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विन्ध्यप्रकाश मिश्र विप्र
साहित्य सृजन में रूचि रखता हूँ ।
चिंतनशील जीव होने के कारण
कुछ न कुछ सृजित करता हूँ ।
पर वीणापाणि माँ की कृपा दृष्टि के बिना
सम्भव नहीं है । एक साधना के रूप में
मनन करता हूँ ।
Mo 9198989831
कवि, अध्यापक

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कोई नहीं

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नवोदित कवि

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माँ की ममता
कैसे कैसे मेरे बेटे पाला है तुझे खुद का भी दिया निवाला है तुझे आज मैं वृद्ध बीमारी की मारी हुई ऐसी हालात में घर... Read more
कर्मक्षेत्र
विचार मेरा कर्म क्षेत्र है शिक्षा है आधार लेखन मेरी शक्ति और अभिव्यक्ति मेरा व्यवहार रचना करना बात की शैली साहित्य मेरा आचार कर्मकरे निज... Read more
अनवरत
कोशिशे जारी रहेगी हम अनवरत चल रहे है कोई ठोकर कोई बाधा आ नही सकती रुकावट दीप बनकर जल रहे है हम अनवरत चल रहे... Read more
अरुणोदय
अरूणोदय की बेला आयी कली कली डाली मुस्काई ओस विन्दु मिट गए धरा के प्रातःकाल सुखद सुहाई काली रात दूर है दुख सी फिर सुख... Read more
बेटी
खुशियों का कारण है मेरी बिटिया दुख का निवारण है बिटिया घर की किलकारी बिटिया हम सबकी प्यारी है बिटिया । मा की दुलारी बिटिया... Read more
दीप
खुशी से जगमग हो जीवन दीप पंक्तियां दमके चमके स्निग्ध तेल हो मन मे सबके दयाभाव हो हममे सब मे जगमग करदे नगर डगर मे... Read more