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बंदना मोदी गोयल प्रकाशित उपन्यास हिमखंड छठा पूत सांझा काव्य संग्रह,कथा संग्रह राष्टीय पञ पत्रिकाओं में कविता कथा कहानी लेखों प्रकाशन मंच पर काव्य प्रस्तुति निवास फरीदाबाद

All Postsकविता (7)गज़ल/गीतिका (5)मुक्तक (1)शेर (2)हाइकु (1)
गजल
गजल कौन यादों में यूँ बसी सी है क्यों निगाहों में खलबली सी है चांदनी पूछती दरिंचो से रात दुल्हन सी क्यों सजी सी है... Read more
गजल
आप सबकी मोहब्बतों के हवाले दिल खोलकर समीक्षा कीजिए २१२२/२१२२/२१२२/२१२ जिंदगी से जब किसी दिन सामना हो जाएगा क्या हकीकत क्या फसाना फैसला हो जाएगा... Read more
गजल
बहर १२२२ १२२२ १२२२ १२२२ काफिया ई रदीफ मालूम होती है गजल नदी बरसो यहॉ कोई बही मालूम होती है सुनी थी जो कहानी, अब... Read more
मुक्तक
गुजरे वक्त के साये जब कदमों से लिपट जाते है यादों के कितने मौसम पल भर में पलट जाते हैं निगाहें लगती है तकने रस्ता... Read more
खुबसूरत हाईकु
??????जय माँ शारदे?????? -------------------------------------------------------------------- जपानी विधा हाइकु १ - नवसूरज उल्लासित मन अभिनंदन २ नई उम्मीदें बदलती तारीखें है शुरुआत ३ आस का पंछी उम्मीद... Read more
गजल
१२२२/१२२२/१२२२/१२२२ काफिया आम रदीफ होते हैं मतला वही अक्सर जमाने में सनम बदनाम होते हैं दिलों पर जो बिना सोचे समझे कुर्बान होते हैं शहीदों... Read more
एक स्वप्न सलोना
इक स्वपन सिलौना...... वो स्वपन सिलौना दिल का खिलौना मोम की गुडिया आग का दरिया कागज की कश्ती सुनसान सी बस्ती तेरा खोना,मेरा खोना वो... Read more
स्मृतियां
स्मृतियाॅ लेने लगी हैं आकार मूरतों का स्मृतियाॅ वो....जो बह चली थी खुलते ही गाॅठ ओढनी की। इक इक कर दाने यादों के आज के... Read more
खत के जवाब में
खत के जबाब में..... पूछा था मैंने हालचाल इस ख्याल से चेहरा हसीं दिख जायगा आज फिर ख्बाब में मत पूछिये क्या भेजा उसने खत... Read more
शेर
हो मेरी आदतों में' शामिल तेरी" कोइ आदत दूँ' मैं भी मुस्करा कभी यों बेवजह तिरे लिय वंदना मोदी गोयल
शेर
हो मेरी आदतों में' शामिल तेरी" कोइ आदत दूँ' मैं भी मुस्करा कभी यों बेवजह तिरे लिय वंदना मोदी गोयल
गजल
गजल बहर १२२२/१२२२/१२२२/१२२२ काफिया आ रदीफ नही होता मतला खबर उसको अगर होती कभी पर्दा नहीं होता निगाहों में उतरता चॉद ये शिकवा नहीं होता... Read more