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Category: गीत

“तेरे शहर में“
Sahib Khan गीत Dec 9, 2016
तेरी याद फिर खींच लाई, मुझे तेरे शहर में कैसे जिए तेरे बिना, हम तेरे शहर में, हर शै मिलते ही तेरा पता पूछती है,... Read more
एक ख्वाहिश है
Sahib Khan गीत Dec 8, 2016
एक ख्वाहिश है,,,,,,,,,,,, दिल से दिल लगाने की, आंखों से दिल में उतर जाने की, एक ख्वाहिश है,,,,,,,,,,,, सांसो से सांस मिलाने की, तेरे लबों... Read more
दास्ताँ-ए-हिन्दुस्तान
Sahib Khan गीत Dec 8, 2016
कैसे कहें हम, दास्तान-ए-हिंदुस्तान, किसी का मर गया ज़मीर, किसी ने लूट लिया जान, कैसे कहें हम, दास्तान-ए-हिंदुस्तान, सियासत की कुर्सी पर बैठे हैं, सियासी... Read more
गोरे- गोरे गाल…………. तेरा होना पास मेरे |गीत| “मनोज कुमार”
गोरे- गोरे गाल तेरे सिल्की- सिल्की बाल तेरे देता है प्यारा अहसास इनका होना पास मेरे जन्म जन्म साथ मेरे रग रग में वास मेरे... Read more
हिन्दी बाल गीत - 01
हिन्दी बाल गीत -०१ . नन्हें - मुन्ने बच्चे हम, पर कितने हैं सच्चे हम, छोटी सी दुनिया हमारी, मम्मी -पापा-दीदी- हम. . कभी करते... Read more
बाल गीत
बच्चों के है दिल को भाता ऊँची गर्दन वाला ऊँट ढेर ढ़ेर ये पानी पीता बड़े बड़े ये लेता घूँट नहीं रेत पर कभी फिसलता... Read more
हम मानव हैं हरित धरा के :: जितेन्द्र कमल आनंद ( पोस्ट १५९)
Jitendra Anand गीत Nov 21, 2016
हम मानव हैं हरित धरा के ,मानवता से नाता है । भारत भाग्य विधाता है ।। महारथी कवि काव्यप्रज्ञ ये स्वर्णिम रथ दौडाते हैं। काव्यकलश... Read more
गीत
Ravi Sharma गीत Nov 12, 2016
पेड़ों की छाँव तले फूलों के पास बैठूँ तो मुझे लगे आप मेरे साथ । राहों में सपने पले धुँध आसपास देखूँ तो मुझे लगे... Read more
गीत
Ravi Sharma गीत Nov 12, 2016
मन की बोली मन की बोली जो कोई जाने, वो ही अपना कहलाता है। मन वो पंछी जो निश- दिन, हमको, ख़्वाब सुनहरे दिखलाता है।... Read more
इस देश को प्राचीन संस्कार चाहिये
इस देश को प्राचीन संस्कार चाहिये कर्तव्य हो प्रमुख,नही अधिकार चाहिये। शिक्षा मिले कुछ ऐसी, जिसमें मूल्य भी रहें हमको नहीं अब खोखला व्यापार चाहिये।... Read more
धर्म क्या है ?
Naveen Jain गीत Nov 10, 2016
विषय - धर्म धर्म क्या है ? धर्म कोई पंथ नहीं, धर्म कोई संत नहीं । धर्म की ना शुरूआत है, धर्म का कोई अंत... Read more
गीत
Ravi Sharma गीत Nov 9, 2016
तौबा- तौबा करते- करते प्यार हो गया। आँखों ही आँखों में कब इक़रार हो गया। कुछ ना बोली, मुख ना खोली। जानूँ ना मैं, आँख-... Read more
युग निर्माण करें सब मिलकर::-- जितेन्द्र कमल आनंद ( पोस्ट १३८)
युग निर्माण करें सब मिल कर, मानवताके पथ पर चलकर । परम अपेक्षित है गीताके ,परमतत्व को फिर पाने की । आवश्यकता है भारतको ,... Read more
लोककवि रामचरन गुप्त के पूर्व में  चीन-पाकिस्तान से भारत के हुए युद्ध के दौरान रचे गये युद्ध-गीत
कवि रमेशराज के पिता स्व. श्री 'लोककवि रामचरन गुप्त ' का चर्चित 'लोकगीत'—1. || पापी पाकिस्तान मान || ---------------------------------------------------------------- ओ पापी मक्कार रे, गलै न... Read more
१३५ : अंतस जब दर्पण बन धुँधलाता यादों को -- जितेंद्रकमलआनंद ( पोस्ट१३५)
अंतस जब| दर्पण बन धुँधलाता यादों को । विरहाकुलनयनों से नीर छलक आता है ।। दामन में धूप लिए यौवन दोपहरी में ---- भटका है... Read more
गीत
Ravi Sharma गीत Nov 6, 2016
उलझ- उलझ कर सुलझ- सुलझ कर, फिर से उलझ जाती हूँ । तुम्हें जब उदास पाती हूँ । मचल- मचल कर, संभल- संभल कर, फिर... Read more
बोलो वंदे मातरम
बलिदानों का दुर्लभ अवसर कहीं न जाए बीत पहन बसंती चोला कवि अब गाओ क्रांति के गीत वंदे मातरम, बोलो, वंदे मातरम केसर की घाटी... Read more