Skip to content

Category: दोहे

मित्र।
दोहे।। मित्र । जग में सच्चे मित्र से,,,,,,,,,,,मिलिए बारम्बार ।। हृदय निहित हर भाव का,,करे सफल उपचार ।। सच्चे उर से मित्रता ,,,,,,,,, उपजाती नित... Read more
विवेक सक्सेना के दोहे
vivek saxena दोहे Feb 18, 2017
उनसे क्या निभ पायेंगे,प्रेम, प्रीत,संबंध। जिनको भाती ही नहीं, ये माटी की गंध।। सत चरित्र संगति सदा, शुभ होता परिणाम। ज्यों कोयल की कूक से,... Read more
जीवन के आयाम
चोरी मक्कारी ठगी,झूठ सुबह से शाम! बदल गये क्या वाकई,जीवन के आयाम! देख सुदामा मीत को , नजरे फेरें श्याम ! बदल गये इस दौर... Read more
मतदान पर दोहे
लोकतंत्र का है यही, हम सबको पैगाम अपना मत देकर सही, करें देश का काम सत्ता को समझो नहीं, नेताओं जागीर जनता के इक वोट... Read more
दोहे-एकादश
बसंत(फागुन) पर देखिए हमारा प्रयास.... दोहे-एकादश शरद विदाई शुभ घड़ी, ऋतु बसंत महकाय। सुरभित सुमन सुवास नभ, सुरमय कंठ सुहाय।। २ रँग बसंती चूनरी, देख... Read more
'सहज के दोहे
अन्दर से बेशक हुआ, बिखरा - चकनाचूर. चेहरे पर कम ना हुआ,पर पहला सा नूर. 'सहज' प्रेम से वास्ता,नफरत का क्या काम. यहीं धरा रह... Read more
'सहज' के दोहे
जीवन है अनमोल यह, इसको नहीं बिगाड़. यह है दुर्लभ से मिला,समझ नहीं खिलवाड़. सोच सार्थक हो सदा,दिन कैसे भी होयँ. निश्चित काटेंगे वही, जो... Read more
एक दोहा
अन्दर से बेशक हुआ,बिखरा- चकनाचूर. चेहरे पर कम ना हुआ,पर पहला सा नूर. @डॉ.रघुनाथ मिश्र 'सहज
दोहे
हर चुनाव में सुन रहा पुल पुलिया निर्माण। बाढ़ समस्या मिटेगी राज नीति के वाण।। सड़के सब गड्ढा बनी ऐसा हुआ विकास।फरी फरी सब चर... Read more
दोहे
नगर नगर में हैं खुली शिक्षा की दूकान। डिग्री ऐसे विक रही जैसे बीड़ी पान। जिन्दा मुर्दा हो कोई सबको मिले प्रवेश। भारीभरकम फीस है... Read more
दोहे
वंश वाद की फल रही राजनीति में बेल। दल बदले सत्ता मिले वही पुराना खेल। पिता पुत्र चाचा सगे महासमर में आज। कुरुक्षेत्र सूबा बना... Read more
दोहे
नये वर्ष पर चढ़ गया ,मित्र चुनावी रंग। नेता चिल्लाने लगे ,जैसे पी हो भंग। दलों की है लाचारी,बन्द है नोट हजारी।। बिगुल चुनावी बज... Read more
'सहज' के दोहे -खामोशी
खामोशी पसरी रही,लोग रहे भयभीत। दूर-दूर तक मौन थे,छन्द-ग़ज़ल औ गीत। हम जब तक खामोश थे,खूब चल गई पोल। ठान लिया अब बोलना,होगा डब्बा गोल।... Read more
स्वरचित दोहे
स्वरचित दोहे ***** छोटे मुँह की बात भी,ऊँची राह सुझाय । सीख कहीं से भी मिले, सीखो ध्यान लगाय ।। ***** औरन को अपना कहें... Read more
बसंत पर दोहा एकादश
बसंत पर देखिए हमारा प्रयास.... दोहे-एकादश शरद विदाई शुभ घड़ी, ऋतु बसंत महकाय। सुरभित सुमन सुवास नभ, सुरमय कंठ सुहाय।। २ रँग बसंती चूनरी, देख... Read more
हुआ नहाना ओस में
रिश्ता नाजुक प्यार का, ज्यों प्रभात की ओस ! टिके न ज्यादा देर तक, व्यर्थ करे अफ़सोस!! हुआ नहाना ओस में ,.तेरा जब जब रात... Read more
बेबस था इतिहास
वाहियात बातें करें,....रहें उगलते आग ! सुर साधो उनके लिए, जैसा उसका राग !! नेताजी की सुन रहे , जहाँ सभी बकवास ! वादे सहमें... Read more
दुमदार दोहे
आज देखिए हमारे कुछ दुमदार दोहे... दुमदार दोहे... १ लोकतंत्र जब देश मे, भीड़तंत्र बन जाय। सही गलत की सोच तब, भीड़ में ही खो... Read more
नए नए नित छंद
कलम स्वरूपी पुष्प से ,निकलेगा मकरंद ! यही सोच रचवा रही,..नए नए नित छंद!! करें लेखनी से नही,औरौं का अपमान ! होते है साहित्य के,पंडित... Read more