कविता

तेरी याद अक्सर आती है

आप तो आते कभी नहीं तेरी याद अक्सर आती है गम-ए -जुदाई उपहार दी तन्हा मैं,नींद नहीं आती है जब याद तेरी बैचेन बनाएं मेरी ज... Read more

अपनापन

दिखते नहीं हैं पर,दिल महसूस करता है, कुछ हालात होते है,कुछ जज़्बात होते है, जिनके होने की कीमत को,केवल मन समझता है| जिनसे दिल के ... Read more

कीमत इन्सान की

घटती जा रही है कीमत इन्सान की पैसा होता जा रहा है बाप इन्सान का बढते जा रहे है बे-ईमान इन्सान समाज में दरिन्दों की फौज है ... Read more

क्या कहना

प्यार करे पर कह न पाए । क्या कहना । दूर रहे पर रह न पाए क्या कहना । बंद आंखों से देखें उसको। क्या कहना । मन ही मन में चाहे उसक... Read more

" बेटी "

II आज वह मां सोई नहीं होगी , आज भी उसे अपनी बेटी के आने का इंतजार होगा ll ll आज भी उसकी आंखों में वही सपने होंगे, जिसे कभी उ... Read more

पड़ाव

उम्र के इक पड़ाव को लाँघ कर बढ़ चली ज़िंदगी, कितने रंग, कितने रूप दिखाती चली यह ज़िंदगी, कल ही की तो बात थी, जब समझ ने अपनी होंद ... Read more

" तेरी याद "

यूं तो आदत नहीं मुझे रात में जगने की , लेकिन तेरी याद मुझे सोने नहीं देती है ll चाहा कई बार तुझे नींद से जगाने की , लेकिन ते... Read more

" एक बार "

ये कहना सही नहीं की अंधेरा बहुत है , तुम एक बार इन आँखों को खोलो तो सही !! जिन्हे समझ बैठो हो तुम अपनी राहों में पत्थर, उन्हें ... Read more

708 तेरे बग़ैर जीना सीख लिया था

तेरे बग़ैर जीना सीख लिया था। खुशी को करीब लाना सीख लिया था। जो तुम ना आते सामने मेरे यूं, हमने भी हंस हंस के जीना सीख लिया था। त... Read more

जीवन काल मेँ मोक्ष प्रॉति

जीवन काल मेँ मोक्ष प्रॉति 🙏 ना पीछे कोइ, ना आगे कोइ, ना बाएँ कोइ, ना दायेँ कोइ, ना ऊपर कोइ, ना नीचे कोइ... मैं ही ह... Read more

सफ़ेद बकरी वो भी तीन थन वाली @हास्यव्यंग व कहानी

मेरी कहानी में पात्रा नहीं पात्र है नरेन्द्रा उसे एक तीन थन वाली सफ़ेद बकरी मिल गई. अब क्या था. उसने एक तडीपार को अपनी योजना समझा... Read more

लोग अजनबी

घास हरी हो तो ही अच्छी लगती है बस यही बात मुझको यू खटकती है हा है मुझे प्यार तुझसे मानता हूं जिंदा तो हूं पर मेरी जान कही भटकती... Read more

पत्ते है हम

इन पत्तों की तरह बेजान बना दिया है लड़े जो तूफानों सी हवा से पर उनको अपनो ने ही गिर दिया है । बेजान पड़े है वो धारा पर , पर क्... Read more

कैसी है मेरी जिंदगी

ओश की बूंद सी बन बैठी ये जिंदगी तू यूं बेजान मत बन ये जिंदगी जरा उठकर देख तेरे अंगे समुद्र भी खारा लागे तू बुझा सकती है बहुतों की... Read more

जीवन ही है सृजन में मूल

जीवन ही है सृजन में मूल खिलते है धरा पर इसके फूल, हर खूशबू तुझसे इत्र तो भौतिक आयोजन तू है तो जिंदा हंस मेरा नीर क्षीर ... Read more

कुछ पल

वक्त थम सा गया था उस वक्त जब किसी ने बस जाने वाले को रोका नहीं । मुझे पता है लोग जाते है लौटकर आने के लिए पर इसके बीच का वक्त ब... Read more

सर्दी के दोहे

सर्दी का मौसम आया, ठंड बहुत है छाई स्वेटर जर्सी अब पहनो ,ढूँढों गर्म रजाई मूँगफली संग रेवड़ी , खाओ खूब खजूर सर्दी नजर ना आए... Read more

माता पिता की छाया

गांव का वृक्ष देता छाया मुसाफिरों को फैलता गया शहर सिमटता गया गाँव बनने लगीं बल्डिगें बड़ी कटने लगे वृक्ष बेरहमी से छाँव ... Read more

योद्धा वीरनारायण थे

योद्धा वीरनारायण थे --------------------------- सिंह गर्जना करते थे, आग लगाते थे पानी में । ऐसे शूरवीर हमारे थे, देते कुर्बानी... Read more

शहीद वीरनारायण सिंह

शहीद वीरनारायण सिंह जोहार करव ओ भुइँया ल, जिहा जनमें वीरनारायण ग। बन्दव थव मैं ओ मईया ल, अइसे वीर ल जनमाइस ग। फिरंगी मन से... Read more

उन गिद्धों को मानव क्यूँ बनाया है

उस मानव पर मुझे घिन आती है, जो नारी पर गलत नजर डाले हैं। सामने तेरी औकात क्या होगी, चार पाँच होकर गैंग बनाते हैं। खुदा को भी ... Read more

अनंत यात्रा

‌ एक पथिक चला जा रहा निर्बाध अपने गंतव्य की ओर । ‌समय के थपेड़ों की मार सहते हुए क्लान्त चेहरा असमय झुर्रियों को वहन किए हुए । आशा... Read more

कहानी मूंछों की

हास्य कविता छंदमुक्त कैप्टन हमिन्दर साहब को था अपनी मूंछों पर घमंड बहुत हैं नहीँ किसी की उनकी जैसी मूंछ बैठते जब स्टू... Read more

दृढ़-संकल्प

मौसम प्रतिकूल न होगा, समय के भाल पर प्रेम का कुमकुम लगाएंगे। तैरना सीख लिया हमने, स्तब्ध समुद्र के हृदय से मोती खोज़ लाएंगे। ज्व... Read more

जिसने कष्ट सहे केवल वे जन्मे

जग बदला हाँ बदला नीर क्षीर बदला हाँ हो चुका गदला पहले हिचकी याद थी अब एक बीमारी ढ़कोसलों की सूची में एक कमला एक गमला ... Read more

प्याज पर दोहे

प्याज पर दोहे प्याज ब्याज पर हैं मिलें,हुआ विकास महान प्याज रत्न अनमोल है, भाव छुए आसमान सेब हुए हैं प्याज समान,प्याज समान है... Read more

जीवन में संतुलन

है संतुलन जीवन में जरूरी कम बोलो अच्छा बोलो बना रहेगा मान समाज में तराजु सा संतुलित हो कार्य हमेशा नहीँ बिगड़ेगी... Read more

प्रेमिका

पुरानी मोहब्बत को इस नई ताकत से मत तौलो ये संबंधों की तुरपाई है, षणयंत्रों से मत तौलो मेरे लहजे की छैनी से गढ़े कुछ देवता ... Read more

कह मुक़री

जीवन में इनसे बिखरे रँग कदम सधे चलते इनके सँग इनके बिन बस रहती रैना ऐ सखी साजन, न सखि नैना इसके बिना नहीं कुछ भाये हमसे ह... Read more

खेल किस्मत के

है खेल निराले भाग्य के कहीं खुशी तो कहीं गम है नियति जन्म है तो निश्चित है मृत्यु है विधि का विधान ये है उत्पत... Read more

स्त्रियों का स्त्रियों से घृणा

मेरी प्यारी बेटी ' ओशी ' दुनियां को खूबसूरत ही होना था प्रेम प्यार से लबा लब भरे होना था नानी दादी की परिकथा सा ही रहना था मग... Read more

प्रकृति वर्णन - बच्चों के लिये एक कविता धरा दिवस के लिए

*प्रकृति वर्णन* सुबह उठें हम सूरज की मखमली रोशनी को पायें, चिड़ियों का संगीत सुने और फूल कोई कविता गायें ।। भंवरों का संगीत म... Read more

संघर्ष थकाता बहुत है ;

सुना है मैंने इस संघर्ष थकाता बहुत है, मगर अंदर से बना देता है मजबूत, ए संघर्ष इतना न थका देना मुझे, कि एक दिन दोबारा उठने की ... Read more

गीता ज्ञान और आज

श्रीकृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिया गीता-महाज्ञान का था उपदेश दिया जब अर्जुन ने हथियार थे डाल दिए सब अपने थे जो खड़े हथियार लिए भाई... Read more

याद

भूली हुई कहानी कोई, अक्सर याद आती है , जब खिलते है नए फूल पुरानी डाली पर, जब मीठी धूप छन कर आये छत पर, जब तितलियाँ अठखेलियाँ करे... Read more

मुक्तक

१. मेरे उलझे हुए ख्वाबों की ताबीर में वो बस सगा सा दिखे अपनी ताबीर में वो ~ सिद्धार्थ २. बीते जून का झगड़ा था, मन से मन का रगड... Read more

मुक्तक

१. कुछ कुछ अपने कुछ पराये लगते हो तुम मुझे जिंदगी के सताये लगते हो ! ...सिद्धार्थ २. ये सूरज जल रहा है, या हम तुम जल रहे हैं ... Read more

मुक्तक

१. नजर से दूर दिल से भी दूर जाओग क्या ? हमें अपने ख्याल से निकाल पाओगे क्या ? ~ सिद्धार्थ २. एक कहानी से कई और कहानी निकल आते... Read more

उन्वान – # बंदिश #

पापा मेरे जीवन का तेरे जीवन से मेल नहीं तुम स्वतन्त्र स्वछन्द जीते मेल- जोल सही. ठण्डी हवा सादगी भरा जीवन सदा ही जिया आज हर पल बं... Read more

सिलसलेवार सिलसिले

कुछ सिलसिले सिलसलेवार चले रुक न सके कम नहीं हुये खत्म होते भी तो कैसे हो गये हम इतने पढ़े लिखे. अनपढों ने खिंचा जिसे उस आस... Read more

बेटियाँ और छद्म राष्ट्रवाद

हिरण गाय शेर भगेरे चीते से भी कम आकी गई मेरी लाडो. ये छद्म राष्ट्रवाद है तू राष्ट्रवाद से बाहर है कहाँ छुपाते उन्हें कैसे... Read more

बना ले तू मधुर संबंध

बना ले तू मधुर संबंध , छोड़ मोह माया बंधन । जगा ले सोई चेतना , कर ले अब ईश वंदन ।। सुख नाता तोड़ गया, प्रेम का पड़ा अकाल । म... Read more

जिंदगी और पहल

नृत्य प्रकृति करती है अस्तित्व मेरा द्रष्टा हर संयोग उससे जुड़े हुआ, कोई रोता है कोई हँसता, तरंगों का खेल है, सर्प नहीं देखता... Read more

हास्यव्यंग

याद आती है वो मगर खुद आती नहीं हिचकी आती है भूल पड़ती नहीं नाम लेती है वो नाक बहती है याद उसकी छींकें बढ़ाती है कभी ठण्... Read more

अबला और शास्त्र

हिरण गाय शेर भगेरे चीते से भी कम आकी गई मेरी लाडो. कहाँ छुपाते उन्हें कैसे लतियाते मिल बैठकर आज बतियाते सोमरस सुरापान प... Read more

धोखे और सलीके

आज समाज आहत ! धोखे से नहीं ! सलीके से आहत है ! चिंता है राम घनश्याम री, ✍️ कथा गाथा पकडे माथा प्रकृति अनजान सी भेष कब से पहच... Read more

【 23】"*" आखिर कौन उजाड़े प्रकृति को? "*"

रूह तक कांप जाती है, सोचकर मेरी दर्द से काटते हैं लोग यहाँ, पेड़ों को गर्व से Read more

राष्ट्रहित

कबूतर उतरे नहीं उतारे गए है दाना डाल कर ललचाए गए हैं अब शिकारियों का तांता लगेगा पाव पाव मांस राष्ट्रहित में बटेगा फिर डकार के स... Read more

बनो सहारा

जीवन सुगम बन गया जब मिला आसरा ईश का बनो सहारा जरूरमंदों के साथ उन्हें पाओगे मिलेंगी दुआएं हर कदम जीवन सफल पाओगे दे... Read more

पुस्तकें सच्ची मित्र

किताबें होती इंसान की सच्ची मित्र बनाती हैं ये इंसान का अच्छा चरित्र हो रहा हो इंसान जब कहीं पर बौर ना हो कोई साथी ,ना हो कोई... Read more