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Category: कव्वाली

पढ़ना लिखना छोड़ दिया मैंने
--पढ़ना लिखना छोड़ा मैंने--- ___________________________ हाँ पढ़ना लिखना छोड़ दिया मैंने पढ़ें लिखों को पीछे छोड़ दिया मैंने बहुत कुछ सीख लिया मैंने बहुत पढ़ा... Read more
मुक्त छन्द रचना -कालजयी बन जाएँ
कालजयी बन जाओ: एक यथार्थ परक मुक्त छन्द कविता-समीक्षार्थ: अभी -अभी स्वानुभव पर आधारित, विशिष्टतया नकारात्मक सोच वालों के नाम पाती. विमर्श के लिए" 000... Read more
भारतीय फौज
???????????????????? आम नहीं इनकी जिंदगी, मौका है हक अता करने का किस्मत वालों को मिलता, मौका ये वतन पे मिटने का ?????????? ???????????????????? अमृत का... Read more
अगर भगवान तुम हमको, कही लड़की बना देते
अगर भगवान तुम हमको, कही लड़की बना देते जहाँ वालों को हम अपने, इशारो पर नचा देते|| पहनते पाव मे सेंडल, लगाते आँख मे काजल... Read more
मुक्ति
कर्म योग्यता और संस्कार सबसे ऊपर मेरा प्यार निस्वार्थ प्रीत जो मन लाये मैं मेरा उसका मिट जाये चाहे कोई विकट हो मेरा भक्त मुझे... Read more
मुक्ति
कर्म योग्यता और संस्कार सबसे ऊपर मेरा प्यार निस्वार्थ प्रीत जो मन लाये मैं मेरा उसका मिट जाये चाहे कोई विकट हो मेरा भक्त मुझे... Read more
तेरा इंतजार
जो देखा था तेरे इंतजार में टूटता पत्ता उस पेड़ से जो सुख गया था बरसात के इंतजार में माली बेखबर सो गया तपती धुप... Read more
पलाश का साधुत्व
ऐ पलाश! मैंने देखा है तुम्हें फूलते हुए, देखा है मैंने- तुम्हारी कोंप-कोंप से प्रस्फुटित होते- यौवन को.. मैंने देखा है, तुम्हें वर्ष भर फाल्गुन... Read more
कव्वाली :-- तेरी दीवानगी की हद सरहद पार ले आई !!
कव्वाली :– तेरी दीवानगी की हद अनुज तिवारी “इन्दवार” एक तरफ बहता है दरिया एक तरफ है गहरी खाई !-५ नहीं मिलती यहाँ राहत ,... Read more