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Category: कहानी

अनहोनी
अनहोनी अचानक सड़क पर एक चीख सुनाई पड़ती है । छ्ज्जे परखड़े दो छात्रआपस मे गुफ्तगू कर रहे थे । धुंधलका गहराने लगा था ।... Read more
प्रायश्चित
प्रायश्चित शीतकाल प्रारम्भ है, रात्रीकी चादर सुबह का सूरज धीरेधीरे समेट रही है। उसकाप्रकाश दरवाजे की झिर्रीयों से छन-छन कर अंदर प्रवेश का अहसास करा... Read more
डिफ़ाल्टर
डिफाल्टर प्रवीण कुमार हमारे गाॅव में एक परमानन्द जी का परिवार रहता था। षाम को जब मेहनतकष मजदूर,बटोही घर पहॅुच कर विश्राम की मुद्रा में... Read more
मंझली बेटी.
मँझली बेटी---डा प्रवीण कुमार श्रीवास्तव Quote Post by admin » Mon Aug 28, 2017 4:08 pm मँझली बेटी बंजारों की दुनिया अद्भुत होती है ।... Read more
जहाँ सुमति --------
           जहां सुमति ................ गोधूलि की बेला थी , गाँव –गाँव दुधारू पशु धूल उड़ाते हुये अपने अपने निवास की ओर अग्रसर थे । सूरज की... Read more
मेरा बंगला
मोनू दोस्तों से तन कर बोला-"फिकर न कर मैं ले आता हूँ तेरी गेंद। ये तो मेरा ही बंगला है।" पानी से भरे स्वीमिंग पूल... Read more
आफत.....
आफत... शाम का वक्त था बाजार की रौनक शुरू ही हुई थी कि मेरा महाविद्यालय से आना हुआ! अचानक ही एक हाय-हैलो वाली सखी सामने... Read more
हे कृष्ण तुम कहां हो
सादर प्रेषित स्वरचित पिताजी अखबार की खबरें पढ़ते हुए एकाएक बोले,हे भगवान न जाने क्या कुछ और देखना-सुनना लिखा है इस योनि में। मां पूजा... Read more
गज़ल
रदीफ़- हम हैं। इन्द्रधनुषी रंग तुम हो सनम,माना खुशरंगों का। सुन हम भी कम तो नहीं,सलौने ख्वाब से हम हैं। माना कि तुम समंदर हो... Read more
*ज़िंदगी* ******** धूप की तरह खिलखिलाती राहत की ज़िंदगी में इस तरह अँधेरी रात ग्रहण बन कर आएगी ये उसने तब जाना जब अस्पताल में... Read more