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Vindhya Prakash Mishra
Teacher at Saryu indra mahavidyalaya Sangramgarh pratapgarh up
Mo 9198989831
कवि, अध्यापक

Hometown: नरई चौराहा संग्रामगढ प्रतापगढ
All Postsकविता (123)गज़ल/गीतिका (2)मुक्तक (1)लेख (5)शेर (1)
कर्मक्षेत्र
विचार मेरा कर्म क्षेत्र है शिक्षा है आधार लेखन मेरी शक्ति और अभिव्यक्ति मेरा व्यवहार रचना करना बात की शैली साहित्य मेरा आचार कर्मकरे निज... Read more
अनवरत
कोशिशे जारी रहेगी हम अनवरत चल रहे है कोई ठोकर कोई बाधा आ नही सकती रुकावट दीप बनकर जल रहे है हम अनवरत चल रहे... Read more
अरुणोदय
अरूणोदय की बेला आयी कली कली डाली मुस्काई ओस विन्दु मिट गए धरा के प्रातःकाल सुखद सुहाई काली रात दूर है दुख सी फिर सुख... Read more
बेटी
खुशियों का कारण है मेरी बिटिया दुख का निवारण है बिटिया घर की किलकारी बिटिया हम सबकी प्यारी है बिटिया । मा की दुलारी बिटिया... Read more
दीप
खुशी से जगमग हो जीवन दीप पंक्तियां दमके चमके स्निग्ध तेल हो मन मे सबके दयाभाव हो हममे सब मे जगमग करदे नगर डगर मे... Read more
दीपक
दीपक है अंधकार विनाशक दीपक प्रकाश विस्तारक दीपक शिक्षक का प्रतीक है पतंगे की गहन प्रीति है दीपक प्रेम की वर्तिका प्रतीक दीपक से है... Read more
दर्द
दर्द दिया तो दवा क्यो दी है जलती आग को हवा क्यो दी है बात छिपाने को कहकर सबसे बता क्यो दी है किसी को... Read more
सुखद सबेरा
सुखद सबेरा हो जीवन मे ज्ञान प्रकाश विस्तार गगन मे वासित हो परिवेश हमारा मलयज सुगंध हो पवन मे कटे अंधेरा ऩभ का सारा चमक... Read more
एक एकता
आइये एक होकर चले राह पर नफरतो को दिलो से मिटा दीजिए हम हिन्दू नही हम मुस्लिम नही एकता क्या है दुनिया को दिखा दीजिए... Read more
छोटा जीवन
हमने छोटे जीवन मे बडे कर्म करके देखे हमने अपने आप से भी गलती पर लडकर देखे सही गलत का भेद बताया जो सबने वही... Read more
बडे राज
बडे ही राज रक्खे है दिलों मे दबा करके कभी कह दो बहाने से मौका पा करके कभी तो खोलिये कुछ राज की गठरी बहुत... Read more