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पता परिचय |नाम- विनोद कुमार
ग्राम- नोहरी का पूरा चायल कौशाम्बी (उ.प्र.) | शिक्षा - बी.ए.फस्ट इयर | हिन्दी उर्दू गज़ल, गीत छंद कविता भी लिखना | काव्योदय के दोनो साझा संकलन में मेरी दो गज़ल प्रकाशित हो चुकी है

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All Postsगज़ल/गीतिका (4)दोहे (1)
"मनहरण घनाछरी छंद" काजल लगा के चक्षु,शशि रुप धरे हुये, मोहन से मिलने को,आयी राधा मोहिनी। लोचन से लोचन का,मिलन होते ही राधा, नाची जैसे... Read more
दोहा
Vinod Kumar दोहे Jun 13, 2016
लालच की होती नहीं,जग में कोई थाह। जो इसमें जितना गया,उतना हुआ तबाह। होती है क्यूँ प्यार में,अक्सर ऐसी बात। जिसको दो दिल में जगह,करे... Read more