गज़ल/गीतिका

दर्द में आदत है मुस्कुराने की

वो भी करने लगे ज़िद जाने की हमको आदत नही मनाने की हाल बेहाल ज़िंदगी भी थी उसने कोशिश की आज़माने की जख़्म गहरे बहुत थे ज़म... Read more

Pulvama k shaido ko naman

****** पुलवामा के शहीदों को नमन *********** सर के बदले सर कभी ना आयेगा ! दुश्मन यूं ही अपना कहर ढायेगा !! कब तलक ख... Read more

ग़ज़ल:- वो समझते नहीं, या समझदार हैं

वो समझते नहीं, या समझदार हैं। मुक्त पंछी हैं वो, हम गिरफ्तार हैं।। मर रहे प्यार में, मिट गये प्यार में। ख़ुद को भूले हैं हम, वो ... Read more

ग़ज़ल

------ग़ज़ल----- ग़हन कौन सा लग गया ज़िन्दगी को छुपी है कहाँ ढूँढ़ता हूँ ख़ुशी को रहे तीरग़ी का बसेरा ही दिल में तर... Read more

किस मशीनी दौर में रहने लगा है आदमी

किस मशीनी दौर में रहने लगा है आदमी ख़ून के आँसू फ़क़त पीने लगा है आदमी सभ्यता इक दूसरा अध्याय अब रचने लगी बोझ माँ-ओ-बाप को कहन... Read more

मेरी ग़ज़ल

नाजो नखरों में पली मेरी ग़ज़ल है कनक जैसी खरी मेरी ग़ज़ल इतने रंगों में रँगी मेरी ग़ज़ल फागुनी सी लग रही मेरी ग़ज़ल ये भिगो देती ... Read more

यूँ इस तरह से...

तुम इस तरह से ..सताओगे.. तो वफ़ा कौन करेगा...2 बनके हमदर्द रहेंगे ...2 ज़माने के दुःख-दर्द सहेंगे...ज़माने के दुःख दर्द सहेंगे... ... Read more

ग़ज़ल:-- रूह से रूह जब मिलाओगे ।

ग़ज़ल:-- रूह से रूह जब मिलाओगे । ✍🏻 अनुज तिवारी "इंदवार" मतला रूह से रूह जब मिलाओगे । जिस्म का ख़्याल भूल जाओगे । हुस्न... Read more

गज़ल :-- हुस्न तेरा जो कातिलाना है ।

गज़ल :-- हुस्न तेरा जो कातिलाना है ।* काफिया :-- आना रदीफ़ :-- है ✍🏻 अनुज तिवारी "इंदवार" बहर :-- ये मुलाक़ात इक बहाना है 2122--... Read more

ग़ज़ल :-- दौलत मिली तो तौर तरीका बदल गया ।

ग़ज़ल :-- दौलत मिली तो तौर तरीका बदल गया । बहर :-- 221-2121-1221-212 रदीफ :- बदल गया काफिया :-- आ ✍🏻 अनुज तिवारी " इंदवार " त... Read more

ग़ज़ल :-- मेरे गद्दे में जरा सी घास भर दो ।

ग़ज़ल :-- मेरे गद्दे में जरा सी घास भर दो । ✍🏻 अनुज तिवारी "इंदवार" हसरतों में मैकदे की प्यास भर दो । ज़िंदगी में इक नया... Read more

जब जियादा चढाव होता है

ग़ज़ल - जब जियादा चढाव होता है। रास्तों में घुमाव होता है।। हो ही जाता है दूर लोगों से। तेज जिसका भी भाव होता है।। पेड़ आ... Read more

देखो तो क्या कहर ढा रहा वेलेंटाइन डे

वेलेंटाइन डे है आ रहा वेलेंटाइन डे, काश! मिले अब हूर,गा रहा वेलेंटाइन डे! जन्म-जन्म की ले तन्हाई जिए जा रहे हम, इसी से हमको नह... Read more

हसरतों को गले से लगाते रहे

तीर खा कर सनम मुस्कुराते रहे हम मुहब्बत में खुद को मिटाते रहे। एक भी तो न साबित सच हो सका जो भी इल्ज़ाम मुझ पर लगाते रहे। ... Read more

मुक़द्दर

:- ग़ज़ल गुज़ार दी हमने उमर तन्हा इश्क़ उधर तो मैं इधर तन्हा मुक्कदर में वो हमसफर न था रात में रह गये अधर तन्हा तुमसे ... Read more

गीत भॅवरों ने गुनगुनाए हैं

ग़ज़ल- गीत भॅवरों ने गुनगुनाए हैं।। चार सू फूल मुस्कराये हैं।। शम्स(सूरज) ने सर उठाया है ज्यों ही। चाॅद तारें भी मुंह छिपाये ह... Read more

राहे इश्क़

ये जो मेरे रुख पे जमाल है, तेरी आशिकी का कमाल है यही तो हक़ीक़त ए इश्क़ है, यही बंदगी की मिसाल है जो सलीब ए इश्क़ पे चढ़ गए, तो ... Read more

मौसम बसंती आ गया

सज गयी है ये धरा मौसम बसंती आ गया बाग वन सुरभित हुआ मौसम बसंती आ गया पीत पट ओढे धरा सोलहो सिंगार कर लग रही है अप्सरा मौसम बसं... Read more

*वसंत-पंचमी*

*वसंत-पंचमी* """"""/////"""""" आया रे आया रे ऋतुराज, मनाओ रे सखी वसंत पंचमी, कोयल की कुंहूँ कुंहूँ की बोली, पतझड़ बीता, भईं... Read more

आँखें।।

वो इजहारे इश्क़ यूँ, निगाहों निगाहों से कर गए, महफ़िल में जो कहते थे कि, बेजबान है आँखें।। खुन्नस लिए जो बैठे थे, न कभी कहते जुबां... Read more

ग़ज़ल

-----ग़ज़ल----- ग़मों से उबरने को जी चाहता है ख़ुशी दिल में भरने को जी चाहता है तुम्हारी निगाहों में ही देख कर अब क़सम स... Read more

ग़ज़ल:- अपने हाथों की लकीरें, खुद मिटा डाली मैंने

अपने हाथों की लकीरें, खुद मिटा डाली मैंने। वक़्त के हाथों से जंजीरें, हटा डाली मैने।। जीतना मुझको नही, अपनो की जिसमे हार हो। ख्व... Read more

ग़ज़ल- यार की यारी लिखूँ, या फ़िर वफादारी लिखूँ

यार की यारी लिखूँ, या फ़िर वफादारी लिखूँ। जिंदगी के खेल में, बाज़ी को अब हारी लिखूँ।। मूर्खता अपनी को मैं ख़ुद, की समझदारी लिखूँ।। ... Read more

ग़ज़ल

मुझको खुलूस ने वो अता मर्तबा किया दुश्मन ने भी अदब से मेरा तज़किरा किया क़िरदार की बुलंदी ----------उड़ा ले गयी मुझे जब बंद ग़... Read more

गज़ल

औरों के यूँ दर्द जगाना, ठीक नहीं दीवारों से सर टकराना, ठीक नहीं हम आँखों की भाषा भी पढ़ लेते हैं हमको बच्चों सा फुसलाना, ठीक नह... Read more

आती है याद जब कभी उनको मेरी किसी बक्त --आर के रस्तोगी

आती है याद,जब कभी उनको मेरी किसी बक्त अपनी धडकनों को उनकी धडकनों से मिला देता हूँ मिल जाते है जब कभी मोहब्बत के पैमाने मैखाने म... Read more

गज़ल

"गुल भी नहीं रहे अब गुलशन नहीं रहा, दहलीज़ सूनी घर में ऑंगन नहीं रहा, रखता था बाँध कर हमें जो एक डोर से आपस में अब वो प्यार का ... Read more

खुदगर्ज़

खुदगर्ज़ ---------------- आईने में अक्स बढ़ती उम्र का हिसाब मांग रहा है ... Read more

खुदगर्ज़

खुदगर्ज़ ---------------- आईने में अक्स बढ़ती उम्र का हिसाब मांग रहा है ... Read more

कोई इश्क़ असर नहीं करता!!

तुम्हारी यादों के साथ ही मैं अपना सफ़र नहीं करता ज़िन्द़ा हूँ या फिर मर गया यह भी ख़बर नहीं करता जिसने भी कहा है सब ग़लत बात ह... Read more

ग़ज़ल: ख़ुशबू तेरी बदन में, महकती है आज भी

ख़ुशबू तेरी बदन में, महकती है आज भी। यादों की बिजलियाँ सी चमकती है आज भी।। मिलकर तेरा सहमना वो नज़रें झुकाना यूँ। फूलों लदी हो डा... Read more

स्नेह से (गीतिका)

* स्नेह से * ~ स्नेह से हर वक्त जब नजरें मिलाते तुम रहे। फिर बताओ आज क्यों नजरें चुराते तुम रहे। काश पहले जान जाते हम हक... Read more

मुस्कुराते तुम रहे

* मुस्कुराते तुम रहे * ~ कष्ट सहकर साथ मेरे मुस्कुराते तुम रहे। इसलिए हर वक्त मुझको खूब भाते तुम रहे। क्षण निराशा से भरे ज... Read more

मुशायरे में'शे'र अर्ज करो

एक लौ अगर बूझ रहीं हैं तो जलानी क्यो है उजाला है चारों और तो लौ दिखानी क्यो है शौक से लटकाते है निंबू मिर्च बाजारों में जिस भूमि... Read more

गज़ल

"मै तेरी राह तकती हूँ , तुम्हें ये मन बुलाता है, चले आओ तुम्हें सूना मेरा आँगन बुलाता है, बरसती हैं मेरी आँखें, ये बारिश अब नहीं... Read more

गज़ल

" ज़िंदगी से दर्द पाने का भी अपना ही मज़ा है, चोट खाकर मुस्कराने का भी अपना ही मज़ा है, कौन कहता, है ज़रूरी जंग जीती जायें सब प... Read more

ग़ज़ल

-------ग़ज़ल----- जिसे अपनी हम ज़िन्दगी जानते हैं उसे चश्म की रौशनी जानते हैं जो सीखे हैं जीना यहाँ मुश्क़िलों में ख़ु... Read more

ग़ज़ल

-----ग़ज़ल---- बू-ए-गुल से आज घबराता हूँ मैं खुद को काँटों से ही बहलाता हूँ मैं फेर लेती हर कली मुझसे नज़र गुलसितां मे... Read more

ग़ज़ल- दिल मे खुद्दारी रखो, अपनी छवि न्यारी रखो

दिल मे खुद्दारी रखो, अपनी छवि न्यारी रखो। गफलतों में मत पड़ो, बस समझदारी रखो। यार से यारी रखो, दुश्मनी प्यारी रखो। साथ छूटे या ब... Read more

खलिस (कमी)

कोई प्यासा कुवें के पास, कब जाता है ये समझों, कब फनकार जीवन का, लुफ्त उठता है ये समझो। हथेली पर यूँ रख कर जान, जरा एक बार तो कह दो... Read more

जरूरत

अब न आँखे भरती हैं, अब न दिल पिघलता है, महज एक बूत के जैसे, बदन घर से निकलता है। कभी कहती थी माँ की, बेटा ये बचपना छोड़ो, अभी वही ... Read more

खता

ये बातें उनदिनों की है, अकेला ऊब जाता था। तेरे यादों में जाने कैसे, अक्सर डूब जाता था।। की अब हालात मुझको, चैन से सोने नही देता। ... Read more

वो सयानी हो गयी

किसको कहें की जिसके हमने, इतने तंज झेले थे, कितने नखरें, कितने उल्फत, कितने रंज झेले थे। उसकी वो बचकानी हरकत, अब जाफरानी हो गयी, ... Read more

गज़ल/ गीतीका

चलो फिर से हंसने का सामान जुटाया जाये टूटें दिलों को सिरो को फिर से जोड़ा जाए चाँद हथेली पर नहीं उगता लेकिन फिर भी टूटे हूए तारो... Read more

दुश्वारियां

उफ़ ये इश्क़ की दुश्वारियाँ ..... दिल लगा के तो देख कभी नीलम ग़र समझनी, इश्क़ की दुश्वारियाँ। इक जुनूँ और महज़ दिवानापन नहीं,... Read more

तू सुकूं दिल का मेरे तू ही तो ग़मे दिल है

तू सुकूं दिल का मेरे तू ही तो ग़मे दिल है। तू मसीहा है मेरा और तू ही का़तिल है।। जिस तरफ देखता हूं तेरा ग़ुमां होता है। इस तर... Read more

ग़ज़ल- थाम कर हाथ राहें दिखाना सनम।

थाम कर हाथ राहें दिखाना सनम। साथ जीवन मरण का निभाना सनम।। तुम मिले प्राणवायु मिली है मुझे। मर न जाऊँ कहीं मैं बचाना सनम।। छो... Read more

ग़ज़ल- मिलेंगे अब जमी अंबर, सितारों की गवाही में

मिलेंगे अब जमी अंबर, सितारों की गवाही में। मिलन मधुमास आयेगा, नजारों की गवाही में।। जुबा खामोश है मेरी, जो चाहे अब सजा देदो। अद... Read more

ग़ज़ल- ज़ाम पे ज़ाम पीता रहा आज़तक

ज़ाम पे ज़ाम पीता रहा आज़तक। होश़ आए न जीता रहा आज़तक।। वो निबाले दिखाता रहा आज़तक। भूख मेरी बढ़ाता रहा आज तक।। उसकी चाहत में ख़ु... Read more

शीर्षकहीन

तुम्हारे चेहरे के आईने में मैं अपना अक़्स ढूँढू मेरे चेहरे के आईने में तुम अपना वफ़ा ढूंढो Read more
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