Skip to content

विन्ध्यप्रकाश मिश्र विप्र
साहित्य सृजन में रूचि रखता हूँ ।
चिंतनशील जीव होने के कारण
कुछ न कुछ सृजित करता हूँ ।
पर वीणापाणि माँ की कृपा दृष्टि के बिना
सम्भव नहीं है । एक साधना के रूप में
मनन करता हूँ ।
Mo 9198989831
कवि, अध्यापक

Hometown: नरई चौराहा संग्रामगढ प्रतापगढ उ प्र
Published Books

कोई नहीं

Awards & Recognition

नवोदित कवि

Share this:
All Postsकविता (134)गज़ल/गीतिका (2)मुक्तक (1)लेख (6)शेर (1)साहित्य कक्षा (1)
दीपक
दीपक है अंधकार विनाशक दीपक प्रकाश विस्तारक दीपक शिक्षक का प्रतीक है पतंगे की गहन प्रीति है दीपक प्रेम की वर्तिका प्रतीक दीपक से है... Read more
दर्द
दर्द दिया तो दवा क्यो दी है जलती आग को हवा क्यो दी है बात छिपाने को कहकर सबसे बता क्यो दी है किसी को... Read more
सुखद सबेरा
सुखद सबेरा हो जीवन मे ज्ञान प्रकाश विस्तार गगन मे वासित हो परिवेश हमारा मलयज सुगंध हो पवन मे कटे अंधेरा ऩभ का सारा चमक... Read more
एक एकता
आइये एक होकर चले राह पर नफरतो को दिलो से मिटा दीजिए हम हिन्दू नही हम मुस्लिम नही एकता क्या है दुनिया को दिखा दीजिए... Read more
छोटा जीवन
हमने छोटे जीवन मे बडे कर्म करके देखे हमने अपने आप से भी गलती पर लडकर देखे सही गलत का भेद बताया जो सबने वही... Read more
बडे राज
बडे ही राज रक्खे है दिलों मे दबा करके कभी कह दो बहाने से मौका पा करके कभी तो खोलिये कुछ राज की गठरी बहुत... Read more
(@  करवा चौथ@) पति से खूब प्रीति बढै निशदिन इस हेतु ही व्रत ये धारति हैं ।
(@ करवा चौथ@) पति से खूब प्रीति बढै निशदिन इस हेतु ही व्रत ये धारति हैं । दीर्घ जीवी बनें नित सुहाग रहे ये प्रेम... Read more
पूनम का चाँद
पूनम का चांद चांदनी विखराता मोती सदृश छिटक कर नभ भाता तारे छिपा छिपी कर टिमटिम करते शून्य गगन मे अपनी आभा से रंग भरते... Read more
दशहरा
कितना ज्ञान भरा हो अंदर कितनी होवे शक्ति अपार कितनी सेना पीछे चलती कितना होवे स्वर्ण भंडार । कितनी जीत मिली हो जग मे कितना... Read more
नव किसलय
नव किसलय स्फुटित हो चटक रही है कली कली गुंजित है हर फूल खिला है हर डाली पर अलि अलि भाष्कर आभा फैलाए खिले हुए... Read more