Skip to content

Category: कविता

बंधन
बँधन भँवरा देख मुसकराने लगा कलियन से बतराने लगा मृदु मुस्कान बिखेर कुछ कुछ सकुचाने लगा आ जाओ प्रिये दिवस का अवसान हो चला रात... Read more
अच्छे दिन आएँगे
मोदी सरकार जब करेगी सबके सपने साकार तब अच्छे दिन आएँगे । मोदी सरकार देगी जब योजनाओं को पूर्ण आकार तब अच्छे दिन आएँगे ।।... Read more
दोधक छंद
211 211 211 22 साजन-साजन रोज पुकारूँ आँगन-आँगन द्वार निहारूँ। पीर नहीं सजना अब जाने भूल गये अब क्या पहचाने।।
चौपाई
जीवन अपना फूलों-सा है जीना लेकिन शूलों-सा है। जो भी शूलों पर है चलता जीवन में फूलों-सा खिलता।।
दीदार अधुरा था
हूश्न के द्वार पर देखा, हूश्न जुल्फों में उलझा था! मिला दिल को सुकूं कि, ऐसा हमने नजारा देखा था! उसकी भीगी जुल्फों में, आंखें... Read more
गजल
इस जिन्दगी मैं क्या है दरिया सी रवानी है मौजो को बता देना लगती ये सुहानी है ।। अल्फ़ाज पुराने हैं , अंदाज नये से... Read more
वजूद
---वजूद--- पेड़ पर अटकी पतंग , कितनी कोशिश करती है ,छूटने की रिहा होने की , पर हर बार स्वयं के भरसक प्रयास के बावजूद... Read more
जीवन साथी
छीना मेरे अधिकारो को बोलो तुमने क्या पाया साथी बन यूं साथ चले साया भी साथ न आया पलट गया समय आज अब हम से... Read more
अनकही
छीन मेरे अधिकारो को बोलो तुमने क्या पाया साथी बन यूं साथ चले साया भी साथ न आया पलट गया समय आज अब हम से... Read more
अपेक्षायें
भाईयों-बहिनों को चाहिए, भाई ज़िम्म़ेवार। माता-पिता को पुत्र पूरा। समाज को इंसान जो जिए दूसरों के लिए । देश को चाहिए सच्चा देशभक्त । मित्रों... Read more
बचपन
मैं अक्सर सोचती हूं रात के गहरे अंधेरो में न जाने क्यूं वो बीते पल अभी भी मुझमें ज़िंदा हैं मुझे अक्सर ही लगता है... Read more