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Category: गज़ल/गीतिका

क्‍यों है
मुफलिसी में रोटी और भूख में तकरार क्यों है इबादत के लिए मंदिर मस्जिद अलहदा क्यों है सजदा जमीं पर वो देखता आसमान से क्योंं... Read more
बताना क्या है ।
हमें कितनी मोहब्बत है तुमसे उसको बताना क्या है । गीत रह जाएंगे गुनगुनाने के लिए हमें जताना क्या है।। हमारे बुजुर्गों के हौसले क्यों... Read more
अपने प्यारे झंडे़ को आज हम फहरायेगे।।
मेरे प्यारे भाई बहनो सुन लीजिये बात मेरी । अपने प्यारे झंडे़ को आज हम फहरायेगे।। आजादी की खातिर जिन वीरो ने कुर्वानी दी है।... Read more
गजल
*"गजल"* जी चाहता है खुलकर रोये पर ना जाने क्यों, बिना बरसे ही आंखों से घटाएँ लौट आती है। महकती गुनगुनाती हैं हवाएं मुझे लगता... Read more
गज़ल
जी चाहता है खुलकर रोये पर ना जाने क्यों, बिना बरसे ही आंखों से घटाएँ लौट आती है। महकती गुनगुनाती हैं हवाएं मुझे लगता है,... Read more
*रिझाया तो बहुत*
रिझाया तो बहुत मग़र ,नहीं पयामों के पाबन्द निकले। बाँहें उठा के दिखाया तो बहुत ,मग़र नहीं पसन्द निकले।। मेरी फुंगाँ को कभी सुना तुमने,यार... Read more
*चुप बैठें *
तुम बहरे हो तो क्या ? हम सुनके भी चुप बैठें । वेदम समझते हो तो क्या ,हम पिटके झुक बैठें।। हमारा सलाद बनाने की... Read more
ग़ज़ल
यह खुश नसीबी’ ही थी’, कि तुमसे जिगर मिले हूराने’ ख़ुल्द जैसे’ मुझे हमसफ़र मिले | किस्मत कभी कभी ही’ पलटती है’ अपनी’ रुख डर्बी... Read more
‪टूटने का महज मंजर दिखाई देता है
‪टूटने का महज मंजर दिखाई देता है!‬ ‪नहीं महफूज अब ये घर दिखाई देता है!!‬ ‪मैं कब तलक तुम्हें सीने से लगाऊंगा भला,‬ ‪तुम्हारे हाथ... Read more
🌸अगर तूने श्रद्धा से बुलाया न होता 🌸
अगर तूने नजरो को मिलाया होता। मेरे दिल को तूने लुभाया न होता।। न तू मेरा होती न मे तेरा होता। अगर तूने श्रद्धा से... Read more
‪टूटने का महज मंजर दिखाई देता है
‪टूटने का महज मंजर दिखाई देता है!‬ ‪नहीं महफूज अब ये घर दिखाई देता है!!‬ ‪मैं कब तलक तुम्हें सीने से लगाऊंगा भला,‬ ‪तुम्हारे हाथ... Read more
दिल से दिल को मिलाकर कभी देखिये
खामियों को भुलाकर कभी देखिये, शक का पर्दा हटाकर कभी देखिये! प्रीत खुद जाग जायेगी करिये यकीं, दिल से दिल को मिलाकर कभी देखिये!! रोते... Read more
सिर्फ पछतावा रहे, मौक़ा निकल जाने के बाद
सिर्फ पछतावा रहे, मौक़ा निकल जाने के बाद। याद आएगी जवानी, उम्र ढल जाने के बाद।। दिन का उजाला, निशा की चांदनी भाती बहुत। लोग... Read more
गजल
*"ये दिल बेतलब हो गया"* *था बहुत विषैला पर दम ना था जहर में,* *क्योंकि चाहने वाले बहुत थे मेरे शहर में,* *और तुझे क्या... Read more