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Category: हाइकु

हाईकु-छंद
१ सच्ची जिंदगी पापाचरण तज अच्छी वंदगी २ व्यसन त्यागें गुणों मे श्रेष्ठतम वे रहें आगे ३ जिंदगी जीत कर्तव्य पथ पर सभी से प्रीत... Read more
हाईकु-पंच
आज के हमारे हाईकु देखिए कुछ इस तरह.... हाईकु-पंच १ हम जो लिखे नाम के लिए तब क्षणिक सुख २ हम क्यो लिखें कुछ दाम... Read more
माँ
प्रदीप कुमार दाश "दीपक" ------------------ माँ 01. माँ का आँचल छँट जाते दुःख के घने बादल । --0-- 02. खुशियाँ लाती तुलसी चौंरे में माँ... Read more
वो चेहरा
"शराफत का करामाती ताला है सीरत पर" "अनजान सी नज़रें है लेकिन मुस्कान भी है" "उम्मीद देता हर आते जाते को फ़क़ीर मन! "हर मौसम... Read more
हाइकु
सक्रांति के हाइकु पर्व त्यौहार उत्साहीत अपार प्रथा आधार खाये घेवर भाभी हाथ देवर सगुन धर नाचें व गायें लोहड़ी में हर्षाये धूम मचाये सज्जित... Read more
जीवन
१ जिंदगी है एक खेल कभी विरह कभी मेल। २ जीवन रंगीन है कलरव करता संगीत है। ३ नदी का नीर श्वेत और शीत जीवन... Read more
सुखद पल
नीला अमर महकती बगिया सुखद पल बहता पानी नदिया के किनारे सुखद पल चाँद सूरज धरती के पहरे सुखद पल ईश्वर भक्ति मन है आनंदित... Read more
खुबसूरत हाईकु
??????जय माँ शारदे?????? -------------------------------------------------------------------- जपानी विधा हाइकु १ - नवसूरज उल्लासित मन अभिनंदन २ नई उम्मीदें बदलती तारीखें है शुरुआत ३ आस का पंछी उम्मीद... Read more
ओस
पिघला चाँद टपका बूंद बूंद बन के ओस करें श्रृंगार कमसिन कली का ओस के मोती कातिल सूर्य कोहरे ने बचाई ओस की जान नोचे... Read more
जीवन पथ
************************ जीवन पथ संभल मुसाफिर बदली दिशा --- शीत लहर कोहरे का जहर दूषित वायु --- भक्‍ति सागर परंपरा पुरानी ज्ञान की वर्षा अभ्रिषेक शर्मा... Read more
मेरे कुछ हाइकु
मेरे कुछ हाइकु *अनिल शूर आज़ाद सूरज छिपा घिरने लगी सांझ विहग उड़े। हंसा चन्द्रमा रात्रि-रानी देख के नाचे तारक। यह अंदाज़ तुम्हारी कसम भूलेगा... Read more
चंद हाइकु
चंद हाइकु *अनिल शूर आज़ाद गांधी कहते सच अहिंसा श्रम मानव धर्म। बीता समय कल की हक़ीकत आज सपना। लघु पत्रिका अभाव ही अभाव पत्रिका... Read more
हाइकु
बिकने लगे कल्पित समुंदर भावनाओं में =============== सीखो हायकु पाँच सात पाँचमें जापनी विधा ==================== तीन पंक्ति में सत्रह वर्णमाला पूरित भाव ================= ये प्रदूषण... Read more
शिखरिनी ( हाइकू):: जितेंद्रकमलआनंद: जग असार( पो ७७)
शिखरिनी छंद ------------------ जग असार किंतु परम ब्रह्म । हैं सारात्सार ।।४!! सर्व विज्ञाता परमब्रह्म ही हैं -- सर्वान्तरात्मा ।।५!! मानव धर्म नैतिकता पूर्ण है... Read more
शिखरिनी छंद( हाइकू ) जितेंद्रकमलआनंद: गुरु सकाश( पोस्ट७६)
शिखरिनी छंद: ------------------ गुरु सकाश ( ध्यान ) करिए प्रात: शाम । पायें प्रकाश ।। १ ।। अक्षराक्षर शिखरिनी छंद है । सत्राहाक्षर ।।२ ।।... Read more