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Category: कहानी

प्रेम का ज्वार-१
भाग-१- प्रेम का ज्वार ----------------- प्रीति बेलि जिनी अरुझे कोई,अरुझे मूए न छूटे सोई। प्रीति बेलि ऐसे तन बाढ़ा,पलुहत सुख बाढ़त दुःख बाढ़ा। प्रीति अकेली... Read more
बालकहानी - घमंडी सियार
घमंडी सियार ओमप्रकाश क्षत्रिय "प्रकाश" काननवन में एक सियार रहता था. उस का नाम था सेमलू. वह अपने साथियों में सब से तेज व चालाकी... Read more
बेटियां
एक बार घटित हुआ वो किस्सा फिर उसने शोर मचाया सबको जगाया जग जग मै चर्चित होकर थम सा गया ये किस्सा था बेटियों के... Read more
मान
विभा के माथे पर सदैव सिंदूरी बिंदी सजी रहती थी. वह बड़े चाव से इसे लगाती थी. उसके लिए यह प्रतीक थी उसके सुखी वैवाहिक... Read more
ये मेरा दोष है?
ये मेरा दोष है? अपने वार्डरोब से जल्दी से साड़ी निकालकर पहन ली और पर्स के साथ हॉस्पीटल चेकअप की फ़ाइल लिए हुए सुविधा ने... Read more
हवेली
वृंदा जिस समय हवेली पहुँची वह दिन और रात के मिलन का काल था. उजाले और अंधेरे ने मिलकर हर एक वस्तु को धुंधलके की... Read more
लकीर
इन गलियों में रमन ने पहली बार कदम रखा था। मेकअप लगाये झरोखों से झांकते चहरे जो हाव भाव से उसे अपनी ओर खींचने का... Read more
बांझ
सुमन गर्म कपड़ो का संदूक खोले कितनी देर से बैठी थी। बेटे का पुराना लाल स्वैटर झटककर पहन लिया था दूर से आई एक आवाज... Read more
मेरा  आत्मसम्मान
मेरा आत्मसम्मान मेरा आत्मसम्मान रात ऐसे मध्यम सी ढल रही थी । अपनी बाल्कनी से नीचे झाँकते हुअे, रितीमा विहार का इंतजार कर रही थी... Read more
मेरा विश्र्वास
मेरा विश्र्वास यूॅंही माेल में घूमते हुए आठ बज चुके थे। मौनवी ने मोबाइल से नरीत को बताया , "मुझे थोड़ी देर लग जायेगी ,मै... Read more
शाम का साया
शाम का साया तेज दौड़ती हुई ट्रेन की खिड़की के पास बैठी हुई तक्षवी, उड़ती हुई लटो को संभालती घड़ी में टाइम देख रही थी... Read more
समजौता
समझौता अभी तो सुबह के ८- ३० हुए थे ।। जल्दी तैयार होकर नित्या एक्स्ट्रा क्लास के लिए अपनी कार लेकर निकल ही रही थी... Read more
स्वरिता
'अरे ,चलो देर हो रही है 'कहते हुँऐ अंगना अपनी छोटी सी बेटी स्वरिता को हाथ खींचकर कार में बिठाने लगी । 'नहीं आना हे... Read more
क्या करे
क्या करे---- खुशी , कैसी खुशी अर्जित कर रहा था अखिल जो किसी के आंसुओं से लिखी है, जबरन किसी की जड़ो को काटने से... Read more
अंतहीन यात्रा
शरीर, क्या है, बस जन्म लेने का माध्यम या फिर एक सौभाग्य भी जन्म देने का। सुमन की थरथराती ऊंगलियां अपने ही शरीर को टटोलकर... Read more
नंगे पांव
अंजिली आखिर कितनी देर आंसुओं से तन मन भिगोती , रात कब तक अपनी परछाई से उसकी आंखो में घुलती। शायद मंदिर के घण्टे ने... Read more
नोटबन्दी
बिना किसी बैकप के,इक्के के पीछे घोड़े को बान्ध कर दौड़ाने वाले मोदी जी भारत के पहले प्रधान सेवक हैं l 500 और 1000 के... Read more