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Category: कविता

कन्या का आगमन
खिली हो तुम फूल बनकर उस बगिया मेँ जहाँ... बरसोँ से तितलीयों का आना-जाना नहीँ, महकी हो तुम खुशबू सी उस गुलिस्तां में जहाँ... अरसे... Read more
बचपन
मासूम सा चाँद था,तप गया वो समय से पहले परेशानियों ने बचपन छीन लिया समय से पहले देख कर दुनिया वालो को घबरा गया वो... Read more
2 शेर
दिखा रही है जिंदगी भी खेल कुछ अजीब से नयी मिली है मुश्किले नये मिल रहे हैं हादसे बिखर गई है जिंदगी, समझ नहीं है... Read more
शेर
क्या क्या न सहा जीस्त ने सिर्फ तेरे वास्ते जब अलग थी मंजिले अलग थलग थे रास्ते।।।।
जीवन
हैं कुछ इस तरह जीवन नही कोई ख़ुशी ना कोई गम एक सफर हैं एक रास्ता गिरते है संभलते हैं फिर भी निराश नही हैं... Read more
हमारे मात पिता
ईश्वर का अवतार हैं जो वही हमारे मात पिता हमको जिसने जन्म दिया वही हमारे मात पिता हमको जिसने पाला पोसा वही हमारे मात पिता... Read more
आदमी खुद को ही छलने लगा है, हवाओं में ज़हर घुलने लगा है।
आदमी खुद को ही छलने लगा है, हवाओं में ज़हर घुलने लगा है।*** पहुँचना चाँद तारों तक मुबारक बात है, कलेजा भूमि का फटने लगा... Read more
*वहां भी याद रखना*
Sonu Jain कविता Nov 13, 2017
*वहां भी याद रखना* सात समंदर पार जाते ही भूल न जाना,, अपने प्यारे हिंदुस्तान को याद रखना,, यहाँ की सोंधी माटी की खुशबू को... Read more
सैलाब
हां नहीं रुकता है किसी के रोके, मेरे अश्कों का ये अविरल सैलाब सनम। हां रुके भी तो आखिर कैसे रुके, झट से टूटे,थे देखे... Read more
@शिकवे मिटाते है@
*शिकवे मिटाते है* चलो आज कुछ खाव को हकीकत बनाते है,, अपने हाथों से ही नये कुछ घरौंदे बनाते है,, बहुत सह लिया जिलालत को... Read more
मुक्ति, युक्ति और प्रेम
मुक्ति, युक्ति और प्रेम // दिनेश एल० “जैहिंद” हो तुम कितनाहुँ बड़े कर्मयोगी ।। हो तुम कितनाहुँ बड़े धर्मयोगी ।। जनम-मरण के बीच लटके रहो,,... Read more
सिंदूर: एक रक्षक
सिंदूर: एक रक्षक // दिनेश एल० “जैहिंद” कवि – एकनिष्ठता का द्योतक सिंदूर पतिव्रता का पोषक सिंदूर । सिंदूर रचता सकल परिवार स्त्री–लाज का रक्षक... Read more