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Category: कविता

कभी सोचा है ...
सुनो, इतना भी मुश्किल नहीं है जीना ... सोचो , जब भी कभी तुमने अपने आपको अकेला महसूसा है कितनी द्फ़े डबडबाई आँखों से बमुश्किल... Read more
दस्तूर
राहें चलें तो पत्थरों से मजबूर हैं उपरवाला अपने रुतबे पे मगरूर है लोगों के दिलों में थोड़ी चाहत तो जरुर है लेकिन यहाँ फुलों... Read more
तुम्हारी ख़ामोशी मुझे अच्छी नहीं लगती
तुम्हारी ख़ामोशी मुझे अच्छी नहीं लगती क्यूं मायूस बनकर जिन्दगी गुजारते हो दिल को खुश रखों, रखो हर पल पल यूं ही जैसे की पवन... Read more
अस्तित्त्व
अस्तित्व तुम्हें हक़ है कि चुनो तुम रिश्तों की भीड़ से स्वयं के अस्तित्व को, समेटो रसोई के मसाला डिब्बों में बंद पड़े अरमानों या... Read more
यादें
सासें हैं क्या याद दिलाती रहती हैं कोई है कोई है याद आ रहा है। धूमिल नहीं पड़ती ये बेवफा नहीं, साथ देने मे उस्ताद... Read more
प्रेम उत्सव
नभ मंडल मे अप्सराएँ मचा रहीं है शोर , मही पर प्रेम उत्सव मना रहे है लोग । बन उपवन मे मदहोशी , मन वीणा... Read more