Skip to content

Category: गीत

कंडेक्टर बाबू टिकसै बनावत नाहीं ! ***************
कंडेक्टर बाबू टिकसै बनावत नाहीं ! *********************** इयें-उएँ तुम ताकौ- झांकौ, नीकी सवारी पास मैं टांकौ नेकौ मन सकुचावत नाहीं कंडेक्टर बाबू टिकसै बनावत नाहीं... Read more
साथी गर तू साथ निभाए नामुमकिन मुमकिन हो जाये !*******************
साथी गर तू साथ निभाए नामुमकिन मुमकिन हो जाये !*************************** माना है दो पग की दूरी, पग भर में ही कर लें पूरी तेरा मेरा... Read more
बेवफ़ा यार...
बेवफ़ा यार.... ************ निग़ाहें मिलाकर निग़ाहों से दूर कर दिया। पल में प्यार का शीशमहल चकनाचूर कर दिया। जो कहते थे साथी हैं हम सुख-दु:ख... Read more
जीवन रंग-बिरंगा मेला, साथी संगी सब दो पल के, जाना जीव अकेला  ! *****************
जीवन रंग-बिरंगा मेला, साथी संगी सब दो पल के, जाना जीव अकेला ! ****************** जान बूझ कर बना नासमझ खेले जीवन खेला एक-एक कर आगे... Read more
रूठा यार
रूठा मेरा यार,न जाने क्योँ? छोड़ा मेरा साथ, न जाने क्यों? रोयें जज्बात,न जाने क्यों? बिना बात की बात,न जाने क्यों? दिल तो था उदास,... Read more
ऐ बाबुल
ऐ बाबुल! बिटिया को भेजें क्यों ससुराल ? देख ले बिटिया की ,क्या हो गई है हाल ? ऐ बिटिया !कभी तो जाना होगा पिया... Read more
दीपावली
krishan saini गीत Oct 19, 2017
रावण मार के घर को आये,खुशी हुई बड़ी भारी.... दीप जलाके मने दीवाली,फैल रही उजियाली... मात कैकई वर मांगा था,राम जाये वन को... सुन माँ... Read more
कौन मनाएगा दीवाली(गीत)
"कौन मनाएगा दीवाली?"(गीत) घर -आँगन लक्ष्मी बिन सूना, नहीं तेल, दीया, बाती। रौशन दुनिया लड़ियों से है, जगमग ज्योति नहीं भाती। मान दीप का ही... Read more
गीत
rajesh Purohit गीत Oct 17, 2017
ज्योतिपर्व मनाओ ज्योति पर्व मनाओ। दीन दुखी हर मानव को गले लगाओ।। सद्भावना और भाईचारे का दीप जलाओ। आस्था और विश्वास से लक्ष्मी को मनाओ।।... Read more
जाने किस दिन हो पायेगा भ्रष्टों का अवसान
जाने किस दिन हो पायेगा भ्रष्टों का अवसान ■■■■■■■■■■■■■ ■■■ ये चाहें तो नाहक़ में ही लड़ जाएं इंसान नेता बड़े महान कि भइया नेता... Read more
कविता... दोस्ती
दोस्त तेरी क़सम है,कृष्ण-सुदामा से न यह कम है। बिन कहे दर्द समझुँ न,मैं भी गुम यार दोस्ती गुम है।। नैनों में मेरे तू,हँसे है... Read more
बाल कविता
Santosh Khanna गीत Oct 12, 2017
बाल कविता बच्चों को दिवाली उपहार देखो खेले मेरी मुनिया भांति भांति के सुंदर खेल। कभी उछाले गेंद हवा में कभी पलंग के नीचे डाले... Read more
*बात पनघट की*
ब्रज भाषा में एक रचना ....! (पनघट पर एक नारी अपनी सखी से कह रही है अपने मन की बात । संदर्भ पुराना है ।गीत... Read more
बात पनघट की
ब्रज भाषा में एक रचना ....! (पनघट पर एक नारी अपनी सखी से कह रही है अपने मन की बात । संदर्भ पुराना है ।गीत... Read more