घनाक्षरी

डमरू घनाक्षरी

डमरू घनाक्षरी गरज गरज कर बरस चपल घन, तड़प उठत अब सकल जगत मन। पग पग पल पल लगत अगन यह बढ़त चलत अब जलत रहत मन। सन सन सन सन... Read more

जीवन संगिनी (मनहरण घनाक्षरी छंद)

👲👲👲 जीवन^संगिनी 🙍🙍🙍 ^^^^^^^^^*************^^^^^^^^^^ मम जीवन संगिनी, कलत्र अंग अंगनी। खुशियों के संग प्रिय, अंग में विरा... Read more

मनहरण घनाक्षरी

#मनहरण_घणाक्षरी छंद प्रथम प्रयास आसमां में काले घन, उमड़ चले हैं तन दामिनी के संग मिल, नगाड़े बजात हैं। मेघ देख विरहन, व्याकु... Read more

नेताजी सुभाष चन्द्र बोष की जयंती पर....

तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा, जोश भरे ऐसे उदघोष को प्रणाम है। दिल में भवानी और खून में जवानी दिखे, वतनपरस्ती वाले जोश क... Read more

रस ज्ञान (घनाक्षरी)

प्रेमी-प्रेमिका के बीच, योग या वियोग हो तो, वहां श्रृंगार रस की, अनुभूति होती है। हो हँसी-विनोद और, हास-परिहास दिखे, हास्य रस ज... Read more

राष्ट्रीय युवा दिवस

राष्ट्रीय युवा दिवस, बारह जनवरी आज, जागो सब युवा आओ, मनाओ आनंद जी। जन्म हुआ इस दिन, देश के सपूत का जो, जिन्हें जानते हैं सब, श्... Read more

विश्व हिन्दी दिवस की, खुशियाँ मनाइये

1.दस जनवरी आज, हमे हिन्दी पे है नाज, विश्व हिन्दी दिवस की, खुशियाँ मनाइए। 2.हिन्दी बोलें हिन्दी लिखें, हिन्दुस्तानी हिन्दी दिखें... Read more

मनहरण घनाक्षरी

जन्नत ये जिन्दगी है मोहब्बत बंदगी है प्यार में रवानगी है आप जब से मिले। फूल दामन में दिए कांटे ख़ुद झेल लिए बाग़ तूने पै... Read more

जवान औ किसान

जवान औ किसान 💐💐💐💐💐💐💐💐 हिन्द के जवान तुम,वीर हो महान तुम। रक्षण में जान तक,आप ही लुटाते हो।। दुश्मन को मार कर,रीपु का संघार कर। ... Read more

रावण दहन

रावण ** दहन ************* देखा रावण दहन, आया विचार गहन। मन के तू रावण को, काहे न मारता है।। पुतले है फूंकता तू,खुद पे... Read more

बड़ी ज्ञानी जात

"न हिन्दू बड़ा न ही मुल्ला बड़ी ज्ञानी जात है, धर्म के आडे छिपके करते उत्पात ये"| Read more

चीर के बनाए राह

चीर के बनाये राह, पत्थरों के सीने पे जो। दिल में सदा उनकी, याद पलती रहे।। एक साथ चल पड़े, कारवां के कारवां तो। कितनी भी मुश्किलें... Read more

भूल ये तुम्हारी

कुण्ठा में गुजार दिया, तुमने सफ़र कहीं। भूल ये तुम्हारी कहीं, तुम्हें सालती रहे।। मन की निराशा तेरे, मन में रहे जो कहीं। रासते मे... Read more

सरस्वती वंदना

वीणा वादिनी ओ माता, हंस वाहिनी ओ माता। चार वेद धारिणी मां, ज्ञान का प्रकाश दे।। है घना अंधेरा घेरे, दूर हो गये सबेरे। मुझको उजालो... Read more

सरस्वती वंदना

मात शारदे सुनो जी, दृग खोल देख लो जी। द्वार पे खड़ा हूं मात, तनिक तो ध्यान दे।। ज्ञान चक्षु खोल माता, तम सारे हर माता। मेरी मुश्क... Read more

हिन्दी

बढी खूब साख ताज हिंद का है हिंदी आज, भाषा पर नाज मनमीत होना चाहिए। छाई हर देश मन भाई नर नेक अब, बने देश भाषा ये प्रयास होना चाहिए... Read more

कुप्रभाव

- "मन का छंद मनहरण" दिनांक - 09.09.2018 दिन - रविवार 🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞🌞 छंद -१ जात धर्म भेद भाव, नित्य दे रहे है घाव। इनका बूर... Read more

कृष्ण भजन

१)कृष्णा संग बसे राधा बिन श्याम सब आधा मन बसे रूप सादा ये ही सच्ची प्रीत है। २)श्याम जब से मिले हो कष्ट सारे ही हरे हो बजे म... Read more

घनाक्षरी

मनहरण घनाक्षरी छंद विधान- कुल 31 मात्राएँ। 16, 15 पर यति। अंत में लघु गुरु। ******************************* "जननी जन्मभूमिश्च... Read more

मेंहदी

विषय -मेंहदी विधा -धनाक्षरी कर सोलह श्रंगार वधू चली ससुराल लगती आज गजब मेंहदी सजी हाथों में। पिता का प्रेम इस मे पति का... Read more

दरिद्र ही नारायण

विधा--- घनाक्षरी 🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯🔯 दरिद्र ही नारायण *******†*†****** दूध दधी हाथ लिए, फल का प्रसाद लिए। गंगा जल। ढार क... Read more

मनहरण घनाक्षरी छंद

सुनो सारनाथ में जो दिए गए उपदेश,उनको ही अब हमें अपनाना चाहिए। बौद्ध धर्म के त्रिरत्न बुद्ध धम्म और संघ,पर पूरे भारत का ध्यान जाना... Read more

कुण्ड‌‌‌‌‌‌‌‌लियाँ

कद काठी में वे बड़े, ऊपर से धनवान । धनवानों का खासकर, अफसर रखते ध्यान ॥ अफसर रखते ध्यान, कहें जो वे करते हैं । नीरव जैसे संत, इन्ह... Read more

कलयुग के कन्हैया

सुख छीन रहे दुख बीन वजा वनके मनमोहन ये कलि वाले । अपने पन को पनपात नही ,मतभेद बढ़ात सभी दल वाले ।। कब राम रहीम चहें लरवो ,पर द्वँद ... Read more

मनहरण घनाक्षरी

निग़ाह राह टारता , रहा वक़्त गुजारता । हँस सँग दुनियाँ के , दर्द मैं बिसारता । जी कर खुशियों को भी , खुशी रहा निहारता । मैं... Read more

मनहरण घनाक्षरी

ये बदल सावन के , पिया मन भावन से । रिम झिम बरसत , रस प्रियतम से । ज्यों प्रणय निवेदन , साजत है साजन से , थिरकन होंठो... Read more

हाइकु

"नरेंद्र मोदी" ********** (1)प्रधानमंत्री जन सेवक सत्ता देश हित में। (2)कूटनीतिज्ञ जन भाग्य विधाता कर्मठ ज्ञाता। (3)दृढ़... Read more

हाइकु

" कृषक " ******* (1)गर्म तपन उगलता सूरज कृषि सुखाई। (2)बिन पानी के आग लगी खेतों में कृषक रोए। (3)कृषक छाले सुलग राख ह... Read more

हाइकु

"दोस्ती"(हाइकु) ******* (1)दोस्ती का पता "सुख-दु:ख"निवास मैत्री नगर। (2)नेह की डोर विश्वास संग बाँधी दोस्ती चरखी। (3)हाथ... Read more

--जल ही जीवन है--कविता

मनहरण कवित्त"जल ही जीवन है" ------------------------------------------- मिलके जल बचाएँ,आओ रे कल बचाएँ, संकल्प हम उठाएँ,जल बहाना न... Read more

--कब तक तक यूँ ही घर देखेंगे उजड़ते--

कवित्त मनहरण--"कब तक" ----------------------------------- जब दो फूल खिलते,अच्छे ही दोनों लगते, जब दो हाथ मिलते,शोभा दोनों बनते। ... Read more

--कोशिशें नाक़ाम न हों--मनहरण कवित्त छंद

मनहरण कवित्त--"कोशिशें नाक़ाम न हों" --------------------------------------------------- समय अनमोल है,व्यर्थ गँवाना नहीं है, हार स... Read more

--विधान ऐसा बने--घनाक्षरी छंद

कवित्त छंद की परिभाषा और उदाहरण कवित्त छंद ---------------यह एक वर्णिक छंद है।इसमें कोई गण का नियम नहीं होता है।इसके प्रत्येक चरण ... Read more

घनाक्षरी

सिंहावलोकन घनाक्षरी - जाओगे भाग रण से,याद करो भूतकाल, राह भी मिलेगी नहीं,फिर पछताओगे। पछताओगे यों बैठ,अपने कुकर्म पर... Read more

घनाक्षरी

सिंहावलोकन घनाक्षरी - जाओगे भाग रण से,याद करो भूतकाल, राह भी मिलेगी नहीं,फिर पछताओगे। पछताओगे यों बैठ,अपने कुकर्म पर... Read more

घनाक्षरी

सिंहावलोकन घनाक्षरी - जाओगे भाग रण से,याद करो भूतकाल, राह भी मिलेगी नहीं,फिर पछताओगे। पछताओगे यों बैठ,अपने कुकर्म पर... Read more

मधुर - मधुर मन्द - मन्द

..... त्रिपद छन्द ..... ( ठुमक चलत रामचन्द्र ) से प्रेरित मधुर- मधुर मन्द- मन्द , मोहन मुस्कायें मोर मुकुट तिलक भाल वैज्यन्ती... Read more

घनाक्षरी

8,8,8,8 सभी शब्द बिना मात्रिक श्रृंगारिक डमरू घनाक्षरी पवन परस तन,मचलत हर मन, बहकत चहकत,मनमथ वश सब। नयन मदन मद,अधर अनघमय... Read more

घनाक्षरी

डमरू घनाक्षरी-8/8/8/8 अमात्रिक शब्द घटत अतल जल,बढ़त उमस पल, जलत अचर चर,गरम सहत जग। चम चम चमकत,नज़र न ठहरत, तन ... Read more

नसीब आपन आपन (भोजपुरी)

नसीब आपन आपन ******************* रोज ही विष के पान करीला सगरे दिन हम काम करीला सुख नइखे बस आश करीला ... Read more

आज की राजनीति (व्यंग)

आज की राजनीति ****************** दलित दलित का खेल चल रहा, नेता उनसे से मेल चल , तिकड़म चुनावी झेल चल रहा, ... Read more

वृक्ष की पुकार

हमें न काटो *********** काटो मत उपकार करो ना ऐसे संहार करो खुद का मत अपकार करो कुछ तो करो विचार। प्राणवायु... Read more

हिन्द के जवान

हिन्द के जवान ************** हिन्द के जवान हो वीर तुम महान हो राष्ट्र को आतंक से आज अब बचाइये। वीरता ... Read more

परिवर्तन की बयार

(समीक्षार्थ) परिवर्तन का बयार ***************** कैसी ये उल्टी बयार बढ रहा है पापाचार, हर तरफ है... Read more

राह तो दिखाइये

आप सभी ज्ञानी जनों के समीक्षार्थ 👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏👏 राह तो दिखाइये **************** बीन रहा कुड़े रोज, कर रहा भाग्य खोज।... Read more

लालच का असर

लच लच लच रहा , लालच की ओर सदा। लालच के आगे आज, मानव भी सो गया। लूट, लूट, लूट, लूट, लूट ही मचाये सदा। दानवी प्रवृत्तियों में, ... Read more

बेटी बचाओ

बेटी बचाने की मुहिम जो चलाई, उस अभियान को सार्थक भी बनाइए, नीति राजनीति की बदलिए हुज़ूर, त्राहि-त्राहि करे देश इस देश को बचाइए। र... Read more

लाड़ली लाड़ो

*लाड़ली लाड़ो* ************* लाड़न ते पारी लाड़ो ल्हौरी अति लाड़ली है, लाड़ कूँ लड़ाय मेरे मन कूँ लुभाय रे । मीठी तुतलाय बोल गोद... Read more

सुनो ये आवाज

*सुनो ये आवाज* ************** मन में उमंग होय तन में तरंग उठें, होवत हैं लीन दोउ बीज रुप जात है । फूटत है बीज सूक्ष्म चीर कै धरा... Read more

जन-धन-खेत-पशु, आग से बचाइये

घनाक्षरी (खेतों की ये नरवाई) ---- खेतों की ये नरवाई, मत जला मेरे भाई, घास-पात खेत की ही, मिट्टी में दबाइये. वर्षा के पानी को फ... Read more
Sahityapedia Publishing