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Category: कविता

गजल
इस जिन्दगी मैं क्या है दरिया सी रवानी है मौजो को बता देना लगती ये सुहानी है ।। अल्फ़ाज पुराने हैं , अंदाज नये से... Read more
वजूद
---वजूद--- पेड़ पर अटकी पतंग , कितनी कोशिश करती है ,छूटने की रिहा होने की , पर हर बार स्वयं के भरसक प्रयास के बावजूद... Read more
जीवन साथी
छीना मेरे अधिकारो को बोलो तुमने क्या पाया साथी बन यूं साथ चले साया भी साथ न आया पलट गया समय आज अब हम से... Read more
अनकही
छीन मेरे अधिकारो को बोलो तुमने क्या पाया साथी बन यूं साथ चले साया भी साथ न आया पलट गया समय आज अब हम से... Read more
अपेक्षायें
भाईयों-बहिनों को चाहिए, भाई ज़िम्म़ेवार। माता-पिता को पुत्र पूरा। समाज को इंसान जो जिए दूसरों के लिए । देश को चाहिए सच्चा देशभक्त । मित्रों... Read more
बचपन
मैं अक्सर सोचती हूं रात के गहरे अंधेरो में न जाने क्यूं वो बीते पल अभी भी मुझमें ज़िंदा हैं मुझे अक्सर ही लगता है... Read more
लेखनी का कागज से स्पर्श
लेखनी का कागज से स्पर्श अपने अनुभबों,एहसासों ,बिचारों को यथार्थ रूप में अभिब्यक्त करने के लिए जब जब मैनें लेखनी का कागज से स्पर्श किया... Read more
" तितली और नन्ही हथेली " ---------------------- अहा ! रंग बिरंगी तितलियाँ । अहा ! सुंदर सुंदर तितलियाँ ।। सहसा मन में बोल पड़ी ।... Read more
मैं बस एकबार..
मैं बस एकबार मिलना चाहता हूँ तुमसे , ओ मेरे दिलदार.. भुलाकर शिकवे सारे, भुलाकर दुनिया का दाह लिपटकर गले से तुम्हारे रोना चाहता हूँ... Read more
शरद ऋतु के जंगल
शरद ऋतु के जंगल भोर की मुस्काती बेला में कोहरे की पतली सी चादर में रवि रश्मि के स्वागत को आतुर घने घने से मिले... Read more
तुम और पक्षी
तुम्हें अच्छी नहीं लगती, पक्षियों की स्वच्छंद उड़ान, क्योंकि-तुम उड़ ही नहीं सकते। तुम्हें भाता नहीं है, पक्षियों का निडर होकर चहकना । क्योंकि-तुम जहाँ... Read more
स्तब्ध
छवियां तो धूमिल हो जातीं हैं पर प्रेम समर्पण अब देखा अंतर्मन भी मौन हुआ उसका ये अर्पण देखा किंकर्त्तव्यविमूढ़ सी तकती आंखें ने ये... Read more