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Category: गज़ल/गीतिका

गजल-क्यों आज सक की निगाहो से देखते हो/मंदीप
क्यों आज सक की निगाहो से देखते हो/मंदीप् क्यों आज सक की निगाहो से देखते हो, ये दिल तुम्हारा है क्यों विस्वास नही करते हो।... Read more
ग़ज़ल- जिसे देखता हूँ मैं छिपकर हमेशा
ग़ज़ल- जिसे देखता हूँ मैं छिपकर हमेशा ☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆☆ जिसे देखता हूँ मैं छिपकर हमेशा कि उसका रहा दिल है पत्थर हमेशा ~~~ वो मेरा नहीं... Read more
ग़ज़ल- क़ाबिल तेरे नहीं हूँ मुझे ध्यान आ गया
ग़ज़ल- क़ाबिल तेरे नहीं हूं मुझे ध्यान आ गया 221 2121 1221 212 मफ़ऊल फ़ाइलात मुफ़ाईल फ़ाइलुन ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ अच्छा हुआ कि यार अभी ज्ञान आ... Read more
गीतिका-  जिसने खुद को है पहचाना
गीतिका- जिसने खुद को है पहचाना ◆●◆●◆●◆●◆ जिसने खुद को है पहचाना उसके आगे झुका जमाना दुनिया में तो दुख हैं लाखों फिर भी इनसे... Read more
नादान परिंदा………..डी. के. निवातियाँ
मैं आया नादान परिंदा अनजान की तरह ! लौट जाऊँगा एक दिन मेहमान की तरह !! क्या सहरा,क्या गुलिस्ता, हूँ सब से वाकिफ कट जायेगा... Read more
ग़ज़ल
इतनी कोशिशों के बाद भी तुम्हें कहाँ भूल पाते है दीवारों से बचते है तो दरवाजे टकराते है। कौन रुलाए कौन हँसाए मुझको इस तन्हाई... Read more
ग़ज़ल
ये नफरत का असर कब तक रहेगा है सहमा सा नगर कब तक रहेगा हक़ीकत जान जाएगा तुम्हारी जमाना बेखबर कब तक रहेगा बगावत लाजमी... Read more
ग़ज़ल ( मुहब्बत है इश्क़ है प्यार है या फिर कुछ और )
लोग कत्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होती है हम नजरें भी मिलाते हैं तो चर्चा हो जाती है. दिल पर क्या गुज़रती है... Read more
ग़ज़ल- बंजर में जैसे फूल निकलते कभी नहीं
ग़ज़ल- ये स्वप्न... मापनी- 221 2121 1221 212 ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ ये स्वप्न मेरे' स्वप्न हैं' फलते कभी नहीं। बंजर में' जैसै' फूल निकलते कभी नहीं।। उपदेश... Read more