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युद्ध गीत
umesh mehra गीत May 2, 2017
गीदड़ भभकी कब तक देंगे । अब तो शीश धरा पे बिछायेगे ।। पौरूष अब दिखाना होगा । रक्त रगों में खोलाना होगा ।। कायर... Read more
बिखरे  अरमान
umesh mehra गीत Apr 22, 2017
तृण तृण करके नीड़ बनाया,बना है कितना सोना । अरमानो को पंख लगे हैं महका कोना कोना ।। दिन भर बैठी स्वेटर बुनती, कहीं बनाती... Read more
असलियत
भरोसा था कि आइना बतायेगा मुझे फितरत उनकी । बड़ा ही शातिर निकला न बताई असलियत उनकी ।। पहचानते कैसे कि चेहरे पे नकाब लगा... Read more
बैसाख महीना
umesh mehra गीत Apr 13, 2017
आया गरम बैसाख महीना,धरती तपती आग के जैसे । नदिया सूखी कंठ भी सूखे,धूप लगे है शूल के जैसे ।। ऊधम करते बच्चे दिनभर,मिली है... Read more
अलहड़ बेटी
मैं अलबेली अलहड़ बेटी ,हूँ मैं बड़ी सयानी । घर ऑगन की शोभा हूँ मैं, पापा की हूँ रानी ।। खाना पीना पढना लिखना सब... Read more
चिरागे  इश्क
जाओ न मुझसे दूर मुलाकात कीजिए ।। आओ क़रीब बैठकर कुछ बात कीजिए ।। --*--*--*--*---*--*----*---*----*----*----*----*- मार ही डाल मुझे अपनी निगाहों से सनम । आहिस्ता... Read more