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Category: कविता

मेरी बेटी
कभी ठुमक ठुमक, कभी मटक मटक वो सारे घर में चलती है कभी माँ, कभी मम्मा, कभी मम्मी जी मुझको हर वक़्त बुलाती रहती है... Read more
बेटियाँ
बेटा बेटा करते करते आज तीसरी बेटी हुई है उम्मीदों की बली आँचल फिर चढ़ी है दुर्गा माँ की डोली धूम धाम से सजी है... Read more
कोई बात बने
कोई बात बने ------------------ मोम के पिघलने का सदियों से रहा है दस्तूर कोई पत्थर अब पिघला तो कोई बात बने ऐसा भी नही कि... Read more
बदलाव चाहिये
बदलाव चाहिये सुबह की चाय हाथ मे अखवार वही खबर लूटमार बलात्कार भ्रस्टाचार पढ़ते पढ़ते चाय ठंडाई छाई मलाई अंतरमन मे अफसोष करते सरकार को... Read more
मिलन
एहसास मिलन की खुमार, चड़े हुए नशे की सुमार नशे की सूरत उतरे, पर न उतरे मिलन का एहसास एतवार अभी बाकी, खूश्बु रह गई... Read more
आया रे सावन
आया रे सावन खिल उठा मन, चहका चित्तवन, झूमे आंगन आंगन , सखीयाँ नाचो-गाओं, धूम मचाओ,बड़ गई धड़कन बहका-बहका मोसम, भीगी भीगी हवा,आया रे सावन... Read more
मैं बूढ़ा पेढ़,
मैं बूढ़ा पेढ़, मुझ मे झुरियां पढ़ चुकी, कितने अर्सों से यहाँ खड़ा ! गर्मी-सर्दी,सावन -भादो- हर मौसम को निहारता, सारे के सारे उतार चड़ाव,... Read more
बीता- वक़्त
बीता- वक़्त सचमुच खोया वक़्त, सोये देर तक इधर उधर की बातें, गप्पे देर तक उम्र बढ़ गई, मायूसी दूर तक जागे अब,अफसोश कब तक... Read more
कल
गुजरे हुवे कल पूछे कुछ ऐसे कल अभी गुजरा कंहा से फिर वापस आने की है जो बात कल नहीं, आज भी हूँ साथ हर... Read more
स्वप्न बुनना
स्वप्न बुनना जब देखता हूँ ; बिछोने पर बैठी, हज़ारों फंदे डाल, बेटे के लिये,जाड़े मे, क्रोशिए से स्वेटर बुनते! सोचता हूँ ,बुनती ही क्यों?... Read more
ठन्ड में  पेश है चाय:-
ठन्ड में पेश है चाय:- प्यारा बंधन हम दोनों यारों में .........................जैसे गरम चाय स्पर्श भावों के रोमांच शरीर पे .......................जैसे वाष्पित चाय लिखे लेख... Read more
जिन्दगी
जिन्दगी जिन्दगी के दस्तूर बड़े निर्जीव हसंता-रोता खेलता मौत के ठिकाने पहुंचने सजीव कुछ दमकते ख़याल जिस का असर अज़ीब मन को रोशनी देते अँधेरे... Read more
बेटियां
बेटियां ***** हर आंगन में खिले कलियॉ हॅसती रहे मुस्काती रहे । हर आंगन गूंजे स्वर इनका। यों राग खुशी के गाती रहे। हर आंगन... Read more
मुक्तक
एक मुक्तक ?????????????? इस कहानी में कोई मोड़ तो आया होता। दर्द अपना कभी अश्कों में छिपाया होता। मैं बसा लेती तुझे दिल की हर... Read more
मेरे दोस्तों
कविता मेरे दोस्तों - बीजेन्द्र जैमिनी एक-एक पौधा लगाओ मेरे दोस्तों पौधे को पड़े बनाओ मेरे दोस्तों जीवन होता है अनमोल - ऐसा संकल्प बनाओ... Read more
आ गई वर्षा प्यारी
हरी-भरी हरियाली लेकर, आ गई वर्षा प्यारी। काले-काले बादल घिरे हुए हैं, देखो कैसी छटा निराली। रिमझिम-रिमझिम बरस रहा है, धरती पर फैली हरियाली। छायी... Read more
भँवर
भँवर लगता है किसी भँवर में हूँ अनचाहे शहर में हूँ अनजाने लोगों की नज़र में हूँ डर लग रहा है कहा जाऊँ ! न... Read more
भारत भूमण्डल के मंगलस्वरूप !
संसार की सार आधार हो, स्थूल, सूक्ष्म पावन विचार हो दिव्य शांति सौम्य विविध प्रकार जिनसे सर्वत्र क्लांत , क्रंदन की प्रतिकार ! करूणावरूणालया कल्याणकारिणी... Read more
दिल की आवाज
Raj Vig कविता Jan 19, 2017
रूह की आवाज को बहुत करीब से सुनने की कोशिश की है मैंने । जिन्दगी के माईनो को एक बार फिर से समझने की मंशा... Read more