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Category: गज़ल/गीतिका

ग़ज़ल (निगाहों में बसी सूरत फिर उनको क्यों तलाशे है )
कुछ इस तरह से हमने अपनी जिंदगी गुजारी है जीने की तमन्ना है न मौत हमको प्यारी है लाचारी का दामन आज हमने थाम रक्खा... Read more
ग़ज़ल
वो कहते हैं हम तो ख़ुदा हो गए हैं ख़ुदा जाने वो क्या से क्या हो गए हैं कदमबोसी करते नज़र आते थे जो वो... Read more
मेरी ग़ज़ल जय विजय ,बर्ष -२ , अंक ११ ,अगस्त २०१६ में प्रकाशित
प्रिय मित्रों मुझे बताते हुए बहुत ख़ुशी हो रही है कि मेरी ग़ज़ल जय विजय ,बर्ष -२ , अंक ११ ,अगस्त २०१६ में प्रकाशित हुयी... Read more
मुहब्बत का मेरे भी वास्ते पैग़ाम आया है
मिला चौनो क़रारो बेश्तर आराम आया है सुना है जी चुराने में मेरा भी नाम आया है न कोई राबिता था तब न कोई राबिता... Read more
गीतिका
विधा -गीतिका छंद-चौपई 15 मात्रा समान्त -आन पदांत-अपदांत। समस्त गुणीजनों को सादर प्रस्तुत ------------------------- -------------------------- सबसे प्यारा हिंदुस्तान। तन मन इस पर है बलिदान। माने... Read more