गज़ल/गीतिका

ज़िन्दगी से दूर कितना भी हटा देना हमें

ज़िन्दगी से दूर कितना भी हटा देना हमें पर नहीं आसान यादों से विदा देना हमें जब हमारी जीत में ही बस तुम्हारी जीत थी क्यों गँवा... Read more

हमेशा फूँक कर पग मैं चली हूँ

हमेशा फूँक कर पग मैं चली हूँ उलझ हर बार पर फिर भी गिरी हूँ न चारागर न हूँ कोई दवा मैं मिटाना दर्द अपना जानती हूँ जला जो... Read more

जिऊं तो सुहागन मरु सुहागन

सोलह बारे बरत रखूं न हो‌ कोई चुभन फल में मांगू जिऊं तो सुहागन मरु तो सुहागन। मैं सजती तब थी जब सँवरती नहीं थी मेरा सँवरना जैसे ... Read more

तुमने पुकार कर

देखा नही कभी मुझे तुमने पुकार कर मैं लौटता चढ़े हुए दरिया को पार कर है कैसी आग ये लगी उठता रहा धुआँ जाए कहीं नहीं मुझे ये खाकसार... Read more

दिल कह रहा कि ताउम्र ऐसे तुझे देखता रहूँ।

दिल कह रहा कि ताउम्र ऐसे तुझे देखता रहूँ। तेरे बारे में दिन -रात मैं सोचता रहूँ। मासूम से ये चेहरा और उस... Read more

लब तुम्हारे मौन हैं

उठ रहा तूफ़ान दिल में लब तुम्हारे मौन हैं कह रही खामोशियाँ क्यों शोर सारे मौन हैं आज से पहले न बातें खत्म होती थी कभी बातें क... Read more

ग़ज़ल- होना था तन्हा हुआ रंजूर तो

ग़ज़ल- होना था तन्हा हुआ रंजूर तो ★★★★★★★★★★★★★ होना था तन्हा हुआ रंजूर तो तुम भी जाओ जा रहे हो दूर तो कोई मुझसे प्यार अब करता... Read more

ग़ज़ल

"आदमी" 2122 2122 212 ऐब दुनिया के गिनाता आदमी। आपसी रंजिश बढ़ाता आदमी। चंद सिक्कों में बिकी इंसानियत भूल गैरत आजमाता आद... Read more

रफ़्ता रफ़्ता हाथों से किनारा गया

दस्तो सहरा में दिन गुजारा गया दर्द सीने में ऐसे उतारा गया शौके गौहर में हम ना जमी के रहे रफ़्ता रफ़्ता हाथों से किनारा गया स्य... Read more

ग़ज़ल- वो "गिरगिट सा रंग बदलना" जानते हैं

हिंदी भाषा के मुहावरे और लोकोक्तियां पर आधारित यह गजल/ गीतिका लिखने का प्रयास किया गया है। वो "गिरगिट सा रंग बदलना" जानते हैं। ... Read more

गज़ल

रेंग रहे हैं विषधर इनसे बचकर रहना, आस्तीन के सर्प हैं इनसे बचकर रहना, भले लोग ही बसे यहाँ हैं इन भवनों में, रोज फेंकते हैं ये प... Read more

दर्द दामन में

दर्द दामन में छुपाना सीखिये चोट खाकर मुस्कुराना सीखिये मतलबी हर शै यहाँ पर जान तू खार से भी दिल लगाना सीखिये रौशनी को जो तरस... Read more

ग़ज़ल

++++++ग़ज़ल+++++++ दर्द सीने में दबाना सीखिए ग़म को सहकर मुस्कुराना सीखिए हाथ तो मिलते हैं लेकिन दोस्तों ... Read more

ग़ज़ल- चाहे नज़रों से ही गिरा जाना

ग़ज़ल- चाहे नज़रों से ही गिरा जाना ★★★★★★★★★★★★★ चाहे नज़रों से ही गिरा जाना नज़र आऊँ तो नज़र आ जाना तेरी नफ़रत भी बहुत प्यारी है ... Read more

कर सकता नहीं

💮💮💮 चाह तेरी नज़र की इन्कार कर सकता नहीं, अश्कों से लबरेज ये अब्सार कर सकता नहीं। 💮💮💮 सुबह का है आफ़ताब कि चाँद है तू रात का, ... Read more

ग़ज़ल

-------ग़ज़ल----- हो जिसका बागबां दुश्मन वो हर बागान ख़तरे में कली की कमसिनी फूलों की है मुस्कान ख़तरे में भला बरसेंगी कैसे र... Read more

ग़ज़ल

----ग़ज़ल---- देश के जो हैं परस्तार बदल कर देखें इस इलेक्शन में वो सरकार बदल कर देखें ओढ़ रक्खी जो रिदा हमनें गु़लामों वाली ... Read more

जिस्म का बाज़ार है बस

सजा फिर जिस्म का बाज़ार है बस भुला दे सब ख़बर, अखबार है बस ये दुनियाँ छोड़ दूँगा मैं उसी पल तुम्हारी ना की ही दरकार है बस भले ह... Read more

हमारी ईद हो जाए

जरा ठहरो मुकद्दर आजमाकर देख लेता हूँ इन्हीं बंजर जमीं में गुल खिला कर देख लेता हूँ खुशी रहती नही आँगन मेरे ज्यादा दिनों तक तो ... Read more

तेरी बातों में सच्चाई नहीं है

ग़ज़ल (बह्र-हज़ज मुसद्दस महज़ूफ) तेरी बातों में सच्चाई नहीं है। कि मुझमें कुछ भी अच्छाई नहीं है।। यकीं कैसे दिलायेगा तू ख़ुद ... Read more

कोई तस्वीर मन मन्दिर में जब आसीन होती है

कोई तस्वीर मन मन्दिर में जब आसीन होती है गमों से जूझते दिल को बड़ी तस्कीन होती है मुहब्बत जब किसी के दिल मे ही तदफीन होती है उसी... Read more

चुनावी जाल

चुनावी जाल सियासी खेल के हर शख्स का राज़ मैं लिख दूँ बदलते देश के हालात पर अल्फ़ाज़ मैं लिख दूँ। कभी आया नहीं बरसों, कभी ना हाल ... Read more

एजाज़ लिख दूँ

मैं रोशनी ‌पलट दूँ की ऐसे अल्फाज़ लिख दूँ धार है मेरे कहने मे अगर खंजर को आवाज़ लिख दूँ‌। मिट्टी मे मिल जाते हैं आकाश कई अक्सर ... Read more

"दिन गुजरते गये"

रात ढलती गई दिन गुजरते गये वो संवरती गई हम बिखरते गये अभी याद है उसका चुपके से हँसना गलियों से उसकी हमारा गुजरना अधूरी कहानी... Read more

वजूद

वजूद ---------- करता है इंसान ताउम्र गुरुर शोहरत पर अपनी वक़्त औ हालात हमेशा मुस्तक़िल भी नहीं रहते मुगालते में रहता है त... Read more

आओ चले मतदान करें

देश प्रेम को आगे रखके हम खुद का सम्मान करें लोकतंत्र के महापर्व में आओ चलो मतदान करें गली मोहल्ले गाँव शहर में घूम घूम कर हम भा... Read more

गज़ल

माँ हर पल बच्चों पर ही अपने ध्यान देती है लुटाके हर ख़ुशी अक्सर उन्हें पहचान देती है, दुखों का बोझ हैं ढ़ोती सदा हँसकर हमारी माँ... Read more

गज़ल

सच कहूँ माँ के ही ज़ैसी है वतन की धूल ये ज़ख्म पे बन जाती मरहम वतन की धूल ये, दूर जब परदेश में आकर बसा कुछ दिन याद में बस जाती ... Read more

जब देश में हमारे चुनाव आता है।

सियासी लोगों को अक़्सर तनाव आता हैं। जब देश में हमारे...... चुनाव आता हैं।। कितने वादे किये और मुकर भी गए,, अब पूरा करेंगे फ़िर स... Read more

भले डगमगाओ /मगर पग बढ़ाओ

भले डगमगाओ मगर पग बढ़ाओ न छोड़ो ये हिम्मत न आँसू बहाओ करो सामना तुम न नज़रें चुराओ गमों में नहाकर भी बस मुस्कुराओ ... Read more

गज़ल

डाल से बिछुड़े परिंदे आसमाँ मे खो गए इक हकी़क़त थे जो कल तक दास्ताँ मे खो गए जुस्तजू में जिसकी हम आए थे वो कुछ और था ये जहाँ कु... Read more

गज़ल

मुहब्बत का हमे इज़हार करना ही नहीं आया, मेरी कश्ती को दरिया पार करना ही नहीं आया. जिसे जो चाहिए था तोड़ कर वो ले गया उनसे, दरख... Read more

संभल के रहना देश के लोगों

*चुनावी दौर की हकीकत* ***************** ***************** संभल के रहना देश के लोगों, बवाल ... Read more

अब तो मिलने से भी घबरा रहा हूँ

हूँ मैं काला तिल उनकी गालों का, उनकी ज़ीनत का मैं पहरा रहा हूँ। लोग बढ़ते रहे आगे मुझसे, मैं वही का वहीं ठहरा रहा हूँ। खायीं हैं ठोक... Read more

जहाँ माँ मुस्कुराती है

दिलों जां वार कर वो ज़िन्दगी सबकी बनाती है ज़हर पीकर वो सबको ही सदा अमृत पिलाती है। कड़ी तपती दुपहरी हो कि मौसम तेज़ बारिश का ... Read more

बुलंदियाँ

दिनांक 9/4/19 बेटियां जब छूए बुलंदियाँ आसमां तलक तो गजल होती है बै-कोफ निकले बेटियाँ जब घर से तो गजल होती है घर में रहे... Read more

संभल के रहना देश के लोगों

*चुनावी दौर की हकीकत* ***************** ***************** संभल के रहना देश के लोगों, बवाल ... Read more

माँ

ये माँ की दुआ का असर है ग़म क्या है मुझे ना ख़बर है। देखे जिस जगह सिर्फ ख़ुदा माँ की उस जगह भी नज़र है। जिसके सिर पर न वो हा... Read more

ग़ज़ल :- मेरी औकात

मेरी औकात है क्या, मुझको बताता है कोई...! आईना ले के मेरे सामने आता है कोई...!! ख़ुदकुशी जुर्म है सो, जब्त गम पे करता है कोई...!... Read more

बेवफा जिन्दगी

दिनांक 7/4/19 सफर वही रहते हैं बदल जाते हैं मुसाफिर सड़क के दोराहे वही रहते हैं सड़क पर भटक जाता है आदमी यहाँ आ कर ... Read more

गज़ल

दो-तिहाई विश्व की ललकार है हिंदी मेरी माँ की लोरी व पिता का प्यार है हिंदी । बाँधने को बाँध लेते लोग दरिया अन्य से पर भँवर क... Read more

गीतिका

गीतिका- कठिन साधना सी मेहनत है,पर लाचारी गाँवों में। नहीं मिटाए मिटती फैली, हर दुश्वारी गाँवों में।।1 हरे - भरे हैं खेत च... Read more

राहिल

मैं हूँ सय्यारह मुहब्बत के गीत गाऊंगी, वादी ए दिल मे मुहब्बत सी बिखर जाऊंगी.. रौनकें, रंग, बू -ए -चमन एक तरफ, दिल कि वादी में म... Read more

हूँ वो शाइर

हूँ वो शाइर जो अजाबों की अज़ल लिखती हूँ अश्कों के हर्फों से मैं दर्दे ग़ज़ल लिखती हूँ। तुम मुझे चाहे समझ लेना धरा की माटी मैं ... Read more

ग़ज़ल---- ज़ख्म किसी को दिखाना नहीं।

राज़ दिल के किसी को बताना नहीं है भरोसे के लायक जमाना नहीं। रहम उन पर करो जो हैं बेबस पड़े तुम कभी भी दुखी को सताना नहीं । ... Read more

जाने क्यों

जाने क्यों दिल से दूर हो गये तुम। हमसे दूर जाने कहाँ खो गये तुम। जब जरूरत थी तुम्हारे जागने की, आँखे मूँद गहरी नींद सो ग... Read more

मुक्तक

तू ही है बोलता मुझमें तुझे ही सुन रही हूं मैं, कहीं मुझमें बसा है तू कही तुझमें बसी हूँ मैं, मेरे रब तू ही मेरा तेरे बिन है और क्य... Read more

गज़ल

भले नेताओं को मंदिर कहीं मस्जिद बनाना है मेरी बस एक कोशिश है मुझे भारत बचाना है, सियासी लोग इस चालाकियों में व्यस्त हैं भाई लग... Read more

कम भी नहीं है हौसले (गजल)

कम भी नहीं है हौसले (गजल) (बहर-2212 2212 2212 2212) कम भी नहीं है हौसले गिर भी पड़ी तो क्या हुआ। है जिन्दगी... Read more

ग़ज़ल ~यादों से दामन छुड़ा रही हुँ मैं

~ ग़ज़ल ~ यादों से तेरी आज फिर दामन छुड़ा रही हुँ मैं मचलते अरमानों को लोरी से सुला रही हुँ मैं । सुर सरगम ... Read more
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