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मैं विवेक दुबे
निवासी-रायसेन (म.प्र.)
पेशा - दवा व्यवसाय
निर्दलीय प्रकाशन द्वारा बर्ष 2012 में "युवा सृजन धर्मिता अलंकरण" से
सम्मान का गौरब पाया
कवि पिता श्री बद्री प्रसाद दुबे "नेहदूत"
से प्रेरणा पा कर कलम थामी
काम के संग फुरसत के पल
कलम का हथियार
ब्लॉग भी लिखता हूँ "कुछ शब्द मेरे " नाम से
vivekdubyji.blogspot.com

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कर्म
आंत हीन इन अंतो से । लगते खुलते फन्दों से। फँसते पंक्षी उड़ते पंक्षी , अपने अपने कर्मो से । .... विवेक दुबे"निश्चल"©..
पढ़ना लिखना छोड़ दिया मैंने
--पढ़ना लिखना छोड़ा मैंने--- ___________________________ हाँ पढ़ना लिखना छोड़ दिया मैंने पढ़ें लिखों को पीछे छोड़ दिया मैंने बहुत कुछ सीख लिया मैंने बहुत पढ़ा... Read more