गज़ल/गीतिका

मुशायरे में'शे'र अर्ज करो

एक लौ अगर बूझ रहीं हैं तो जलानी क्यो है उजाला है चारों और तो लौ दिखानी क्यो है शौक से लटकाते है निंबू मिर्च बाजारों में जिस भूमि... Read more

गज़ल

"मै तेरी राह तकती हूँ , तुम्हें ये मन बुलाता है, चले आओ तुम्हें सूना मेरा आँगन बुलाता है, बरसती हैं मेरी आँखें, ये बारिश अब नहीं... Read more

गज़ल

" ज़िंदगी से दर्द पाने का भी अपना ही मज़ा है, चोट खाकर मुस्कराने का भी अपना ही मज़ा है, कौन कहता, है ज़रूरी जंग जीती जायें सब प... Read more

ग़ज़ल

-------ग़ज़ल----- जिसे अपनी हम ज़िन्दगी जानते हैं उसे चश्म की रौशनी जानते हैं जो सीखे हैं जीना यहाँ मुश्क़िलों में ख़ु... Read more

ग़ज़ल

-----ग़ज़ल---- बू-ए-गुल से आज घबराता हूँ मैं खुद को काँटों से ही बहलाता हूँ मैं फेर लेती हर कली मुझसे नज़र गुलसितां मे... Read more

ग़ज़ल- दिल मे खुद्दारी रखो, अपनी छवि न्यारी रखो

दिल मे खुद्दारी रखो, अपनी छवि न्यारी रखो। गफलतों में मत पड़ो, बस समझदारी रखो। यार से यारी रखो, दुश्मनी प्यारी रखो। साथ छूटे या ब... Read more

खलिस (कमी)

कोई प्यासा कुवें के पास, कब जाता है ये समझों, कब फनकार जीवन का, लुफ्त उठता है ये समझो। हथेली पर यूँ रख कर जान, जरा एक बार तो कह दो... Read more

जरूरत

अब न आँखे भरती हैं, अब न दिल पिघलता है, महज एक बूत के जैसे, बदन घर से निकलता है। कभी कहती थी माँ की, बेटा ये बचपना छोड़ो, अभी वही ... Read more

खता

ये बातें उनदिनों की है, अकेला ऊब जाता था। तेरे यादों में जाने कैसे, अक्सर डूब जाता था।। की अब हालात मुझको, चैन से सोने नही देता। ... Read more

वो सयानी हो गयी

किसको कहें की जिसके हमने, इतने तंज झेले थे, कितने नखरें, कितने उल्फत, कितने रंज झेले थे। उसकी वो बचकानी हरकत, अब जाफरानी हो गयी, ... Read more

गज़ल/ गीतीका

चलो फिर से हंसने का सामान जुटाया जाये टूटें दिलों को सिरो को फिर से जोड़ा जाए चाँद हथेली पर नहीं उगता लेकिन फिर भी टूटे हूए तारो... Read more

दुश्वारियां

उफ़ ये इश्क़ की दुश्वारियाँ ..... दिल लगा के तो देख कभी नीलम ग़र समझनी, इश्क़ की दुश्वारियाँ। इक जुनूँ और महज़ दिवानापन नहीं,... Read more

तू सुकूं दिल का मेरे तू ही तो ग़मे दिल है

तू सुकूं दिल का मेरे तू ही तो ग़मे दिल है। तू मसीहा है मेरा और तू ही का़तिल है।। जिस तरफ देखता हूं तेरा ग़ुमां होता है। इस तर... Read more

ग़ज़ल- थाम कर हाथ राहें दिखाना सनम।

थाम कर हाथ राहें दिखाना सनम। साथ जीवन मरण का निभाना सनम।। तुम मिले प्राणवायु मिली है मुझे। मर न जाऊँ कहीं मैं बचाना सनम।। छो... Read more

ग़ज़ल- मिलेंगे अब जमी अंबर, सितारों की गवाही में

मिलेंगे अब जमी अंबर, सितारों की गवाही में। मिलन मधुमास आयेगा, नजारों की गवाही में।। जुबा खामोश है मेरी, जो चाहे अब सजा देदो। अद... Read more

ग़ज़ल- ज़ाम पे ज़ाम पीता रहा आज़तक

ज़ाम पे ज़ाम पीता रहा आज़तक। होश़ आए न जीता रहा आज़तक।। वो निबाले दिखाता रहा आज़तक। भूख मेरी बढ़ाता रहा आज तक।। उसकी चाहत में ख़ु... Read more

शीर्षकहीन

तुम्हारे चेहरे के आईने में मैं अपना अक़्स ढूँढू मेरे चेहरे के आईने में तुम अपना वफ़ा ढूंढो Read more

मुझे

मुद्दतों बाद फिर याद आया सनम भूलने में जिसको लगे ज़माने मुझे। बस इक हिचकी आई, हुईं आंखें नम वो गुज़रे हुए पल याद लगे आने मुझे। ... Read more

बख्ता नहीं(गज़ल)

सरकार को खलता नहीं, गर हाथ में बस्ता नहीं। था सामने डटकर खडा़, बच्चा निडर टसका नहीं। है क्या वजह क्यूँ ना पढा? क्यूँ ज... Read more

गज़ल

"ख़ुशामद के लिए होठों पे अफ़साना नहीं आता, मुझे सच को कभी भी झूठ बतलाना नहीं आता, नहीं गिरवी है मेरी आबरू शोहरत के शर्तों पर क... Read more

ग़ज़ल - मिलन के तराने यूँ हम गुनगुना लें

मिलन के तराने यूँ हम गुनगुना लें। चलो ज़िंदगी को ग़ज़ल हम बना लें।। मिलें वो कभी तो गले से लगा लें। मिलें इस क़दर हम ख़ुदी को मिटा ल... Read more

गज़ल

आकर मेरे कानों में कोई चुपके चुपके कहता है, इश़्क जुनूँ है इश़्क है पागल देख कलम लिख देती है, अक्सर छोटी बातों पर उसकी आँखें भर ... Read more

धजी के सांप

धजी के सांप तो बनते बहुत है । पर धजी सांप की नहीं बनती ।। भर गए भेद कितने रिश्तों में । बेटे और बाप की नहीं बनती ।। पहनते खूब बा... Read more

ग़ज़ल

212 212 212 212 याद तेरी रुलाती रही रात भर दर्द दिल में जगाती रही रात भर जख्म दिल को दिया तूने' गहरा बहुत आह ... Read more

महफ़ूज जिन्दगी

मैं तो खुद पर हुकुमत करता हूँ इसलिए महफ़ूज रहता हूँ दूसरों पर हुकुमत करने वाले तो डरे से रहते है मेरा मौला मेरा सिपहसलार ... Read more

चाहत

आखें हँसती रहती हैं दिल उदास रहता है इस तरह मैं उसके करीब रहता हूँ किसी से कुछ कहता नही हूँ वह मुझसे दूर रहता है बहाना कु... Read more

घर मेरा छीन कर मुझे बेघर तो कर दिया

ग़ज़ल - - घर मेरा छीन कर मुझे बेघर तो कर दिया। अब शुक्रिया तेरा है कलंदर तो कर दिया।। तू हाथ भी न थाम सका डूब जब रहा। एहसान त... Read more

ग़ज़ल

"रस्म-उल्फ़त" रूँठना भी है अदा उनको मनाना चाहिए। फ़ासलों को दूर कर नज़दीक आना चाहिए। मानकर अधिकार अपना की शिकायत आपसे माफ़ क... Read more

ग़ज़ल

"लाज़मी है" ज़िंदगी बोझिल हुई है गुनगुनाना लाज़मी है। रिस रहे रिश्ते यहाँ मरहम बनाना लाज़मी है। गेसुओं से अब झरे शबनम नहीं रु... Read more

ग़ज़ल

'शायरी अपनी जगह' आशिकी अपनी जगह है बेकशी अपनी जगह। मुफ़लिसी अपनी जगह है बेबसी अपनी जगह। था मुकम्मल प्यार उनका बेवफ़ाई कर गए ... Read more

ग़ज़ल

"सुनाता हाले दिल अपना" सुनाता हाले दिल अपना मगर सबसे छुपाना था। तुझे मालूम है ए दिल बड़ा दिलकश फ़साना था। छिड़ी है बात उल्फ़... Read more

बहुत हैं ख्बाईशे

ख्बाईशे बहुत ज्यादा पाल रखी है मैने जानता हूँ जिन्दगी छोटी है और ख्बाईशे लम्बी हैं ख्वाइशों के लिए दिन रात भागता भटकता हूँ ... Read more

नील गगन

विषय- नील गगन! विधा - विधाता छंद ! विधान - २८ मात्रा, १४- १४ मात्रा पर यति,चार चरण, दो दो चरण समतुकांत, अंत गुरु गुरु ! ( १,८,१५ ... Read more

ग़ज़ल:- सादगी से अब नही जी पा रहा है आदमी

सादगी से अब नही जी पा रहा है आदमी। आदमी को आदमी बन खा रहा है आदमी।। था बुजुर्गों से सुना डायन भी छोड़े एक घर। साँप बन खुद के सपो... Read more

धुआँ उठा नहीं,मैं आग लगाऊं किस तरह --आर के रस्तोगी

धुआँ उठा नहीं,मैं आग लगाऊ किस तरह प्यार हुआ नहीं,उन्हें गले लगाऊ किस तरह आवाज़ दी है उसने,मुझे हमेशा बार बार जुबान मेरी बंद ह... Read more

मेरी जिन्दगी की कैताब

मेरी जिन्दगी की किताब को गौर से पढ़िए करीबी सा लगूं मुझे दिल खोल के पढ़िए। अरसे से पड़ी बन्द किताब के पीले पन्नों में सूखे हु... Read more

ग़ज़ल

"लिखूँ ए दिल बता क्या मैं" लिखूँ ए दिल बता क्या मैं बड़ा दिलकश फ़साना था। नहीं मैं भूलता उसको वही मेरा खज़ाना था। बहुत खुशिया... Read more

प्यासा मुद्दत से

तेरी मुस्कान देख कर लगा हमे हमे अपना सहारा मिल गया है भटकता मै रहा प्यासा मुद्दत से जीवन बुंद से दुबारा मिल गया है सभी मंद... Read more

ये सदा जग तेरा भी नही

ये सदा जग तेरा भी नही मेरा भी नही ओर हमेशा यहां कोई रहता भी नही बोलते रहे सदा ही वो अपना मुझे स्वार्थ निकला न तो फिर बोला भी... Read more

खुद को लुटाना पडा

वक्त निकलने पर पिछताना पडा ना बचा कुछ हमे मुस्कुराना पडा निकले वो मुहोबत के माहिर बडे फिर झूठा सही हमे ही शरमाना पडा गजब ढा... Read more

अश्क बहाते देखा

इतनी खुशी हुई उसे अश्क बहाते देखा आज राहों मे उसे फूल बिछाते देखा अपने मन की कभी किसी को नही बताई अपने पीया को देख उसे दर्द स... Read more

जरूरी था

ये जो वक्त के साथ चल रहा है चलना जरूरी था मुहब्बत का इल्जाम तेरे सिर लगना जरूरी था खुशिया ही खुशिया हो हर कोई चाहे जीवन मे दु... Read more

रजा चाहिए

नजर की तेरी मुझको रजा चाहिए बाहों मे तू रहे ऐसी सजा चाहिए जिदंगी मुझसे हर घड़ी रहती खफा समझ पाया नही इसे क्या चाहिए जरुरतो ने ... Read more

जीना वही

सही मायने मे जीना वही है जो दूसरे के काम आऐ ओर मरना वो है जो तिरंगे मे लिपट घर हम आऐ इस दुनिया मे बहुतो की पशुओ सी जीवनचर्या ह... Read more

ग़ज़ल- तुमको चाहा रब से ज्यादा, तुम मेरे भगवान हो

तुमको चाहा रब से ज्यादा, तुम मेरे भगवान हो। भक्त बन करता मैं पूजा, तुम मेरा ईमान हो।। क्यों तेरे बिन रह न पाऊं, एक पल भी अब सनम।... Read more

ख़ुदा मिलेगा कहाँ ढूंढूं किन ठिकानों में

1122 1212 122 22 ख़ुदा मिलेगा कहाँ ढूंढूं किन ठिकानो में या वो है महलों में या है यतीमखानो में वो गीत ग़ज़लों में है या भजन की संध्य... Read more

नज़्म

मुहब्बत में माही से होकर जुदा ये रुह-ए-रवां फिर किधर जाएगी। समय चलता है, चलता रहेगा सदा दुखों की घड़ी भी बदल जाएगी। ख़ुद मुझे भी... Read more

तुम्हारे बिना

अगर आए कयामत तो तेरे पहलू में दम निकले बड़े बेताब लेकर ख्वाब ये नज़रों में हम निकले । तिरा ही ख्वाब रातों में हैं दिन में भी त... Read more

बताये किसे

सनम हम से रूठ के गयी दिल का हाल बताये किसे, दिल के फूल में महक नही, खुश्बू न आई बताये किसे, वो इश्क की बाजी जीते हुए, मैं जा... Read more

ग़ज़ल:- मैं हाल-ए-दिल अपना सनम क्यों कह नहीं पाता

मैं हाल-ए-दिल अपना सनम क्यों कह नहीं पाता। कैसे कहूँ तेरे बिना मैं रह नही पाता।। चाहा है तुमको जान से बढ़कर सनम मैंने। दर्दे जुद... Read more
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