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Category: कविता

साइबर कैफ़े
"साइबर कैफे" एक शाम मै साइबर कैफे गया..किसी काम के सिलसिले में मेरा पूरा ध्यान अपने कंप्यूटर पर था तब तक कोई आकर मेरे पड़ोस... Read more
अब तो चले आओ...
कभी तो बाँहों के गिरफ्त में चले आओ, कंपकपाती हुईं पैरों को बढ़ाते चले आओ, शर्द हवाओं के बीच, ज़ुल्फ़ लहराते चले आओ, गर्मी होठों... Read more
खुद पर अफ़सोस
रह रहकर खुद पर अफ़सोस हुआ, चाहा ज़िंदगी से बढ़कर मैंने जिसे, जब आँखें जागी तो मैं बेहोश हुआ, अब कोई फितूर, असर क्यों करता... Read more
समय का चक्र पूर्ण गतिमान उद्यमी को उद्यम संधान ! ****
समय का चक्र पूर्ण गतिमान, उद्यमी को उद्यम संधान। **** किसी को दो पल काम तमाम किसी की खाली उम्र तमाम कोई रो देखे किस्मत... Read more
किस्मत
सुन,लगी है फिर से रेस,मुझमें और मेरे हालात में। देखो बैठी है मेरी किस्मत लगाकर अचूक घात में। मैं तो उलझनों से उभरने का खोज... Read more
अन्तर्मन
सहज मेरा दिल सहता है या इसकी एक विवशता है कभी किसी ने न समझा मेरा अन्तर्मन क्या कहता है। कोख से प्रादुर्भाव हुआ तो... Read more
[खुला आसमान दे दो]
Sonu Jain कविता Nov 21, 2017
🙏सभी बेटियों को समर्पित मेरी रचना बेटी की ख्वाइश और चाह,दिली आराजु आप तक पहुचे तो जरूर संबल आशीष और सम्मान मिले,,,🙏 *[खुला आसमान दे... Read more
राधा श्याम
नाम तेरा मेरा क्यू लेते साथ प्रेम से इतराती,रिझाती राधा श्याम से बोली कितना #प्रेम करते मुझसे मुझको जरा बताओ तो नही बोले फिर कुछ... Read more
भगवान बचाओं
भगवान बचाओं .... देखो कलयुग ऐसा आया , भगवानों का भी घर है बनाया , इससे काम नहीं चला तो उसमे ताला भी लगवाया ....... Read more