कविता

ग्राम्य जीवन

इन गांवों में मिलती है जीवन की परिभाषा। आशाओं को घेरे बैठी मन की घोर निराशा। मरता हुआ हर इंसान रखता जीने की अभिलाषा। संध्या समय ... Read more

भारत के वीर सपूत

दिनांक 13/6/19 न तपती रेत की न अपने तन की चिन्ता चिन्ता है तो बस अपने देश की कैसी भी सरहद बर्फ की आग की हर जगह बेखौफ़ है ... Read more

रोजगार चाहिए , नौजवानों को

दिनांक 13/6/19 विधा छंदमुक्त कविता भटकता नौजवान शहर शहर गली गली उम्मीदों के महल न ठौर न ठिकाना लुहावने मज़मून न सांस लेने... Read more

गूँजने दो किलकारियाँ बचपन की

काग़ज़ की नाव बनाकर तैरता हूँ सागर पार तक। काग़ज़ का फूल बनाकर चूमता हूँ अकसर सार तक।। बचपन का खेल सिखाए जीतना हर बाजी प्यार की। ... Read more

945 तेरे लफ्ज़ तेरी बातें

तेरे लफ्ज़ों ने दर्द दिया मुझको, तेरी बातों ने गम। फिर उन्हीं बातों, उन्हीं लफ्ज़ों ने लगाया मरहम। क्यों ऐसा होता है, ए मेरे सनम... Read more

माँ मकान तो पिता नींव है

माँ ने तो बस क्षीर पिलाया पिता भी सम्बल देता है माँ ने सच-झूठ में फ़र्क बताया पिता आत्मबल देता है माँ की महिमा की गाथा सब ग्रंथों... Read more

गलती भी कर रही है, और फैसला भी सुना रही है...

भटकी वो और भटका मुझे रही थी, समाज के सामने, झुठला मुझको रही थी, जुबां बदलती रही, मेरे खिलाफ, हर मुलाकात पे वह, हर रिश्तों ... Read more

न रचो कोई चक्रव्यूह साधो

दिनांक 12/6/19 चक्रव्यूह इन्सान रचता रहता है चक्रव्यूह हमेशा अपनों फंसाने के लिए नहीं छोड़ता कोई कसर मारने के लिए कृष्ण... Read more

विधवा विलाप

सम्मान में न जाने कैसा मिला अभिशाप है आश के विश्वास में,मुझको मिला संताप है लाली-वाली बिंदियाँ छूटी,छूटा पाव महावर का क्या कसूर ... Read more

नासाज दिल

दिल आज नासाज हे, नासमझ कुछ मिजाज हे, दर्द इश्क का नही फिर भी उदास हे, ख्वाईशो की लंबी फेहरिस्त के बोझ मे, गुमसुम हे, अंजान हे, प... Read more

वर्षा आगमन

Neha कविता Jun 12, 2019
उमड़ घुमड कर बदरा छाए आसमां में घनघोर घटा सम छाई तूफान ने भी संग रफ्तार जमाई मानो वर्षा की होगी खूब अगुवाई हर्षित पु... Read more

तुम कुछ बताती नहीं.....

तुम कुछ बताती नहीं और मैं कुछ छुपाता नहीं राज़ गहरा इन आँखों का ,मैं पढ़ भी पाता नही ।। कोई शिकवा और शिकायत ,कहाँ करती हो तुम और बि... Read more

मितव्ययिता

दिनांक 12/6/19 विधा तांका 1 जीवन चले अविरल सतत जरूरतें है रोटी घर कपड़ा खर्च हो नियंत्रित 2 जीवन गाड़ी जलती है पै... Read more

उठो द्रोपदी अब शस्त्र संभालो ---आर के रस्तोगी

उठो द्रोपदी अब शस्त्र संभालो , कलयुग में कृष्ण नहीं आयेगे | अपनी रक्षा स्वयं ही करनी , कोई तुम्हे बचाने नहीं आयेगे || कब तक त... Read more

उठ जाग लक्ष्य संधान को

मन्दाक्रान्ता छंद विधान में लिखने का तुच्छ प्रयास नियम:-मगण -ऽऽऽ भगण-ऽ।। नगण-।।। तगण-ऽऽ। तगण-ऽऽ। दो गुरू -ऽऽ चौथे, छठे व सातवें व... Read more

चांद से बातें -

चांद से बातें हुईं अपनी तो बस रात भर। चांद भी सोया नहीं मेरी तरह से रात भर। चांद था खामोश लेकिन मैने उससे किया सवाल। क्यों उदास आ... Read more

***" पापा की याद में "***

🌠🌟🕉🌟🌠 ।। श्री परमात्मने नमः।। *** पापा की याद में *** यूँ तो दुनिया के सारे गम हँसकर झेल लेते हैं।दर्द कैसे बयां करूं... Read more

***" किताबें "***

*"किताबे"*📚📚 जीने की राह दिखाकर पथ प्रदर्शक बन जाती है अकेलापन में साथी बनकर करुणा भाव दर्शाती है कलम की नोंक पर चलकर विशाल ज... Read more

भूख से न मरे कोई मेरे देश में ---आर के रस्तोगी

भूख से न मरे कोई मेरे देश में,ऐसा राष्ट अब चाहिये | पटेल का स्टेचू नहीं,पटेल जैसा नेता हमे अब चाहिये || हो विकास सभी का,पर पहले ... Read more

जिंदगी तुझसे ही

जिंदगी तुझसे ही है वास्तव मेरा ओर तुझसे ही शिकायत करता हूँ जीवन जीने के लिए ए जिंदगी मै हर पल रोज मरा करता हूँ कैसी अजीब कसमा ... Read more

जिंदगी मे आना

तेरा मेरी जिंदगी मे आना इस कधर हुआ है लिखना मेरा बिलकुल कम हुआ है तन्हाई मुझ से अब कोशो दूर है तेरे ख्यालो का मुझ पर प... Read more

तेरा साथ

तेरे ख्यालों की नगरी ने ही तो आबाद किया है मुझे वरना क्या था इस दिल के वीराने मे कभी खुशी आई भी तो दरवाजा खटखटा कर मुझे पर... Read more

कल करो सुरक्षित

उग्र हो रहे सूर्य देवता, हवा भी अब चुभती है। भीषण गर्मी शोले बन, घाव सी अब दुखती है।।1।। यदि रहा ऐसा ही आलम, संकट प्राणों पर ... Read more

भूख से न मरे कोई मेरे देश में --आर के रस्तोगी

भूख से न मरे कोई मेरे देश में,ऐसा राष्ट अब चाहिये | पटेल का स्टेचू नहीं,पटेल जैसा नेता हमे अब चाहिये || हो विकास सभी का,पर पहले ... Read more

बेटियों का मन

बच्चो की एक कविता है मछली की कहानी कहती है मछली जल की रानी है जीवन उसका पानी है हाथ लगाओ तो डर जाएगी बाहर निकालो तो मर जाएगी ... Read more

नराधम का मिटना बेहतर है ,,,(कविता)

जिस बुरी नज़र से कोई किसी नारी /मासूम बच्चियों को देखे , उस बुरी नज़र को तो बुझा देना बेहतर है. जिस अपनी गन्दी ज़बान से इन्हें दे ... Read more

अफसोस

हवस की आग में जल रहा है आदमी बेटियां घर में भी घबराई रहती हैं बाड खा रही खेत, कुछ दौर ऐसा है चमन में भी कलियां मुरझाई रहती हैं द... Read more

तुम्हारा अस्पताल हूँ

रोग-रोगी का मैं ही पटल हूँ हसते रोते खड़ा मैं अटल हूँ चैतन्य कलेवर का रिश्ता सरल हूँ मैं ही तुम्हारा अस्पताल हूँ उज्जवल को जन्... Read more

लाचार व्यवस्था

दिनांक 10/6/19 विधा छंदमुक्त कविता दुर्योधन के चुंगल में फंसी द्रोपदी देखे आस पांडव बैठे सिर झुकाए कृष्ण ने किया उपाय ... Read more

आ भी जाऔ

आ भी जाऔ कि मुझे कोई साँस मिले। दफन कर गये हो अपनी यादों के तले। जिन्दा है ये गुमाँ अभी बाकी है नब्ज़ ले ले के तेरा न... Read more

मेरी मेहनत काम आएगी वो , रंग लाएगी

जिस दिन कलेक्टर बनने की मेरी बारी आएगी मेरी मेहनत काम आएगी वो , रंग लाएगी रात-रात भर वो पढ़ना, जॉब के साथ-साथ पढ़ना वो शिखर की... Read more

जाग उठ अब है ! नारी

जाग उठ अब है! नारी, तू कहाँ किसी से हारी, तुझमे क्षमता है प्रबल , अबला नही ,है सबल, तू धरा का है रूप, दुर्गा का है स्वरूप, क... Read more

943 अपने बेगाने

सोचा था जो अपने हैं, हरदम साथ निभाएंगे। क्या मालूम था हमें, वो यूं बेगाने बन जाएंगे। क्या है पैमाना अपने बेगाने का। क्या पैम... Read more

एक

बेटियां होती सब एक सी, जाति धर्म की खटास इन पर क्यों आजमाते हो क्या इतने नामर्द हो गये जो इन पर दरिंदगी अपनी, दिखलाते हो Read more

मुक्तक

कर बद्ध सभी से वंदन है रोकना अब बेटियों का कृंदन है ऐसी सजा हो, हैवानियत की, जो कांप जाए, दरिंदो का, तन मन है Read more

पापियों का संसार

मानव वहसी बन गया, कुत्ते रहे वफादार कालिख मन मे छुपा रखी, मुखड़े है ईमानदार सुनी सड़के,जंगल, झाड़ियाँ, नाले हो गये है भौचक्के,शर्... Read more

पॉलिथीन का नाम ज़हर है

पॉलीथिन के विरोध में मेरी एक स्वरचित कविता पॉलीथिन है घातक इतनी, इसका दूसरा नाम ज़हर है। कोई न इससे बच पाया है, इससे प्रभावित ... Read more

पतवारें बनो तुम

मौजो से भिड़े हो , पतवारें बनो तुम, खुद हीं अब खुद के, सहारे बनो तुम। किनारों पे चलना है , आसां बहुत पर, गिर के सम्भलना है... Read more

व्यापार

दिल की जो बातें थीं सुनता था पहले ,सच ही में सच था जो कहता था पहले। करने अब सच से खिलवाड़ आ गया, लगता है उसको व्यापार आ गया। ... Read more

तेरे बारे मे

जब सोचता हूँ तेरे बारे मे यही सोचता हूँ वो पल कैसा होगा जब हम मिलेंगे तेरी नजरे झूक जाएगी शायद मेरा दिल भी उत्साहित होगा ... Read more

बदला

मन मे हम कहा बैर की भावना रखते है ये सिर्फ नमूना है हमे कम न आकना कोई जब प्यार करते है तो सिर कटा लेते है ओर गर आए बदला लेने पर... Read more

आज फिर तेरी याद आयी।

बैठे बैठे छत के मुंडेर पर, अँधेरी डरावनी रात में, अचानक मेरी पलके भींग गयी जज्बात से, ऐसे उमड़े बदल की अश्को की बरसात आयी, आज ... Read more

मै भी एक पेड़ हूं

मै भी एक पेड़ हूं *************** (१) गली गली में मै हूं, छाया तुम्हे देता हूं। खेतों की पार में हूं, वर्षा ... Read more

942 जुदाई

ऐसी तन्हाई है छाई। की दिल की धड़कन, भी देती है सुनाई। याद जब तेरी आई। टिक गई निगाह कहीं, और आँख भर आई। जब से हुई जुदाई। ... Read more

अनुनय

हे महादेव तुम जब सब जानते हो। मेरी यह विनती क्यों न मानते हो।। रक्षित नहीं हैं हमारी बगिया की कलियाँ । हैं बसे ज... Read more

देख दशा आँसू आते

देख दशा आँसू आते, कैसे भेड़िये खुले घूमते, गली गली में ये विचरते, कली कली को निहारते, खिलने से पहले ही रौंदते, क्यों नही कुछ... Read more

मै तो हूँ ही बेवकूफ

मै तो हूँ ही बेवकूफ इन सब मामलों में प्यार के मामलों में लुभाने के मामलों में कोई रूठ जाए तो उसे मनाने के मामलों में आए अजनबी ... Read more

अनमोल जिंदगानी है ।

चरागा जल रहा है हवाओ की मेहरबानी है, हवाओ से जला है , हवाओं को ही बुझानी है । कैसे गुरूर करता अपने पर दो दिनों की जिंदगानी है ।... Read more

कैसी विडंबना ख्यालों से

कब तक चीख दबी रहेगी, हैवानो के हाथो से कब तलक तड़पेगी नारी, जुल्मी, विक्षिप्त, विचारों से कहने को,ब्रह्मांड की शक्ति है, करते सब उ... Read more

तुझे चलना होगा (कविता)

जब तक सूरज चंदा चमके इस अमूल्य धरा का मान रहे सत्य अहिंसा के पथ पर नित हमारे स्वाभिमान रहे नहीं चाहिए धन और दौलत सादा ज... Read more