गज़ल/गीतिका

बुरा है वक़्त लेकिन गम नहीं है

बुरा है वक़्त लेकिन गम नहीं है रहा भी एक सा मौसम नहीं है कलम करती नहीं आवाज बिल्कुल मगर विस्फोट करती कम नहीं है बदलते वक... Read more

वो अब रखता नही है वास्ता भी

वो अब रखता नही है वास्ता भी हमें उससे नही कोई गिला भी मरज़ कैसा है ये उल्फत का यारो कहीं मिलती नहीं जिसकी दवा भी मोहब्बत की... Read more

किरदार निखर गया होता !

अपनी सारी हदों से में भी गुजर गया होता, सियासत में होता तो ज़मीर मर गया होता। फिर्कों की नहीं करता इंसानियत की बात, तेरा किरदार... Read more

ग़ज़ल- तू जबसे मुझे प्यार करने लगा है

ग़ज़ल- तू जबसे मुझे प्यार करने लगा है □□□□□□□□□□□□□□ तू जबसे मुझे प्यार करने लगा है। मेरा चेहरा भी निखरने लगा है।। मैं जीवन की स... Read more

कहीं शह, कहीं पर मात

कहीं पर शह तो कहीं पर मात देखो बिगड़ते हुए रोज़ मुल्क के हालात देखो बदतमीजी की हदें ऐसे भी पार होती है संसद में गालियां, गूसे औ... Read more

उम्मीद जिन्दगी से

यादें उनकी दिल में रखते हैं सलामती की दुआ हमेशा रखते हैं डगर हो मुश्किल हौसले बुलंद रखते है मंजिल मुश्किल , उम्मीद आस... Read more

जिंदगी हम तुझे जीने निकले

ग़ज़ल जिंदगी हम तुझे जीने निकले। लोग कहते हैं कि पीने निकले।। हो गया फिर से लहू से ही तर। जख़्मे दिल अपना जो सीने निकले।।... Read more

भला आग से आग बुझाते हैं क्या

भला आग से आग बुझाते हैं क्या आंधियों से दीये जलाते हैं क्या जो पीर दर्द के मायने बदल दे उस दर्द पर मरहम लगाते हैं क्या... Read more

गम मुझे दे के सभी मेरी ख़ुशी तू रख ले

गम मुझे दे के सभी मेरी ख़ुशी तू रख ले खार दे दे मुझे तू फूल की खुशबू रख ले देखना प्यार का पलड़ा मेरा भारी होगा हो न विश्वास तो ... Read more

[[[ ग़ज़ल ]]]

ग़ज़ल / दिनेश एल० "जैहिंद" "इरादे को मकसद बनाकर तो देखो" बहर - १२२__१२२__१२२__१२२ कभी भी नजर तुम मिलाकर तो देखो ! किसी हुस... Read more

हम अपने दर्द को जब गज़लों में गाने लगे

हम अपने दर्द को जब गज़लों में गाने लगे सारे परिन्दें रो पड़े फूल मुरझाने लगे यूँ मासूमियत से ज़िंदगी कान में कह गई तुम पहल... Read more

[[[ ग़ज़ल ]]]

[[[ ग़ज़ल ]]] काफिया -- अट रदीफ -- रहे हैं बह्र -- २२१_२१२२_२२१_२१२२ नेता हमारे कर के वादे पलट रहे हैं ! ये तो हमें भी जैसे... Read more

[[[ ग़ज़ल ]]]

ग़ज़ल --- "मगर वह दबदबा जाता रहा बाजार होते ही" १२२२_१२२२_१२२२_१२२२ काफिया -- बाजार रदीफ -- होते ही अकेले हूँ... गये बेटे.... Read more

मेरे रस-छंद तुम, अलंकार तुम्हीं हो

जीवन नय्या के खेवनहार तुम्हीं हो तुम्हीं गहना हो मेरा श्रृंगार तुम्हीं हो मेरी तो पायल की झनकार तुम्ही हो बिंदिया, चूड़ी, कंगना,... Read more

जिगर देखिए किसका बड़ा है?

जिगर देखिए किसका बड़ा है शीशा पत्थरों में जड़ा है । वफादारी का है यह सिला सफ में वह अकेला खड़ा है वह गैर की खुशी की खातिर म... Read more

आज यूं गम के मारों को नींद आ गई

आज यूं गम के मारों को नींद आ गई, जैसे जलते शरारों को नींद आ गई। थे ख़ज़ां में यही होशियार-ए-चमन, फूल चमके तो खारों को नींद आ गई... Read more

बेजमीरों के अज़्म पुख़्ता हैं

रूबरू जब कोई हुआ ही नहीं ताक़े दिल पर दिया जला ही नहीं ज़ुल्मतें यूं न मिट सकीं अब तक कोई बस्ती में घर जला ही नहीं बेजमीरों के... Read more

कलमकारों की तहरीरों में जादू...

मुकद्दर जब मिरी आंखों में आंसू भेज देता है, मिरा मौला मिरी कश्ती लबे जू भेज देता है। सजा देता है फिक्रो फन की राहों को मिरा मौला... Read more

गज़ल

जुगनुओं से सदा जगमगाते रहो, दौरे गम में भी तुम मुस्कराते रहो, जब तलक आसमां में सितारें रहें तुम सदा रौशनी में नहाते रहो, इन ... Read more

गुनहगार

जब सोचा था हमने दिलसे तो गुनहगार थे बहुत । देखा तो जिन्दगी मे फूल कम और खार थे बहुत । गुनाह बख्शाने के लिए सोचे भी तो कैसे,... Read more

परछाईयों के शहर में

परछाईयों के शहर में परछाई बन कर रह गई। तेरी मोहब्हत ही मेरी रुसवाई बन कर रह गई। जोश तो मुझ में भी था आँधियों सा यूँ तो कभी अब त... Read more

वो चेहरा जो रोज़ ख्वाबों में आता है

खामोशी और सन्नाटा नज़र आता है जो रस्ता इस दिल से उस दिल को जाता है जाने कौन है और क्या लगता है मेरा वो चेहरा जो रोज ख्... Read more

ग़ज़ल

जल रहीं हसद की आग में ग़रीब बस्तियाँ पर अमीर क्यों रखे था बंद अपनी खिड़कियाँ रौनकें थी जिनसे मुस्कुरा रही थी हर कली अब चमन में ... Read more

गज़ल

तेरी आँखों को जो भाए नज़ारे हम बनाते हैं, अँधेरी रात में काग़ज़ पे तारे हम बनाते हैं, मुझे रंगों से अपने हैरतें तख़्लीक़ करनी ह... Read more

गज़ल

फूलों से सजी कल जैसी अब डाली नहीं होती, रहबर ही बने रहजन तो रखवाली नहीं होती , जीना है बहुत मुश्किल नहीं मरना भी आसां है सुना ... Read more

"फुहार"

मेघों का यूँ प्यार लुटाना, अच्छा लगता है, प्रकृति दिखे आतुर स्वागत को,अच्छा लगता है। चपल, कौँध जाती बिजली, जो रह-रह कर, टीस ... Read more

गज़ल

" इश्क मोहब्बत के किस्से लिख जाओ तुम, हम वीरों की कुर्बानी लिख जायेंगे, लिखना है दरबानी पर तो लिख लो तुम हम झाँसी वाली रानी प... Read more

गज़ल

बुढ़ापा, बचपना कोई जवानी से भी डरता है, कोई सूखे से डरता है कोई पानी से डरता है, वो भी दौर था पढ़ लेते थे नयनों की हर भाषा समय ब... Read more

सौदा

सौदा -------- बिकता होगा कोई इंसान किसी कीमत पर यहां नादां हैं मुझसे इंसानियत का सौदा करने आए हैं कर ही न सके जो सौदा मेरे ... Read more

गिर जाता है हर बार सँभल क्यों नहीं जाता

गिर जाता है हर बार सँभल क्यों नहीं जाता अब डर ये तेरे दिल से निकल क्यों नहीं जाता मर जाता है इक बार में ही टूट कर यहाँ ऐ ख्... Read more

ग़ज़ल

जिसकी आँखों का मर गया पानी समझो उसका उतर गया पानी याद आई जो उस सितमगर की मेरी आँखों में भर गया पानी आशियाना ड... Read more

गज़ल

"इबादत है, इजाज़त है, शिकायत है, नजाकत है, सनम आँखों में तेरे वास्ते अब भी मुहब्बत है, हवाओं में, फ़िज़ाओं में, बहारों में, नजारो... Read more

वो जिसकी भी यहाँ चर्चा करेंगे

वो जिसकी भी यहाँ चर्चा करेंगे उसी का बाद में किस्सा करेंगे बनाएंगे जगह हम तो दिलों में न अपनों से तेरा मेरा करेंगे भले ही... Read more

क्या बन जाओगे तुम

अब बिगड़ी सुधार कर क्या बन जाओगे तुम । बेवफ़ा हो बेवफ़ा ही कहलाओगे तुम ।। ना आएगा परिंदा झूठ के झांसे में । डालते ... Read more

गज़ल

तुम न सोचो हम यहाँ पैसे कमाने आए हैं अब तलक जो भी कमाया है, लुटाने आए हैं, जो सदा तन्हाई में हम गुनगुनाते थे कभी आज महफ़िल में ... Read more

भले थोड़ा हम मुस्कुराने लगेंगे

भले थोड़ा हम मुस्कुराने लगेंगे भुलाने में तुमको जमाने लगेंगे लगेंगे सजाये हैं सपने जो आंखों में हमने वही नींद इक दिन उड़ाने लगे... Read more

कोई दाँव तो चल

मैं चल रहा हूँ इतना संभल कर मानो जीवन समर है। अब तक सही हूँँ ये दोस्तों की मोहब्बत का असर है।। मिलती यहाँ देखी धोखों की सौग़ातें ... Read more

इबादत

मिल जाय ग़र तुझको ख़ुदा कहीं, मेरी भी सिफ़ारिश कर देना क्योंकि मैं कभी इबादतगाह जाता नही। करता हूँ खिदमत यतीम लाचारों की, क... Read more

ग़ज़ल

बात जमा माड़ी थी या, तन्नै क्यूकर समझी कोन्या रै कितनी ए तगड़ी हो लड़ाई, यारी तै तगड़ी कोन्या रै न्यू लोग भतेरे मिल ज्यांगे, अर दोस्... Read more

आज बाजार खरीदार पुराने निकले

ग़ज़ल आज बाजार खरीदार पुराने निकले। खोटे सिक्के हैं जो उनके वो चलाने निकले।। अपनी ढपली वो लिये राग सुनाने निकले। कुछ तमाशा... Read more

मेरा खास था

मेरा खास था पर दुनिया के लिए आम था मेरी नजरों से दूर वो बड़ा बदनाम था कितनी बार टूटा हूँ मन्नतें निभाने को मैं कोई सितार... Read more

मुस्कान से खिला खिला चेहरा दिखाई दे

मुस्कान से खिला खिला चेहरा दिखाई दे आंखों में तैरता हुआ दरिया दिखाई दे कितनी भी कामयाबी की तुम सीढियां चढो झुकने में कद ये ... Read more

पहला पहला प्यार ज़िन्दगी

पहला पहला प्यार जिन्दगी सुन्दर सा उपहार जिन्दगी राह बदलती रहती ये तो है नदिया की धार ज़िन्दगी होती नहीं सरल ये देखो कष्टों... Read more

" तुमको नाज़ ज़रूरी था " !!

रहमत बरसी तुम पर रब ने , तुमको नाज़ ज़रूरी था ! चाँद अगर शरमाया है तो , कह दो आज ज़रूरी था !! नज़रें थक आई देखा तो , ऊँचाई पर तुम इत... Read more

अपना न कर सके

दिनांक 2/6/19 हम चाह कर भी उन्हें अपना न कर सके वो सामने से गुजरते रहे बात न कर सके बदनाम गलियों में भी हम उन्हें अपना ... Read more

बिन आग के तुम आग लगा देती --आर के रस्तोगी

बिन आग के तुम आग लगा देती | बिन पानी के तुम इसे बुझा देती || सीखा है कहाँ से तुमने ये हूनर | मुझको भी जरा तुम सिखा देती || ल... Read more

आज के शेर

आज के शेर —————————- ख़ूब मलिये, ज़ख़्मों पे नमक, दर्द की इन्तहा क्या है!! हम जानते हैं। ———————- अपना पता बदलि... Read more

चारों खाने चित

चारों खाने चित हुआ मैं,तेरी इस मुस्क़ान पे। इक तेरा नाम रहता,बस मेरी ज़ुबान पे।। आँखों में वो ही निशाना,देखे धार प्यार की। लगता ज... Read more

ग़ज़ल

-------ग़ज़ल------ भूल कर ख़ुद को कभी ख़ार नहीं मानूँगा हाँ मगर साहिबे क़िरदार नहीं मानूँगा ख़ाक है ख़ाक में इक... Read more

हास्य रचना

जब से लाया हूँ मैं लुगाई को मैं तरसता हूँ पाई पाई को पूछती चाय भी नहीं वो मुझे खुद तो खाये वो रसमलाई को गल गया है ... Read more