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Category: दोहे

नारी का उत्थान
अन्तर्राष्ट्रीय महिलादिवस की हार्दिक बधाई नारी के उत्थान में, है नारी का हाथ देना होगा खुद उसे, नारी का ही साथ अपनी ताकत को यहाँ... Read more
देख तुम्हारी सादगी ,
अपने-अपने दंभ को ,भूल-बिसर के आज शामिल होली में रहो ,जुड़ता दिखे समाज # फागुन-फागुन सा हुआ ,सावन बिछुड़ा मीत छोड़ अधर की बासुरी ,राधा... Read more
टपकेगी जब आरजू
टपकेगी जब आरजू, नैनो से बन बूंद ! लेना ही तब ठीक है,आँखे अपनी मूंद !! जीना सीखा भी नही,हमने अभी रमेश ! मरने का... Read more
नीति रा राजस्थानी दूहा
टैम-टैम री बात है,टैम करै मजबूर| कुण नै भावै खूंसडा,चुगणा बोतल पूर|1| तेरी मेरी राड मै, राम रट्यो ना बीर| माटी री आ मूरती,माटी बण्यौ... Read more
कुछ दोहे
कविता किरकी कांच जस, हर किरके को मोह । छपने की लोकेषणा, करे छंद से द्रोह । आत्म मुग्ध लेखन हुआ, पकड़ विदेशी छंद ।... Read more
शिव दोहे
द्वादश लिंग बिराजते, पावन तीरथ धाम। आग नयन विष कंठधर, त्रिपुरारी प्रभु नाम।। फागुन चौदस रात को,बिल्वपत्र जल हाथ। पूजा -अर्चन जो किया, पार लगायो... Read more
शंकर का अभिषेक
बच्चे खड़े कतार में ,भूखे जहाँ अनेक ! वहीं दूध से हो रहा,भोले का अभिषेक !! ......................... जिसने भी दिल से किया,भोले का गुणगान !... Read more
दोहे...नीति पर
प्रीत रीत सबसे सुघर,तोडो़ मत विश्वास। बिना प्रेम मानव रहे,जीवन जन्म निराश।। नीतिपरक दोहे कहूं,सुन लो धर कर ध्यान। प्रेम सहित विष पानकर,मीरा बनी महान।।... Read more
बढ़ चढ़ कर मतदान
लोकतंत्र की राह जब,..... लगे नहीं आसान ! फर्ज समझकर तब करो, बढ़ चढ़ कर मतदान !! पछतावा हो बाद में, ..रखा नहीं यदि ध्यान... Read more
मित्र।
दोहे।। मित्र । जग में सच्चे मित्र से,,,,,,,,,,,मिलिए बारम्बार ।। हृदय निहित हर भाव का,,करे सफल उपचार ।। सच्चे उर से मित्रता ,,,,,,,,, उपजाती नित... Read more
विवेक सक्सेना के दोहे
vivek saxena दोहे Feb 18, 2017
उनसे क्या निभ पायेंगे,प्रेम, प्रीत,संबंध। जिनको भाती ही नहीं, ये माटी की गंध।। सत चरित्र संगति सदा, शुभ होता परिणाम। ज्यों कोयल की कूक से,... Read more
जीवन के आयाम
चोरी मक्कारी ठगी,झूठ सुबह से शाम! बदल गये क्या वाकई,जीवन के आयाम! देख सुदामा मीत को , नजरे फेरें श्याम ! बदल गये इस दौर... Read more
मतदान पर दोहे
लोकतंत्र का है यही, हम सबको पैगाम अपना मत देकर सही, करें देश का काम सत्ता को समझो नहीं, नेताओं जागीर जनता के इक वोट... Read more
दोहे-एकादश
बसंत(फागुन) पर देखिए हमारा प्रयास.... दोहे-एकादश शरद विदाई शुभ घड़ी, ऋतु बसंत महकाय। सुरभित सुमन सुवास नभ, सुरमय कंठ सुहाय।। २ रँग बसंती चूनरी, देख... Read more
'सहज के दोहे
अन्दर से बेशक हुआ, बिखरा - चकनाचूर. चेहरे पर कम ना हुआ,पर पहला सा नूर. 'सहज' प्रेम से वास्ता,नफरत का क्या काम. यहीं धरा रह... Read more
'सहज' के दोहे
जीवन है अनमोल यह, इसको नहीं बिगाड़. यह है दुर्लभ से मिला,समझ नहीं खिलवाड़. सोच सार्थक हो सदा,दिन कैसे भी होयँ. निश्चित काटेंगे वही, जो... Read more