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Category: Sahitya

द्विपदी
किसी ने गर जो मेरे ग़म को तराशा होता हम भी कोयले से वह हीरा बन गए होते -------------------------------------------- प्यार को रिश्ते में बांधना नहीं... Read more
माँ
तेरे एहसानों का शुक्रिया अदा कैसे करूँ माँ मैं तो दोज़ख़ के भी क़ाबिल न था तूने सीने से लगा, जन्नत का बाशिंदा बना दिया।... Read more
मुक्तक
हम सभी मरते हैं लेकिन जीते नहीं सभी! जाम को हाथों में लेकर पीते नहीं सभी! हर रोज ढूंढ लेते हैं यादों में दर्द को,... Read more
हे कुर्सी!
हे कुर्सी ! तेरी महिमा अपरम्पार है तेरे ही कारण समाज में बेईमानी व भ्रष्टाचार हैं परिवारवाद की जड़ तू है बुराईयों का गढ़ तू... Read more
मुक्तक
हम सभी मरते हैं लेकिन जीते नहीं सभी! जाम को हाथों में लेकर पीते नहीं सभी! हर रोज ढूंढ लेते हैं यादों में दर्द को,... Read more
दिल!!हाइकु!!
पत्थर दिल बेख्याल सा रहता घूमता रहा घमंडी रहा बेपरवाह फिरा ऐसे ही रहा तोड़ने वाले तोड़ते ही रहते मायूस हुआ चाहत रही दिल में... Read more
==* मेरी आरजू *==
स्वच्छंद फिजाओं में खिलखिलाती हंसी हो मानलो जिंदगी चाँद तारों में जा बसी हो दरबदर भटकती कहानियाँ अब कहा रही हो नया सवेरा, नई उड़ान... Read more
बंजारन
मैं बंजारन करूँ पुकार साहिब जी ! पधारो हमारे देश मेरे हो वालम बंजारे आजा अपने देश । पथ देख देख नयना पथराये मरुधर भूमि... Read more
बेटी बचाओ
कैसे बेटे भी करें, उस कुल का उद्धार जहां दी गईं बेटियां, निर्ममता से मार निर्ममता से मार,खून अपना जो देते सोचो कैसा पाप, चढ़ा... Read more