कविता

शहनाई

******शहनाई********** ********************* मयखाने में रौनक आई हैं बज रही कहीं पर शहनाई है आँखों मे छाई है मयकशी गम भ... Read more

सही बात

करो समर्थन हमेशा सही बात का होते सफल वही जो रहते अटल अपने निर्णय पर होते घर परिवार समाज देश में मतभेद अनेक ... Read more

जख्म

जख्म क्या हैं??? वो.. जो जिस्म पर दिखते हैं और कुछ दर्द देते हैं??? वो तो , भर जाते हैैं वक़्त के साथ .... मिट जाते हैं एक अ... Read more

गीता पढ़. कविताएँ गयी गढ़ १/११

गीता पढ़. कविताएँ गयी गढ़ १/११ *************************** हर हरि हरैया, हर हरि इच्छा l सहज शब्द है, है गीता शिक्षा ll मगन मन ... Read more

हम तो, भ्रष्ट हुए जी l १/१०

हम तो, भ्रष्ट हुए जी l १ /१० हम तो, भ्रष्ट हुए जी l माया में, मदमस्त हुए जी ll तनखा करू हूँ, सो गुना l शर्म को लागाऊं, ... Read more

नवगीत

अधिकारों का भोर ***************** रहते मत वैभिन्य निरर्थक, वार्ता के संवाद. माँगों के हर विज्ञापन का, पीठ चढ़ा वैताल, फैल ... Read more

विनय राग से जुड़ना सीखों

संघर्ष के द्वार खोलना सीखों अपने आप से मिलना सीखों सौगात कसम तुम अड़ना सीखों न प्रकृत से लड़ना सीखों धैर्य पथिक तुम चलना सीखों वि... Read more

नीर ही जब अपनी नमी से डरता हो,

नीर जब अपनी नमी से डरता हो, प्यार जब अपने कमी से डरता हो, ऐसे में ज़िन्दगी वहाँ मुस्कराए कैसे, जब आदमी ही, आदमी से डरता हो. Read more

अंतहीन प्रश्न

‌जीवन एक अंतहीन प्रश्न की भांति आकांक्षा और अभिलाषा को समेटे हुए । ‌आशाओं और निराशाओं के पलों को समाहित किए हुए । ‌व्यथाओं और कु... Read more

संध्या सुन्दरी .. २ / १०

संध्या है, छाँव है ( २ / १०) संध्या है, छाँव है l प्रीत का पड़ाव है ll उमडी उमंग है l मन मन मृदंग है l तन तन पतंग है l न... Read more

मेरी जाने तमन्ना

मेरी जाने तमन्ना मेरी जाने तमन्ना तजमहल जैसी कोई ख्वाईश मत रख मुझसे क्योंकि , मै इसे पुरा नही कर पाउंगा ये मै भी जानता हुं , त... Read more

पहेलियाँ (प्यास पहेली)

प्यास-पहेली - 3 लोगो की हर चाल, है आँकी l जगह जगह दिखाए, झांकी ll शंकेत –1, 2 मैं नार, यही कहीं छिपी हूँ l सुरू में मिल जाऊं,... Read more

भक्तिभाव एक लकवा

गिरे तो गिरे पर इससे ज्यादा और ना गिरें, पदासीन लोगों को हमदर्दी इसमें भी चाहिए, उठाने दौड़ी जनता, झट से फिर धड़ाम गिरे, ... Read more

बदला है आजकल ये इंसान हद से ज्यादा

बदला है आजकल ये इंसान हद से ज्यादा रहता है आजकल ये हैरान हद से ज्यादा उजड़े हुये चमन में आते कहाँ परिंदे जबसे हुआ चमन ये वीरान हद ... Read more

*** " मन चला क्यों , मधुशाला की ओर....! " ***

# कैसा अज़ब है यह आज का दौर , टूट रहा अब सद्भावना की डोर। बिखरता संबंध , विचलित मन , सिमटता प... Read more

कविता

शहर बंद है आराम का दिन है छः बाई छः के बाथरूम में खुली सांसें हैं आज फिर शहर बंद है कुछ धमाकों के बीच सौ मीटर चौड़ा रास्ता भी ... Read more

हाइकु -- "ये संध्या मेरी", संध्या सुंदरी कविताओं से जुड़ी हैं l

१० हाइकु -- "ये संध्या मेरी" संध्या सुंदरी से जुड़ी हैं l 1 प्रीत से भरी l खुशीयों से है घिरी l ये संध्या मेरी l 2 शांती ... Read more

संध्या सुन्दरी .. १ / १०

संध्या सुन्दरी, सजी संवरी सजनी l सहज मधुरतम आलिंगन, उषा - रजनी ll संध्या सुसज्जीत सुन्दरी l सपना सी, पर खरी परी ll संध्य... Read more

धीरे धीरे रात बढी, दिन के उजालों में l भाग १ / ५

धीरे धीरे रात बढी, दिन के उजालों में l भाग १ / ५ धीरे धीरे रात बढ़ी, दिन के उजालों में l छम छम गम नाचें, दिन के उजालों में ll ... Read more

समीक्षा

विमोचन-समारोह में, डॉ० अर्चना गुप्ता जी के कुण्डलियाँ संग्रह - 'अर्चना की कुण्डलियाँ' (भाग २) के सम्बंध में मेरे द्वारा पढ़ा गया आले... Read more

पहेलियाँ (प्यास पहेली)

प्यास पहेली ... १ एक जंगल है, घना घना l उंची चोटी पर, बना बना ll शंकेत - १,२ अंधेरे से है, सना सना l महीन है, हर तना तना l ... Read more

चेतनता

"चेतना" 💐💐 जीवन का सार यही है,सुख है भार नहीं है। प्रेम जगा मस्ती में चल,करनी रार नहीं है। प्रारब्ध सदा संग चले,इतना ध्यान रहेगा... Read more

"पहचान दिलाई हिंदी ने" (कविता)

शीर्षक-"पहचान दिलाई हिंदी ने" (हिंदी कविता) जिंदगी में गहराते पलों में अपने भी बेगाने हुए हिंदी भाषा के जुनून से फिर मैदान में... Read more

राज दरबारी

राज-दरबारी वो हैं बड़े लेखक नवाजा जाता है उन्हें खिताबों से दी जाती है सरकार द्वारा सुविधाएं नाना प्रकार की बदले में मिलात... Read more

बाबा

बस वही एक चेहरा है जाना पहचाना सा जो मेरी उम्र के साथ बदलता गया शदाबी से झुर्रियों तक पर मेरे लिए मुहब्बतों के रंग कभी मुर्झ... Read more

क्या कहूँ(ताटंक छंद)

दृष्टि जहाँ भी जम जाती है, होश जहाँ गुम होते हैं। दिल का पलड़ा भारी होता, बुद्धि सभी जन खोते हैं। धोखा या आकर्षण कहदूँ, या दीवान... Read more

एक चाह

दीदार तुम्हारा हो हर दिन . . . . पूरी एक चाह हमारी हो जो डगर तुम्हारे तक जाऐ . . . . वो अंतिम राह हमारी हो तेरे ... Read more

प्रवंचना(ताटंक छंद)

जिसको भी मानूँ मैं अपना,वो हो जाता बेगाना। दे जाता ज़ख्मों का हँसके,वो एक नया अफ़साना। उम्मीदों की चादर है छलनी,गिरगिट भी पानी-पानी।... Read more

🇮🇳 अब थक सा गया शाहीनबाग 🇮🇳

🇮🇳 *अब थक सा गया शाहीनबाग* 🇮🇳 देशविरोधी जुबान से, उगलते-उगलते जहरीला राग, अब थक सा गया शाहीनबाग । भड़के दंगे,हर कोशिश की, ल... Read more

नवरंग समाए बिन होली

देखकर तेरी मेरी राहे । बहुत बेचैन ये निगाहें ।। एक दूजे को हम चाहे । सूनी पड़ी कब से बाहें ।। प्रेम का रिश्ता है अटूट ... Read more

स्वर्ग यहाँ, नर्क यहाँ

********स्वर्ग यहाँ, नर्क यहाँ************* ************************************ सुन लो ओ मूर्ख इंसान ,समय के बोल फरमान नर्क यह... Read more

इश्क़ की कशिश..

क्यों मेरे इश्क की कशिश तुझ तक पहुंचती नहीं कहनी चाही जो बात, वह तुझ तक बात पहुंचती नहीं, एक तू ही तो मेरे प्यार का रखवाला है सनम... Read more

मिट्टी में मिट्टी

मिट्टी में मिट्टी कल तक नहीं लगने दी कपड़ों पर धूल रहा संवारता कंचन-काया रोज-रोज रहा निहारता आइने में आज सोया पड़ा है चिरनि... Read more

सरहद

सरहद -विनोद सिल्ला सरहदों पर व्याप्त है भयावह चुप्पी की जा रही है चुपचाप निगहबानी की जाती हैं बाड़बंधी नियन्त्रित करने को ... Read more

पर वो बात नहीं

वो बात नहीं -विनोद सिल्ला तेरा होना देता था ऊर्जा देता था खुशी तेरा न होना छोड़ गया खालीपन नहीं रुका तेरे जाने से कोई काम... Read more

सब शिकायतें दूर

सब शिकायतें दूर -विनोद सिल्ला एक रोज मेरे विद्यालय में चल रहा था सफाई अभियान उठा रहे थे बिखरे कूड़ा-कर्कट को मैं और मेरे छात... Read more

दुम

दुम अवसर था अपने शहर में उपमंडल स्तर के आयोजन का जाने कितने छुटभैये दुम हिलाते लगा रहे थे चक्कर प्रशासनिक अमले के करने के ल... Read more

वो हैं बड़े

वो हैं बड़े वो हैं बड़े नहीं-नहीं शायद बहुत बड़े मैं नहीं कहता वे स्वयं कहते हैं बात-बात पर लेकिन मुझे उनमें नहीं आया नजर ... Read more

अपेक्षा

अपेक्षा कर लेते हैं हम अत्यधिक अपेक्षा दूसरों से नहीं सोचते कितने खरे उतरते हैं हम दूसरों की अपेक्षा पर जब नहीं होती अपेक... Read more

मिलन

मीत मिलन की महती महिमा मिलो मोहब्बत से मन मीत संग मालिक की माया मोहे मोरा मन मन मचले मोहन से मिलन को मिलन में है मिली मि... Read more

आलिंगन

छायी देखो बसंत की मस्ती चली मदिर वासंती बयार। विटप संग लिपटी है वल्लरि आलिंगन संग निखरा प्यार। इन्हें बांहों का झूला कह दें... Read more

वह अल्हड़ नहीं

वह अल्हड़ नहीं है, अब मासूम नहीं है। किसी भी शोहरत से, महरूम नहीं है। उसकी जुदा कहानी है अब बच्ची नहीं, सयानी है उस पर चढ़ च... Read more

"मतलबी "

बिना स्वार्थ न पूछे कोई बिन काम के कोई न यार मतलब का हर इंसा बन्धु मतलबी है सारा संसार। आज समय वो है जग में। मतलब की साथी सं... Read more

सपने में

विरह के उठते धुंए में शनैः शनैः, तुम्हारे चेहरे का धुंधलाना। स्मरण कर-करके तुम्हारा, साँसों का मेरी रुक-रुक जाना। दिवास्वप्नों ... Read more

"मंशा संस्तुति" (कविता)

वीर शहीद की पत्नी कर रही इंसाफ की गुहार वीरांगना रूप में ठान ली उसने बनेगी पालनहार आज पुलवामा बलिदान की बरसी है पहली गुलाब क... Read more

जय महाकाल

कालों के भी काल महाकाल भक्तों के हैं महाकाल भज रही आज दुनियां महाकाल दुश्मन के हैं काल महाकाल उत्पत्ति ब्... Read more

बेटा-बेटी दोनों प्यारे(लावणी या कुकुभ छंद)

बेटी घर की लक्ष्मी होती, समझो सबको समझाओ। देकर मान प्रतिष्ठा रक्षा, साहस से हृदय सजाओ। बेटा-बेटी दोनों प्यारे, अंतर क्यों तुम क... Read more

मजबूत हाथ

नहीं झूकता शीश गर हैं हाथ मजबूत लोह हस्त तोड़ सकते हैं पहाड़ भी नमन करते हाथ ईश को पाते आशीर्वाद रहते खुश न हों... Read more

मुक्तक

ख्वाहिशें गुमनाम रहे लबजों से न हो जाहिर इश्क की बात चले फिर दर्द कैसे न हो जहिर डाल पे लगी फूल यक-ब-यक मुरझाता नहीं बिछड़ के... Read more

शिव ताण्डव स्तोत्रम्

शिव ताण्डव स्तोत्रम् का भावानुवाद सरसी छन्द- जिनकी सघन जटाओं से है,निःसृत गंगा धार। पड़े गले में रहते जिनके, नित सर्पों के ह... Read more