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Category: कविता

सृष्टि
ऐ सृष्टि, कहाँ है तेरी दृष्टि, कभी अतिवृष्टि, तो कहीं अनावृष्टि। ऐ सृष्टि, ये जो आषाड है, मेघों की चिंघाड है, उफनती बाढ है, तो... Read more
जीवन धारा
जीवन की दो धारा एक बने रातों की स्याही एक बने उजियारा। एक दिखाए सपन सलोने तपी तपी सी राहें बन जाये मुस्कान हृदय की... Read more
होनहार कवि “ललित कुमार” की फुटकड़ रचनाएँ || मै निर्धन-कंगाल, तूं राजा रायसिंह की जाई | इस टुट्टी छान मै करूँ गुजारा, क्यूँ महल छोडकै आई || टेक ||
होनहार कवि “ललित कुमार” की फुटकड़ रचनाएँ रागनी -5 मै निर्धन-कंगाल, तूं राजा रायसिंह की जाई | इस टुट्टी छान मै करूँ गुजारा, क्यूँ महल... Read more
होनहार कवि “ललित कुमार” की फुटकड़ रचनाएँ || बिजली कैसे चमके लागै, रत्ना के म्हा जड़ी हुई | चन्द्रमा सी श्यान हूर की, फुर्सत के म्हा घड़ी हुई || टेक ||
होनहार कवि “ललित कुमार” की फुटकड़ रचनाएँ रागनी -4 बिजली कैसे चमके लागै, रत्ना के म्हा जड़ी हुई | चन्द्रमा सी श्यान हूर की, फुर्सत... Read more
होनहार कवि “ललित कुमार” की फुटकड़ रचनाएँ || तूं धर्मराज तुल न्याकारी, राजा क्यूँ अनरीति की ठाणै | महारै समय का चक्कर चढ्या शीश पै, हम नौकर घरां बिराणै || टेक ||
होनहार कवि “ललित कुमार” की फुटकड़ रचनाएँ रागनी-3 तूं धर्मराज तुल न्याकारी, राजा क्यूँ अनरीति की ठाणै | महारै समय का चक्कर चढ्या शीश पै,... Read more
होनहार कवि “ललित कुमार” की फुटकड़ रचनाएँ || सिणी, सांपण, बीर बिराणी, ये तीनूं-ऐ बुरी बताई | नर, किन्नर, देवता मोहे, होवै खोटी बीर पराई || टेक ||
होनहार कवि “ललित कुमार” की फुटकड़ रचनाएँ रागनी-2 सिणी, सांपण, बीर बिराणी, ये तीनूं-ऐ बुरी बताई | नर, किन्नर, देवता मोहे, होवै खोटी बीर पराई... Read more
होनहार कवि “ललित कुमार” की फुटकड़ रचनाएँ || हो बन्दे ! मतकर मान-गुमान, या जिंदगी सुपने कैसी माया | ऐसा जग मै कौण जण्यां, जो नहीं काळ नै खाया || टेक ||
होनहार कवि “ललित कुमार” की फुटकड़ रचनाएँ रागनी-1 हो बन्दे ! मतकर मान-गुमान, या जिंदगी सुपने कैसी माया | ऐसा जग मै कौण जण्यां, जो... Read more
ए मेरी जान
ए मेरी जान सुन आज तुझे हिसाब लिखू दिल ए बेचैन का राज लिखूँ कैसे गुजरे मेरे दिन मेरी रात लिखूँ। है दिल कितना बेकरार... Read more
महाकाल
कालो के काल महाकाल। प्रचंड है। अखंड है। अलौकिक है। अद्भुत है। क्षम्य है। रक्षक है। भक्षक है। सर्वव्यापी है। अन्तर्यामी है। महाव्यापी है। रुद्र... Read more
arunima
अरूणिम अरूणिमा पर काले घन बन छाये रूकी नहीं आभा वह दूर तक बिखरा गयी निशा काली-काली भी नहीं कुछ बिगाड़ पायी माता की सुपूती... Read more
तेरे बाद
Raj Vig कविता Jan 20, 2018
शामे उदास रहने लगी तेरे चले जाने के बाद आंखों मे आंसू रहने लगे मुद्दतों गुजर जाने के बाद । दिन गुजरने लगे तेरी यादों... Read more
दरारें दिल की
दरारें दिल की हल्की दरारें दिल की इतनी गहरी होती है अंधी खाई हो जैसे गंगा जमुना बह कर पसर जाए सोख लेती नदियों को... Read more
अभिलाषा
कुछ किया नहीं ऐसा,पर विशिष्ठ स्थान मिले, ऐसी चाहत लिये जी रहा हूँ मैं। शुभ कामनाओं को ओढे,कल्पना लोक में रहकर, यथार्त के धरातल पर... Read more
5 लाल हमने खोये
5 लाल हमने खोये नए साल का था आगमन,औऱ खुशियां थी चहुँ ओर। कहीँ मिठाई बट रही, ढोल नंगाड़ो का था कहीं शोर।। नाच गा... Read more
अ मेरे हमराही
तेरे आने से महक जाती है फिजाएं मेरी, तभी रूबरू होकर तेरा दीदार करती हूँ। लगे न बुरी नजर तुझे अ मेरे हमराही, तभी इस... Read more
दर्द
"दर्द" देखा है मैंने इस जमाने को, मेरे दर्द में मुझे सताते हुए। लाख कमिया निकाली और, मुझे ही बुरा बताते हुए।। लाखों थपेड़े खाये... Read more
हिसार कांड
"हिसार कांड" जिस देश मे नारियां "देवी" सोची जाती है। हर रोज वहाँ पर क्यों बेटियां नोची जाती है।। कभी दिल्ली कभी हिसार में,हवस की... Read more
निर्भया v/s गुड़िया
निर्भया v/s गुड़िया देने दिलासा उस माँ को, अब राजनीतिक पार्टी आएंगी। चन्द पैसो में क्या वो उसकी, गुडिया को लौटा पाएंगी।। कोई दस लाख... Read more
मासूम बेटी
"मासूम बेटी" दरिंदा ने बणाई योजना, उनकी करणी पार गयी। छः साल की मासूम बेचारी, अपणी जिंदगी हार गई। कूड़ा बीन के करै गुजारा, पाल... Read more
बेटी
​ ​ "बेटी"​ ​मैं नही चाहती कि मेरे देश की किसी बेटी में​ अकारण भरा हुआ अभिमान हो। चाहती हूँ कि हर बेटी में पूरीतरह​... Read more
तेरे चेहरे का नूर
​"तेरे चेहरे का नूर"​ तेरे चेहरे का नूर, मेरे दिल को हुजूर, सुकून दे गया। तेरा नजरें मिलाना, फिर मुस्कुराना, मेरा चैन ले गया। ​... Read more
नारी का सम्मान
"नारी का सम्मान"​ इंसान तभी कहलाओगे, जब नारी का सम्मान करो, अबला समझकर उसको, ना उसका अपमान करो। :-वो माँ भी तो 1 नारी है... Read more
तुम मेरे कौन हो????
"​​तुम मेरे कौन हो" लाख कोशिश करती हूं , लेकिन समझ नही पाती हूँ। ​ ​कि ​​तुम मेरे कौन हो? जितना सुलझाती हूँ,​ ​उतनी उलझती... Read more
इंद्रधनुष
इंद्रधनुष - एक संवाद दूर कहीं एक टूटे फूटे घर में जहाँ गरीबी की परिभाषा भी शरमाती थी माँ गोद लिए बैठी थी अपनी इकलौती... Read more
इंद्रधनुष
इंद्रधनुष - एक संवाद दूर कहीं एक टूटे फूटे घर में जहाँ गरीबी की परिभाषा भी शरमाती थी माँ गोद लिए बैठी थी अपनी इकलौती... Read more
आईना बोल उठा
"आईना बोल उठा" मैं आई जब आईने के सामने तो आईना बोल उठा, ये भेद मेरा खोल उठा, के आईना बोल उठा। खुशियों की थी... Read more
क्या लिखू?
मैं ने सोचा आज एक नायाब कविता लिखू सोचा तो किस पर लिखूं सोचा चांद पर लिखूं सदियों से जिसकी उपमा दी जाती है प्रिया... Read more
शाम होते ही
हर सुबह वो प्यार के मोह में घुल जाता है। शाम होते ही वो फिर से बदल जाता है।। दिन में लगता है वो खिलता... Read more
जिंदगी
कभी तप्त धूप सी, तो कभी सघन छाया है जिंदगी। है मेरी समझ से परे, न जाने क्या माया है जिंदगी। कभी हँसी की फुहारें,... Read more
*इंद्रधनुष के समय *
मन प्रफुल्लित हो छोटी बूंदें, बैठीं -आकर -इंद्रधनुष -पर । तन बेध रहीं रवि की किरणें बन प्रत्यंचा के प्रखर शर ।। कुछ लटकी भटकी... Read more
*बदला बदला *
बदला बदला सा दिखता है मौसम आजकल। हुआ उतारू धोखा देना ,मौसम---- आजकल। बरसाती मांसों के बादल ,हुए ----ठंड से पीले । लगे वरसने ताराओं... Read more
कविता
सत्ताधीशों आप सभी का, इतना सोना ठीक नहीं, ज़्यादा दिन तक गांधीवादी, सोच को ढोना ठीक नहीं। खुली छूट सेना को दे दो, आर-पार हो... Read more