मौसेर... Read more

अदला - बदली

मीता अपने पॉटरी की वर्कशाप के लिए दोनो बच्चों पति और बड़ी दीदी के साथ जयपुर जा रही थी लेकिन स्टेशन पहुँचने से पहले ही उसकी दीदी का फो... Read more

भगवान ने बचा लिया

सच्ची घटना ======== भगवान ने बचा लिया ============== घटना अक्टूबर 1989 की है।मैं अयोध्या में कमरा लेकर रह रहा था।उस स... Read more

ईमानदार चोर

मेरी मंझली बहन की शादी तय हो चुकी थी, 10 दिन बाद शादी थी। घर में बहुत गहमागहमी का माहौल था। दूर-दूर से रिश्तेदार आने लगे थे। उनकी ... Read more

समाधान

समाधान ====== बेटी की शादी के लिए दहेज को लेकर परेशान बाप ने बेटे के साथ मिलकर इस बड़ी और गम्भीर समस्या का सरल समाधान ढूंढ लिया। ब... Read more

स्याही

उस वक्त प्राथमिक विद्यालय से उच्च विद्यालय पहुंचने के बीच एक बोर्ड की परीक्षा की दीवार होती थी। उसको फलांगने पर ही उच्च विद्यालय म... Read more

दयाशंकर जी की अलौकिक शक्तियाँ

लगभग ६०-७० वर्ष पहले की बात होगी। पंडित दयाशंकर जी का गांव मे काफी रुतबा था। विद्वान और कर्मकांडी थे। गांव के शिव मंदिर में पुजारी... Read more

अजनबी भीड़

सूनी आँखों से आकाश को निहारती विभा न जाने क्या सोच रही थी कि अचानक उसका अतीत किसी भयंकर भूकंप की तरह उसके शरीर को तरंगित कर गया। पल ... Read more

शहादत

लघु कथा ..... *शहादत* ========== हां! वह बहुत डरपोक था, लड़ाई के नाम से वो अंदर तक कांप ही तो जाता थ... Read more

बहूरानी

अरे नही...ये क्या कर रही हो ? सुमित्रा के विवाह को पंद्रह दिन हो चुके थे घर मेहमानों से खाली हो चुका था , उसने सोचा आज मम्मी ( सासू ... Read more

आपके लिए

आपके लिए ~~~~~~~ रीमा ससुराल से विदा होकर पहली बार मायके आयी।मांँ बाप भाई बहन सब बहुत खुश थे।हों भी क्यों न? अपनी सामर्... Read more

डर।

मैं 15 साल था और मैंने एक स्कूल से दूसरे स्कूल में दाखिला लिया था। मैं बड़ा ही खुश था। नये स्कूल में जाने के लिए। पूरी रात यही सोचता... Read more

यह वेशभूषा ही मेरा रेल टिकट है(लघुकथा)

गेरुआ वस्त्र गले में माला त्रिपुंड एक झोली संत तेजी से आ रहे थे, शायद उन्हें यही ट्रेन पकड़नी थी, जिससे मैं उतरा था। पास आते ही मैंन... Read more

बेटी के घर का पानी

पुरानी मान्यता थी कि एक बार जिस घर बेटी ब्याह दी , फिर उस घर का पानी भी नहीं पिया जाता था। इसके पीछे का तर्क तो नहीं मालूम, कुछ रहा... Read more

इन्सानियत

स्वतंत्रता दिवस पर झंडा वन्दन के लिए मयंक तैयार हो कर आफिस जा रहा था । वह संचालक था , इसलिए झंडा वन्दन उसे ही करना था । मयंक अ... Read more

दुकानदार का हिसाब किताब

गांव में उन दिनों चोरी डकैती आम बात थी। डकैत जब मन करता धमक पड़ते , दो चार को लूटते और धमकी देते हुए निकल पड़ते कि खबरदार जो पुलिस को ... Read more

आत्मग्लानि बोध से मुक्ति

वैसे तो अनूप एक सीधा साथ लड़का ही था। पढ़ने लिखने में भी ठीक ही था। सांतवीं की छमाई की परीक्षा हो चुकी थी। विद्यालय के मैदान में उसक... Read more

सोचमग्न

लोधा जी को कुछ न कुछ सोचने की बीमारी थी। पता नही अपने खयालों मे डूबे विचारों के गहरे सागर की किस तह पर बैठे रहते थे कि प्रत्यक्ष मे ... Read more