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Category: दोहे

दोहे
नोट बंद जब से हए, लम्बी लगी कतार बैंकों में मुद्रा नहीं, जनता है लाचार | लम्बी लम्बी पंक्ति है, खड़े छोड़ घर बार ऊषा... Read more
दोहे रमेश के
माँ से बेटा हर समय, करे जहाँ पर क्लेश ! उस घर मे होती नही, बरकत कभी रमेश !! बचपन मे जिसके लिए, लडती थी... Read more
कुछ दोहे
बिन सोचे समझे नहीं , करना भारत बंद अच्छे दिन अब दूर हैं , बस कदमों पर चंद दाल गलेगी अब नहीं,सुनो खोल कर कान... Read more
दोहे
प्रभु मेरे क्या हो गया, पटरी नीचे ट्रेन स्वर्ग सिधारे लोग सौ, यात्री हैं बेचैन | बच्चे हुए अलग अलग, सन्तति बिन माँ बाप मिली... Read more
काला धन कागज हुआ
नाजायज जायज लगे, जायज न्याय विरुद्ध ! जहाँ भावना मर्म की, ....होती नहीं विशुद्ध !! काला धन कागज हुआ, हुआ जिन्हे ये बोध! सही कदम... Read more
मत करिए उपहास
जिस पनघट के नीर से, सदा बुझायी प्यास ! उसका भूले से कभी, ...मत करिए उपहास !! कहाँ मिली हैं खूबियाँ, ...सभी किसी के पास... Read more
लक्ष्य बड़ा है देश हित, धीरज रखिये आप। जरा  जरा सी बात पर, करिये नहीं विलाप।।
लक्ष्य बड़ा है देश हित, धीरज रखिये आप जरा जरा सी बात पर, करिये नहीं विलाप ---------------------------------------------- कहीं फाड़कर फेंकते, कहीं जलाकर नोट काले धन... Read more
कुछ दोहे
घोर तमस संसार में, भटक रहा इन्सान l सबके अपने देखिये, अलग-अलग भगवान l --------------- नई पौध के दौर में, मर्यादा है ढेर l राह... Read more
दोहे
जीवन की ये चाकरी मुझको नहीं सुहाय थामूं बहिया अापकी मुझको लियो बुलाय तुझको सुमिरन सब करें जोगी भया न कोय मेरे मन आके बसो... Read more
धुंध अंधाधुंध....
पर्यावरण की दुर्दशा पर कुछ विचार... क्या दिल्ली लखनऊ क्या, सबका है यह हाल। खुद ही गलती वह करे, खुद ही है बेहाल।1 गैस चैंबर... Read more
पंच दोहे
पंच दोहे.... पनप रहा है देश में, बहु आयामी आतंक। नहीं अछूता अब बचा, राजा हो या रंक।1 राग द्वेष भ्रष्टाचार अरु, जाति धर्म का... Read more
दोहे
दिल सम्हाल कर राखिए,ना जाये यह टूट। दिल बिन प्रेम में ना उपजै,प्रेम बिन सब सून॥ तन मन बाबरौ भयो,देख तेरी सरलताई। आगे आगे क्या... Read more
दोहे
राजनीति बाज बैठो, करत गरीब संहार । अापनो वजूद राखो , करत सहज प्रहार॥ राजनीति मधु प्याला, दुष्ट जन करत पान। धर्म अधर्म कोऊ नाहीं,... Read more
दोहे
दोहा दुखियारे घर घर बसे,कोउ न देखन जाय । देखन उनको जाये जो ,कोटिक आशिष पाय ॥ देख जगत की नीति मैं ,खडी -खडी बौराउँ।... Read more
वंदना
prerna jani दोहे Oct 16, 2016
वंदना मात शारदे कृपानिधान ज्ञानवान आज दास पे दयालुता अटूट मां दिखाइए! लोभ मोह काम क्रोध पाप द्वेष मात भक्त की मुसीबतो को नसीब से... Read more
नेह लुटाती चाँदनी
शीतल, उज्जवल रश्मियाँ, बरसे अमृत धार। नेह लुटाती चाँदनी, कर सोलह श्रृंगार।। शरद पूर्णिमा रात में, खिले कुमुदनी फूल। रास रचाए मोहना, कालिंदी के कूल।।... Read more
विजय पर्व पर कीजिए, पापों का संहार
जगत जननी जगदम्बिका, सर्वशक्ति स्वरूप। दयामयी दुःखनाशिनी, नव दुर्गा नौ रूप।। शक्ति पर्व नवरात्र में, शुभता का संचार। भक्तिपूर्ण माहौल से, होते शुद्ध विचार ।।... Read more