कविता

मोबाइल तू है सब का साथी

है चमत्कार मोबाइल फोन बैठे रहो कौसो दूर बात होती चंद क्षणों में आधुनिक हो गया है आज मोबाइल बन गया है स्मार्ट... Read more

जिन्दगी और मौत ---आर के रस्तोगी

चार दिन की है जिन्दगी,हंसी ख़ुशी से इसको काट ले | मत किसी किसी का दिल दुखा,तू दर्द सबके बाँट ले || कुछ भी नहीं साथ जाना,बस एक नेक... Read more

*"सच्चा प्यार"*

दूर हमसे जाने का ना करना कभी गम ! दर्द में हमारे कभी ना करना आँखें नम !! तुम्हारी ख़ुशी में ही हमारी हर ख़ुशी है ! तुम्हारी चाहत मे... Read more

कविता:- शब्द ब्रह्म है

शब्द ब्रह्म है ********** शब्द तो ब्रह्म है, शब्द शब्द में प्राण है। शब्द लक्षित होते, शब्द ही विज्ञान है।। शब्द से लिखी रा... Read more

कविता क्या है?

"कविता क्या है?" ------------------- फूलों महकी डार-सी,तारों के नभ दरबार-सी। दीपों के त्योहार-सी,ख़बरों के अख़बार-सी। हर जन मन की ... Read more

"सहारा हैं यादें" (कविता)

तन्हाइयों में ये यादें ही तो सहारा होती हैं हमारा असर करती है दोस्त बनकर बेकरार दिल को दे करारा हम दर्द... Read more

खयाल मेरा

भटका भटका सा हर शख्स नजर आता है मुझे जब से साधु हो गया है मन मेरा । बदला बदला सा संसार लगने लगा है मुझे जब से पाक साफ ह... Read more

राख़

जाके कोई क्या पुछे भी, आदमियत के रास्ते। क्या पता किन किन हालातों, से गुजरता आदमी। चुने किसको हसरतों , जरूरतों के दरमियाँ। ... Read more

सैनिक की जिंदगी,

दिवाली पर न आऊँगा, उमंगों को सुला देना नहीं मिल पाई है छुट्टी अकेले घर सजा लेना यहाँ सरहद पे हम मिलकर बमों को खूब फोड़ेंगे हमारे ... Read more

सैनिक की जिंदगी,

दिवाली पर न आऊँगा, उमंगों को सुला देना नहीं मिल पाई है छुट्टी अकेले घर सजा लेना यहाँ सरहद पे हम मिलकर बमों को खूब फोड़ेंगे हमारे ... Read more

है! मेघ जल्दी बरस

धरा कर रही पुकार, है! मेघ करो उपकार, बरसाकर तुम नीर, मिटा दो सबकी पीर, सब ताक रहे आसमान, अब सहन नही तापमान, गरमी से सब बेहाल, ... Read more

श्रीभगवान बव्वा के दोहे

"श्रीभगवान बव्वा के दोहे" बच्चों को अब दीजिए, बड़ा ज़रूरी ज्ञान । मात पिता के हाथ में, बसते हैं भगवान ।। नये समय का खेल है, द... Read more

एक दादा द्वारा अपने पोते को लिए लिखा एक काव्यात्मक पत्र। हिंदी और अंग्रेजी में.

एक दादा द्वारा अपने पोते को लिए लिखा एक काव्यात्मक पत्र। अंग्रेजी और हिंदी में. . प्रिय नन्हें वेद, अब तुम कुछ बड़े हो गए हो और... Read more

प्रश्न

दिल नहीं मानता कि ........ इन्साँ जानवर से हो गए । और जानवर इन्साँ से हो गए ।। बदल लिया है दोनों ने खुद को खुद से । थ... Read more

ट्रेन का सफ़र

दूर एक मकान.. खेत में मचान.. अनगिनत पेड़.. बिजली की खंबे.. मुँह चलाती गाय.. हवा की सांये सांये.. पतंग उड़ाते बच्चे.. नीं... Read more

अंतर्विरोध

अंतर्विरोध का दौर है, अपने आप से उलझना है.. जीवन की इस पहेली को, अपने अंदाज़ से समझना है.. उड़ने कि तैयारी में.. यूँ ही हाथ ... Read more

उधेड़बुन

अंतरदवंध है क्यों प्रबल.. मरीचिका है क्यों सबल.. खुद ही मैं रथी.. मैं ही आप,क्यों हूँ सारथी.. और उस पर समय की ये गति.. भीड़... Read more

जिंदगी से मुलाक़ात

अभी कल ही.. गली के मोड़ पर.. अचानक मिली जिंदगी.. थोड़ी मुस्कान का आदान प्रदान.. हाय हैल्लो.. पुरानी परिचित सी.. लगी जिंदगी... Read more

मरीचिका

गरम लू की तपिश.. हवा की तरंगों में कुछ. लिख जाती है.. ये लिखावट, कुछ जानी पहचानी लगती है.. कुछ बताना चाहती है.. शायद ये ... Read more

खिड़की

एक दूर अकेले मकान में.. एक खिड़की है सुनसान में.. कई दिनों से खुली नहीं.. धूल जमी है किनारों पर.. कई सदियों से वो धुली नहीं..... Read more

खिड़कियां

कभी कभी लगता है.. एक ख्याल जगता है.. हम सब मग्न है... सीमित हैं.. अपनी अपनी खिड़कियों में.. इन्ही खिड़कियों से ही.. हम चुर... Read more

मांझी अकेला

भवनाओं के उथले सागर में.. भारी सी नाव लिए.. चाहत की टूटी गागर में.. राहतों का ख्याल लिए.. सागरमंथन की लालसा में.. कमजोर पतव... Read more

तलाश

शब्दों के सितार कभी कभी.. अपने आप चल पड़ती हैं उंगलियां.. सुस्ताई सी. अलसाई सी. कोई धुन.. खोल देती है दिल की बंद खिड़किया. जिं... Read more

शाम

अभी अभी शाम ढल गई.. तपिश की ये चादर.. अलसाई सी रात ने ओढ़ ली.. शाम जाते जाते.. थोड़ा अंधेरा भर गई.. शाम का यूँ चुपचाप.. अ... Read more

सफ़र

मंजिल का पता नहीं.. सफ़र कभी रुका नहीं.. रूह को सुकून मिले.. ढूंढे एक ऐसी ठौर.. बेवजह मुस्कान लिए.. बढ़ रहा उस और.. उबड़ खा... Read more

चाँद से मुलाक़ात

दिन भर की गर्मी के बाद.. सुखी धरती पर.. तेज हवाओं के साथ बरसात.. कुछ राहत दे गई.. पर.. बत्ती गुल कर गई.. बाहर बालकोनी में.... Read more

बारिश और मन की यादें

बारिश की बूंदे ज्यों-ज्यों ,तन को भींंगा रहीं थीं। अंतर्मन में उसकी याँदे,अपनी कसक जगा रहीं थीं।। मैंने पूछा, रे मन! तू बाँवला... Read more

तलाश

रेत का विस्तार.. और उस पर.. अनगिनत उलझी.. रेखाओं का श्रृंगार.. या ये नदी के पदचिन्ह.. जो गुजरी थी अनायास.. इस विस्तार से.... Read more

955 तेरा इंतजार

बैठा हूं तेरी याद में दिलबर, कैसे मिटाऊँ तनहाइयाँ। जो तू आ जाए मेरी जिंदगी में, बज उठे शहनाइयाँ। याद तेरी में काटना ... Read more

मेरी मां

उठ जाती है रोज सवेरे भोर से पहले, समेट कर खुद की ख्वाहिशें घर के काम के साथ, चल देती है दो जून की रोटी के लिए , बिना जाने मंज़िल ... Read more

काले काले बादल आये..(बाल गीत)

काले-काले बादल आये. साथ साथ में बारिश लाये.... उमड़ -घुमड़ कर आये बादल । अम्मा से लगवा कर काजल।। बैठ हवा के उडन खटोले ... Read more

माॅनसून

माॅनसून मान-सून भई माॅनसून अब तो ले हमरी भी सुन, हमरी भी सुन यू कम ऑनली साल में वन्स, तुनक तुन तुन, तुनक तुन तुन करते तुम बादल ... Read more

देश में रोजगार की समस्या क्यों ?----आर के रस्तोगी

गाँव खाली हो रहे,सब शहरों की तरफ ही भाग रहे | खेती-बाड़ी छोड़ कर,कारखानों की तरफ भाग रहे || हलधर हल नहीं चला रहे,ट्रेक्टर वे सब चल... Read more

जरूरत है न्याय की

दिनांक 22 / 6 / 19 न्याय उलझा है गवाह और सबूत में अस्मिता लूट रही खुले बाजार में शैतान घुम रहे समाज में बच्चियाँ भयभीत ... Read more

तेरे संग यारा

तेरी प्यारी बातें सपनों में आती है तेरी मुस्कुराहट मुझको सताती है तेरी काली जुल्फे मौसम बनाती है तेरी बोली गीत कोई नया गाती ह... Read more

नवगीत

पहले से आराम बहुत है ********************* जो भेजे हो दवा पेट की केवल दो दिन ही खाया मैं पहले से आराम बहुत है * खे... Read more

किनारे का पेड़

नदी की लहर कभी इधर भी आयेगी इसी इन्तजार मे किनारे का पेड़ सूख गया है । पंछियों ने भी और कहीं आशियाना बना लिया है उनका सब... Read more

क्षमा मांग लो...

भरा पड़ा है देश, धर्म के गद्दारों से। गूंज रहा परिवेश विरोधी नक्कारों से।। भारत तेरे टुकड़े होंगे, श्वर आता है। अफ़ज़ल का आवाह्न दे... Read more

सूरज से मुलाक़ात

आज कई दिन बाद.. मैंने उगता सूरज देखा.. शायद हर रोज ऐसे ही.. कर्मठ सा, आता होगा.. पर मुझे नहीं पाता होगा.. पर मैं तो होता ह... Read more

माँ

खूं अपना पिला कर तुम्हें जिस माँ ने संवारा छोटी सी अज़िय्यत भी न दो उसको खुदारा उठती है नजर जब भी मिरी माँ की तरफ तो लगता है ज... Read more

कविता

कभी उनसे, कहीं मिलने की कुछ तरकीब हो जाये, कुपित जीवन के पतझड़ में, कभी एक फूल खिल जाये। सुना है हर धड़कते दिल के कुछ अरमान होते हैं... Read more

महत्व योग का

दिनांक 21/6/19 योग के रंग में रंगी है दुनियाँ हर तरफ हैं योग की खुशियाँ मन शरीर रहे स्वस्थ अब योग है साथी सब का अब ... Read more

951 उलझे शब्द

कभी-कभी शब्दों में यूँ उलझ जाता हूँ। कि शब्द कहाँ से कहाँ जा पड़ते हैं। कुछ समझ ही नहीं पाता हूँ। कभी-कभी शब्द यूँ भाग... Read more

योग दिवस

गर रोज़ सुबह शाम तुम योग को करते जाओगे स्वस्थ मन और निर्मल काया यह ,ताउम्र तुम पाओगे रोगो को ये दूर भगाए स्फूर्ति ताकत, हरदम... Read more

अन्तराष्टीय योग दिवस पर एक सन्देश -योग करो,आरोग्य रहो ---आर के रस्तोगी

योग करो,आरोग्य रहो" यह संदेश जन जन तक पहुँचाना है | भारत को अब पूरे विश्व का हम सबने ही योग गुरु बनाना है || सुबह उठो,योग करो,हर... Read more

नाम उसी का योग है....

अंतराष्ट्रीय योग दिवस पर मेरी एक स्वरचित कविता राष्ट्र को समर्पित मानव को मानवता सीखने, एक निष्ठा रूपी प्रयोग है। जिससे काया कल... Read more

आज का मेहताब...

जन्म लेते ही, औरों का मोहताज था, अपने दम से, न चलने का ढंग था जिसे। जब जवानी का उसको, नशा चढ़ गया, वो किसी को भी, कुछ भी समझता नही... Read more

952 सुना हाल ए दिल

सुना हाल ए दिल तू अपना, मेरा भी हाल सुन। ना बैठ तू यूँ चुपचाप ,ना रहे यूँ गुमसुम। कोई तस्वीर बना ऐसी, जो दिल में उतर जाए। छेड़ ... Read more

दोहा

ज्यों चन्दा घनघोर घटा से झाँक रहा अपने प्रीतम को, ऐसे ही रुखसार तुम्हारा आकर्षित करता जन मन को। -अशोक शर्मा Read more

काले तिल

मुख मंडल पर काले तिल की बातें अजब निराली है, लगता है मानो ईश्वर ने उनकी नज़र उतारी है। प्रेम छलकते चंचल नयनो पर वो भी बलिहारी है, ... Read more