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Category: कुण्डलिया

वन्दन है
वन्दन है उस गर्भ का जहाँ रहा नौ मास। जननी का मुझको प्रभो! मात्र बना दो दास। मात्र बना दो दास, पिता की सेवा कर... Read more
कुण्डलिया
बिन मोबाइल हाथ में, रहे न ऊंची शान, जपूँ फेस बुक रोज मैं, व्हाट्स एप में ध्यान। व्हाट्स एप में ध्यान , दाल चूल्हे पर... Read more