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Category: हाइकु

दिल!!हाइकु!!
पत्थर दिल बेख्याल सा रहता घूमता रहा घमंडी रहा बेपरवाह फिरा ऐसे ही रहा तोड़ने वाले तोड़ते ही रहते मायूस हुआ चाहत रही दिल में... Read more
“हाइकु”
“हाइकु” कल की बात आस विश्वास घात ये मुलाक़ात॥-1 दिखा तमाशा मन की अभिलाषा कड़वी भाषा॥-2 दुर्बल काया मनषा मन माया दुख सवाया॥-3 मान सम्मान... Read more
हाइकु!!निर्झर
बारिश आयी निर्झर सी बछौर मन भायी सोता बहा दिखा प्रकृति छटा मन समायी इंद्रधनुष रंग बिखेरे खूब झरना खिले आकिब देखो ऋतू बहार आयी... Read more
“हाइकु”
“हाइकु” छूटा बंधन मुँह में मिठाइयाँ सत्य की जीत॥-1 घिनौना स्वार्थ हाय तोबा दुहाई वो शहनाई॥-2 बहाना बाजी राह मील पत्थर मोह मंजिल॥-3 वापस आई... Read more
आइना
आईना (हाइकु) ....... ...... ........ क्षमता का अपमान अयोग्य को सम्मान जातीय आरक्षण। बिलखती जनता भ्रष्ट व्यवस्था मौकापरस्त राजनीति। ऊंची दुकान फीके पकवान वर्तमान राजनेता।... Read more
हँसी: खास टॉनिक
हँसी: खास टॉनिक // दिनेश एल० “जैहिंद” मर्द हंसोड़ लुगाई हंसमुख जोड़ी बेजोड़ // ********** लो हंसगुल्ले स्वाद में रसगुल्ले खास टॉनिक // ********** शिशु-मुस्कान... Read more
षड ऋतु
षड ऋतु (हाइकु) 1/ बसंत ऋतु कोयल की पुकार उमड़े प्यार। 2/ ग्रीष्म की ऋतु सूर्य तेज तर्रार गर्मी की मार। 3/ वर्षा की ऋतु... Read more
नारी
नारी का तन । नहीं कोई वस्तु । पवित्र मन ।। माँ का प्यार । कम न होगा कभी । है बेशुमार ।। एक भारत... Read more
***खोजता स्वअस्तित्व अपना***
विषय- खोज/तलाश रेंगा काव्य शैली 5+7+5+7+7+5+7+5+7+7----- * माँ दरबार मनोकामना पूर्ण तलाश मेरी संपूर्ण फलीभूत इच्छाएँ हैं संतुष्ट * खोजता आज स्वअस्तित्व अपना रात्रि का... Read more
* खोजता आज  स्वअस्तित्व अपना *
विषय- खोज/तलाश रेंगा काव्य शैली 5+7+5+7+7+5+7+5+7+7----- * माँ दरबार मनोकामना पूर्ण तलाश मेरी संपूर्ण फलीभूत इच्छाएँ हैं संतुष्ट * खोजता आज स्वअस्तित्व अपना रात्रि का... Read more
दूरियाँ
(1)?कभी दूरियाँ आती नहीं है रास मुझे तुम्हारी ? (2)?नजदीकियां बहुत सुकूं देती मुझे तुम्हारी ? (3)?कभी ना जाना तुम दूर हमसे कसम खा ले... Read more
सीता विरह
हाइकु ***** सीता विरह है परीक्षा राम की व्याकुल जिया ************** कौन है जीता तुम बिन प्रेयसी राम के सिया ************** प्राण विवश जंगल में... Read more
प्रिय आये हैं
जल तरंग बज उठा मन में आयी बदरा मन प्रसन्न बरसा बहार में घुली कजरा प्रिय आये हैं जलसेतु बाँध दो चलो कहार खुशी के... Read more
प्रकृति
शिखरिणी छंद । सघन वन । खोते अस्तित्व । भीगे नयन ।। कैसे हो वर्षा । खत्म होते पेड़ । मन तरसा ।। हमें है... Read more