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Category: दोहे

कुछ दोहे
???कुछ दोहे??? एक जैसे भावों की,नकल टीपतेे लोग| फेसबुकी कविता हुई,ज्यों संक्रामक रोग||1|| निराला औ' दिनकर सी,ढूँढ़ कलम मत आज| अंगूठे से लिख रहा,ज्ञानी हुआ... Read more
डाँटे बहुत जमीर
आँखें दोनों मूँदकर, किया अगर विश्वास ! होगा तुमको शर्तिया,.कष्ट भरा अहसास !! बुरे दिनों में एक यह,मिली मुझे है सीख ! सच वैसा होता... Read more
हुए बुद्ध सिद्धार्थ
बरगद नीचे बैठ कर, हुए बुद्ध सिद्धार्थ ! अर्जित सच्चे ज्ञान से,किया खूब परमार्थ !! नफरत से होती नही,नफरत कभी समाप्त ! मानवता का पाठ... Read more
ऱिश्ता -ए -उम्मीद
लेते सभी प्रयोग मे,...मुझे स्वाद अनुसार! हुआ नमक की भाँति कुछ,मेरा भी किरदार! रिश्ता वो बिगडा कभी,होता नही बहाल ! करते हों मध्यस्थता, जिसमे कई... Read more
? ब्रजरज ?
?? ब्रज के दोहे ?? ????????? ब्रजरज सों कट जात हैं,भव-सागर के फंद। राधे जू की कृपा सों,मिल जाएं ब्रजचंद।। ब्रजरज है पावन परम,माथे लीजै... Read more
ऱिश्तों की पहचान
कैसे भूलूँ आपका, मै दुर्दिन अहसान ! सहज कराई आपने,रिश्तों की पहचान ! ! एक दूसरे का करें,आपस मे सम्मान ! ऐसी होनी चाहिए,रिश्तों की... Read more
चली गई इंसानियत
खबरें अब अखबार की,लगती है नासूर ! चली गई इंसानियत, छोड शहर को दूर !! काँटे जीवन मे हमे,करना पडे कबूल ! सींचा दोनो हाथ... Read more
,श्रम साधक मजदूर
मजदूरी के नाम पर,..मिले सेर भर धान ! इसमें कैसे खुद जिएं, खायें क्या ...संतान? सरकारें बदली कई,.....बदले कई वजीर! श्रम साधक मजदूर की,मिटी कहाँ... Read more
आदत से मजबूर
जल्दी से माने कहाँ,अपना कभी कसूर ! ऐसा ही है आदमी, .आदत से मजबूर!! करते है आलोचना,...देते हैं उपदेश ! वोजब कर सकते नही,कुछ भीअगर... Read more
बेटी है अनमोल धन,..कुदरत का उपहार ! जिसको मिलना चाहिए, जीने का अधिकार !! तुलसी पीपल नीम सब, कुदरत का उपहार ! होता ढेरों रोग... Read more
सूख गये उद्यान
दूषित है जलवायु अब,...सूखे कई प्रदेश ! चलो लगायें बाग हम,मिलकर सभी रमेश !! माली उपवन का जहाँ,.....बन जाए सय्याद! वहाँ सुनेगा कौन फिर, बुलबुल... Read more
वहशी नक्सलवाद
झपटें सारे नक्सली, जैसे गीदड़ बाज ! हमने सत्तर साल में, ढूंढा नहीं इलाज !! यूं नोचे है देश को,वहशी नक्सलवाद! देता है पीडा सदा,... Read more
सियासत का बस धर्म एक,सत्ता मिलें बस यार। मैं बैठा बेटा पाए,मूरख सब संसार। राजा है पर धर्म नही ,नीति बिना ये राज।। रामराज्य की... Read more
अहंकार से ना बचें, राजा रंक फकीर। दूजे सह खुद भी मिटें,घात होय गंभीर।। अहंकार के साथ चला, लेकर के कुछ आस। चार कदम ही... Read more
पृथ्वी दिवस पर
खनिज लवण जल दे रहा,मानव को वरदान ! पृथ्वी पिंड विशाल यह, लगता मातु समान !! लगी केंद्र में आग है , फिरभी बाँटे नीर... Read more
उठने लगे सवाल
खबरें वो छापे बहुत, हरदम खबर नवीस ! मिलती हो टी आर पी, जिनसे उन्हें असीम !! वो जो चाहें सो कहें,...होता नही बवाल! मैने... Read more
मित्रता
देख सुदामा की दशा रोने लगे थे कृष्ण अश्रु के जल से कदम धोने लगे थे कृष्ण ???????????? 2 पछताता है जो उम्र भर, ये... Read more
गर्मी का अहसास
कूलर रोया जल बिना, ए सी हुआ उदास ! इनको भी होने लगा,..गर्मी का अहसास!! हुआ जरा सा क्या हमे, गर्मी का आभास ! लगे... Read more
दोहे (सूरज से......
दिनांक-१६/४/२०१७ दोहा छन्द सूरज से जिवन खिलै-मिलै असिम प्रकाश। बिन प्रकाश नित बढ़ै कीट-करै वस्तु का नाश। बिन तुम भगवन है व्यर्थ -दुनिया के सुख... Read more
मांगू नही उधार
बना दुआओं से फकत कहाँ किसी का कार्य ! लाजिम है हर क्षेत्र मे,श्रम करना भी आर्य !! बदहाली मे मै कभी,...मांगू नही उधार! मुझे... Read more